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Wednesday,01-April-2026
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रोहित शर्मा ने पास किया फिटनेस टेस्ट, आस्ट्रेलिया के लिए भरेंगे उड़ान

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Rohit-Sharma

रोहित शर्मा ने बेंगलुरू स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है और वह अब आस्ट्रेलिया के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने को तैयार हैं। रोहित को आईपीएल में मांसपेशियों में खिंचाव की शिकायत हुई थी। ऐसा पता चला है कि उन्होंने शुक्रवार को फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है और वह इस सप्ताह के अंत में आस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो सकते हैं। इस संबंध में हालांकि बीसीसीआई ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, 32 साल के रोहित मुंबई से दुबई तक चार्टर फ्लाइट लेंगे और वहां से 13 दिसंबर को सिडनी के लिए रवाना होंगे। वह चार मैचों की टेस्ट सीरीज के आखिरी दो मैचों में चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।

सिडनी पहुंचने के बाद रोहित को 14 दिन के अनिवार्य क्वांरटीन पर जाना होगा।

शुरुआत में रोहित को आस्ट्रेलिया दौरे पर नहीं चुने जाने के बाद बीसीसीआई ने बाद में उन्हें टीम में शामिल करने की बात कही थी।

भारतीय कप्तान विराट कोहली 17 दिसंबर से एडिलेड ओवल मैदान पर शुरू हो रहे पहले टेस्ट मैच के बाद अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए स्वदेश वापस लौट लेंगे। उनके जाने के बाद रोहित के आने से टीम को मजबूती मिलेगी।

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ईरान में क्रूर शासन के खिलाफ हमारे संघर्ष की दहाड़ पूरी दुनिया सुन रही : नेतन्याहू

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तेल अवीव : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि मेरे भाइयों और बहनों, इजरायल के नागरिकों, इस स्वतंत्रता के पर्व की पूर्व संध्या पर इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत है। पूरी दुनिया ईरान की दुष्ट सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारी शेर जैसी गर्जना सुन रही है, एक ऐसी लड़ाई जिसमें हमने बेहद बड़ी व विशाल उपलब्धियां हासिल की हैं।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इसकी एक पीड़ादायक कीमत भी है। अभी कल ही, हमने अपने चार सर्वश्रेष्ठ बेटों को खो दिया। इजरायल के नागरिकों की ओर से और मेरी व मेरी पत्नी सारा की ओर से मैं शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। हम सभी प्रेम के साथ उन परिवारों को गले लगाते हैं जिन्होंने अपना सबसे अनमोल सदस्य खो दिया है और हम अपने वीर घायल साथियों को भी प्रेम से गले लगाते हैं। हम एक ही लोग हैं, एक साझा नियति की डोर से बंधे हुए, अपने अस्तित्व और अपने भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए साथ हैं।

अमेरिका के साथ हमारे संयुक्त अभियान के एक महीने पूरे होने पर हम व्यवस्थित रूप से उस आतंकी शासन को कुचल रहे हैं जिसने दशकों तक यह नारा लगाया: “अमेरिका की मौत, इजरायल की मौत।” यह सच है कि हर पीढ़ी में वे हमें नष्ट करने के लिए उठ खड़े होते हैं और इस पीढ़ी में आयतुल्लाओं के शासन ने हमें समाप्त करने, मध्य पूर्व पर कब्ज़ा करने और पूरी दुनिया को धमकाने का बड़ा प्रयास किया। उसने इन घातक इरादों को आगे बढ़ाने के लिए परमाणु कार्यक्रमों और बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास किया, हमारे आसपास आतंकवादी संगठनों को धन और हथियार दिए और उस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को झेलते हुए आगे बढ़ा। अब मैं आपको बताना चाहता हूं कि वर्षों में इस सब पर ईरान को लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का खर्च आया है। अब यह कहा जा सकता है कि वह पैसा व्यर्थ चला गया।

