अंतरराष्ट्रीय समाचार
पीएमएल-पीपीपी ने ‘जेल भरो तहरीक’ के आह्वान करने पर इमरान को बताया ‘कायर’
इस्लामाबाद, 18 फरवरी : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने 22 फरवरी से पीटीआई की ‘जेल भरो तहरीक’ शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश की लगातार और बिगड़ती आर्थिक स्थिति के साथ पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर सरकार की कथित कार्रवाई को रोकने और निंदा करने के लिए सरकार विरोधी प्रदर्शन लाहौर से शुरू होगा।
खान ने जमान पार्क लाहौर में अपने निवासी से वीडियो लिंक के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, मैं अपनी पार्टी को 22 फरवरी बुधवार को आंदोलन शुरू करने की तैयारी शुरू करने का निर्देश दे रहा हूं। हम लाहौर से आंदोलन शुरू करेंगे, और फिर इसे हर दूसरे दिन अन्य सभी प्रमुख शहरों में शुरू करेंगे और हम जेलों को भर देंगे।
उन्होंने कहा, वे (सरकार) हमें गिरफ्तार करना चाहते हैं। हम जेलों को भर देंगे। जेलों में कोई जगह नहीं बचेगी क्योंकि जेलों में कोई जगह खाली नहीं छोड़ी जाएगी। खान की घोषणा पाकिस्तानी अदालतों में उनके खिलाफ विभिन्न मामलों की सुनवाई के बीच आई है।
उन्हें आतंकवाद-रोधी अदालत (एटीसी) और लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) द्वारा दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी का खतरा है, जो खान को आगे बढ़ने के लिए कार्यवाही के लिए पेश होने के लिए कह रहे हैं। लेकिन बार-बार समन भेजने के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री अभी तक अदालत में पेश नहीं हुए हैं।
जेल भरो अभियान को लेकर खान के आह्वान का उपहास किया गया और पाकिस्तान डेमोक्रेटिक सरकार (पीडीएम) के राजनीतिक नेतृत्व ने उनकी आलोचना की।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने समर्थकों को अपने घरों से बाहर आने और जेल जाने के लिए खान पर जोर दिया है, जबकि वह खुद अपने घर में बैठे हैं और गिरफ्तारी का विरोध करने के उद्देश्य से अपने खिलाफ मामलों पर अदालतों के समक्ष जमानत याचिका दायर करते रहते हैं।
वह (खान) अपने समर्थकों से बाहर आने और जेल जाने का आह्वान कर रहे हैं। जबकि कायर खुद अपने घर में छिपे है, अदालतों से जमानत मांग रहेा है, बूढ़े और बीमार होने का बहाना बना रहे है और खुद को गिरफ्तार होने से बचा रहे है।
आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह ने भी खान की आलोचना की, उन्हें अपने घर में छिपने और जानबूझकर नियमों और कानून का उल्लंघन करने के लिए अपने समर्थकों को सड़कों पर फेंकने और जेल जाने के लिए गिरफ्तार होने के लिए कायर कहा।
सनाउल्लाह ने कहा कि खान का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है क्योंकि वह अपने स्वयं के दावों का खंडन करना जारी रखते है, जो उसे एक आत्म-केंद्रित व्यक्ति के रूप में प्रदर्शित करता है, जो खुद को कानून से बचाने के लिए दूसरों का उपयोग कर रहा है।
आने वाले दिनों में देश में राजनीतिक उथल-पुथल, गिरफ्तारी, रैलियों और राजनीतिक अराजकता से भरे होने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार खान को हिरासत में लेना चाहती है, जबकि उनके समर्थक उनकी गिरफ्तारी के सरकारी प्रयासों का विरोध करने के लिए विशेष रूप से लाहौर में उनके आवास के बाहर सड़कों पर उतर आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 76,000 के ऊपर

