अंतरराष्ट्रीय
रोहित-ईशांत की गैरमौजूदगी टेस्ट में चिंता की बात नहीं : लैंगर
ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कोच जस्टीन लैंगर ने कहा है कि रोहित शर्मा और ईशांत शर्मा अगर टेस्ट सीरीज के शुरुआती दो मैचों में नहीं खेलते हैं तो इसका मेजबान टीम की मानसिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लैंगर ने कहा कि दोनों टीमों के बीच बीते कुछ वर्षो में होती आ रही सीमित ओवरों की सीरीज से टीम को मदद मिलेगी। आईएएनएस संवाददाता ने जब लैंगर से पूछा कि क्या रोहित और ईशांत के शुरुआती दो टेस्ट मैचों में न रहने से अस्ट्रेलिया को फर्क पड़ेगा ?
इसका जवाब देते हुए लैंगर ने कहा, “यह हमारा काम नहीं है। हमारी अपनी चुनौतियां हैं। हम मैच की सुबह पहली बार एक ग्रुप के तौर पर एक साथ आएंगे। यह भारत के ऊपर है कि वो क्या करती है और किसे चुनती है। इन बातों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होगा। कोविड-19 के दौरान एक चीज मैंने सीखी है कि अगर आप उन चीजों पर ध्यान देंगे जो आपके बस में नहीं हैं तो आप पागल हो जाएंगे। वह जिसे चाहें उसे चुन सकते हैं।”
रोहित और ईशांत इस समय राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में रीहैब कर रहे हैं। ऐसी खबरें हैं कि यह दोनों शुरुआती दो टेस्ट मैचों से बाहर हो सकते हैं क्योंकि इन्हें ठीक होने में समय लगेगा और वह फिर सख्त क्वारंटीन से गुजरेंगे।
भारत और आस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर सीरीज का पहला टेस्ट 17 दिसंबर से और दूसरा टेस्ट 26 दिसंबर से शुरू हो रहा है।
लैंगर ने कहा कि दोनों टीमें सीमित ओवरों में हालिया समय में लगातार एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुकी हैं तो इससे आस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को भारतीय गेंदबाजों का सामना करने में मदद मिलेगी।
लैंगर ने कहा, “हम जानते हैं कि जसप्रीत बुमराह विश्व स्तर के गेंदबाज हैं। मोहम्मद शमी के साथ यह एक शानदार ओपनिंग जोड़ी होगी। आईपीएल में खेलकर हमारे खिलाड़ियों ने इन्हें परखा है। पिछले कुछ ग्रीष्मकाल में हमने 14 वनडे खेले हैं। हमारे खिलाड़ियों ने उन्हें काफी देखा है। मुझे प्रतिद्वंदिता के बारे में यह बात पसंद है। हम उनके स्पिनरों का, बुमराह, शमी का सम्मान करते हैं। उनके बाकी के गेंदबाज जैसे नवदीप सैनी का भी।”
टेस्ट सीरीज की शुरुआत से पहले भारत-आस्ट्रेलिाय तीन मैचों की वनडे और इतने ही मैचों की टी-20 सीरीज खेलेंगी।
अंतरराष्ट्रीय
अबू धाबी: मारे गए 2 लोगों में से एक भारत, दूसरा पाकिस्तान का

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अबू धाबी, 26 मार्च : संयुक्त अरब अमीरात में गुरुवार को मिसाइल के टुकड़े गिरने से मारे गए दोनों लोगों की पहचान हो गई गई है। अधिकारियों के अनुसार इनमें से एक भारत और दूसरा पाकिस्तान का नागरिक था। वहीं घायलों में भी एक भारतीय शामिल है।
अबू धाबी मीडिया ने सुबह हुए हादसे का अपडेट दिया है। एक्स पोस्ट के जरिए बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोकने के बाद गिरे टुकड़े की चपेट में आने से पाकिस्तानी और भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। वहीं तीन घायलों में से एक अमीराती, दूसरा जॉर्डन और तीसरा भारतीय नागरिक है। इनमें से किसी को गंभीर तो किसी को सामान्य चोट आई है।
मीडिया कार्यालय ने इस जानकारी के साथ लोगों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है और कहा है कि अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक सोर्स से ही जानकारी लें।
गुरुवार सुबह ही बताया गया था कि मिसाइल को सफलता से इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन इसी दौरान जो टुकड़े गिरे, उसकी जद में आए दो लोगों की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए।
अधिकारियों का मानना है कि भले ही मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम हवा में ही नष्ट कर दे रहा है, लेकिन उनके गिरते हुए टुकड़े या मलबा लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच का ये संघर्ष अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ईरान खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य बेस मौजूद हैं। वो कहता रहा है कि जो देश अमेरिकी जमीनी सेना की मदद करेंगे, वे भी निशाने पर रहेंगे। हालांकि खाड़ी देशों का कहना है कि वे इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं।
जब से ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल का संघर्ष शुरू हुआ है, तब से यूएई में ईरानी स्ट्राइक में गुरुवार को मारे गए दो लोगों को मिलाकर 10 लोग मारे गए हैं। शनिवार (21 मार्च) को यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि आठ लोग मारे गए, “जिनमें सेना के दो सदस्य और पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी और फिलिस्तीनी देशों के छह आम नागरिक शामिल हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-इजरायल और ईरान के हमलों में हूती की ‘एंट्री’, ईरानी मीडिया ने किया बड़ा दावा

