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Wednesday,14-October-2026
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हिमाचल में चुनाव की तैयारी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा 4 दिन में करेंगे 25 जगहों का दौरा

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पांच में से चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली चुनावी जीत के बाद भाजपा ने अगले विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। इसी के तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शनिवार से अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगे। हिमाचल प्रदेश में इसी वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने जेपी नड्डा के हिमाचल प्रदेश के दौरे को लेकर बयान जारी कर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा 09 अप्रैल 2022, शनिवार से चार दिन के महत्वपूर्ण विस्तृत प्रवास पर हिमाचल प्रदेश में रहेंगे जहां वे कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे और कई सांगठनिक बैठकें करेंगे। बलूनी के मुताबिक, पांच विधानसभाओं में हाल ही में हुए चुनाव और इनमें से चार राज्यों में भाजपा की हुई ऐतिहासिक विजय के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह किसी भी राज्य में पहला प्रवास कार्यक्रम है।

अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश के विस्तृत प्रवास के दौरान जेपी नड्डा 25 से अधिक जगहों का दौरा करेंगे और आम नागरिकों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात करेंगे। इन सभी जगहों पर स्थानीय नागरिकों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा नड्डा के सम्मान में अभिनंदन समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।

इस साल के अंत में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा अध्यक्ष के इस चार दिवसीय दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद सत्र के दौरान भाजपा संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सासदों को अपने-अपने क्षेत्र में जाकर जनता से संपर्क स्थापित करने का निर्देश भी दिया था। इस दौरे को उसी का एक हिस्सा माना जा सकता है, जहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं जनता से संपर्क करने के लिए मैदान में उतार रहे हैं, लेकिन वास्तव में यह सिर्फ संपर्क अभियान ही नहीं रहने जा रहा है।

इन चार दिनों में नड्डा हिमाचल की जनता का मूड भांपने की कोशिश करेंगे और सरकार के कामकाज को लेकर जनता के साथ-साथ संगठन का फीडबैक लेने की भी कोशिश करेंगे, क्योंकि इसी आधार पर दिल्ली में पार्टी के आला नेता बाद में बैठक कर राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करेंगे।

शनिवार को नड्डा के चार दिवसीय दौरे की शुरुआत शिमला में विधानसभा चौक से होटल पीटरहॉफ तक एक भव्य रोड शो से होगी और इसके बाद वो 11.10 बजे शिमला में एक भव्य जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 10 अप्रैल, रविवार को भाजपा अध्यक्ष शिमला में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे और रविवार को ही नड्डा दसेरन में बूथ बैठक करेंगे। वे टुटू, दाड़लाघाट, नम्होल, बंदला, सिहड़ा, कोठी चौक, घुमाणी और भगेड़ चौक में कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात करेंगे।

11 अप्रैल, सोमवार को भाजपा अध्यक्ष निचिल भटेड़ – मंदिर शेड, सलनू, मंदरीघाट, मझवाड़, हरलोग, हवाण पंचायत घर, तल्याणा, कुठेड़ा और मोरसिंघी में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क करेंगे।

12 अप्रैल, मंगलवार को नड्डा कोठीपुरा स्थित एम्स जाएंगे और वहां चल रहे कार्यो का निरीक्षण करेंगे। वे इसके संबंध में यहां एक महत्वपूर्ण बैठक भी करेंगे। झंडुता, कंदरौर, घाघस और रघुनाथपुरा में 12 अप्रैल को नड्डा कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क भी करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

दिसंबर में पीएम मोदी का कनाडा दौरा द्विपक्षीय संबंधों की तरफ बढ़ा अगला ‘तार्किक कदम’ होगा: उच्चायुक्त पटनायक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा पर सभी की निगाहें टिकी हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने कहा कि भारतीय समुदाय भी पीएम मोदी के दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों को मजबूती देने की दिशा में अगला तार्किक कदम होगा।

आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में पटनायक ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। राजनीतिक संपर्क बढ़ने के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कृषि, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है।

पढ़िए पूरा साक्षात्कार:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनाडा दौरा दिसंबर में प्रस्तावित है। ये भारत-कनाडा संबंधों की दृष्टि से कितना अहम है?

