अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका में 200 बिलियन डॉलर के युद्ध वित्तपोषण प्रस्ताव पर कांग्रेस में उठे सवाल
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वॉशिंगटन, 20 मार्च : ईरान युद्ध की बढ़ती लागत और इसके वैश्विक बाजारों पर प्रभाव ने अमेरिकी कांग्रेस में विभाजन को और गहरा कर दिया है। क्योंकि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही पार्टी के सांसद प्रस्तावित 200 बिलियन डॉलर से अधिक के युद्ध वित्त पोषण अनुरोध के पैमाने और मकसद पर सवाल उठा रहे हैं।
सीएनएन के अनुसार, व्हाइट हाउस युद्ध के लिए भारी नए वित्त पोषण की मांग करने की तैयारी कर रहा है जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अपनी पार्टी में स्पष्ट रणनीति और समयरेखा की कमी को लेकर संदेह बढ़ रहा है।
सांसदों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है कि यह पैसा कैसे इस्तेमाल होगा या अमेरिकी सैन्य संलग्नता कितने समय तक चलेगी।
ट्रम्प ने संकेत दिया कि यह अनुरोध बहुत बड़ा हो सकता है, यह कहते हुए कि सेना को अपनी शक्ति बनाए रखने के लिए संसाधनों की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हम सबसे अच्छे आकार में होना चाहते हैं, जितना हमने कभी नहीं रहा।” उन्होंने जोड़ा, “यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम शीर्ष स्तर पर बने रहें, यह एक छोटी कीमत है।”
हालांकि, इस तर्क का विरोध भी हो रहा है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने खुले तौर पर अतिरिक्त खर्च को खारिज कर दिया है, जो कई लोगों के अनुसार संभावित “अनंत युद्ध” का संकेत देता है।
प्रतिनिधि लॉरेन बोएबर्ट ने कहा, “मैं नहीं कहती। मैंने नेतृत्व को पहले ही बता दिया है। मैं किसी भी युद्ध पूरक बजट के लिए ‘नहीं’ हूं। मैं वहां पैसा खर्च करने से थक गई हूं। मेरे राज्य कोलोराडो में लोग जीवित रहने के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहे। हमें अभी अमेरिका फर्स्ट नीतियों की जरूरत है।”
प्रतिनिधि चिप रॉय ने कहा, “हम क्या कर रहे हैं? हम जमीनी सैनिकों की बात कर रहे हैं। इस तरह की लंबी गतिविधि की बात कर रहे हैं। उन्हें हमें पूरी ब्रीफिंग और समझाना बाकी है कि हम इसे कैसे भुगतान करेंगे और मिशन क्या है।”
फिस्कल कंज़र्वेटिव्स ने भी सवाल उठाया कि प्रस्तावित धन और बढ़ सकता है या नहीं। प्रतिनिधि थॉमस मैसी ने कहा, “यह सवाल खड़ा करता है, वे कितने समय तक वहां रहने की योजना बना रहे हैं? क्या लक्ष्य हैं? क्या यह पहला $200 बिलियन है? क्या यह एक ट्रिलियन में बदल जाएगा?”
