राजनीति
ओडिशा कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2021 को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में ओडिशा मंत्रिमंडल ने इस क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2021 को मंजूरी दी। मुख्य सचिव एससी महापात्रा ने कहा कि ओडिशा इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2021 की अवधारणा ओडिशा को इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए एक अनुकूल, उद्योग के अनुकूल और सक्रिय औद्योगिक माहौल प्रदान करके वर्ग अग्रणी बुनियादी ढांचे, सहायक सुविधाओं और नीतिगत पहलों के साथ की गई है।
सरकार के एक प्रेस बयान के अनुसार, ईएसडीएम इकाइयों को उनके निश्चित पूंजी निवेश के आधार पर 10 करोड़ रुपये से 250 करोड़ रुपये तक की निश्चित पूंजी निवेश सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
राज्य सरकार ने नीति में 5 वर्ष की अवधि के लिए विद्युत शुल्क एवं विद्युत निरीक्षण शुल्क में छूट का प्रावधान किया है। पात्र ईएसडीएम इकाइयों को 5 वर्ष की अवधि के लिए 30 प्रतिशत की दर से 50 लाख रुपये प्रति यूनिट तक बिजली बिलों पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
इसी तरह ऐसे निवेशकों को स्टांप ड्यूटी में 100 फीसदी और दूसरे ट्रांजैक्शन पर 50 फीसदी की छूट दी जाएगी।
भूमि को कृषि उपयोग से औद्योगिक उपयोग में परिवर्तित करने के लिए देय भूमि परिवर्तन शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी।
महिला उद्यमियों और विकलांग व्यक्तियों, स्थानीय उद्यमियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह नीति मार्च 2026 तक लागू रहेगी।
मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में दशकों से लंबित भूमि विवाद से निपटने की नीति को भी मंजूरी दी है।
राज्य के राजस्व मंत्री सुदाम मरंडी ने कहा कि 51 सरकारी कॉलेजों और 644 सहायता प्राप्त कॉलेजों के कब्जे में क्रमश: 180 एकड़ और 1713 एकड़ जमीन है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह सरकारी जमीन पर 1,274 हाई स्कूल हैं। जिसका कुल मूल्य 4,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।
ऐसे संस्थान प्रीमियम, आकस्मिक शुल्क, वार्षिक भूमि किराया, उपकर, अतिक्रमण शुल्क सहित जुर्माना, ब्याज आदि का भुगतान करने में असमर्थ होने के कारण भूमि संस्थानों के नाम दर्ज नहीं है।
कैबिनेट ने नए युग के मेगा उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक खंड के अलावा औद्योगिक नीति संकल्प 2015 में संशोधन करने की मंजूरी दी है।
प्रोत्साहन के इस पैकेज में 30 प्रतिशत तक की पूंजी निवेश सब्सिडी, एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति, ऊर्जा शुल्क, बिजली शुल्क में छूट, उड़िया कर्मचारियों के लिए रोजगार लागत सब्सिडी आदि शामिल हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों से राज्य में लगभग 12,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है, जिससे 35,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
राजनीति
राज्यसभा उम्मीदवार के नाम को लेकर मायावती का अखिलेश पर निशाना, बोली-पीडीए के नाम पर छलावा कर रही सपा

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर परिवारवाद और धनबल की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सपा अपने आपको समाजवादी और पीडीए की पार्टी बताती है, लेकिन उसके काम इसके विपरीत नजर आते हैं।
मायावती ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवार प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सपा ने 30 सितंबर को दोनों उम्मीदवारों का नामांकन कराया था।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेफॉर्म एक्स पर लिखा कि बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में परिवार, सगे-संबंधियों, भाई-भतीजों और बड़े पूंजीपतियों को टिकट नहीं देती। उनके मुताबिक पार्टी सर्वसमाज के गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों से जुड़े कर्मठ अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाती है।
उन्होंने कहा, ”बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, करीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल गरीब, मध्यम वर्ग व कमजोर तबकों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बसपा की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ‘पीडीए’ की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज्यादा नजर आती है।”
