अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान व चीन में 2.4 अरब डालर जल विद्युत परियोजना का करार, कश्मीरी नाराज
पाकिस्तान सरकार ने चीन के साथ 1,124 मेगावॉट कोहाला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए कम से कम 2.4 अरब डालर के त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर गुरुवार को प्रधानमंत्री इमरान खान भी मौजूद थे। अन्य उपस्थित लोगों में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर, चीनी राजदूत याओ जिंग, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) प्राधिकरण के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आसिम सलीम बाजवा और चीनी कंपनी के प्रतिनिधि शामिल थे।
कोहाला जलविद्युत परियोजना, एक एकल स्वतंत्र विद्युत उत्पादक (आईपीपी) में अब तक का सबसे बड़ा बिजली क्षेत्र निवेश है।
यह पीओके में झेलम नदी पर सीपीईसी के हिस्से के रूप में बनाई जा रही है। चीन के थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन (सीटीजीसी) की सहायक कंपनी कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड (केएचसीएल) को इसे बनाने का ठेका मिला है।
इमरान ने हस्ताक्षर समारोह में कहा, “यह विदेशी निवेश की दिशा में एक शानदार कदम है। पाकिस्तान में पानी से बिजली पैदा करने की क्षमता है और यह परियोजना इसी दिशा में आगे बढ़ाया गया एक कदम है।”
उन्होंने कहा कि यह परियोजना पीओके के युवाओं के लिए रोजगार प्रदान करेगी जोकि इस वक्त की एक बड़ी जरूरत है।
लेकिन, पीओके के लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और इसे लेकर सख्त नाराज हैं। उनका कहना है कि यह झेलम के पानी की धारा को जबरदस्ती मोड़ने का और लोगों को जल आधारित संसाधनों से वंचित करने का प्रयास है। यह जलवायु परिवर्तन की वजह बनेगा जो पहले से ही नीलम झेलम पावर प्लांट परियोजना के कारण नीलम नदी के किनारे रहने वाले परिवारों को नुकसान पहुंचा रहा है।
मुजफ्फराबाद में एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, “ये परियोजनाएं हमारी नदियों को कश्मीर से डाइवर्ट कर रही हैं और इसे सीधे कोहाला के मुहाने पर ले जा रही हैं, जहां से पाकिस्तान शुरू होता है। हमारी नदी को इस तरह से मोड़ना, नदी के किनारे बसे हजारों परिवारों के जीवन पर गंभीर प्रभाव डालेगा।”
उन्होंने कहा, नीलम नदी के किनारे रहने वाले लोग जलवायु में बदलाव पहले से ही महसूस कर रहे हैं क्योंकि गर्मियों के दौरान तापमान ऊपर जा रहा है। यह नीलम झेलम पावर प्लांट की वजह से है, जिसने नदी के पानी की काफी मात्रा को मोड़ दिया है। अब यह परियोजना झेलम नदी के किनारे और भी अधिक परिवारों के लिए दुख लेकर आएगी।
कार्यर्ता ने नाम नहीं छापने के आग्रह के साथ कहा कि इन परियोजनाओं से पाकिस्तान को लाभ होता है, इनसे कश्मीरियों को कोई फायदा नहीं हुआ है। पूरा पीओके बिजली संकट से जूझ रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार सृजन के दावे पर उन्होंने कहा कि कई शिक्षित इंजीनियरों को नीलम झेलम पावर परियोजना में दैनिक मजदूरी के आधार पर ही काम मिला था। दिहाड़ी आधारित काम से युवाओं को मदद नहीं मिल सकती। यह एक सीमित अवधि के लिए होता है। यह उनका करियर नहीं हो सकता।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से सोने और चांदी करीब 2 प्रतिशत तक फिसले

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अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से सोमवार को सोने और चांदी दबाव के साथ खुले और शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुओं में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 9:50 पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रै्क्ट 1.06 प्रतिशत या 1,641 रुपए की गिरावट के साथ 1,52,968 रुपए पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,52,829 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,53,251 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि एमसीएक्स गोल्ड की शुरुआत मामूली गैप डाउन के साथ हुई, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी की बढ़ती दिलचस्पी के चलते यह 1,52,000 रुपए के स्तर से ऊपर बना हुआ है। अगर यह 1,55,000 रुपए से ऊपर निकलता है तो यह 1,57,000-1,58,000 रुपए के स्तर तक जा सकता है।
दूसरी ओर, 1,52,500 रुपए से नीचे टूटने पर, यह 1,51,000-1,50,000 रुपए और उससे आगे 1,48,000 रुपए तक जा सकता है।
चांदी का 5 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 1.96 प्रतिशत या 5,045 रुपए की गिरावट के साथ 2,52,100 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,52,016 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,54,089 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी पर विश्लेषक ने कहा कि चांदी गैप डाउन के साथ 2,52,000 रुपए के आसपास बनी हुई है। इसके लिए रुकावट का स्तर 2,55,000-2,60,000 रुपए है और अगर यह इस स्तर को तोड़ता है तो 2,68,000–2,70,000 रुपए के स्तर देखने को मिल सकते हैं। अगर चांदी 2,48,000 रुपए का स्तर तोड़ती है तो यह 2,44,000-2,40,000 रुपए के स्तर तक जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में दबाव देखा जा रहा है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 1.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,814 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80 डॉलर प्रति औंस पर थी।
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अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में ईरान के जहाज को किया जब्त, ईरानी सेना ने मुंहतोड़ जबाव देने की दी चेतावनी

