अंतरराष्ट्रीय
ओलंपिक : ऑस्ट्रेलियाई कैनोइंग-कयाकिंग पदक विजेता ने कंडोम से की नाव की मरम्मत
ओलंपिक गेम्स विलेज में वितरित किए गए कंडोम कैनोइंग और कयाकिंग में ओलंपिक पदक विजेता जेसिका फॉक्स के काफी काम आए, क्योंकि इस ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने अपनी नाव को ठीक करने के लिए कंडोम की रबर का इस्तेमाल किया। टिकटॉक पर पोस्ट किए गए एक छोटे से वीडियो में, महिलाओं की सी1 कैनोइंग स्लैलम फाइनल में स्वर्ण और महिला कयाकिंग के-1 फाइनल में कांस्य जीतने वाली फॉक्स ने खुलासा किया कि कैसे उनकी टीम ने उनकी नाव की मरम्मत की।
एक छोटे कैप्शन के साथ फॉक्स ने लिखा, शर्त है कि आप कभी नहीं जानते थे कि कश्ती की मरम्मत के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया जा सकता है। जाने कयाकर कैसे कंडोम का उपयोग करते हैं।
जेसिका ने मंगलवार को कंडोम से मरम्मत की गई नाव से कांस्य पदक जीता था। वह गुरुवार को सोना जीतने के लिए पानी में लौटी।
टोक्यो आने से पहले उन्होंने पिछले दो ओलंपिक में पदक जीते थे। उन्होंने 2012 के लंदन खेलों में रजत और 2016 के रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।
टोक्यो ओलंपिक के आयोजकों ने खिलाड़ियों को 1.5 लाख कंडोम दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के तेज पर अमेरिका की नजर, खार्ग द्वीप पर कर सकता है कब्जा, राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए संकेत

TRUMP
वाशिंगटन, 30 मार्च : पिछले एक महीने से जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान का तेल लेना चाहते हैं और देश के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा कर सकते हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “सच कहूं तो मेरी पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना है।” उन्होंने इसकी तुलना वेनेजुएला से की, जहां वाशिंगटन जनवरी में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के बाद कथित तौर पर तेल उद्योग पर लंबे समय तक नियंत्रण रखना चाहता है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का तेल लेने का मतलब होगा खार्ग द्वीप पर कब्जा करना, जिसके जरिए ईरान के 90 प्रतिशत से ज्यादा तेल का निर्यात होता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के हमले से हताहतों की संख्या बढ़ने और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा है।
रिपोर्ट में ट्रंप के हवाले से कहा गया, “हो सकता है हम खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लें, हो सकता है न करें। हमारे पास बहुत सारे विकल्प हैं।” उन्होंने कहा, “इसका यह भी मतलब होगा कि हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि उनका मानना है कि द्वीप पर ईरान की सुरक्षा व्यवस्था बहुत कम या बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने कहा, “हम बहुत आसानी से इस पर कब्जा कर सकते हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है और ईरान से लगभग 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने के लिए संभावित सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की सोच से परिचित एक अज्ञात सूत्र का हवाला देते हुए बताया गया है कि उन्होंने अपने सलाहकारों को इस बात के लिए दबाव डालने को भी कहा है कि ईरान युद्ध खत्म करने की शर्त के तौर पर यह सामग्री सौंपने पर राजी हो जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन इस क्षेत्र में 10,000 तक अतिरिक्त सैनिक तैनात कर रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को घोषणा की कि 2,500 मरीन सहित 3,500 से ज्यादा सैनिक मध्य पूर्व पहुंच चुके हैं।
इस खतरे के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के जरिए चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा, “बहुत जल्द कोई समझौता हो सकता है।”
गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिकी की ईरान के साथ लड़ाई को एक महीने से अधिक समय हो गया है। 28 फरवरी को यह जंग शुरू हुई थी। इसके बाद दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। मार्च में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो जून 2022 के बाद से सबसे ज्यादा है।
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संकट गहराने के साथ ही क्यूबा अगला निशाना होगा : ट्रंप