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 720 अंक या 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,135 और निफ्टी 247 या 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,967 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को ऑटो शेयर लीड कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी पीएसई के साथ ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183 अंक या 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,149 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 433 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 61,847 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एसबीआई, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, सन फार्मा और एनटीपीसी लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ खुले। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक हरे निशान में थे। वहीं, जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट खुलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ अमेरिकी की बातचीत अंतिम दौर में है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है।
खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 5.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 97.90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 91.12 डॉलर प्रति बैरल पर था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान से समझौता मंजूरी में लग सकते हैं कुछ दिन: रिपोर्ट

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान की लीडरशिप से इस समझौते को मंजूरी मिलने में कुछ दिन लग सकते हैं।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अभी बातचीत पूरी तरह फाइनल नहीं हुई है और यह डील टूट भी सकती है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह बात कही गई।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह संभावित समझौता लंबे समय तक शांति बनाए रखने वाला कोई पक्का समझौता बनेगा या नहीं, और क्या इसमें अमेरिका की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी मांगों का भी हल निकलेगा।
रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि वे ‘जल्दबाजी में कोई समझौता न करें’, क्योंकि ‘समय हमारे पक्ष में है।’
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “दोनों पक्षों को समय लेना चाहिए और सही तरीके से फैसला करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की पाबंदी तब तक पूरी तरह लागू रहेगी, जब तक कोई समझौता तय होकर उस पर आधिकारिक मंजूरी और हस्ताक्षर नहीं हो जाते।
रविवार को ही ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत का बचाव करते हुए ओबामा सरकार के समय हुए परमाणु समझौते की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा बातचीत ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगी।
‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुआ ईरान परमाणु समझौता ‘हमारे देश के इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक था।’ यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने की सीधी राह देता था।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि लेकिन ट्रंप प्रशासन जो समझौता अभी ईरान के साथ कर रहा है, वह बिल्कुल इसका उल्टा है।
यह बयान ऐसे समय आया जब ट्रंप ने कहा कि ईरान और कई मध्य-पूर्वी देशों के बीच एक बड़ा क्षेत्रीय समझौता लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं से बातचीत की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
हमारी मांगें मानने के अलावा अमेरिका के पास कोई रास्ता नहीं बचा : ईरान

ईरान-अमेरिका के बीच स्थायी संघर्ष विराम को लेकर चर्चा जारी है। दोनों ओर से एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी भी खूब हो रही है। शनिवार को ईरान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बड़ा बयान दिया गया है। मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि यूएस-इजरायल के पास हमारी मांगों को मानने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाए-निक ने कहा कि ट्रंप के पास ईरानी की मांगें मानने और ईरान के अधिकारों को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “चाहे जंग हो या बातचीत, दोनों हालात में अमेरिका और इजरायल के लिए यही एक रास्ता शेष है। अगर वे ईरान की मांगों को नहीं मानते, तो दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा।”
प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को नजरअंदाज कर रहे हैं और पूरी तरह इजरायल के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप का अहंकारी रवैया अमेरिका को युद्ध के दलदल में और गहराई तक ले जाएगा।
इस बीच, ईरान-अमेरिका के बीच स्थायी संघर्ष विराम को लेकर चर्चा जारी है। शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कई देशों के अपने समकक्षों संग टेलीफोन वार्ता की। बातचीत का मकसद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर गंभीर मंत्रणा करना था।
आईआरएनए समाचार एजेंसी ने बताया कि अराघची ने अपने तुर्की, कतर, जापान, ओमान और इराक के समकक्षों के साथ हालिया क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की।
हाकान फिदान, शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी, तोशिमित्सु मोतेगी और फुआद मोहम्मद हुसैन के साथ अलग-अलग फोन वार्ताओं में अराघची ने द्विपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी से भी फोन पर बात की। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात और युद्ध रोकने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की। बातचीत में क्षेत्रीय हालात, तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों को लेकर दोनों पक्षों ने बात की।
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