ईरान से वसूली गई कीमत केवल धन तक सीमित नहीं थी। आने वाले पासओवर (मुक्ति पर्व) की भावना में ‘मोचन युद्ध’ की शुरुआत से ही, हमने ‘बुराई के धुरी’ पर दस विपत्तियां डाली हैं। गाज़ा में हमास पर प्रहार, लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर प्रहार, सीरिया में असद पर प्रहार, यहूदिया और समारिया में आतंकी संगठनों पर प्रहार, यमन में हूतियों पर प्रहार, और ईरान पर पांच और प्रहार- उनके परमाणु कार्यक्रम पर प्रहार, उनकी मिसाइलों पर प्रहार, शासन की बुनियादी संरचना पर प्रहार, दमनकारी ताकतों पर प्रहार, और “पहिलौठों की विपत्ति”, या हमारे मामले में, शीर्ष नेतृत्व पर प्रहार। तानाशाह खामेनेई से लेकर परमाणु वैज्ञानिकों तक और रिवोल्यूशनरी गार्ड व बसीज के कुख्यात हत्यारों तक, नसरल्लाह, हनियेह, डेइफ़, सिनवार और कई अन्य तक।

मिस्र की दस विपत्तियों के बाद भी फ़िरऔन ने इजरायल के लोगों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी और हम सभी जानते हैं उसका अंत क्या हुआ। यही स्थिति ईरानी ‘बुराई के धुरी’ के खिलाफ अभियान में भी है। यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन अभी भी यह कहा जा सकता है कि हमारे दुश्मनों पर आई इन दस विपत्तियों के मुकाबले, हमने ‘राइजिंग लॉयन’ और ‘रोअरिंग लॉयन’ अभियानों तथा पूरे ‘मोचन युद्ध’ में दस बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

पहला हमने एक रणनीतिक बदलाव किया। इन दोनों अभियानों से पहले, ईरान हमें घेरने की कोशिश कर रहा था। आज हम उन्हें घेर रहे हैं। ईरान का आयतुल्ला शासन पहले से कहीं अधिक कमजोर है और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत।

दूसरा, हमने दुनिया को ईरान के खतरे के प्रति जागरूक किया। पहले दुनिया ने हमारी चेतावनियों को नजरअंदाज किया। आज कोई भी इस खतरे की गंभीरता को नहीं नकार सकता।

तीसरा, पहले हम अकेले लड़ रहे थे। आज हम अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे हैं- एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सहयोग में।

चौथा, हमने उस आतंकी शासन की नींव हिला दी, जो पहले अजेय लगता था। अब यह शासन डगमगा रहा है, और देर-सबेर गिर जाएगा।

पांचवां, हमने दो अस्तित्वगत खतरों को समाप्त किया- परमाणु हथियार और बैलिस्टिक मिसाइलों का खतरा।

छठा, हमने ईरान की आतंकी सेनाओं की ताकत तोड़ दी, जो हमें चारों ओर से घेर रही थीं।

सातवां, हमने अपनी सीमाओं से परे गहरे सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किए। आठवां, हमने अपनी सुरक्षा नीति बदली-अब हम पहल करते हैं और अपने दुश्मनों को चौंकाते हैं।

नौवाँ, हमने साबित किया कि हमारी वायु रक्षा प्रणाली दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। दसवाँ, हमने इजरायल की जनता और अर्थव्यवस्था की अद्भुत मजबूती दिखाई।

इजरायल के नागरिकों, ये उपलब्धियां आपकी वजह से संभव हुई हैं-आपके विश्वास और शक्ति के कारण। दुश्मन आते-जाते रहेंगे लेकिन उनका सामना करने की हमारी क्षमता और दृढ़ संकल्प ही हमारे भविष्य को सुरक्षित करता है। मिलकर हमने इजरायल को एक क्षेत्रीय शक्ति, और कुछ क्षेत्रों में वैश्विक शक्ति बना दिया है।

कई बार पिछले ढाई वर्षों में, मुझे कठिन निर्णय लेने पड़े- रफ़ाह, फिलाडेल्फ़ी, गाज़ा सिटी में प्रवेश, बंधकों की वापसी, सीरिया में हस्तक्षेप और ‘राइजिंग लॉयन’ व ‘रोअरिंग लॉयन’ जैसे साहसी कदम। इन सभी में मैंने आपकी आवाज़ सुनी, नागरिकों की और सैनिकों की।

आपने मुझसे कहा: “हम समझते हैं क्या दांव पर है। हम मजबूत हैं। प्रधानमंत्री, कमजोरी की आवाज़ों के सामने मत झुको। लड़ाई जारी रखो, हमें जीत की ओर ले चलो।” और हम वही कर रहे हैं।

