अंतरराष्ट्रीय
27 अगस्त से एशिया कप टी20 टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा श्रीलंका, शाह का बढ़ा कार्यकाल
एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) ने शनिवार को अपनी वार्षिक आम बैठक के बाद घोषणा की है कि एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट का 2022 सीजन 27 अगस्त से 11 सितंबर तक श्रीलंका में आयोजित किया जाएगा। इस साल यह एक टी20 प्रतियोगिता होगी। सभी पांच टेस्ट टीमें, मेजबान श्रीलंका, भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी, जबकि एक और एशियाई टीम का फैसला 20 अगस्त से होने वाले क्वालीफाइंग राउंड के बाद किया जाएगा।
एसीसी ने एक ट्वीट में कहा, “एशिया कप 2022 (टी20 प्रारूप) इस साल के अंत में 27 अगस्त से 11 सितंबर तक श्रीलंका में होगा। इसके लिए क्वालीफायर 20 अगस्त से खेले जाएंगे।”
एशिया कप, जो आमतौर पर वनडे और टी20 प्रारूपों के बीच वैकल्पिक होता है, आखिरी बार 2018 में खेला गया था और भारत ने जीता था। हालांकि, टूर्नामेंट का अगला सीजन, जो 2020 में खेला जाना था, उसको कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।
श्रीलंका को 2020 सीजन की मेजबानी करनी थी, लेकिन कोविड-19 ने इस आयोजन को 2022 में स्थानांतरित करने से पहले 2022 तक टाल दिया गया। उन्होंने 2022 सीजन की मेजबानी करने के अपने अधिकारों को बरकरार रखा, जिसमें पाकिस्तान टूर्नामेंट के 2023 सीजन की मेजबानी करने के लिए कतार में था।
गत चैंपियन भारत एशिया कप में सबसे सफल टीम है, जिसने 2016 में एकमात्र टी20 सीजन सहित सात बार जीत हासिल की, जबकि श्रीलंका ने पांच बार प्रतियोगिता जीती है।
एजीएम के दौरान, सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि बीसीसीआई सचिव जय शाह 2024 तक एक और वर्ष के लिए एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष के रूप में बने रहेंगे।
शाह ने पिछले साल जनवरी में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष नजमुल हसन से एसीसी की बागडोर संभाली थी, जिससे वह एसीसी अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त होने वाले सबसे कम उम्र के प्रशासक बन गए।
इस बीच, ओमान क्रिकेट बोर्ड के पंकज खिमजी को एसीसी का उपाध्यक्ष और मलेशिया क्रिकेट संघ के महिंदा वल्लीपुरम को विकासशील समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
एजीएम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, मैं एसीसी में अपने सभी सम्मानित सहयोगियों को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मुझे अपने द्वारा शुरू किए गए सभी कार्यों को करने के योग्य माना। मैं विनम्रतापूर्वक इस सम्मान को स्वीकार करता हूं और प्रतिबद्ध हूं।
उन्होंने आगे कहा, इस क्षेत्र में क्रिकेट के हमारे प्रिय खेल को व्यवस्थित, विकसित और बढ़ावा देने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए, एसीसी को बढ़ाने में सहायता करना है।
उन्होंने कहा, हम इस क्षेत्र में क्रिकेट के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से महिला क्रिकेट में अग्रणी काम और एसीसी द्वारा वर्ष भर में आयोजित होने वाले कई जमीनी स्तर के टूनार्मेंटों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एसीसी अध्यक्ष के रूप में शाह के विस्तार का प्रस्ताव श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने किया था और एसीसी के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से नामांकन का समर्थन किया था।
शाह और उसके कार्यकारी बोर्ड और समितियों के कार्यकाल को 2024 में अगली एजीएम तक बढ़ाने के निर्णय के साथ शनिवार (19 मार्च) को कोलंबो में एसीसी की वार्षिक आम बैठक में निर्णय लिया गया था।
एजीएम में यह भी निर्णय लिया गया कि कतर क्रिकेट एसोसिएशन को एक एसोसिएट से एसीसी के पूर्ण सदस्य के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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