दिनेश के पटनायक: पिछले वर्ष से, हम अपने संबंधों को उच्च स्तर पर बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। यह प्रक्रिया तब शुरू हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के कनानास्किस में जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्हें प्रधान मंत्री मार्क कार्नी द्वारा आमंत्रित किया गया था। दोनों नेताओं ने फैसला किया कि दोनों देशों के उच्चायुक्तों को अपने-अपने पद पर लौट जाना चाहिए। दोनों उच्चायुक्तों ने पिछले साल सितंबर में अपना कार्यभार फिर से शुरू किया।

तब से, हमने एक वर्ष पूरा कर लिया है, और बहुत कुछ हुआ है। प्रधानमंत्री कार्नी ने इस वर्ष फरवरी-मार्च में भारत का दौरा किया, और दोनों विदेश मंत्री पिछले वर्ष में 12 से अधिक बार मिल चुके हैं। हमने कई बार रक्षा मंत्रियों, व्यापार मंत्रियों, ऊर्जा मंत्री, प्राकृतिक संसाधन मंत्री, कनाडा, शिक्षा प्रतिनिधिमंडलों और हाल ही में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भारत यात्रा देखी है। इन सभी चीजों को मिलाकर, ये घटनाक्रम हमें एक ऐसे चरण पर ले आए हैं जहां प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा अगला तार्किक कदम है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था, इसलिए काफी समय हो गया है। हम व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत की प्रक्रिया में हैं और चौथे दौर की बातचीत समाप्त हो गई है। बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है।

जब पिछले साल नवंबर में दोनों प्रधानमंत्रियों की जोहान्सबर्ग में मुलाकात हुई, तो उन्होंने एक साल के भीतर वार्ता समाप्त करने पर सहमति जताई थी। मुझे विश्वास है कि हम नवंबर तक इन्हें पूरा कर लेंगे। हमें उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा जाएंगे तो हम सीईपीए पर हस्ताक्षर करने की स्थिति में होंगे।

संक्षेप में कहूं, भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने के लिए जरूरी प्रमुख क्षेत्रों में अब काम आगे बढ़ रहा है। इनमें सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, निवेश, व्यापार, रक्षा संवाद, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, कृषि एवं खाद्य क्षेत्र, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।

मैं इसके लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और सबसे बढ़कर दोनों प्रधानमंत्रियों का आभार जताना चाहता हूं जिनकी अगुवाई में ये संभव हो पाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व ने समय के साथ भारत-कनाडा संबंधों को किस तरह आकार दिया है?

दिनेश के पटनायक: बिल्कुल, मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन और नेतृत्व के बिना, कुछ भी नहीं हो पाता।

मैं इसका पूरा श्रेय दोनों प्रधानमंत्रियों को दूंगा। प्रधानमंत्री कार्नी ने कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जबकि मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया।

जब दोनों देशों के उच्चायुक्तों ने अपने-अपने पद संभाले, तब उन्हें सरकारों के शीर्ष स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले थे कि द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत बनाना है और उन्हें पहले से बेहतर स्तर पर ले जाना है।

मेरा विचार है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के सक्रिय समर्थन और मार्गदर्शन के बिना यह प्रगति संभव नहीं होती।

कनाडा में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा के दौरान उनके स्वागत के लिए यह समुदाय कैसी तैयारी कर रहा है?

दिनेश के पटनायक: प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था। ऐसे में करीब 11 साल बाद उनकी प्रस्तावित यात्रा को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में काफी उत्साह है। कनाडा की 2021 की जनगणना के अनुसार, यहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगभग 30 लाख है।

भारतीय समुदाय के अलग-अलग वर्गों के लोगों से लगातार यह पूछने के लिए संदेश और अनुरोध मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी वहां कब आएंगे और वो उनसे मिलने की इच्छा रखते हैं। इस समुदाय में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख सहित विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमियों के लोग हैं। इसके अलावा छात्र, शोधकर्ता, शिक्षाविद, कारोबारी और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भी प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जता रहे हैं।

लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोगों वाले इस समुदाय के हर व्यक्ति से प्रधानमंत्री की मुलाकात संभव नहीं होगी, लेकिन यह प्रयास किया जाएगा कि उनकी यात्रा से अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिले।

भारत और कनाडा अंतरराष्ट्रीय अपराध, आतंकवाद और प्रत्यर्पण के मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आतंकवाद से निपटने में यह कितना अहम है?

दिनेश के पटनायक: हम इन मुद्दों से पार पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जब मैं पिछले साल 18 सितंबर को भारत आया था, तो कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी उसी हफ्ते भारत के दौरे पर थीं ताकि अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ बातचीत कर सकें। इसी तरह, एनएसए अजीत डोभाल ने फरवरी में कनाडा का दौरा किया था।

तब से दोनों देश सीमापार अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए काम कर रहे हैं।

पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है। दोनों देशों की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों पक्षों में यह साझा समझ विकसित हुई है कि कनाडा में सामने आने वाली कुछ सुरक्षा चुनौतियां भारत के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं और इसी तरह इनका असर कनाडा पर भी पड़ता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में कनाडाई प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार डेविड मॉरिसन के साथ बातचीत की। आप इस बैठक को कैसे देखते हैं?