गाज़ा और लेबनान में आगे बढ़ते सैनिक से लेकर तेहरान के आसमान में उड़ते पायलट तक-इस्राइली योद्धा चीते की तरह तेज, चील की तरह हल्के और शेर की तरह बहादुर हैं। हम आतंकी शासन को कुचलते रहेंगे, अपनी सुरक्षा को मजबूत करेंगे और अपने लक्ष्य हासिल करेंगे।

पासओवर हग्गादा में कहा गया है: “हर पीढ़ी में कोई न कोई हमें नष्ट करने उठ खड़ा होता है लेकिन ईश्वर हमें उनके हाथों से बचाते हैं।” यही विरासत हमें संभाले हुए है। राष्ट्र अडिग खड़ा है, और हमें भी अडिग रहना होगा। ईश्वर की कृपा से हम इजरायल की अनंतता सुनिश्चित करेंगे।

पूरे इजरायल को स्वतंत्रता पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अमेरिकी सेना कुछ हफ्तों में बाहर आ सकती है : ट्रंप

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TRUMP

वाशिंगटन, 1 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अमेरिकी सेना कुछ हफ्तों में बाहर आ सकती है। उनका दावा है कि अमेरिका ने अपना मुख्य लक्ष्य, यानी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, पहले ही हासिल कर लिया है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, “मुझे लगता है दो या तीन हफ्ते लगेंगे। यह मिशन अब पूरा होने वाला है।”

उन्होंने दावा किया कि लगातार हमलों से ईरान की ताकत काफी कमजोर हो गई है। ट्रंप ने कहा, “हमारा एक ही लक्ष्य था कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों, और वह लक्ष्य पूरा हो गया है। अब उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा, “वहां सत्ता परिवर्तन हो चुका है और अब हम ज्यादा समझदार लोगों से बात कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का मकसद ईरान की ताकत को लंबे समय तक कमजोर करना है। ट्रंप ने कहा, “हम उनकी हर क्षमता को खत्म करना चाहते हैं।”

साथ ही, उन्होंने बातचीत के जरिए समझौते की संभावना भी जताई। उन्होंने कहा, “संभव है कि समझौता हो जाए, क्योंकि वे हमसे ज्यादा समझौता करना चाहते हैं।”

हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि समझौता होना अमेरिकी सेना के हटने की शर्त नहीं है। उन्होंने कहा, “ईरान को समझौता करने की जरूरत नहीं है… जब हमें लगेगा कि उन्हें लंबे समय तक बहुत पीछे धकेल दिया गया है, तब हम वहां से हट जाएंगे।”

ट्रंप के मुताबिक, इस संघर्ष ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। उन्होंने कहा, “हमने उन्हें काफी पीछे धकेल दिया है। उन्हें दोबारा खड़े होने में 15 से 20 साल लगेंगे।” उन्होंने इस कार्रवाई को जरूरी बताते हुए कहा, “हमें यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि एक पागल व्यक्ति परमाणु हथियार बनाना चाहता था।”

ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्होंने दोहराया कि मुख्य लक्ष्य हासिल हो चुका है और अब बचा हुआ काम जल्दी पूरा कर लिया जाएगा। अब ईरान के पास न नौसेना बची है, न वायुसेना और न ही कोई मजबूत सेना।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की संचार व्यवस्था और हवाई सुरक्षा सिस्टम भी नष्ट हो चुके हैं। ट्रंप के अनुसार, “उनके पास अब न दूरसंचार है और न ही एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम।” उन्होंने इसे अमेरिका की निर्णायक जीत बताया। ट्रंप ने कहा, “वे हार रहे हैं, खुद मान रहे हैं कि हार रहे हैं और समझौते के लिए गुहार लगा रहे हैं।”

अंत में उन्होंने कहा कि ईरान की रक्षा प्रणाली इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब अमेरिकी विमान पूरी तरह से आसमान पर नियंत्रण बनाए हुए हैं।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान की रक्षा क्षमताओं को इस हद तक बेअसर कर दिया गया है कि अमेरिकी विमान अब पूरी आज़ादी से उड़ान भर रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान के लोग हवाई हमलों और जरूरी अपडेट को ट्रैक करने के लिए इस ऐप का कर रहे इस्तेमाल

