अंतरराष्ट्रीय
पैरालंपिक (ऊंची कूद) : थंगावेलु ने जीता रजत, शरद ने जीता कांस्य
भारत के पैरा एथलीट मरियप्पन थंगावेलु और शरद कुमार ने यहां जारी टोक्यो पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष ऊंची कूद में क्रमश: टी42 और टी63 वर्ग में रजत और कांस्य पदक जीते। थंगावेलु और शरद के पदक जीतने के साथ ही भारत ने इस पैरालंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम कर लिए हैं। थंगावेलु ने सीजन का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 1.83 मीटर के जंप के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
इस इवेंट का स्वर्ण पदक अमेरिका के सैम ग्रेवे ने जीता। उन्होंने 1.88 मीटर का जंप किया। थंगावेलु और शरद से पहले मंगलवार को निशानेबाज सिंघराज ने पुरुष 10 मीटर एयरपिस्टल एसएच1 इवेंट में कांस्य पदक जीता। भारत ने टोक्यो पैरालंपिक में अब तक दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य सहित कुल 10 पदक जीते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
एलपीजी लेकर होर्मुज से सुरक्षित निकला भारतीय जहाज शिवालिक

नई दिल्ली, 14 मार्च : अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष के 15वें दिन भारत के लिए अच्छी खबर आई। भारत का एलपीजी (रसोई गैस) ले जाने वाला जहाज शिवालिक शुक्रवार रात होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर गया। जहाजों के आवागमन पर नजर रखने वाली ट्रैकिंग साइट ‘मरीनट्रैफिक’ के मुताबिक, यह जहाज 7 मार्च को कतर से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था।
जंग के बीच भारत का एलपीजी ले जाने वाला जहाज शिवालिक शुक्रवार रात होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर गया।
यह जहाज भारत की सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का है और इसमें करीब 50,000 टन से ज्यादा एलपीजी ले जाने की क्षमता है। इसी वजह से इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
फिलहाल भारत में एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए लोग घबराहट में एलपीजी सिलेंडर बुक कर रहे हैं। शुक्रवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि गलत सूचनाओं के कारण लोग घबराकर बुकिंग और जमाखोरी करने लगे हैं। घरेलू एलपीजी डिलीवरी का औसत चक्र लगभग ढाई दिन का है। डायवर्जन को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) सिस्टम लागू किया गया है।
इस सिस्टम के तहत ग्राहकों को सिलेंडर प्राप्त करने के लिए डिलीवरी करने वाले को एक कोड देना होगा। अस्थायी उपाय के रूप में, एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप पर मौजूद ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो इस इलाके के ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरान के करीब 80 से 90 फीसदी कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है।
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हमले से ईरान को पहुंची ‘चोट’, हमें मिली बड़ी कामयाबी : ट्रंप

TRUMP
वॉशिंगटन, 14 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान “बहुत अच्छी तरह” आगे बढ़ रहे हैं। और अमेरिकी बलों ने बड़े पैमाने पर हमले करते हुए “बहुत बड़ी कामयाबियां” हासिल की हैं, क्योंकि मध्य-पूर्व में संघर्ष तेज होता जा रहा है।
वॉशिंगटन के जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में ट्रंप ने कहा कि सैन्य अभियान सफल रहा है और इससे ईरान की क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने कहा, “ईरान की स्थिति बहुत अच्छी है। आज बहुत बड़े हमले हुए हैं, बहुत बड़ी जीत मिली है, जैसा कि आपने सैन्य स्तर पर सुना होगा। मुझे लगता है कि सब कुछ बहुत अच्छी तरह नियंत्रण में है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि यह अभियान उस परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए चलाया जा रहा है, जिसे उनके मुताबिक ईरान से पैदा हो रहा था।
उन्होंने कहा, “हमें मध्य-पूर्व और पूरी दुनिया में मौजूद परमाणु खतरे को खत्म करना था और हम इसे खत्म करके रहेंगे।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि लड़ाई के दौरान ईरानी सेना को काफी कमजोर कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “मेरे लिए इसका मतलब बहुत साफ है कि हम ऐसी प्रभुत्व वाली स्थिति में हैं, जैसी पहले कभी नहीं देखी गई।”
बिना शर्त आत्मसमर्पण की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है, उनकी ज्यादातर सेना खत्म हो चुकी है। उनका बड़ा खतरा हर तरह से खत्म हो गया है।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की वायु रक्षा और रडार प्रणालियों को बड़े पैमाने पर निष्क्रिय कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “उनके पास रडार नहीं है, ज्यादातर मामलों में उनके पास एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार नहीं हैं। लगभग सब कुछ खत्म हो चुका है और आप यह देखेंगे।”
संघर्ष कितने समय तक चलेगा, इस सवाल पर ट्रंप ने कोई निश्चित समयसीमा देने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि अभियान उम्मीद से कहीं तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, “मैं आपको समय नहीं बता सकता। मेरे मन में एक अंदाजा है, लेकिन उसे बताने से क्या फायदा? यह उतने समय तक चलेगा जितना जरूरी होगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि हम तय समय से काफी आगे हैं।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है, लेकिन उनका मानना है कि हालात सामान्य होते ही कीमतों में गिरावट आएगी।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जैसे ही यह सब खत्म होगा, पेट्रोल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ऊर्जा से जुड़ी हर चीज की कीमतों में बड़ी कमी देखने को मिलेगी।”
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने इस मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की है।
उन्होंने कहा, “हां, मैंने उनसे बात की है। हम इस मुद्दे पर और कुछ अन्य विषयों पर भी चर्चा कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मामले में इजरायल के नेतृत्व से भी बातचीत हुई है, हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक लक्ष्य कुछ हद तक अलग हो सकते हैं। यहां उनका इशारा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर था।
ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि उनका नजरिया थोड़ा अलग हो सकता है, क्योंकि वे एक अलग देश हैं।”
फिर भी उन्होंने अमेरिकी सैन्य बल की प्रशंसा करते हुए कहा, “वह आपको बताएंगे कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी ताकत दुनिया में कभी नहीं रही।”
ये बयान ऐसे समय आए हैं जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के खर्ग द्वीप पर अमेरिका का बड़ा हमला, डोनाल्ड ट्रंप बोले- सैन्य ठिकाने तबाह