दिनेश के पटनायक: यह एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक थी क्योंकि दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र के बीच समन्वय द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की बुनियाद है।

पटनायक ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता भरोसा और साझा चिंताओं को लेकर बेहतर समझ पिछले एक साल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे तक दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय और मजबूत हो जाएगा। मॉरिसन कनाडा के प्रमुख विदेश नीति सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल हैं। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व के बीच संवाद ने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आधार तैयार किया है।

दोनों पक्ष अपने बीच मौजूद समस्याओं और चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा का मुद्दा पहले द्विपक्षीय संबंधों में मुश्किलों का एक प्रमुख कारण रहा था, लेकिन अब इस पर बातचीत और सहयोग के जरिए आगे बढ़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत और कनाडा की एजेंसियों के बीच सहयोग में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी), भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और अन्य संबंधित संस्थाएं शामिल हैं। इस सहयोग के दायरे में आव्रजन, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली, संगठित अपराध, धनशोधन और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे आते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा तक भारत-कनाडा संबंधों में कई क्षेत्रों में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी।

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राजनीति

ओडिशा कैबिनेट ने 11 विभागों के 16 प्रस्तावों को मंजूरी दी, कक्षा 9 और 10 के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकें देने की घोषणा

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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में ओडिशा कैबिनेट ने 11 विभागों के 16 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन विभागों में राजस्व और आपदा प्रबंधन, उद्योग, वित्त, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा और कृषि एवं किसान सशक्तिकरण आदि शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि इससे सुशासन, समावेशी विकास और ‘समृद्ध ओडिशा’ के विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बुधवार को प्रस्तावों की जानकारी एक्स पोस्ट के माध्यम से दी गई है।

कक्षा 9 और 10 के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकेंः 284.07 करोड़ की लागत वाली इस स्कीम के तहत 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों में अनुमानित 28.7 लाख छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।

इंडस्ट्रियल रीस्ट्रक्चरिंग: इस संशोधन से योग्य इंडस्ट्रियल रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम के लिए स्टाम्प ड्यूटी को तर्कसंगत बनाया जाएगा, जिससे बीमार इकाइयों को फिर से शुरू करने, बिजनेस को जारी रखने और नौकरियों को बचाने में मदद मिलेगी।

एलिमेंट्री एजुकेशन नियमों में संशोधनः 1997 के नियमों में किए गए इस संशोधन से लेवल-2 अधिकारियों की सीनियरिटी का निर्धारण लेवल-3 में सेवा की अवधि के बजाय सेलेक्ट लिस्ट में उनके स्थान के आधार पर किया जाएगा।

डिप्लोमा इंजीनियरों के सर्विस कैडर का रीस्ट्रक्चरिंगः जूनियर इंजीनियर-असिस्टेंट इंजीनियर के अनुपात को संशोधित करके 60:40 कर दिया गया है, जिससे कुल स्वीकृत संख्या बढ़ाए बिना प्रमोशन की संभावनाओं में सुधार होगा।

तुस्तापल्ली इन-स्ट्रीम स्टोरेज प्रोजेक्टः 105.62 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से बोलांगीर के सूखे की चपेट में आने वाले 12 गांवों के लिए जल सुरक्षा मजबूत होगी और ग्रामीण आजीविका को सहारा मिलेगा।

कक्षा 9 और 10 के लिए मुफ्त पाठ्यपुस्तकेंः 284.07 करोड़ की लागत वाली इस स्कीम के तहत 2025-26 से 2029-30 तक पांच वर्षों में अनुमानित 28.7 लाख छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।

अस्तारंगा फिशिंग हार्बर स्टेज-2: 133.81 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से 1,960 मशीनीकृत मछली पकड़ने वाली नावों के लिए लैंडिंग और बर्थिंग की सुविधा मिलेगी और लगभग 35,000 लोगों को लाभ होगा। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 20 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी तक लाने की भी उम्मीद है।

रायरंगपुर में पोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चरः इस फैसले के तहत पोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी जमीन को मंजूरी दी गई है, जिसमें आधार केंद्र और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र शामिल हैं, जिससे जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।

खाद और बीज की सप्लाई के लिए 1,360 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंडः 2026-27 से 2029-30 तक चलने वाली यह चार साल की योजना, समय पर खाद और अच्छी क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराने में मदद के लिए ओएससीएमएफ और ओएसएससी को बिना ब्याज वाला रिवॉल्विंग फंड देगी।

500 करोड़ रुपये का शहरी स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज प्रोग्रामः 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाला यह पांच साल का प्रोग्राम शहरी लोकल बॉडीज और चुने हुए ब्लॉक हेडक्वार्टर में ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाएगा, जिससे जल-जमाव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की समस्या कम होगी।