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तेहरान, 31 मार्च : ईरान में 30 दिनों से ज्यादा समय तक इंटरनेट बंद है। ईरानी लोग हवाई हमलों और जरूरी अपडेट को ट्रैक करने के लिए अलग मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि ईरान के लोग टेलीग्राम के जरिए एक-दूसरे के साथ मैसेजिंग या जानकारी साझा कर रहे हैं। इसके अलावा इंडोनेशियाई मीडिया आउटलेट ने बताया है कि ईरान के लोग एयरस्ट्राइक और अन्य जरूरी जानकारी के लिए माहसा अलर्ट ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सीएनए ने कहा बताया कि ईरान में हजारों लोग जरूरी जानकारी शेयर करने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर लोग जानकारी साझा कर रहे हैं कि एयरस्ट्राइक कहां हुए, किन इलाकों में बिजली चली गई और कितना नुकसान हुआ।

ईरान में होने वाले एयरस्ट्राइक के लिए कोई ऑफिशियल चेतावनी सिस्टम न होने के कारण, इसके नागरिक खुद ही समस्या का समाधान कर रहे हैं। ईरानी नागरिक अपना खुद का क्राउडसोर्स्ड एयर अटैक वॉर्निंग सिस्टम बनाते हैं।

इंडोनेशया के डिजिटल मीडिया पोर्टल वीओआई के अनुसार, ईरान में जब मिलिट्री हमलों या मूवमेंट से जुड़ी पब्लिक वॉर्निंग देने के लिए कोई आधिकारिक सरकारी सिस्टम नहीं था, तब महसा अलर्ट नाम का प्लेटफॉर्म एक इमरजेंसी सॉल्यूशन के तौर पर सामने आया है।

ईरान के डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने इस ऐप को तैयार किया है। यह ऐप हमलों और सैन्य गतिविधियों के स्थानों को मैप करने के लिए जनता, सोशल मीडिया और मैनुअल सत्यापन से प्राप्त डेटा पर आधारित है।

ऑफिशियल मिलिट्री वॉर्निंग सिस्टम के उलट, महसा अलर्ट पूरी तरह से रियल-टाइम नहीं है। हालांकि, यह एप्लिकेशन हमलों या खतरों से जुड़ी वेरिफाइड जानकारी होने पर भी नोटिफिकेशन भेजता है।

हर डेटा अपडेट बहुत छोटा रखा जाता है, एवरेज सिर्फ 100केबी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कनेक्शन अनस्टेबल या लिमिटेड होने पर भी यूजर्स जानकारी हासिल कर सकें।

इंडोनेशियाई न्यूज पोर्टल ने बताया कि सही जानकारी बनाए रखने के लिए, महसा अलर्ट के पीछे की टीम डेटा दिखाने से पहले अच्छी तरह वेरिफिकेशन करती है। पुष्टि के तौर पर मार्क की गई अटैक लोकेशन को सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो या इमेज-बेस्ड जांच से गुजरना होगा।

इसके अलावा, इस एप्लिकेशन में मेडिकल सुविधा पॉइंट, सीसीटीवी कैमरे और सरकार से जुड़े होने का शक वाले चेकपॉइंट जैसी अतिरिक्त जानकारी भी होती है। अब तक, डेवलपमेंट टीम को 3,000 से ज्यादा आने वाली रिपोर्ट को वेरिफाई करना बाकी है।

इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट एक्सेस सामान्य स्तर के सिर्फ करीब 1 प्रतिशत तक रह गया है। इसका मतलब है कि अधिकांश लोग इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और देश डिजिटल रूप से दुनिया से लगभग कट चुका है।

28 फरवरी, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों की एक शृंखला के बाद से ही इंटरनेट ब्लैकआउट जैसी स्थिति है। मौजूदा हालात के कारण देश के इतिहास में सबसे लंबे डिजिटल शटडाउन हुआ है, इससे लगभग 9 करोड़ नागरिक एक गंभीर राष्ट्रीय संकट के दौरान वैश्विक समुदाय से लगभग पूरी तरह कट गए हैं।

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