मायावती ने कहा कि इसका एक और खास व ताजा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिए द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नजदीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ‘फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिए होगा।
मायावती ने कहा कि इस प्रकार का है सपा, उसका ‘पीडीए’ व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ‘पीडीए’ का चाहिए, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूंजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ‘पीडीए’ के बहकावे में ना आए तो यह सही।
उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिए खासकर अपरकास्ट समाज के गरीबों तथा ‘बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब खासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही जरूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिए कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बसपा में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
राजनीति
आध्यात्मिक नेताओं ने बाबा रामदेव के इस बयान का स्वागत किया है कि भारतीय मुसलमान धर्म-परिवर्तित हैं; उनका कहना है कि सनातन परंपरा प्राचीन है।

नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव के इस बयान पर कि “भारत में सभी मुसलमान धर्म बदलने वाले हैं” गुरुवार को कई हिंदू आध्यात्मिक नेताओं ने अच्छी प्रतिक्रिया दी। कुछ नेताओं ने कहा कि सनातन परंपरा सबसे पुरानी है और दूसरे धर्म भारत में बाद में आए। मीडिया से बात करते हुए, ‘तपसी चांद’ के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “इंटरनेशनल योग गुरु और पतंजलि पीठ के संस्थापक, परम आदरणीय बाबा श्री रामदेव ने बहुत कड़वा सच कहा है। जो भी इसे समझ लेगा, उसका जीवन सुधर जाएगा। भारत में सभी मुसलमानों के पूर्वज राम और कृष्ण हैं। हर कोई सनातनी है और सभी के पूर्वज हिंदू थे। जिस दिन वह ‘घर लौटेगा’, उसके सभी पाप माफ हो जाएंगे।” जगतगुरु रामदिनेश आचार्य ने कहा, “मेरा मानना है कि सनातन परंपरा (भारत में) सबसे पुरानी रही है। दूसरे धर्म उसके बाद आए, इसलिए लोग मूल रूप से सनातन परंपरा का हिस्सा थे। बाद में कुछ लोगों ने धर्म बदला, इसलिए मुझे लगता है कि वे भी हिंदू हैं। बाबा रामदेव जी की बात मुझे सही और लॉजिकल लगती है।” महा मंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने कहा, “योग गुरु बाबा रामदेव ने अपनी मर्ज़ी या सनक से कुछ नहीं कहा; उन्होंने धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कहा। जब किसी का खतना होता है और उसे कलमा सिखाया जाता है, तो वह मुसलमान बन जाता है।
हर इंसान हिंदू पैदा होता है। और मैं आपको बता दूं कि भगवान एक है। यहां लोगों ने इस्लाम धर्म अपना लिया और भगवान को अल्लाह या गॉड कहने लगे। मेरा मानना है कि सभी मुसलमान, चाहे भारत में हों या विदेश में, असल में ‘सनातनी’ हैं।” महंत महा मंडलेश्वर श्री गिरीश दास महाराज ने कहा, “हम बाबा रामदेव जी के इस बयान का स्वागत करते हैं। मेरा मानना है कि मुगल काल में हिंदुओं पर या तो ज़बरदस्ती दबाव डाला जाता था या उन्हें तरह-तरह के लालच देकर इस्लाम अपनाने के लिए मनाया जाता था। आज भी, अगर वे ‘घर लौटना’ चाहते हैं, तो सनातन और हिंदू धर्म खुले दिल से उनका स्वागत करते हैं।” संत कृपालु जी महाराज ने कहा, “बाबर, हुमायूं और औरंगजेब के राज में बहुत से हिंदुओं का धर्म बदला गया।” यह बयान बाबा रामदेव के मिडिया से कहा गया था, “मैं अपने सभी मुस्लिम भाइयों से अपील करूंगा कि वे यह मान लें कि हमारे पुराने ऋषि-मुनि (पुरुष और महिला) उनके भी पूर्वज हैं; राम और कृष्ण भी उनके पूर्वज हैं। अगर मुसलमान अपनी पुरखों की जड़ों से जुड़ेंगे, तो वे कभी कमजोर महसूस नहीं करेंगे। आखिर भारत का हर मुसलमान धर्म बदलने वाला है। अगर हिंदू और मुसलमान एक होकर रहेंगे, तो वे खुद भी मजबूत होंगे और देश भी मजबूत होगा।”
महाराष्ट्र
मालेगांव 2006 बम धमाका मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मामले से डिस्चार्ज किए गए मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाई

नई दिल्ली : बम ब्लास्ट पीड़ितों ने मालेगांव 2006 बम ब्लास्ट केस में पिछले महीने बरी हुए चार आरोपियों राजेंद्र चौधरी, मनोहर राम सिंह निरवरिया, धन सिंह और लोकेश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन फाइल की है, जिस पर आज सुनवाई हुई। इसी तरह, केस से बरी हुए मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ हाई कोर्ट के ऑब्जर्वेशन को हटाने के लिए भी एक पिटीशन फाइल की गई थी, जिसे कोर्ट ने मान लिया और बॉम्बे हाई कोर्ट को हाई कोर्ट के हालिया ऑब्जर्वेशन से प्रभावित हुए बिना मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ पेंडिंग अपील पर सुनवाई करने का आदेश दिया। महाराष्ट्र एटीएस और धन सिंह और अन्य ने केस से बरी हुए 9/ मुस्लिमों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में पिटीशन फाइल की है। सीनियर वकील नित्या रामकृष्णन और सदन फरस्त ने सुप्रीम कोर्ट की दादराकणी बेंच के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपोल पंचोली के सामने दलीलें दीं। बम ब्लास्ट पीड़ितों और केस से बरी हुए मुस्लिम आरोपियों की ओर से जमीयत उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) ने कानूनी कार्रवाई की।
आज सुनवाई के दौरान, एडवोकेट सदन फरस्त ने दो मेंबर वाली बेंच को बताया कि हाल ही में, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की हेड वाली दो मेंबर वाली बेंच ने न सिर्फ चार आरोपियों (धन सिंह और दूसरे) को केस से डिस्चार्ज किया, बल्कि अपने फैसले में मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ कुछ कमेंट्स भी किए। ये कमेंट्स मुस्लिम आरोपियों की गैरमौजूदगी में किए गए थे, उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया, इसलिए कोर्ट को बॉम्बे हाई कोर्ट के इन कमेंट्स को हटा देना चाहिए। एडवोकेट सदन फरस्त की रिक्वेस्ट पर, दो मेंबर वाली बेंच ने ऑर्डर दिया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले में किए गए कमेंट्स का असर केस से डिस्चार्ज किए गए आरोपी नूरुल हुदा अवॉर्डगर के हाई कोर्ट में पेंडिंग केसों पर नहीं पड़ेगा, और हाई कोर्ट मेरिट के आधार पर अपील पर फैसला करेगा। सीनियर एडवोकेट सदन फरस्त की दलीलें खत्म होने के बाद, बम ब्लास्ट पीड़ितों की तरफ से बहस कर रहे सीनियर एडवोकेट नित्यार अमरकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट ने शर्मा को केस से डिस्चार्ज कर दिया था, जबकि ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिए थे। दो जजों की बेंच ने सीनियर वकील नित्या रामकृष्णन को अगले हफ़्ते बम ब्लास्ट पीड़ितों की अपील पर बहस करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई टाल दी।
मुंबई में आज की कोर्ट की कार्रवाई पर खुशी जताते हुए जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के प्रेसिडेंट मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि आज हमें थोड़ी कामयाबी मिली है। बम ब्लास्ट पीड़ितों और आरोपी नूरुल हुदा, मुहम्मद अली शेख, आसिफ बशीर और मुहम्मद जाहिद और ऐस अहमद, जिन्हें 2016 में इस मामले से बरी कर दिया गया था, ने मौलाना अब्दुल कय्यूम के ज़रिए जमीयत उलेमा महाराष्ट्र लीगल एड कमेटी से बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में चुनौती देने की रिक्वेस्ट की थी। मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि सीनियर वकीलों से सलाह के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार पिटीशन (एसएलपी) फाइल की गईं, जिन पर आज सुनवाई हुई, और मामले की असरदार कानूनी पैरवी के लिए देश के जाने-माने क्रिमिनल वकीलों की सर्विस ली गईं, जिसके नतीजे में आज हमें थोड़ी कामयाबी मिली है। मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने आगे कहा कि जमीयत उलेमा कानी इमदाद कमेटी के केस के नतीजे में, महाराष्ट्र एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए 9 मुस्लिम नौजवानों को पहले ज़मानत पर रिहा किया गया और फिर बाद में केस से बरी कर दिया गया, लेकिन बहुसंख्यक समुदाय और महाराष्ट्र एटीएस के आरोपियों ने मुस्लिम आरोपियों को केस से बरी करने के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर सुनवाई चल रही है। मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने आगे कहा कि उन्हें बहुत कम उम्मीद है कि एनआईए बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को भारत के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी क्योंकि एनआईए ने अब तक मालेगांव 2008 बम ब्लास्ट केस में बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की है। इसके उलट, बम ब्लास्ट पीड़ितों ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिस पर आज सुनवाई हुई। 8 सितंबर, 2006 को हमीदिया मस्जिद, बड़ा कब्रिस्तान और मुशवाहर चौक में हुए सीरियल बम धमाकों में 31 लोग शहीद हुए थे और 312 लोग घायल हुए थे।
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