महाराष्ट्र
रघुराम राजन ने उद्धव ठाकरे से की मुलाकात, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज
अर्थशास्त्री और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार देर रात महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से उनके घर पर मुलाकात की। इससे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
इस बैठक को ‘शिष्टाचार भेंट’ के रूप में वर्णित किया गया है। फिर भी तेज राजनीतिक अटकलों को हवा मिली। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के नेता और अन्य महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के बड़े नेता इस बारे में चुप्पी साधे हुए हैं।
बांद्रा पूर्व में स्थित पारिवारिक घर ‘मातोश्री’ में उद्धव ठाकरे, पत्नी रश्मी, उनके बच्चों, युवा सेना प्रमुख और वर्ली विधायक आदित्य के अलावा पर्यावरणविद तेजस ने 60 वर्षीय रघुराम राजन का फूलों का गुलदस्ता देकर गर्मजोशी से स्वागत किया।
पार्टी पदाधिकारियों ने दावा किया कि सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बैठक में आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई, हालांकि विवरण सामने नहीं आया। रघुराम राजन को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा सितंबर 2013 में 23वें आरबीआई गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल सितंबर 2016 तक था।
महाराष्ट्र
सूखे से निपटने के लिए मदद का खर्च आम नागरिकों से नहीं बल्कि बिचौलियों से वसूला जाए: शिवसेना (यूबीटी)

नागरिकों से निजी जश्न कम करने और अपनी बचत को सूखा राहत कार्यों में दान करने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आग्रह पर शिवसेना (यूबीटी) की ओर से मंगलवार को प्रशासन की मंशा और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया गया है।
सरकार के इस रवैये को ‘खाली जेबों से पैसे निकालने’ जैसा बताते हुए, उद्धव ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता से आपदा प्रबंधन के लिए फंड जुटाने को कहना असंवेदनशील और नाकाफी है।
संपादकीय में पूरे महाराष्ट्र में बढ़ते कृषि संकट की ओर ध्यान दिलाया गया। इसमें बताया गया कि गंभीर सूखे के कारण कर्ज और मुश्किलों से जूझ रहे परभणी, यवतमाल, सोलापुर और हिंगोली जिलों में सिर्फ दो दिनों के भीतर चार किसानों ने आत्महत्या कर ली। इसमें चेतावनी दी गई कि अगर राज्य सरकार से तुरंत और सीधी मदद नहीं मिली, तो सूखा प्रभावित इलाके ‘कब्रिस्तान’ में बदल सकते हैं। इन समुदायों को बचाए रखने की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन पर होगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस को सीधे चुनौती देते हुए ठाकरे गुट ने कहा कि जो आम नागरिक पहले से ही महंगाई और आर्थिक तनाव से जूझ रहे हैं, उनसे शादी और नामकरण जैसे छोटे पारिवारिक समारोहों में कटौती करने के बजाय, सरकार को आंतरिक भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ठेकेदारों के कमीशन पर सख्ती करनी चाहिए।
संपादकीय में राज्य की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया। इसमें कोंकण क्षेत्र में तटीय जमीन की विवादास्पद बिक्री और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से जुड़े भारी फंड के लेन-देन का जिक्र किया गया।
इसमें यह भी दावा किया गया कि जनता का पैसा अक्सर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरी जगहों पर लगाया जाता है। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि वे जनता से कंजूसी करने को कहने के बजाय, इस तरह की पैसे की बर्बादी को रोकें ताकि सूखा राहत के लिए फंड जुटाया जा सके।
ठाकरे गुट ने कहा, “राज्य सरकार कमीशन-एजेंटों और ठेकेदारों की सरकार बन गई है। हर तरफ लूट मची है। ठेकेदारों को सरकारी खजाने का पैसा देने और अपनी जेबें भरने के लिए गैर-जरूरी परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। अगर मुख्यमंत्री इस लूट को भी रोक दें, तो इससे सूखा प्रभावित लोगों को फायदा होगा।”
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और नेताओं की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) के आरोपों पर निशाना साधते हुए, संपादकीय में सत्ताधारी गठबंधन से कहा गया है कि वे राजनीतिक खर्चों को ग्रामीण इलाकों की मुश्किलों को दूर करने में लगाएं। इसमें सुझाव दिया गया है कि राजनीतिक दल-बदल और चुनाव प्रचार के लिए रखे गए फंड को तुरंत प्रभावित किसानों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए।
इसके अलावा, संपादकीय में सरकार के लिए सूखे से निपटने के लिए बड़ा फंड जुटाने के कई अहम उपाय सुझाए गए हैं। इसमें सरकार से कहा गया है कि वह राजनीतिक सहयोगियों के लिए तय बकाया रकम को सीधे सूखा राहत कोष में ट्रांसफर करे और मुंबई के बड़े बिल्डरों, स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) के डेवलपर्स और मोटी कमाई करने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों से बड़ा योगदान अनिवार्य करे।
संपादकीय में राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि वह महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र की मदद के लिए पीएम केयर फंड में बची हुई रकम में से 2,000 करोड़ रुपये से 4,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग करे।
आखिर में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रियों द्वारा सांकेतिक दान (जैसे एक महीने की सरकारी सैलरी छोड़ना) सत्ताधारी नेताओं के पास मौजूद भारी संसाधनों को देखते हुए महज दिखावा है। पार्टी ने नेतृत्व से आग्रह किया कि वे भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक बिचौलियों की फल-फूल रही मिलीभगत को तोड़कर असली हिम्मत दिखाएं, ताकि राज्य के 11 करोड़ नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के दौंड में दो भाइयों गुंडागर्दी, 29 साल के व्यक्ति से मारपीट कर लूटा