तेहरान, 26 मार्च : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हमलों का दौर अब भी जारी है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस हमले को लगभग एक महीना होने वाला है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब तक कोई बात नहीं बनी है। इस बीच अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के खिलाफ हूती विद्रोहियों की एंट्री हो सकती है।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही इजरायल के खिलाफ जंग में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट में बिना नाम बताए सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि हूती, जिन्हें यमनी अंसारुल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, बाब अल-मंदाब स्ट्रेट पर कब्जा करने के लिए तैयार हैं।
अक्टूबर 2023 से विद्रोही समूह ने लाल सागर में पहले ही तनाव की स्थिति बना रखी है और गाजा पर इजरायल के हमलों का बदला लेने के लिए सैकड़ों इजरायली ठिकानों पर गोलाबारी की है।
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, हूती ने अमेरिका और ब्रिटेन से जुड़े जहाजों को भी निशाना बनाया है, जिससे दुनिया भर में व्यापार में रुकावट आई है। अमेरिका और दूसरी पश्चिमी नौसेनाएं समुद्र के रास्ते जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही हैं, लेकिन अगर हूती बाब अल-मंदाब स्ट्रेट पर कब्जा करने का फैसला करते हैं, तो इससे उनके विकल्प और कम हो सकते हैं।
बाब अल-मंदाब स्ट्रेट भूमध्य सागर और अरब सागर के बीच एक जरूरी रास्ता है, जो यूरोप को अफ्रीका और उससे आगे के महासागरों में एशिया से जोड़ता है। इन सबके बीच अमेरिका और ईरान के बातचीत को लेकर चर्चाएं हो रही हैं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, ईरान ने इन दावों खारिज करते हुए यह कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे पार्टी के जरिए हल्का-फुल्का संदेशों का आदान-प्रदान हुआ।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मध्यस्थों के माध्यम से ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच विभिन्न संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है, जबकि पिछले महीने के अंत में देश पर अमेरिकी और इजरायली हमलों की शुरुआत के बाद से तेहरान ने वाशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की।
अराघची ने कहा, “कुछ दिनों पहले से अमेरिकी पक्ष विभिन्न मध्यस्थों के माध्यम से अलग-अलग संदेश भेज रहा है। जब मित्र देशों के माध्यम से हमें संदेश भेजे जाते हैं और हम जवाब में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं या आवश्यक चेतावनी जारी करते हैं तो इसे न तो बातचीत कहा जाता है और न ही संवाद। यह केवल हमारे मित्रों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान है, और हमने अपने सैद्धांतिक रुख को दोहराया है।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप की ईरान को चेतावनी, ‘बेहतर होगा बातचीत को लेकर हों गंभीर, कहीं देर न हो जाए’

TRUMP
वाशिंगटन, 26 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान उनके सामने गिड़गिड़ा रहा है और वो डील की भीख मांग रहा है। ट्रंप का यह भी कहना है कि ईरानी वार्ताकार बहुत अजीब हैं। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि तेहरान को “जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”
अपने ट्रुथ सोशल ऐप पर ट्रंप ने कहा: ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और “अजीब” हैं। वे हमसे डील करने के लिए “गुजारिश” कर रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं, और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ “हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं।” गलत!!! उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा!
ईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह “न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।”
धमकी, चेतावनी और विरोध के बीच पश्चिम एशिया ही नहीं पूरी दुनिया के लिए 27 मार्च का दिन काफी अहम है। 23 मार्च को ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता का दावा करते हुए कहा था कि बातचीत “सकारात्मक और रचनात्मक” है, इसलिए वो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के फैसले को “5 दिन के लिए टाल रहे हैं।” इसकी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही है।
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