राष्ट्रीय
ओप्पो भारत में शीर्ष 5 विक्रेताओं में 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे तेजी से बढ़ रहा
मार्केट रिसर्च फर्म कैनालिस की 2022 की तीसरी तिमाही की शिपमेंट रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल स्मार्ट डिवाइस ब्रांड ओप्पो ने गुरुवार को खुलासा किया कि वह भारत के शीर्ष पांच विक्रेताओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाले विक्रेता (साल-दर-साल) के रूप में उभरा है। ओप्पो इंडिया ने 2022 की तीसरी तिमाही में 14 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) वृद्धि और 7.1 मिलियन शिपमेंट के साथ पूरे वर्ष निरंतर गति का प्रदर्शन किया है।
ओप्पो इंडिया के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर दमयंत सिंह खनोरिया ने कहा, “‘इंस्पिरेशन अहेड’ के हमारे ब्रांड प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए, हम ओप्पो में स्मार्टफोन प्रौद्योगिकियों में गर्वित इनोवेटर्स हैं। हमने अपने ग्राहकों के साथ एक प्रोडक्ट पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से अपने संबंध का विस्तार किया है जो उनके जीवन को सुविधाजनक बनाता है।”
खनोरिया ने कहा, “हमारा वर्ष-दर-वर्ष स्थिर विकास इस बात का प्रमाण है कि ओप्पो अपने उत्पादों में जो कुछ लाता है, उसके लिए हमारे ग्राहक उसे पसंद करते हैं। हम भारतीय बाजार के लिए अत्याधुनिक उपकरणों के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार में सीमाओं को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।”
पिछले कुछ वर्षो में, ओप्पो इंडिया ने सभी मूल्य खंडों में उपकरणों का एक मजबूत पोर्टफोलियो लॉन्च किया है, जिसमें सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास तकनीक की विशेषता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपयोगकर्ता कर्व से आगे रहें।
इसका प्रमाण कंपनी के अनुसार रेनो8 प्रो 5जी और रेनो8 5जी को मिली असाधारण प्रतिक्रिया है, जिसने बिक्री के पहले तीन दिनों के भीतर क्रमश: 105 प्रतिशत और 124 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल किया।
कंपनी ने कहा, “इसके अलावा, किफायती कीमत पर प्रीमियम अनुभव की पेशकश करने वाली एफ सीरीज मिलेनियल्स के बीच एक प्रशंसक बन गई है। इसका एक आदर्श उदाहरण 2022 में एफ21 प्रो द्वारा देखी गई 68 प्रतिशत की वृद्धि है।”
सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास तकनीक को और अधिक सुलभ बनाने के ²ष्टिकोण के साथ, ओप्पो की के सीरीज ने देश भर के उपभोक्ताओं का दिल जीत लिया है और इसका के10 5जी देश के सबसे पसंदीदा 5जी उपकरणों में से एक बन गया है।
उपभोक्ताओं को संपूर्ण स्मार्टफोन अनुभव देने के वादे के साथ, ओप्पो इंडिया ने भारत में इसके लागू होने के तुरंत बाद अपने सभी उपयोगकर्ताओं को 5जी का अनुभव सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया है।
ब्रांड ने विभिन्न खंडों में 5जी उपकरणों का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है जो एक गैर-स्टैंडअलोन नेटवर्क पर 5जी का समर्थन करता है। ओप्पो इंडिया ने सितंबर 2022 की शुरुआत से स्टैंडअलोन नेटवर्क को सपोर्ट करने के लिए एफ21 प्रो 5जी और के10 5जी डिवाइस को अपडेट करने और 5जी रोलआउट के अनुरूप ओटीए अपडेट को पूरा करने पर काम करना शुरू कर दिया है।
ग्रेटर नोएडा में एक मजबूत विनिर्माण इकाई द्वारा समर्थित, ओप्पो इंडिया को भी 2022 में लगातार दो तिमाहियों के लिए ‘मेक इन इंडिया’ प्रोडक्ट शिपमेंट के लिए अग्रणी घोषित किया गया है।
ब्रांड ने एसएमई और एमएसएमई को अपने संचालन को बढ़ाने के लिए सशक्त बनाने के लिए ‘विहान’ प्रोजेक्ट भी लॉन्च किया और बदले में, भारत में एक मजबूत स्मार्टफोन पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया। इस कार्यक्रम के तहत ओप्पो इंडिया अगले पांच वर्षों में 60 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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