TRUMP
वॉशिंगटन, 30 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि क्यूबा “अगला होगा” जो पतन का सामना करेगा। उन्होंने द्वीपीय राष्ट्र को एक असफल राज्य बताने के साथ ही यह संकेत दिया कि वॉशिंगटन वहां के लोगों की स्थिति सुधारने के लिए तेल आपूर्ति की अनुमति देने को तैयार है।
ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “क्यूबा अगला होगा… क्यूबा बहुत खराब हालत में है। यह एक असफल देश है और यह अगला होगा।”
उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका क्यूबाई-अमेरिकियों और अन्य प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आएगा। उन्होंने कहा, “हम मदद के लिए वहां होंगे… हम अपने महान क्यूबाई-अमेरिकियों की मदद के लिए वहां होंगे।”
ट्रम्प ने क्यूबा की स्थिति के लिए उसके नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “उनका शासन खराब है। उनका नेतृत्व बहुत खराब और भ्रष्ट है।”
यह टिप्पणियां तब आईं जब वे उन रिपोर्टों पर बोल रहे थे कि आर्थिक कठिनाइयों के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका क्यूबा तक रूस सहित तेल आपूर्ति की अनुमति दे सकता है।
उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि अगर कोई देश अभी क्यूबा को कुछ तेल भेजना चाहता है, तो मुझे इससे कोई समस्या नहीं है।”
उन्होंने जोड़ा कि ऐसी आपूर्ति से भू-राजनीतिक स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। चाहे वह रूस हो या कोई और… इससे मुझे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। इसका कोई खास असर नहीं होगा।
ट्रम्प ने तर्क दिया कि ईंधन की आपूर्ति की अनुमति देने से सरकार के बजाय आम क्यूबाई लोगों को फायदा होगा। उन्होंने कहा, “मैं इसे आने देना पसंद करूंगा… क्योंकि लोगों को हीट, कूलिंग और अन्य जरूरी चीजों की जरूरत होती है।”
साथ ही, उन्होंने कहा कि अतिरिक्त तेल आपूर्ति क्यूबा की व्यापक स्थिति को नहीं बदल पाएगी। चाहे उन्हें तेल से भरा एक जहाज मिल भी जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्यूबा खत्म हो चुका है।
ट्रंप की टिप्पणियां एक दोहरी रणनीति का संकेत देती हैं, जिसमें हवाना के नेतृत्व पर दबाव के साथ-साथ आम नागरिकों की मुश्किलें कम करने के लिए सीमित मानवीय लचीलापन शामिल है।
हाल के वर्षों में क्यूबा लंबे समय से आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है, जिसमें ईंधन की कमी, बिजली कटौती और विदेशी मुद्रा आय में गिरावट शामिल है। अमेरिकी प्रतिबंधों और पाबंदियों के साथ-साथ क्यूबा की अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक चुनौतियों ने इस संकट को और गहरा किया है।
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ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, जमीनी हमले की स्थिति में दी जवाबी कार्रवाई की धमकी

TRUMP
वाशिंगटन, 30 मार्च : ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के यूरेनियम पर कब्जा करने के लिए एक जोखिम भरे सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं और क्षेत्रीय ताकतें संघर्ष को रोकने के लिए बातचीत पर जोर दे रही हैं।
यह ऐसा समय है जब हालात और बिगड़ने के संकेत मिल रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका की 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट पहले ही मध्य पूर्व पहुंच चुकी है। साथ ही, अमेरिकी सेना जमीन पर सैनिक उतारने के विकल्प तैयार कर रही है, जो कुछ दिनों या उससे अधिक समय तक चल सकता है।
इस पूरे मामले के केंद्र में एक योजना है, जिसमें ईरान से करीब 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने पर विचार किया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह काम बेहद जटिल और खतरनाक है। अधिकारियों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया, “ट्रंप ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि आदेश देना है या नहीं। वह यह सोच रहे हैं कि अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए।
अगर इस ऑपरेशन को मंजूरी मिलती है, तो इसमें विशेष बलों के सैनिक शामिल हो सकते हैं, जो ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच परमाणु ठिकानों को सुरक्षित करेंगे और रेडियोधर्मी सामग्री को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई छोटा या जल्दी खत्म होने वाला ऑपरेशन नहीं होगा।
इसके साथ ही, पेंटागन एक बड़े जमीनी अभियान की भी तैयारी कर रहा है, जो कई हफ्तों तक चल सकता है। ऐसी किसी भी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों को ड्रोन, मिसाइल और विस्फोटकों जैसे कई खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारी अतिरिक्त सैनिक भेजने पर भी विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन क्षेत्र में 10,000 और जमीनी सैनिक तैनात करने की योजना बना रहा है, ताकि ऑपरेशन को अधिक लचीला बनाया जा सके।
हालांकि सैन्य तैयारी तेज हो रही है, लेकिन कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत की मेजबानी की, जिसका उद्देश्य संघर्ष को रोकना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है।
लेकिन अभी तक न तो अमेरिका और न ही ईरान इन बातचीत में शामिल हुए हैं। फिलहाल जल्द समाधान के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं।
इस युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सप्लाई बाधित होने की आशंका से वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है।
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