खाड़ी में संघर्ष तेज हो गया है। अमेरिकी और सहयोगी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अपने संचालन बढ़ा दिए हैं, हमले के विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, ईरानी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाने और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को खोलने के लिए।
जनरल डैन केन ने कहा, “ए-10 वारथॉग अब दक्षिणी मोर्चे पर तैनात है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फास्ट-एटैक जलयान को निशाना बना रहा है। अपाचे हेलीकॉप्टर भी दक्षिणी मोर्चे पर लड़ाई में शामिल हो गए हैं।”
क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, जिससे आपूर्ति में व्यवधान की आशंका पैदा हुई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जारी रहता है, तो आर्थिक प्रभाव और गहरा हो सकता है।
एनर्जी विश्लेषक ऐना जैकब्स ने कहा, “ऊर्जा युद्ध का उपयोग पहले दिन से किया गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान ने वैश्विक आपूर्ति मार्ग को प्रभावित किया है।”
दोनों दलों के सांसदों का कहना है कि उन्हें लागत का पूरा और स्पष्ट आकलन नहीं मिला है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने समर्थन देने से पहले खर्च को सीमित करने या पेंटागन की वित्तीय ऑडिट की शर्तें तय करने का प्रस्ताव रखा है।
सीनेट मेजरिटी लीडर जॉन थ्यून ने कहा, “देखना बाकी है” कि यह अनुरोध पास हो पाएगा या नहीं। डेमोक्रेट नेता वर्तमान परिस्थितियों में धन मंजूरी देने के खिलाफ हैं, जिससे प्रशासन के लिए कांग्रेस से समर्थन जुटाना और जटिल हो गया है।
इस संघर्ष ने प्रशासन में व्यापक नीति बहस भी शुरू कर दी है, जिसमें यह चर्चा शामिल है कि क्या ईरानी तेल पर प्रतिबंधों को ढील देने से वैश्विक कीमतों को स्थिर किया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसा करने से अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में आ सकती है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इससे युद्ध के दौरान ईरान की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय
नाटो पर बिफरे ट्रंप, बोले- ‘मदद नहीं की, ये समय कभी भूलना मत’

TRUMP
वाशिंगटन, 26 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) देशों पर बिफरे हैं। उन्होंने सीधे-सीधे धमकी देते हुए कहा कि इस समय को कभी ‘भूलिएगा मत।’
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में ईरान के लिए विवादित शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा, “नाटो देशों ने ईरान जैसे पागल देश के खिलाफ कोई मदद नहीं की। अमेरिका को नाटो से किसी चीज की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ये समय कभी भूलिएगा मत!”
बीते शुक्रवार (20 मार्च) को भी ट्रंप ने ईरान-इजरायल तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद न करने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने नाटो को “कागजी शेर” और सदस्य देशों को “कायर” बताते हुए कहा था कि बिना अमेरिका के यह गठबंधन कुछ नहीं है। ट्रंप ने कहा कि नाटो देश केवल तेल की कीमतों पर शिकायत करते हैं, लेकिन मदद के लिए आगे नहीं आते।
उन्होंने ट्रुथ सोशल पर आरोप लगाया कि नाटो सदस्य देश परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि वे केवल तेल की बढ़ती कीमतों की शिकायत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्य देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद करने को तैयार नहीं हैं, जो कि एक सामान्य सैन्य अभ्यास है और उनकी माने तो तेल की ऊंची कीमतों का मुख्य कारण है।
ट्रंप का आरोप रहा है कि नाटो सहयोगी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं कर रहे हैं, जो तेल की ऊंची कीमतों का कारण है, जबकि यह एक आसान सैन्य कार्य है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ जंग सैन्य रूप से जीती जा चुकी है और अमेरिका को अब किसी देश की जरूरत नहीं है। तब भी उन्होंने कहा था कि नाटो के इन सहयोगियों को हम याद रखेंगे, जो इस मुश्किल समय में साथ नहीं खड़े हुए।
अंतरराष्ट्रीय
श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के 7 मछुआरों को किया गिरफ्तार, केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील

रामेश्वरम, 26 मार्च : तमिलनाडु और श्रीलंका के जाफना जिले के बीच स्थित पाल्क खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच श्रीलंकाई नौसेना ने गुरुवार तड़के रामेश्वरम के सात मछुआरों को अवैध शिकार (पोचिंग) के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऑपरेशन के दौरान दो मैकेनाइज्ड फिशिंग ट्रॉलर भी जब्त किए गए।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार को रामेश्वरम फिश लैंडिंग सेंटर से कुल 365 फिशिंग टोकन जारी किए गए थे। गिरफ्तार किए गए मछुआरे दो नावों पर सवार थे, जो नेदुंथीवू द्वीप के पास मछली पकड़ रहे थे, तभी श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें रोक लिया।
बताया जा रहा है कि जब्त किए गए ट्रॉलर सिमसन और ससिकुमार के हैं। समुद्र में शुरुआती पूछताछ के बाद मछुआरों को हिरासत में लेकर श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना की खबर के बाद रामनाथपुरम जिले के थंगाचीमदम इलाके में मछुआरों के बीच आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में मछुआरे कार्ल मार्क्स की प्रतिमा के पास एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंकाई सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मछुआरों और उनकी नावों की तुरंत रिहाई की मांग की।
मछुआरा संगठनों ने भी केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली गिरफ्तारियों से क्षेत्र के लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।
इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए मछुआरा प्रतिनिधियों की एक आपात बैठक गुरुवार शाम 4 बजे बुलाई गई है। मछुआरा नेता जेसु राजा ने कहा कि यह समस्या पिछले 40 साल से चली आ रही है और मछली पकड़ना ही यहां के लोगों की मुख्य आजीविका है। उन्होंने बताया कि करीब 90 प्रतिशत परिवार इसी पर निर्भर हैं और अगर स्थायी समाधान नहीं निकला तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
उन्होंने ‘पाक बे’ में पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग की, यह कहते हुए कि इस क्षेत्र में मछुआरे लंबे समय से काम करते आ रहे हैं।
एक अन्य मछुआरे एंटनी ने सवाल उठाया कि जब भारत श्रीलंका को मित्र देश बताता है, तो फिर ऐसी गिरफ्तारियां क्यों जारी हैं। उन्होंने कहा कि नावों की जब्ती और भारी जुर्माने के कारण कई परिवार कर्ज में डूब गए हैं और कई मछुआरे बेरोजगार हो गए हैं।
एंटनी ने बताया कि एक मशीनीकृत ट्रॉलर की कीमत करीब 40 लाख रुपए होती है और 2018 से अब तक 180 से ज्यादा नावें जब्त की जा चुकी हैं, जिससे यह संकट और गहरा गया है।
अंतरराष्ट्रीय
इजरायल का दावा ‘एयर स्ट्राइक में ईरानी नेवी कमांडर तंगसीरी की मौत’

तेल अवीव, 26 मार्च : इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नेवी कमांडर अलीरेजा तंगसीरी को मार गिराया है। इजरायली मीडिया ने इसकी जानकारी दी है।
‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ ने इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया कि बंदर अब्बास शहर पर किए गए हमलों में नेवी कमांडर मारे गए, हालांकि ईरान की तरफ से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पिछले कुछ दिनों में अलीरेजा तंगसीरी का नाम सुर्खियों में रहा है। वो आईआरजीसी नेवी के प्रमुख थे और उन्हें ईरान की समुद्री सैन्य रणनीति का अहम चेहरा माना जाता था। खास तौर पर होर्मुज में जहाजों की निगरानी और सैन्य कार्रवाई में उनकी बड़ी भूमिका रही है।
दक्षिणी ईरान के बुशहर प्रांत में जन्मे तांगसीरी, ईरान-इराक युद्ध और तथाकथित टैंकर युद्ध (यह 1980 के दशक में ईरान के साथ अमेरिका का पहला संघर्ष था) में अहम भूमिका निभाने के बाद आईआरजीसी नेवी का हिस्सा बने।
तांगसीरी ने बंदर अब्बास में आईआरजीसी नेवी के पहले नेवल डिस्ट्रिक्ट की कमान संभाली और 2010 से 2018 तक डिप्टी कमांडर के तौर पर काम किया, जिसके बाद उन्होंने फोर्स के चीफ का पद संभाला।
अगर तंगसीरी की मौत की पुष्टि हो जाती है तो उनका नाम उन वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की बढ़ती लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनकी 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से हत्या कर दी गई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी।
पहले और सबसे बड़े नुकसानों में ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई शामिल थे। इसके बाद इस्लामिक रिपब्लिक के सियासी और सैन्य कुनबे के शीर्ष अधिकारी और नेता मारे गए। इस तरह इन हमलों में ईरान की टॉप लेयर लगभग खत्म कर दी गई। खामेनेई के प्रमुख सलाहकार और सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ऐसे ही एक हमले का शिकार हुए थे। उनकी मौत से भी ईरान को काफी झटका लगा क्योंकि वो एक अच्छे नेगोशिएटर भी माने जाते थे।
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