राष्ट्रीय
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन को वित्तवर्ष 21 में अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ
सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) ने वित्तवर्ष 2020-21 के लिए अब तक का सबसे अधिक शुद्ध लाभ 8,444 करोड़ रुपये दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 49 प्रतिशत अधिक है। वित्तवर्ष 20 में, पीएफसी ने स्टैंडअलोन आधार पर 5,655 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ भी वित्तवर्ष 2011 में 66 प्रतिशत बढ़कर 15,716 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्तवर्ष 2010 में 9,477 करोड़ रुपये था।
2020-21 के दौरान, बिजली क्षेत्र के ऋणदाता ने वित्तवर्ष 20 में अपनी शुद्ध ब्याज आय को बढ़ाकर 12,951 करोड़ रुपये कर 10,097 करोड़ रुपये कर दिया।
कंपनी ने 2 रुपये प्रति शेयर का लाभांश घोषित किया जो वित्तवर्ष 21 में 10 रुपये प्रति शेयर यानी 100 प्रतिशत के कुल लाभांश वितरण को लेता है।
लाभ वृद्धि से सहायता प्राप्त, वित्तवर्ष 2021 के लिए पीएफसी की कुल संपत्ति भी 16 प्रतिशत बढ़कर 52,393 करोड़ रुपये हो गई।
वाणिज्यिक बैंकों के विपरीत, पीएफसी के सकल एनपीए अनुपात में वित्तवर्ष 2015 से 238 बीपीएस की तेज कमी देखी गई। मौजूदा जीएनपीए अनुपात वित्तवर्ष 2020 में 8.08 फीसदी के मुकाबले 5.70 फीसदी है।
शुद्ध एनपीए अनुपात में भी वित्तवर्ष 2015 से 171 बीपीएस की तेज कमी देखी गई। वर्तमान शुद्ध एनपीए अनुपात वित्तवर्ष 2020 में 3.80 प्रतिशत के मुकाबले 2.09 प्रतिशत है।
ऋणदाता ने कहा कि उसकी ‘स्ट्रेस्ड बुक’ का 25 प्रतिशत वित्तवर्ष 21 में हल हो गया।
कंपनी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात भी 31 मार्च, 2021 को क्रमिक रूप से बढ़कर 18.83 प्रतिशत हो गया है। पूंजी पर्याप्तता निर्धारित नियामक सीमाओं के ऊपर और ऊपर पर्याप्त कुशन के साथ एक आरामदायक स्तर पर है।
सरकार द्वारा घोषित आत्मनिर्भर डिस्कॉम्स लिक्विडिटी सपोर्ट के तहत, पीएफसी और उसकी सहायक आरईसी ने मिलकर अब तक 1,34,782 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और 78,855 करोड़ रुपये का वितरण किया है।
अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आर.एस. ढिल्लों ने कहा, “वर्ष के दौरान कई विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद मैं अपने वित्त वर्ष 21 के परिणामों से बेहद खुश हूं। वित्तवर्ष 21 में प्रभावशाली प्रदर्शन, जैसा कि अब तक के उच्चतम लाभ से स्पष्ट है, प्रतिकूल आर्थिक घटनाओं से निपटने में पीएफसी की अंतर्निहित ताकत को रेखांकित करता है। आगे भी, हम अपने शेयरधारकों को दीर्घकालिक मूल्य देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धि लोकतंत्र की शक्ति का प्रमाण : नीतीश कुमार

नई दिल्ली, 10 जून: नरेंद्र मोदी बुधवार को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। इस अवसर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार ने उनकी प्रशंसा की है। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक उपलब्धि को लोकतंत्र की शक्ति का सशक्त प्रमाण बताया और कहा कि साधारण शुरुआत से उठकर सबसे ऊंचे चुने हुए पद तक पहुंचने वाले वे लाखों युवा भारतीयों, खासकर साधारण पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं।
नीतीश कुमार ने अपने एक लेख में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अपना नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि दशकों तक यह धारणा रही कि सबसे ऊंचे पद कुछ खास लोगों या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में पैदा हुए लोगों के लिए ही आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री मोदी के सफर ने इस धारणा को चुनौती दी है।
पीएम मोदी की सराहना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जैसे बड़े और प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में जनता का भरोसा जीतना मुश्किल है और उसे बनाए रखना और भी कठिन। फिर भी, लगातार राजनीतिक खींचतान और जनता की कड़ी नजर के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों का विश्वास बनाए रखा है। भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीति में एक नया मानदंड स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि हम भारत के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, लेकिन पीएम मोदी और मैं एक ही पीढ़ी से हैं, जिसकी राजनीतिक चेतना आपातकाल के दौर में आकार ग्रहण कर रही थी। हमने लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं पर हुए आघात को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उन्हें पुनर्स्थापित करने वाले आंदोलन में भाग लिया। वह संघर्ष सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने सार्वजनिक जीवन और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में हमारी समझ को आकार दिया।
