व्यापार
मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार हरे निशान में खुला, कंज्यूमर स्टॉक्स में खरीदारी
मुंबई, 10 मार्च : वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को तेजी के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स 809 अंक या करीब एक प्रतिशत बढ़कर 78,375.73 और एनएसई निफ्टी 252 अंक या करीब एक प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,280.80 पर खुला।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी का नेतृत्व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा, ऑटो, पीएसयू बैंक, रियल्टी, मैन्युफैक्चरिंग,मेटल, फार्मा, डिफेंस, हेल्थकेयर, मीडिया, कमोडिटी और एनर्जी सूचकांक में तेजी थी। दूसरी तरफ आईटी और ऑयल एंड गैस सूचकांक लाल निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 618 अंक या 1.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 56,884 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 224 अंक या 1.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,357 पर था।
सेंसेक्स पैक में इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील,एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, मारुति सुजुकी, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, बीईएल और सन फार्म गेनर्स थे। इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इटरनल, पावर ग्रिड, भारती एयरटेल, आईटीसी, पावर ग्रिड और एक्सिस बैंक लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, जकार्ता और सोल के बाजार हरे निशान में खुले थे। अमेरिकी बाजार भी सोमवार के सत्र में हरे निशान में बंद हुए थे। डाओ में 0.50 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में 1.38 प्रतिशत की मजबूती थी।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार के सत्र में 6,345.57 करोड़ रुपए की बिकवाली की। वहीं, दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 9,013.80 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।
इसके अतिरिक्त, बड़ी तेजी के बाद कच्चे तेल में नरमी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक डब्ल्यूटीआई क्रूड 6.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 88.80 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 6.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर था।
व्यापार
एलपीजी सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी, संकट के बीच आम नागरिकों को प्राथमिकता: नितिन खारा

gas
नागपुर, 13 मार्च : ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न हुए वैश्विक तनावों के बीच देश में एलपीजी आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित कंपनियां लगातार प्रयास कर रही हैं। इसी क्रम में कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन नितिन खारा ने न्यूज एजेंसी मीडिया से बात करते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण एलपीजी सप्लाई को लेकर चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन कंपनी की प्राथमिकता देश के डीलरों और उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति बनाए रखना है।
नितिन खारा ने मीडिया को बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में एलपीजी की सप्लाई को लेकर रोजाना स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी रोज सुबह यह आकलन करती है कि उस दिन गैस की आपूर्ति किस तरह सुनिश्चित की जाए। दिनभर देश भर से डीलरों के फोन आते रहते हैं और कंपनी की पूरी कोशिश होती है कि हर डीलर तक समय पर गैस पहुंचाई जा सके। हालांकि उपलब्धता में कमी के कारण कुछ चुनौतियां सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि एलपीजी आयात करने वाली कंपनियों के सामने फिलहाल एक बड़ी समस्या यह है कि दो एलपीजी वेसल समुद्री बंदरगाहों के पास रुके हुए हैं और वे न तो अंदर आ पा रहे हैं और न ही बाहर जा पा रहे हैं। इसके कारण नियमित आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर कंपनी हर महीने करीब 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी का आयात करती है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण इसमें व्यवधान आया है। फिलहाल लगभग 11,200 मीट्रिक टन एलपीजी का एक वेसल भारत पहुंच चुका है।
नितिन खारा ने आगे बताया कि इस खेप में से करीब 850 मीट्रिक टन गैस खाली करने की योजना थी, जबकि बाकी गैस को मलेशिया की कंपनी इक्विनोर के साथ हुए एक कमिटमेंट के तहत आपूर्ति करने की बात थी। हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक सेल-पर्चेज एग्रीमेंट नहीं हुआ था, लेकिन कंपनी अपने कमिटमेंट को निभाने के पक्ष में रहती है।
उन्होंने कहा कि इस बीच कई डीलरों ने कंपनी से अनुरोध किया कि यह गैस भारत के नागरिकों और घरेलू उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी इस बात पर विचार कर रही है कि उपलब्ध गैस का उपयोग देश में ही किया जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की ओर से भी सुझाव दिया गया है कि यह गैस स्थानीय स्तर पर ही उतारी जाए ताकि आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
खारा ने आगे कहा कि यदि यह एलपीजी देश में ही उपलब्ध हो जाती है तो इससे कम से कम 12 से 13 दिनों तक अतिरिक्त गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे बाजार में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
नितिन खारा ने बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर आज ही हालात सामान्य हो जाएं तब भी पूरी स्थिति को सामान्य होने में लगभग चार महीने का समय लग सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि कई रिफाइनरियों को नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि पहले रिफाइनरियों में उत्पादन शुरू होगा, फिर उस गैस को एलपीजी वेसल के जरिए विभिन्न देशों तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल एलपीजी वेसल की भी भारी कमी है, जिससे आपूर्ति चक्र प्रभावित हो रहा है। उत्पादन, परिवहन और वितरण की पूरी प्रक्रिया सामान्य होने में समय लगेगा।
नितिन खारा ने भरोसा जताया कि सभी संबंधित कंपनियां और सरकारें मिलकर स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने की दिशा में काम कर रही हैं। उनका कहना है कि कंपनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही है कि देश के आम नागरिकों तक एलपीजी की आपूर्ति बनी रहे और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
व्यापार
सोने में मुनाफावसूली जारी, दाम 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे फिसला