trump
वाशिंगटन, 14 मार्च : अमेरिका ने ईरान के अहम खर्ग द्वीप पर एक बड़ा बमबारी हमला किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों की पुष्टि की। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेनाओं ने देश के मुख्य तेल निर्यात केंद्र पर मौजूद सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया, जबकि जानबूझकर ऊर्जा ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सोशल ट्रुथ’ पर पोस्ट किया, “मेरे निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मिडिल ईस्ट के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी हमलों में से एक को अंजाम दिया। ईरान के सबसे अहम ठिकाने खर्ग द्वीप पर मौजूद हर सैन्य ठिकाने को पूरी तरह से तबाह कर दिया। हमारे हथियार दुनिया के अब तक के सबसे शक्तिशाली और आधुनिक हथियार हैं, लेकिन इंसानियत के नाते मैंने द्वीप पर मौजूद तेल के बुनियादी ढांचे को तबाह न करने का फैसला किया है।”
खर्ग द्वीप ईरान के लिए एक बेहद अहम केंद्र है और कच्चे तेल के निर्यात के लिए उसके सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। ईरान के तेल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी में स्थित इस द्वीप पर मौजूद सुविधाओं के जरिए ही आगे भेजा जाता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे चेतावनी दी कि अगर ईरान क्षेत्र में समुद्री यातायात में बाधा डालता है तो यह फैसला बदला जा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “अगर ईरान या कोई और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों के सुरक्षित और बेरोकटोक गुजरने में कोई भी रुकावट डालता है, तो मैं तुरंत अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करूंगा।”
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह फारस की खाड़ी को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है।
ट्रंप ने अपनी चेतावनी में कहा कि अमेरिका के हमलों से खुद का बचाव करने की ईरान की क्षमता बहुत ही सीमित है। उन्होंने ‘ट्रुथ’ पोस्ट में लिखा, “अपने पहले कार्यकाल के दौरान और अभी भी, मैंने हमारी सेना को दुनिया की सबसे घातक, सबसे शक्तिशाली और सबसे प्रभावी सैन्य शक्ति के रूप में खड़ा किया है। ईरान के पास हमारी किसी भी कार्रवाई से बचाव करने की कोई क्षमता नहीं है। वे इसके बारे में कुछ भी नहीं कर सकते।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे और न ही उसके पास अमेरिका, मिडिल ईस्ट या पूरी दुनिया को धमकाने की क्षमता होगी। ईरान की सेना और इस शासन से जुड़े बाकी सभी लोगों के लिए यही समझदारी होगी कि वे अपने हथियार डाल दें और अपने देश का जो कुछ भी बचा है, उसे बचा लें। वैसे भी अब ज्यादा कुछ बचा नहीं है।”
गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका की ओर से 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में ईरान को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। युद्ध में अब तक कम से कम 2,000 लोग मारे गए हैं। अकेले ईरान में 1200 से अधिक लोगों के मारे जाने का दावा है। इसके अलावा, अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान लेबनान में भी 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इराक के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि इस संघर्ष में उनके देश में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं।
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