राजनीति
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मनीष शंकर शर्मा का निधन
भोपाल, 17 मार्च। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के प्रतिष्ठित अधिकारी एवं विशेष पुलिस महानिदेशक (भारतीय रेलवे) मनीष शंकर शर्मा का सोमवार को नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया।
उनका अंतिम संस्कार भोपाल में होगा। वे कैंसर से पीड़ित थे। 1992 आईपीएस कैडर से संबंधित शर्मा ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से आंतरिक मामलों और सार्वजनिक नीति में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी पर विशेष ध्यान दिया।
कानून प्रवर्तन और आतंकवाद-रोधी के क्षेत्र में अपने योगदान के अलावा, उन्होंने कूटनीति में भी अपनी क्षमता दिखाई और यूरोप में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भाग लिया था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत की परिवहन सुरक्षा प्रणालियों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उल्लेखनीय है कि मनीष शंकर शर्मा को “मनीष एस शर्मा दिवस” के रूप में सम्मानित किया गया, जो 20 जुलाई 2015 को अमेरिकी शहर सैन डिएगो के तत्कालीन मेयर ने घोषित किया था और हर साल मनाया जाता है।
अपने करियर में उन्होंने अनेक पुरस्कार प्राप्त किए, जिसमें राष्ट्रीय कानून दिवस पुरस्कार, व्यापार में सुगमता पुरस्कार, रोल ऑफ ऑनर और आरएन जुत्शी पुरस्कार आदि शामिल हैं।
शर्मा का करियर भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की भूमिकाओं में रहा। दुबई में भारतीय व्यापार राजनयिक के रूप में उन्होंने पश्चिम एशिया और अफ्रीका के 22 देशों के बीच व्यापार संबंधों की देखरेख की।
भारत में उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक, देश भर के हवाई अड्डों के लिए विमानन सुरक्षा महानिदेशक तथा यूरोप में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान पुलिस प्रमुख के रूप में कार्य किया।
पुलिस अधीक्षक के रूप में उनके कार्यकाल में रायसेन, सतना, छिंदवाड़ा और खंडवा में पोस्टिंग शामिल थी। नर्मदापुरम (पूर्व में होशंगाबाद) से ताल्लुक रखने वाले शर्मा एक प्रतिष्ठित परिवार से थे।
राष्ट्रीय समाचार
एशियन डेवलपमेंट बैंक ने भारत की 2026 की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया

एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है।
एडीबी ने एक बयान में कहा कि दक्षिण एशिया के लिए इस साल की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें भारत के आर्थिक विकास में मजबूत सरकारी निवेश और निर्यात में ठोस वृद्धि की अहम भूमिका है।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2025 के 5.5 प्रतिशत से घटकर इस साल 5 प्रतिशत रह सकती है। इसके बाद 2027 (वित्त वर्ष 2027-28) में यह मामूली बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो सकती है।
2026 का यह अनुमान जुलाई में जारी पिछले अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक अधिक है।
एडीबी के अध्यक्ष मासातो कांडा ने कहा, “क्षेत्र लचीला बना हुआ है, लेकिन जोखिम बढ़ रहे हैं।”
मजबूत हो रहा ला नीना के विपरीत अल नीनो और शुष्क परिस्थितियों के कारण फसल उत्पादन कम हो सकता है और जलविद्युत उत्पादन घट सकता है। इससे खाद्य और ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं और सबसे कमजोर वर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ सकता है।
कांडा ने कहा कि लंबे समय से जारी ऊर्जा संकट और वित्तीय बाजारों में फिर से बढ़ते जोखिमों के बीच सरकारों के लिए सबसे अधिक प्रभावित लोगों की सुरक्षा और तैयारी करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि एडीबी ऐसे प्रयासों का मजबूती से समर्थन कर रहा है।
एडीबी ने कहा कि मजबूत निवेश, सरकार का प्रोत्साहन और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निवेश चक्र से बढ़े मजबूत टेक्नोलॉजी निर्यात आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत होता अल नीनो ऊर्जा तथा खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (एडीओ) सितंबर 2026 में एडीबी ने 2026 के लिए क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान जुलाई के 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.2 प्रतिशत कर दिया है। कीमतों को स्थिर करने के उपायों ने लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से कम किया है।
एडीओ सितंबर 2026 के अनुसार, क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के परिदृश्य के सामने दो प्रमुख जोखिम हैं।
पहला जोखिम बढ़ता संघर्ष है, विशेष रूप से मध्य पूर्व में संघर्ष के विस्तार और रूस-यूक्रेन युद्ध के तेज होने का। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी रह सकती हैं तथा इसका असर अन्य जिंसों पर भी पड़ सकता है।
दूसरा जोखिम बहुत मजबूत अल नीनो है, जिसके 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने का अनुमान है। इससे ऊर्जा की मांग बढ़ सकती है और कृषि उत्पादन घट सकता है, जिससे ईंधन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
एडीबी ने कहा कि एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों के मूल्यांकन में तेज गिरावट, वित्तीय परिस्थितियों का सख्त होना और व्यापार नीति को लेकर फिर से बढ़ती अनिश्चितता भी आर्थिक वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर में आर्थिक गतिविधियां रहीं मजबूत, पीएमआई 56 के पार

भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रही हैं और इससे कंपोजिट पीएमआई 56.5 पर रहा है, जो कि अगस्त में 54.3 पर था। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई डेटा में बुधवार को दी गई।
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों सेक्टर्स के डेटा को शामिल किया जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों कंपनियों ने मजबूत ग्रोथ दिखाई है। इस दौरान नए ऑर्डर और नौकरियों में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, महंगाई का दबाव कम हुआ और कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ।
आंकड़े के अनुसार, सितंबर में निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है और यह जून के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर हैं। साथ ही, संबंधित इंडेक्स अपने लंबे समय के औसत से ऊपर पहुंच गया है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती के कारण प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेजी आई है। आउटपुट और नए घरेलू ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं। मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के कारण कंपनियों ने अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर बनाना शुरू कर दिया है।”
भंडारी ने बताया कि इनपुट की खरीद में तेजी आई है और तैयार माल के स्टॉक का इंडेक्स अब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर है। मैन्युफैक्चरर्स के लिए कीमतों का दबाव बढ़ा है और आउटपुट की कीमतों में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जो मार्जिन बचाने की नई कोशिश का संकेत है।
सितंबर में भारतीय प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के कुल नए बिजनेस में तेजी से बढ़ोतरी हुई।
दोनों सेक्टर में डिमांड बढ़ी, लेकिन सामान बनाने वाली कंपनियों में यह तेजी ज्यादा साफ तौर पर देखी गई। यहां, सेल्स में बढ़ोतरी सर्विस कंपनियों के मुकाबले ज्यादा रही और यह सात महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
सर्विस क्षेत्र की कंपनियों ने बताया कि मार्केटिंग की कोशिशों से ऑर्डर मिलने में मदद मिली, सर्वे के क्वालिटेटिव हिस्से में प्रॉपर्टी, ट्रांसपोर्ट सर्विस और नई ट्रैवल बुकिंग के लिए ज्यादा मांग का जिक्र किया गया है।
वहीं, डेटा से पता चला कि सामान बनाने वाली कंपनियों ने एल्युमीनियम प्रोडक्ट, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, खाने-पीने की चीजों, फार्मास्युटिकल सामान और आम तौर पर नए मॉडलों की डिमांड में बढ़ोतरी की सूचना दी।
इसके अलावा, सितंबर में कुल रोजगार में मजबूत बढ़ोतरी हुई, क्योंकि कंपनियों ने आउटपुट और नए ऑर्डर में लगातार बढ़ोतरी के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता को बढ़ाना जारी रखा। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस, दोनों सेक्टर में नौकरियां पैदा हुईं और विस्तार की दरें लगभग एक जैसी रहीं।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु: सांबा धान की खेती पर संकट, त्रिची के किसानों ने की 17 नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की मांग

त्रिची जिले के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से सभी 17 सिंचाई नहरों में कावेरी का पानी छोड़ने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मेट्टूर से पानी के कराइकल पहुंचने के बाद सांबा धान की नर्सरी सूख सकती हैं।
किसानों ने बताया कि नहरों के माध्यम से लगातार पानी की आपूर्ति की उम्मीद में उन्होंने नर्सरी लगाई थीं। कई खेतों तक अभी तक पानी नहीं पहुंचा है, जिससे किसान इस मौसम में अपनी फसल की रोपाई को लेकर अनिश्चित हैं।
मेट्टूर से पानी छोड़ने का काम 1 सितंबर को शुरू हुआ था और रविवार को पानी कराइकल पहुंचा। उन्होंने यह भी मांग की कि अगर मौजूदा बहाव को बनाए नहीं रखा जा सका, तो इसके लिए कोई वैकल्पिक योजना बनाई जाए।
मंगलवार शाम को मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 84.16 फीट था और इसमें 46.228 हजार मिलियन घन फीट पानी जमा था। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पानी की आवक 3,867 क्यूसेक थी, जबकि 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। पानी के प्रवाह और छोड़े जाने के बीच के अंतर ने इस चिंता को बढ़ाया है कि सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति कब तक जारी रह सकती है।
किसानों ने कहा कि मौजूदा जल प्रवाह शायद सिर्फ 25 दिनों तक ही चलेगा। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि नहरों से पानी की आपूर्ति कम होने की स्थिति में वह फसलों को कैसे बचाएगी।
पिछले साल त्रिची जिले में 54,929 हेक्टेयर जमीन पर सांबा धान की खेती की गई थी। किसानों ने कहा कि कृषि विभाग ने अभी तक मौजूदा सीजन के लिए खेती का लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया है, जिससे रोपाई की योजना बनाने में मुश्किल हो रही है।
कुछ किसानों ने कहा कि बिजली कटौती के कारण वे अपनी नर्सरी की सिंचाई के लिए इलेक्ट्रिक पंपों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने ईंधन पर सब्सिडी की मांग की, ताकि नर्सरी को बचाने के लिए डीजल पंप सेट का इस्तेमाल किया जा सके।
थिरुप्पराईथुरई के किसानों ने कहा कि कावेरी से पानी छोड़े जाने के तीन हफ्ते बाद भी पुथु अय्यन नहर तक पानी नहीं पहुंचा है, जो उनकी जमीन की सिंचाई करती है। उन्होंने राज्य प्रशासन से यह बताने को कहा है कि वह पूरे जिले में फसल के नुकसान को रोकने के लिए क्या कदम उठाएगा।
उधर, तमिलनाडु अखिल किसान संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष पीआर पांडियन ने सरकार से अपील की कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कावेरी के पानी में राज्य का हिस्सा हासिल करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करे।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उय्याकोंडन समेत कुछ नहरों में पानी छोड़ा गया है। उम्मीद है कि बुधवार तक यह खेतों तक पहुंच जाएगा। डेल्टा में खेती के लिए कल्लनाई से पानी छोड़े जाने के एक दिन बाद 7 सितंबर को नहरों में पानी छोड़ा गया था। अधिकारियों ने कहा कि पानी के अलग-अलग चरणों में वितरण के कारण इसे खेतों तक पहुंचने में एक या दो दिन और लग सकते हैं।
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