अपराध
रश्मिका मंदाना डीपफेक वीडियो मामले का मुख्य आरोपी आंध्र में गिरफ्तार
अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने के मामले के मुख्य आरोपी को दिल्ली पुलिस की एक टीम ने आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
आरोपी की पहचान आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के निवासी 24 वर्षीय ईमानी नवीन के रूप में हुई है, जो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए डीपफेक वीडियो बनाने, अपलोड करने और प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार था।
पुलिस उपायुक्त, आईएफएसओ, हेमंत तिवारी ने कहा कि एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री का डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जा रहा है।
शुरुआती विश्लेषण के दौरान यह पाया गया कि मूल वीडियो एक ब्रिटिश भारतीय लड़की द्वारा अक्टूबर 2023 में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किया गया था और बाद में अभिनेत्री का डीपफेक वीडियो बनाया गया और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया।
जांच में कथित डीपफेक वीडियो से संबंधित 500 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट का विश्लेषण किया गया। एसीपी विजय गहलावत की देखरेख में साइबर लैब में वीडियो का विश्लेषण किया गया। इस दौरान आईएफएसओ यूनिट ने कई सोशल मीडिया अकाउंट धारकों से पूछताछ की।
गहन विश्लेषण और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ के बाद आखिरकार इंस्टाग्राम पर कथित के अकाउंट का पता लगा लिया गया।
डीसीपी ने कहा, ”आगे के विश्लेषण के दौरान यह पाया गया कि एक ब्रिटिश भारतीय लड़की का मूल वीडियो 9 अक्टूबर, 2023 को पोस्ट किया गया था और डीपफेक वीडियो 13 अक्टूबर, 2023 को पोस्ट किया गया था। कथित अपराधी की पहचान करने के बाद एक टीम गुंटूर पहुंची और नवीन का पता लगाया, जिसने अपना अपराध कबूल कर लिया है।”
उन्होंने बताया कि पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह रश्मिका का बहुत बड़ा प्रशंसक है और उसने फैन पेज बनाए और चलाए हैं।
डीसीपी ने कहा, “आरोपी ने अन्य दो प्रसिद्ध हस्तियों के दो और फैन पेज भी बनाए। वह तीनों पेजों का प्रबंधन कर रहा था और मूल/स्वच्छ वीडियो अपलोड कर रहा था। दो और फिल्मी सितारों के फैन पेज के फॉलोअर्स लाखों में हैं।”
अपने रश्मिका पेज पर फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए नवीन ने एक्ट्रेस का डीपफेक वीडियो बनाया और 13 अक्टूबर को फैन पेज पर पोस्ट कर दिया।
डीसीपी ने कहा, “इस डीपफेक वीडियो के कारण इस पेज की फैन फॉलोइंग दो सप्ताह के भीतर 90,000 से बढ़कर 108,000 हो गई। बाद में जब उन्हें एहसास हुआ कि यह एक राष्ट्रीय सनसनी बन गई है। उन्होंने उक्त डीपफेक वीडियो के खिलाफ प्रसिद्ध फिल्मी सितारों के ट्वीट भी देखे, तो डर गए। इंस्टाग्राम चैनल से उस पोस्ट को हटा दिया और इंस्टा चैनल का नाम भी बदल दिया। उसने अपने उपकरणों से प्रासंगिक डिजिटल डेटा भी हटा दिया था।”
यह कानूनी कार्रवाई दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की एक शिकायत के बाद हुई, जिसने अभिनेत्री से जुड़े ‘डीपफेक’ वीडियो का स्वत: संज्ञान लिया।
डीसीडब्ल्यू की पूर्व प्रमुख स्वाति मालीवाल ने एक्स पर लिखा था, “हमारे नोटिस के बाद दिल्ली पुलिस ने @IAmRashmika फर्जी वीडियो मामले में एफआईआर दर्ज की है। आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।”
अपराध
मुंबई : अंधेरी में 60 लाख रुपये से ज़्यादा कीमत के गहने चोरी का ड्रामा करने के आरोप में दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने दो ऐसे चालाक आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है, जिन्होंने चोरी और सड़क हादसे की कहानी रची थी और 60 लाख रुपये के गहने चोरी होने का नाटक किया था। हालांकि, पुलिस जांच में पता चला कि सोने के गहने पहुंचाने वाला व्यक्ति ही चोर था और उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर चोरी की थी। एमआईडीसी पुलिस ने गोल्ड स्टार कंपनी की कंचन पवार की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया था। जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने अपने कर्मचारी अविनाश गंगाधर कदम (26) को सोने के गहने पहुंचाने के लिए भेजा था। उसी समय उसने बताया कि उसकी मोटरसाइकिल एक्टिवा का एक्सीडेंट हो गया था और इस दौरान सोने के गहने और बैग भी चोरी हो गए। उसने बिना किसी चोट या घाव के अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। इस दौरान पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पता चला कि संदिग्ध, जिसका नाम मनोज हेमंत जोगदंड (41) है, एक्सीडेंट से पहले संदिग्ध तरीके से यहां गश्त कर रहा था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों ने चोरी का नाटक किया था और घटना को एक्सीडेंट बताकर लूट की योजना बनाई थी। इसके बाद पुलिस ने अविनाश को भी हिरासत में ले लिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर रहस्य सुलझा लिया। यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर डीसीपी दत्ता नलावड़े ने किया।
अपराध
पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन मामले में आरोपी नासिक में गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन के मामले में फरार एक आरोपी को नासिक में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुणे पुलिस में 38 वर्षीय किरण दादासाहेब शिंदे की दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ‘गंगा फर्नहिल’ प्रोजेक्ट की चार इमारतों में फ्लैट बेचने और उससे जुड़े कामों की जिम्मेदारी सीनियर सेल्स मैनेजर साइमन रॉनी पीटर को सौंपी गई थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फ्लैट की बिक्री से मिली रकम को कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय, अपने सहयोगी बी. चंद्रशेखर के एक फर्जी प्राइवेट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह उन्होंने 32 ग्राहकों से इकट्ठा किए गए लगभग 2 करोड़ रुपए का गबन किया।
इस शिकायत के आधार पर 9 जून को पुणे के कालेपडल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामला दर्ज होने के बाद पीटर फरार हो गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया।
जांच के दौरान पुणे पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी नासिक शहर में छिपा हुआ है। कालेपडल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अशोक शर्माले से संपर्क किया और पीटर का पता लगाने और उसे पकड़ने में मदद मांगी।
विश्वसनीय जानकारी मिलने पर शर्माले को पता चला कि आरोपी पीटर कार से नासिक आया था और गंगापुर रोड पर कालेनगर में होटल ट्रीबो सफायर के कमरा नंबर 301 में ठहरा हुआ था।
यह जानकारी मिलने पर क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम के अधिकारी घनश्याम भोये और उनकी टीम को तुरंत उस जगह भेजा गया। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और बाद में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे पुणे पुलिस को सौंप दिया।
यह ऑपरेशन गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शर्माले और उनकी टीम की अगुवाई में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उनकी टीम में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर तुषार देवरे और पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रवींद्र मोहिते, गिरीश महाले, भागवत थाविल, घनश्याम भोये, प्रवीण केदारे, गोरख सालुंखे, सुजीत जाधव और तुलसीदास चौधरी शामिल थे।
अपराध
जम्मू-कश्मीर : सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में दो वन अधिकारियों समेत तीन गिरफ्तार

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने रविवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार के आरोप में वन विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में वन विभाग के दो अधिकारी और उसी विभाग का एक कैजुअल लेबरर (अस्थायी कर्मचारी) शामिल है।
गिरफ्तार लोगों की पहचान कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; और रामहामा, बीरवाह के कैजुअल लेबरर बशीर अहमद गनी के तौर पर हुई है।
ये गिरफ्तारियां सीबीआई पुलिस स्टेशन, कश्मीर में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गईं।
इससे पहले, सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया और बशीर अहमद गनी को तब पकड़ा जब वह कथित तौर पर 15,000 रुपये की रिश्वत ले रहा था।
यह ऑपरेशन अवैध रूप से पैसे की मांग के आरोपों के बाद शुरू किया गया था। सूत्रों ने बताया कि आगे की जांच चल रही है।
इस केंद्र शासित प्रदेश की अपनी भ्रष्टाचार-रोधी संस्था, ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) है, जिसे सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने का अधिकार है।
सीबीआई के पास ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ के तहत भ्रष्टाचार की जांच करने का मुख्य अधिकार क्षेत्र है, जिसमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी शामिल होते हैं।
सीबीआई के भ्रष्टाचार-रोधी अधिकार क्षेत्र के दायरे और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई खास ऑपरेशनल नियम हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के तहत केंद्रीय अधिकार क्षेत्र उन अधिकारियों पर लागू होता है जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी आम तौर पर राज्य के ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
चूंकि पुलिसिंग राज्य का विषय है, इसलिए सीबीआई राज्यों में ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम’ की धारा 6 के तहत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा दी गई ‘सामान्य सहमति’ के माध्यम से काम करती है।
कई राज्यों ने यह सामान्य सहमति वापस ले ली है, जिसका मतलब है कि सीबीआई को उन इलाकों में जांच करने के लिए मामले-विशेष की सहमति या अदालत के आदेश की जरूरत होती है।
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट सीबीआई को देश में कहीं भी किसी भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने का अधिकार दे सकते हैं, भले ही राज्य सरकार सहमति देने से इनकार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय राज्य पुलिस बल और एसीबी के पास भी अपने राज्य में काम कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत मामले दर्ज करने और उनकी जांच करने का अधिकार क्षेत्र है।
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