मुंबई, 13 मार्च : सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को गिरावट देखी जा रही है। इससे सोने का दाम फिर से 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे और चांदी की कीमत 2.60 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे लुढ़क गई है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी की गई कीमतों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का दाम 1,748 रुपए कम होकर 1,58,555 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,60,303 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
22 कैरेट सोने का दाम 1,46,838 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,45,236 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत 1,20,227 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,18,916 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।
चांदी की कीमत 8,350 रुपए कम होकर 2,59,951 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 2,68,301 रुपए प्रति किलो थी।
आईबीजेए की ओर से दिन दो बार दोपहर 12 बजे और शाम 5 बजे कीमतें जारी की जाती हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स), पर दोपहर 12:30 बजे, सोने के 2 अप्रैल, 2026 के कॉन्ट्रैक्ट 0.40 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,59,632 रुपए और चांदी के 5 मई, 2026 के कॉन्ट्रैक्ट 1.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,63,099 रुपए पर थे।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी जा रही है। सोना 0.64 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,092 डॉलर प्रति औंस और चांदी 3 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82 डॉलर प्रति औंस पर है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर जारी संघर्ष में तनाव के चलते सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आई। वहीं, ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और मुद्रास्फीति की चिंताएं भी बढ़ रही हैं, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हो रही है। इससे सोने पर दबाव बढ़ रहा है।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों से लाल निशान में खुला, आईटी और मेटल में बिकवाली

share market
मुंबई, 13 मार्च : कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शुक्रवार को गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स 590.20 अंक या 0.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,444.22 और निफ्टी 176.65 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,462.50 पर खुला।
शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का नेतृत्व आईटी और मेटल शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल टॉप लूजर थे। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, रियल्टी, सर्विसेज, डिफेंस और इन्फ्रा जैसे सूचकांक भी लाल निशान में थे।
सूचकांकों में केवल एनर्जी इंडेक्स ही हरे निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 181 अंक या 1.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,123 और निफटी मिडकैप 100 इंडेक्स 519 अंक या 0.92 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 55,734 पर था।
सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, आईटीसी, एचयूएल, एनटीपीसी और सन फार्म गेनर्स थे। टाटा स्टील, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, एचसीएल, इन्फोसिस और टाइटन लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसमें डाओ जोन्स में 1.56 प्रतिशत और नैस्डैक में 1.78 प्रतिशत की कमजोरी थी।
भारत के साथ वैश्विक बाजारों में कमजोरी की वजह अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध का जारी रहना है। लंबे समय तक खींचने के कारण इस युद्ध का असर आपूर्ति श्रृंखलाओं पर हो सकता है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले मुकाबले और धीमी हो सकती है या मंदी में जा सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजारों में बिकवाली जारी रखी और गुरुवार को 7,049.87 करोड़ रुपए की इक्विटी से निकासी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,449.77 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।
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