नीतीश कुमार ने कहा कि दशकों तक यह धारणा बनी रही कि देश के सर्वोच्च पद सिर्फ कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में जन्मे व्यक्तियों के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री मोदी की जीवन-यात्रा ने इस धारणा को चुनौती दी है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद तक पहुंचने वाले प्रधानमंत्री मोदी लाखों युवाओं, विशेषकर साधारण परिवारों से आने वाले युवाओं, के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। उनकी कहानी इस विश्वास को मजबूत करती है कि एक जीवंत लोकतंत्र में दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और क्षमता जन्म व परिस्थितियों से उत्पन्न बाधाओं को पार कर सकती है। यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और खुलेपन का सबूत है।
इस दौरान, नीतीश कुमार ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए मोदी सरकार के निर्णयों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन पर पीएम मोदी के विशेष ध्यान के कारण एनडीए सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सहायता की है। शौचालय, बैंक खाते, आवास, गैस कनेक्शन, नल का जल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य अनेक बुनियादी सुविधाएं करोड़ों लोगों तक पहुंची हैं।
नीतीश कुमार ने कहा कि कई वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए मैं जानता हूं कि यह सुनिश्चित करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है कि योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे। सिर्फ अच्छी नीयत काफी नहीं होती, प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। मैंने यह भी देखा है कि नीतिगत निर्णयों को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए लगातार निगरानी, सुधार, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और सूक्ष्म स्तर तक ध्यान देना जरूरी होता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप इस विश्वास को और मजबूत करती है कि एक सशक्त लोकतंत्र में दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और योग्यता जन्म व परिस्थितियों से उत्पन्न हर बाधा को पार कर सकती है।
उन्होंने पीएम मोदी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति, संस्थागत सुधारों, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव व वंदे भारत जैसी नई ट्रेनों की शुरुआत और गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके सफल कार्यकाल का भी उल्लेख किया।
इसके साथ ही, नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन को सराहा। नीतीश ने कहा, “पीएम मोदी बिहार की अनोखी संस्कृति और परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को राज्य से मखाना, मधुबनी पेंटिंग और अन्य उत्पाद भेंट करके वैश्विक मंच पर बिहार की विरासत को पेश किया है।”
नीतीश कुमार ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल की एक खास बात यह रही है कि वैश्विक मंच पर भारत का महत्व बढ़ा है। एक भारतीय के तौर पर मुझे गर्व होता है जब अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, तकनीक, स्वास्थ्य या सहयोग जैसे मामलों में हमारी बात का सम्मान के साथ स्वागत किया जाता है। उन्होंने कहा, “अलग-अलग देशों और समूहों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए पीएम मोदी हमेशा शांति और प्रगति के पक्ष में खड़े रहे हैं। परिणामस्वरूप, 21वीं सदी में वैश्विक विकास के एक प्रमुख चालक के रूप में दुनिया अब हमारे देश की ओर आशा से देखती है।”
राजनीति
पीएम मोदी राष्ट्र धर्म निभाते हुए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में जुटे : सीएम मोहन यादव

