राष्ट्रीय समाचार
संभल हिंसा मामला: जेल में बंद 17 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
संभल, 27 फरवरी। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले साल 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी। इस मामले में जेल में बंद 17 आरोपियों की कोर्ट ने गुरुवार को जमानत याचिका खारिज कर दी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट इससे पहले 42 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर चुका है। बवाल के आरोप में जेल में बंद अब तक कुल 59 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है। कोर्ट का कहना है कि सभी आरोपियों पर गंभीर आरोप हैं।
शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश सैनी ने गुरुवार को बताया कि शाही जामा मस्जिद प्रकरण में 29 लोगों के प्रार्थना पत्र पहले खारिज हो चुके हैं। कोर्ट में आज 17 जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई है। सभी 17 याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कुल मिलाकर अब 59 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है।
जानकारी के अनुसार, संभल हिंसा मामले में 80 आरोपी जेल में बंद हैं। हालांकि, आरोपी पक्ष के वकीलों ने हाल में जमानत याचिका खारिज होने पर हाईकोर्ट जाने की बात कही थी।
संभल के एसपी कृष्ण बिश्नोई ने शुक्रवार (21 फरवरी) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में अब तक कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिसमें से सात मामले संभल कोतवाली, चार मामले नखासा थाने और एक जीरो एफआईआर मुरादाबाद में दर्ज की गई है। छह मामलों में पुलिस ने चार्जशीट पेश कर दी है। सबसे पहले लिखी गई दो एफआईआर में उपनिरीक्षक शाह फैसल की पर्सनल बुलेट और सरकारी गाड़ियों को आग लगाने का प्रयास किया गया। सरकारी गाड़ी जल गई, जबकि उपनिरीक्षक की पर्सनल गाड़ी को जलने से बचा लिया गया। सीसीटीवी के आधार पर इस मामले में 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
उन्होंने कहा कि दूसरे मामले में एक अपराधी ने फायरिंग की थी, जिसमें 25 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इसके अलावा एक और मामले में 21 लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया था। नामजद अभियुक्त समेत 53 लोगों के खिलाफ इसमें चार्जशीट दायर की गई है। चौथे मामले में एसडीएम पथराव के दौरान घायल हुए थे। उसमें 37 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है। साथ ही कोतवाली क्षेत्र के एक मामले में सीओ को पैर में गोली लगी थी। इस केस में 38 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है।
इसके अलावा, जामा मस्जिद के पास हथियारों को लूटने के मामले में 39 लोगों को जेल भेजा गया है। एसपी कृष्ण बिश्नोई ने बताया कि छह मुकदमों में शुरुआत से 36 लोग नामजद थे। इसके बाद 123 लोगों के नाम प्रकाश में आए थे। कुल मिलाकर 159 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से 80 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। साथ ही 79 लोगों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
राजनीति
‘लखनऊ एक्सप्रेस’ का इंजन फेल हो गया है, राजनाथ सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अखिलेश का तंज

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कटाक्ष किया है। सपा प्रमुख ने कहा कि ‘लखनऊ एक्सप्रेस’ का इंजन फेल हो गया है, तभी दिल्ली के इंजन ने लखनऊ की कमान किसी और को थमाने का अंदरूनी फैसला कर लिया है।
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को दिखावटी करार देते हुए कहा कि असली खेल लखनऊ के इंजन को खटारा साबित कर स्थायी रूप से हटाने का है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सत्ता पक्ष की ओर से होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ाने वाला तंज किया।
उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ”सुना है सत्ताधारियों की तरफ से कोई बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है। लगता है ‘लखनऊ एक्सप्रेस’ का इंजन फेल हो गया है, तभी दिल्ली के इंजन ने लखनऊ की कमान किसी और को थमाने का अंदरूनी फैसला कर लिया है।”
अखिलेश यादव ने कहा कि ये प्रेस कॉन्फ्रेंस तो बस दिखावटी है, असली खेल तो लखनऊ के इंजन को खटारा साबित करके उसे परमानेंट हटाने का है। अब लखनऊ वालों की रक्षा कौन करेगा? हालांकि, अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में किसी का नाम लेकर यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस नेता या घटनाक्रम की ओर है।
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष और इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका मकसद चुनावी सुधार नहीं, बल्कि देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करना है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं को अराजकता का मोहरा बनाया जा रहा है और कुछ लोग बांग्लादेश के घटनाक्रम की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।
रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं को राजनीतिक टकराव का साधन बना रहे हैं। कुछ लोग बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरणा लेकर भारत में सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ खुले तौर पर सरकार गिराने की मांग कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, यह लड़ाई न तो चुनावी सुधार के लिए है और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा कोई मुद्दा है। उन्होंने इसे सत्ता हासिल करने की कोशिश बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का भविष्य टकराव में नहीं, बल्कि संवाद और राष्ट्र निर्माण में है।
राष्ट्रीय समाचार
कर्नाटक स्टिंग विरोध: कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के कार्यालय के बाहर धरना दिया

स्टिंग ऑपरेशन का मामला तब एक नाटकीय मोड़ पर आ गया, जब केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच की मांग की और राज्य सरकार को चुनौती दी कि वे जांच की शुरुआत उन्हीं से करें।
कुमारस्वामी ने जनता दल (सेक्युलर) के नेताओं के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह के साथ लगभग 30 मिनट तक बैठक भी की।
धरना स्थल पर मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि उनके और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा, “आज गृह मंत्री कह रहे हैं कि मेरे और मेरे कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच होगी। अगर जरूरत पड़ी तो हम यहां दो दिन तक बैठने के लिए तैयार हैं। वे दावा करते हैं कि उनके पास जानकारी है तो उन्हें जांच करने दें।”
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार कथित स्टिंग ऑपरेशन में सीधे तौर पर शामिल लोगों के साथ नरमी बरत रही है, जबकि उन पर शक कर रही है। उन्होंने जांच के इस तरीके पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, “वे जानते हैं कि यह किसने किया है और इस स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कौन है। वे इसमें सीधे तौर पर शामिल लोगों को वीआईपी जैसा बर्ताव दे रहे हैं, जबकि मुझ पर शक कर रहे हैं और मेरी जांच करना चाहते हैं। जांच मुझसे ही शुरू करें और पता लगाएं कि इस मामले में कौन-कौन शामिल है।”
कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने और उनकी पार्टी के नेताओं ने अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से मामले की उचित जांच सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने कहा, “हमने अपना फैसला ले लिया है। हम मुख्यमंत्री शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से कह रहे हैं कि हमें नहीं पता कि आप कितने परिवारों को बर्बाद करेंगे। आप जो करना चाहते हैं करें, लेकिन हम यहीं बैठेंगे और जांच की मांग करेंगे।”
यह विरोध प्रदर्शन कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच हो रहा है। कुमारस्वामी लगातार राज्य सरकार को इस मामले से निपटने के तरीके को लेकर चुनौती दे रहे हैं।
बता दें कि कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इससे पहले दिन में कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार और गृह मंत्री खड़गे को उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि वे उन्हें निशाना बनाने के लिए पुलिस और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रहे हैं।
दिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराने की मांग की और राज्य सरकार को निष्पक्ष जांच करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है, और जोर देकर कहा कि जांच किसी मौजूदा जज की देखरेख में होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “शिवकुमार और प्रियांक खड़गे, अगर आपमें हिम्मत है तो किसी रिटायर्ड जज से जांच करवाएं। मैं बहादुरी से बोल रहा हूं और आप लोगों की तरह कायर नहीं हूं। क्या आपको लगता है कि मैं डर जाऊंगा? आपने कहा है कि अगर कोई शक हुआ तो मुझे हिरासत में ले लिया जाएगा। मुझे छूने की हिम्मत करके तो देखिए। फिर आंदोलन शुरू हो जाएगा, और मैं देखूंगा कि आप किस-किस को छू सकते हैं।”
कुमारस्वामी ने कहा कि अगर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कोई गलत काम किया है तो वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई सबूत है तो वे खुद बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के दफ्तर जाने और पुलिस से उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कहने को भी तैयार हैं।
उन्होंने पूछा, “अगर उन्होंने गलतियां की हैं तो मैं आपका साथ दूंगा। मैं खुद आगे आऊंगा, लेकिन आप राजनीतिक खेल खेलने के लिए अपनी सत्ता और पुलिस का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकते। आप सम्मान के लायक नहीं हैं। क्या आपमें कोई जमीर है?”