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे ईरानी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर गोलीबारी की और उसे जब्त कर लिया। वहीं ईरानी सेना ने अमेरिका को इस कार्रवाई का जवाब देने की चेतावनी दी है।
ट्रूथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “ईरान के झंडे वाला टीओयूएसकेए नाम का एक कार्गो शिप, जो लगभग 900 फीट लंबा और लगभग एक एयरक्राफ्ट कैरियर जितने वजन का था, ने हमारे नेवल ब्लॉकेड को पार करने की कोशिश की। यह उनके लिए ठीक नहीं रहा। अमेरिकी नेवी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस एसपीआरयूएएनसीई ने टीओयूएसकेए को ओमान की खाड़ी में उन्हें रुकने की साफ चेतावनी दी।”
ट्रंप ने आगे बताया, “ईरानी क्रू ने बात सुनने से मना कर दिया, इसलिए हमारे नेवी शिप ने इंजन रूम में छेद करके उन्हें वहीं रोक दिया। अभी, अमेरिकी मरीन के पास शिप की कस्टडी है। टीओयूएसकेए पर अमेरिकी वित्त प्रतिबंध लगे हैं क्योंकि पहले भी उसने गैरकानूनी काम किए हैं। शिप की पूरी कस्टडी हमारे पास है और हम देख रहे हैं कि शिप पर क्या है!”
वहीं इसे लेकर ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि वह ईरानी जहाज पर अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई का जवाब देगी। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी के टेलीग्राम पर एक पोस्ट के मुताबिक, ईरान की सेना ने कहा, “हमलावर अमेरिका ने सीजफायर तोड़कर और समुद्री रास्ते में डकैती करके, ओमान सागर के पानी में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हमला किया।”
ईरानी सेना ने आगे कहा कि अमेरिका ने जहाज के नेविगेशनल इक्विपमेंट को नष्ट कर दिया और डेक पर सैनिकों को तैनात कर दिया है। पोस्ट के आखिर में कहा गया, “हम चेतावनी देते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना जल्द ही इस अमेरिका की हथियारबंद समुद्री लूट का जवाब देगी और जवाबी कार्रवाई करेगी।”
बता दें, इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने जानकारी दी थी कि अमेरिका के प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद, पाकिस्तान जा रहे हैं। ट्रंप के इस ऐलान के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के जहाज को कब्जे में लेने की जानकारी दी।
तेहरान ने सार्वजनिक तौर पर यह पुष्टि नहीं किया है कि वह बैठक के लिए अपने अधिकारियों को भेजेगा, हालांकि ईरानी सोर्स ने अमेरिकी मीडिया सीएनएन को बताया कि एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पाकिस्तान पहुंचेगा।
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, व्हाइट हाउस के मुताबिक, पाकिस्तान जाने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल होंगे।
ईरानी सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि तेहरान से आने वाले प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तान में हुई पिछली बातचीत के वही अधिकारी होंगे, जबकि कई ईरानी मीडिया एजेंसियों ने इस बात पर संदेह जताया है कि तेहरान ने बातचीत के लिए हामी भरी भी है या नहीं।
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सीजफायर खत्म होने से पहले ईरान-अमेरिका में बातचीत जारी, गालिबफ का दावा-कई मुद्दों पर अभी मतभेद

ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा दो हफ्ते का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। इस बीच ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ उसकी चल रही बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि यह भी कहा कि हम अंतिम फाइनल समझौते से अभी दूर हैं।
ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को टीवी पर दिए एक भाषण में कहा कि दोनों पक्षों के बीच बड़े मतभेद अभी बने हुए हैं।
गालिबफ ने कहा, “बातचीत अभी तक किसी अहम मोड़ पर नहीं पहुंची है। कई कमियां हैं और कुछ बुनियादी बातें अभी बाकी हैं।”
गालिबफ का यह भी दावा है कि संघर्ष के हाल के हफ्तों में ईरान का पलड़ा भारी रहा। तेहरान अस्थायी सीजफायर के लिए तभी राजी हुआ, जब वॉशिंगटन ने उसकी शर्तें मान लीं।
ईरान की रणनीतिक स्थिति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने मकसद पूरे करने में नाकाम रहा है, जबकि ईरान ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल बनाए रखा है।
ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा, ““दुश्मन की हर कोशिश हम पर अपनी शर्तें थोपने की थी और यह जरूरी है कि हम अपने अधिकारों को दर्ज कराएं। इसलिए बातचीत भी संघर्ष का एक तरीका है।
इस बीच, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) ने कहा कि देश तब तक होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले ट्रैफिक पर कंट्रोल और निगरानी रखने के लिए तैयार है, जब तक कि युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और इलाके में पक्की शांति नहीं आ जाती।
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बयान ईरान के मुख्य मिलिट्री कमांड, खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर की तरफ से शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त कंट्रोल फिर से शुरू करने की घोषणा के बाद आया है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, एसएनएससी ने कहा कि वह जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करेगा। इसके तहत जहाजों की जानकारी ली जाएगी, प्रवेश और निकास के लिए परमिट जारी किए जाएंगे। सुरक्षा और पर्यावरण सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा और अपने नियमों व युद्धकालीन प्रोटोकॉल के अनुसार समुद्री यातायात को संचालित किया जाएगा।
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