भोपाल, 9 जून: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं को हमेशा प्रधान सेवक मनाया माना है और वे अपना राष्ट्र धर्म निभाते हुए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में जुड़े हुए हैं । दरअसल, नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री का पद संभाला था।
सीएम मोहन यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 12 वर्ष पूर्व देश ने जोश और अटूट विश्वास के साथ नरेंद्र मोदी को अपना ‘प्रधानमंत्री’ चुना था, लेकिन उन्होंने स्वयं को हमेशा एक ‘प्रधानसेवक’ माना। इसी रूप में वे अपना ‘राष्ट्रधर्म’ निभाते हुए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में जुटे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ भारतीयों की सेवा को ही ईश्वर की सेवा मानते हुए सुशासन और प्रगति के नए-नए रिकॉर्ड बनाए हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के संकल्प के साथ उन्होंने समाज के हर वर्ग- विशेषकर गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के जीवन में समृद्धि का नित नया सवेरा लाकर उनका भरोसा जीता है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति दिलाकर उनके आत्मसम्मान की रक्षा की। कोविड महामारी के संकटकाल में हर पात्र नागरिक को मुफ्त राशन और देशव्यापी मुफ्त टीकाकरण की सुरक्षा दी। कई देशों को भी टीके देकर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भाव से दुनिया का परिचय कराया। उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता का एहसास कराया है।
मुख्यमंत्री यादव ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाएं और सपने पूरे हो रहे हैं। देश विश्व पटल पर एक महाशक्ति के रूप में खड़ा हो रहा है। ये युगांतरकारी परिवर्तन इसलिए संभव हो पाए हैं, क्योंकि सरकार की हर नीति, नीयत और निर्णय के मूल में मानवीय संवेदना रही है।
अपराध
तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता उगाही और भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार

कोलकाता, 9 जून: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की राजारहाट-न्यूटाउन विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के दो बार विधायक रहे और बिधाननगर नगर निगम के पूर्व चेयरमैन सब्यसाची दत्ता को मंगलवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया है। दत्ता पर भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और अपने इलाके में लोगों को लगातार धमकाने के आरोप हैं।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में बिधाननगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वार्ड नंबर 31 के पार्षद सब्यसाची दत्ता ने कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में स्थित सॉल्ट लेक के एक व्यापारी की लिखित शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया। यह इलाका बिधाननगर सिटी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पहले भी दत्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और गुंडागर्दी में शामिल होने की कई शिकायतें मिल चुकी थीं।
व्यापारी की शिकायत के बाद बिधाननगर नॉर्थ पुलिस स्टेशन की टीम ने सोमवार आधी रात के बाद राजारहाट के रायगाची इलाके में दत्ता के घर पर छापा मारा। बाद में उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, दत्ता को आज सुबह उनके घर पर लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।
दत्ता 2011 से 2021 तक नॉर्थ 24 परगना जिले की राजारहाट-न्यूटाउन विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के दो बार विधायक रहे थे। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।
2021 में दत्ता ने जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और उन्हें तृणमूल कांग्रेस के तीन बार के विधायक और पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस ने हराया था।
दिलचस्प बात यह है कि बोस भी न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने पिछले महीने उन्हें राज्य में नगर पालिकाओं में नौकरी के बदले पैसे लेने के मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में दत्ता ने उसी जिले की बारासात विधानसभा सीट से टीएमसी की टिकट पर चुनाव लड़ा और हार गए।
बिधाननगर सिटी पुलिस के सूत्रों ने बताया कि दत्ता को पहले मेडिकल जांच के लिए ले जाया जाएगा और उसके बाद उत्तर 24 परगना जिला अदालत में पेश किया जाएगा। सरकारी वकील उनकी न्यायिक हिरासत की मांग करेंगे।
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