कटक में महानदी वॉटरफ्रंट का विकासः 133.72 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में रिवरफ्रंट प्रोमेनेड, लैंडस्केप वाली जगहें, कटक हाट, एक ओपन-एयर थिएटर और लोगों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

ओडिशा सेकेंडरी एजुकेशन नियम, 2026: नए नियम 1993 के नियमों की जगह लेंगे, सर्विस से जुड़ी विसंगतियों को दूर करेंगे, राज्य स्तर पर एक समान कैडर पदानुक्रम बनाएंगे और हिंदी व संस्कृत शिक्षकों को कैडर का दर्जा और प्रमोशन के मौके देंगे।

ओडिशा सबऑर्डिनेट फिशरीज सर्विस कैडर का पुनर्गठन: मंजूर पदों की संख्या 445 से बढ़कर 774 हो जाएगी, जिससे फील्ड-लेवल पर मैनपावर और फिशरीज सर्विस डिलीवरी मजबूत होगी।

केन्दुझार में डिजास्टर रिकवरी-कम-डेटा सेंटर: 176.83 करोड़ रुपये की लागत वाला यह सेंटर डिजास्टर रिकवरी को मजबूत करेगा और ज़रूरी सरकारी डिजिटल सेवाओं के लगातार चलने में मदद करेगा।

दक्षता विकास योजना: 2026-27 से 2028-29 तक 7450 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का मकसद प्लेसमेंट से जुड़ी ट्रेनिंग, डिजिटल स्किलिंग और विदेश में नौकरी में मदद के जरिए 4.20 लाख युवाओं को स्किल सिखाल सिखाना है।

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राष्ट्रीय समाचार

तमिलनाडु सरकार सहकारी स्टोरों के जरिए 40-50 रुपये प्रति किलो की दर से चावल बेचने पर कर रही विचार

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खुदरा कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए तमिलनाडु सरकार सहकारी दुकानों के माध्यम से चावल को 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचने पर विचार कर रही है।

इस प्रस्ताव में भारतीय खाद्य निगम और अन्य राज्यों से चावल खरीदकर सहकारी संस्थाओं के माध्यम से वितरित करने की बात कही गई है। अधिकारी कार्यक्रम को लागू करने से पहले उपलब्धता और खरीद लागत के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।

अगस्त में जो चावल 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, अब उसकी कीमत 70 से 80 रुपये के बीच है, जिससे परिवारों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

दालों और खाना पकाने के तेल सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई है, जिसके चलते सरकार को इस वृद्धि को रोकने के उपायों की समीक्षा करनी पड़ रही है।

खाद्य मंत्री वेंकटरमनन ने मंगलवार को चेन्नई स्थित सचिवालय में मूल्य निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें स्थिति और संभावित उपायों पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव साईकुमार, खाद्य सचिव अमुधा, वित्त सचिव सिद्दीकी और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

चर्चा का मुख्य केंद्र आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को अधिक किफायती दरों पर आपूर्ति उपलब्ध कराने के उपायों पर था।

समीक्षा के दौरान सहकारी भंडारों के माध्यम से चावल की प्रस्तावित बिक्री सहित कई उपायों पर विचार किया गया। सहकारिता एवं खाद्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार भारतीय खाद्य निगम और अन्य राज्यों के आपूर्तिकर्ताओं से उत्तम गुणवत्ता वाले चावल खरीदने की संभावना पर विचार कर रही है।

अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य सहकारी दुकानों के माध्यम से 40 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराना था।

अधिकारी उन राज्यों की पहचान कर रहे हैं जहां चावल बिक्री के लिए उपलब्ध है और उन दरों का आकलन कर रहे हैं जिन पर आपूर्ति खरीदी जा सकती है। ये विवरण प्रस्तावित हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त मात्रा में चावल सुरक्षित किया जा सकता है या नहीं, यह निर्धारित करने में सहायक होंगे।

अधिकारी ने कहा कि एक लाख टन चावल की उपलब्धता की पुष्टि हो जाने के बाद सरकार कम कीमत पर बिक्री शुरू करने के लिए कदम उठाएगी।

इसलिए, प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले उस मात्रा को सुरक्षित करना एक प्रमुख आवश्यकता है। योजना अभी भी विचाराधीन है, और खरीद संबंधी व्यवस्थाओं को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

बिक्री शुरू होने की कोई तारीख तय नहीं की गई है। यदि प्रस्तावित दरों पर इसे लागू किया जाता है, तो इस पहल से उपभोक्ताओं को अधिकारियों द्वारा बताई गई मौजूदा खुदरा कीमतों से कम दामों पर चावल उपलब्ध होगा। इसका क्रियान्वयन आपूर्ति की पुष्टि और सरकार द्वारा खरीद विकल्पों और लागतों के आकलन के पूरा होने पर निर्भर करेगा।

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