महाराष्ट्र के पुणे के दौंड इलाके में एक 29 साल के व्यक्ति से मारपीट और लूटपाट की घटना सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में दो भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित का नाम दिनेश भरत धनवे है। वहीं, आरोपियों की पहचान आदर्श अनिल जाधव और अमन अनिल जाधव के तौर पर हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रेलवे ग्राउंड के पास खड़ा होकर फोन पर बात कर रहा था। उसी समय आरोपी उसके पास आए और पैसे की मांग करते हुए पूछा, “तुम हमारे इलाके में क्यों आए हो?”
जब शिकायतकर्ता ने वहां से हटने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया और उसे थप्पड़ मारा, जिससे वह जमीन पर गिर गया। इसके बाद, आरोपी आदर्श जाधव ने धनवे पर हमला किया और लोहे की रॉड से उसकी पीठ, जांघ और सिर पर चोट पहुंचाई।
मारपीट के दौरान पीड़ित की पैंट की जेब से जबरन 3,500 रुपये निकाल लिए गए। इसके अलावा, जब शिकायतकर्ता ने अपने रिश्तेदारों को फोन किया, तो आरोपी ने अपने भाई अमन अनिल जाधव को मौके पर बुला लिया। दोनों ने मिलकर धनवे को अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित की शिकायत पर दौंड पुलिस स्टेशन में आदर्श और अनिल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की आगे की जांच चल रही है।
इससे पहले, मई में दौंड से मेडिकल फ्रॉड का एक मामला सामने आया था, जिसमें गैर-कानूनी तरीके से इलाज कर रहे एक फर्जी डॉक्टर को पकड़ा गया था।
पुलिस ने बताया कि उसके पास से दवाइयां, इंजेक्शन और 6.54 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ओमप्रकाश बंसीलाल स्वर्णकार ने यवत के कसुरदी गांव के अखदेवस्ती इलाके में एक अवैध क्लिनिक शुरू किया था। उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन या दवाएं बेचने का लाइसेंस नहीं था।
पुलिस द्वारा क्लिनिक पर छापा मारने के बाद इस अवैध काम का पता चला था। छापे के दौरान, वहां से अलग-अलग कंपनियों की एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन, सिरिंज, बिना लेबल वाली संदिग्ध तरल पदार्थों से भरी बोतलें और नकदी बरामद की गई थी।
महाराष्ट्र
मुंबई में गणेश विसर्जन के दौरान दो गुटों में हुआ विवाद, 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

मुंबई के मालवणी (मलाड) इलाके में गणपति विसर्जन के दौरान विवाद, मारपीट, गाली-गलौज और जुलूस में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मालवाणी पुलिस ने शिकायतकर्ता के आधार पर आदिल (24), सुनील शेख (25), गौस (22), अजगर (23), जाकिर (26), जुबेर (25) और हुसेन (24) के खिलाफ का मामला दर्ज कर इनकी तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर की शाम करीब 7:15 बजे निरंकार नगर, एनटीसी स्कूल रोड, गेट नंबर 7, मालवणी, मालाड पश्चिम में गणपति विसर्जन के दौरान गणपति मंडप के प्रवेश द्वार के पास कोल्ड पायरो उपकरण लगाया गया था। इससे निकलने वाले कृत्रिम आग जैसे प्रभाव को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे सामने स्थित दुकान में आग लग सकती है। इसी बात को लेकर आदिल, सुनील शेख, गौस, अजगर और जाकिर ने गणपति मंडल के कार्यकर्ताओं से विवाद करने लगे।
पुलिस के मुताबिक, जुबेर और हुसैन ने रोहित ठाकुर और सुशील महतो के साथ हाथापाई की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अयान शेख नामक व्यक्ति हाथ में एक मटका लेकर आया और महिला कार्यकर्ताओं के सामने गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने के लिए दौड़ा।
अनंत चतुर्दशी के दिन शुक्रवार सुबह, लालबाग, परेल, गिरगांव और अन्य क्षेत्रों के पूजनीय गणपति प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा शुरू हुई। ढोल-ताशा, नासिक बाजा और बैंजो की थापों पर लाउडस्पीकर के साथ-साथ गुलाल उड़ाते हुए और भीलतू वाद्ययंत्रों (बीम) का प्रयोग करते हुए जुलूस रवाना हुआ। ‘लालबागचा राजा,’ ‘मुंबईचा राजा,’ ‘परेलचा राजा,’ ‘गिरगांवचा राजा,’ ‘गिरगांवचा महाराजा,’ ‘भगवान गणपति’ और गणेशोत्सव मंडलों की गणेश प्रतिमाएं सुबह की ध्वनि के साथ विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुईं। ‘लालबागचा राजा’ के दर्शन के लिए लालबाग बाजार के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। भगदड़ से बचने के लिए ‘सड़क अवरोध’ लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया गया।
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