राष्ट्रीय
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र के शुल्क कटौती के अनुरूप तेजी से आई गिरावट
दीवाली की सुबह ईंधन उपभोक्ताओं के लिए एक शुरुआती चमक लेकर आई है क्योंकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें गुरुवार को 5-10 रुपये प्रति लीटर तक गिर गईं, जो केंद्र की बढ़ती दरों को रोकने के लिए दो पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा के अनुरूप थी।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत गुरुवार को सुबह 6 बजे से 103.97 रुपये प्रति लीटर हो गई, जो पिछले दिन के 110.04 रुपये प्रति लीटर थी। राज्य के स्वामित्व वाले ईंधन खुदरा विक्रेताओं की मूल्य अधिसूचना के अनुसार, डीजल की कीमतें में 98.42 रुपये से कटौती के बाद 86.67 रुपये प्रति लीटर हो गईं।
आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 115.85 रुपये से गिरकर 109.98 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल की कीमत 106.62 रुपये से गिरकर 94.14 रुपये प्रति लीटर हो गई, जो सभी महानगरों में सबसे अधिक था।
देश भर में ईंधन की कीमतें 5-10 रुपये प्रति लीटर कम हुई हैं, जब केंद्र ने बुधवार को घोषणा की कि 4 नवंबर से पेट्रोल के लिए उत्पाद शुल्क 5 रुपये और डीजल के लिए 10 रुपये कम हो जाएगा।
कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और गोवा में कटौती ज्यादा की गई है, इन राज्यों में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर अधिक वैट कटौती की घोषणा की है।
केंद्र ने कहा है कि डीजल पर उत्पाद शुल्क में भारी कमी आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में की गई है। उत्पाद शुल्क में कमी के कारण वित्त वर्ष 2022 की शेष अवधि में 40,000-45,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।
गुरुवार की कीमतों में गिरावट से पहले, बुधवार को ईंधन की कीमतों में वृद्धि पर विराम लगा था, लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार सात दिनों तक बढ़ोतरी हुई थी, जिससे दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा दर 2.45 रुपये प्रति लीटर हो गई।
इसी तरह, डीजल की कीमतों में भी पिछले सप्ताह 2.10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई।
पिछले कुछ दिनों से डीजल की कीमतों में वृद्धि हुई है। गुरुवार की कटौती से पहले दिल्ली में इसकी खुदरा कीमत 9.90 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
देश के कई हिस्सों में ईंधन 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक पर उपलब्ध है और कटौती के बाद भी यह देश के कई हिस्सों में इस स्तर से ऊपर है।
पेट्रोल की कीमतों में 5 सितंबर से स्थिरता बनी हुई थी, लेकिन तेल कंपनियों ने आखिरकार पिछले हफ्ते अपने कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा दीं और इस हफ्ते उत्पाद की कीमतों में तेजी आई।
पेट्रोल की कीमतें भी पिछले 37 दिनों में से 28 दिनों में बढ़ी हैं।
1 जनवरी, 2021 से, शुल्क में कटौती से पहले ईंधन की दरों में 26 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि हुई है।
कच्चे तेल की कीमत तीन साल के उच्च स्तर 85 डॉलर प्रति बैरल से अधिक बढ़ रही है क्योंकि वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है जबकि ओपेक प्लस उत्पादन बढ़ने के कारण कम हो रहा है। आपूर्ति की चिंताओं को दूर करने और ओपेक उत्पादन में संभावित वृद्धि के लिए चीन द्वारा अपने भंडार से कुछ तेल जारी करने के बाद यह गिरकर 82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
5 सितंबर से, जब पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में संशोधन किया गया था, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दोनों ईंधन की कीमत अगस्त के दौरान औसत कीमतों की तुलना में लगभग 9-10 डॉलर प्रति बैरल अधिक है।
दरअसल, कोविड राहत उपायों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए सरकार ने पिछले साल मार्च में और फिर पिछले साल मई में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में संशोधन किया था।
मार्च 2020 और मई 2020 के बीच पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 13 रुपये और 16 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी और अंत में केंद्र द्वारा शुल्क में कटौती का फैसला करने से पहले डीजल पर 31.8 रुपये और पेट्रोल पर 32.9 रुपये प्रति लीटर पर उच्च स्तर पर था।
केंद्र ने राज्यों से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने के लिए ईंधन पर वैट कम करने का भी आग्रह किया है।
तदनुसार, उत्तर प्रदेश, गोवा जैसे राज्यों ने उपभोक्ताओं के लिए खुदरा ईंधन की कीमतों में कमी को बढ़ाने के लिए पहले ही ईंधन पर वैट में कटौती की है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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