अपनी भाषा के लिए जनता से माफी मांगते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पहले कभी इस स्तर तक गिरकर बात नहीं की थी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि राज्य के हित दांव पर लगे हैं।
राष्ट्रीय समाचार
हरियाणा सरकार ने 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की

हरियाणा सरकार ने लक्ष्य का 27 प्रतिशत यानी 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की और किसानों को 1,221 करोड़ रुपए वितरित किए।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई। बैठक में धान की आवक, खरीद, उत्खनन, किसानों को भुगतान और खरीद प्रणाली को अधिक कुशल, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी-आधारित पहलों की प्रगति का भी आकलन किया गया।
समीक्षा में कटाई के पूरे मौसम में सुचारू खरीद संचालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों, ट्रांसपोर्टरों और चावल मिल मालिकों के बीच निर्बाध समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार ने बताया कि हरियाणा की मंडियों में अब तक 21.27 लाख मीट्रिक टन धान आ चुका है, जिसमें से 15.52 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है और 7.69 लाख मीट्रिक टन धान उठाया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा खरीफ ऋतु 2026-27 के लिए निर्धारित 58 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद के लक्ष्य के मुकाबले राज्य लगभग 27 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुका है।
मुख्य सचिव की समीक्षा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसानों को खरीद केंद्रों पर कुशल सेवाएं मिलें और आवक जारी रहने के साथ-साथ खरीदे गए धान की आवाजाही सुचारू बनी रहे।
बैठक में खरीद एजेंसियों और ट्रांसपोर्टरों के बीच समन्वय सुधारने, पर्याप्त उठान व्यवस्था बनाए रखने, पारदर्शी वजन और नमी परीक्षण की सुविधा प्रदान करने और खरीद संबंधी दस्तावेजों की कुशल प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
समीक्षा के दौरान खरीद प्रणाली के महत्वपूर्ण पहलुओं में समय पर भुगतान, सुचारू गेट-पास प्रक्रिया और प्रभावी डिजिटल सत्यापन शामिल थे। उपायुक्तों से बातचीत करते हुए मुख्य सचिव ने उन्हें बाधाओं को दूर करने और समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया ताकि खरीद और उठान कार्यों में और तेजी लाई जा सके।
जिलावार समीक्षा में कई जिलों में खरीद के उत्साहजनक संकेतक सामने आए। कुरुक्षेत्र में आवक-से-नीलामी अनुपात 88.2 प्रतिशत रहा, इसके बाद यमुनानगर में 81.8 प्रतिशत और अंबाला में 80.7 प्रतिशत रहा।
राज्य का औसत 74.7 प्रतिशत रहा। नीलामी से खरीद में रूपांतरण के मामले में, पंचकुला में 93.7 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र में 92.4 प्रतिशत और कैथल में 90.9 प्रतिशत रहा, अंबाला में 89.3 प्रतिशत, यमुनानगर में 85.4 प्रतिशत और करनाल में 78.5 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि राज्य का औसत 86 प्रतिशत था। नीलामी से खरीद में रूपांतरण के मामले में, पंचकुला में 57.1 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र में 55 प्रतिशत और कैथल में 52.2 प्रतिशत रहा, जबकि अंबाला में 49.4 प्रतिशत रहा।
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