राजनीति
किसी ने मुझे इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा था : तीरथ सिंह रावत
चार महीने के अंदर इस्तीफा देने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि उन्होंने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से परामर्श करने के बाद राज्य में संवैधानिक और कानूनी संकट से बचने के लिए निर्णय लिया और किसी ने उनसे इत्सीफा देने के लिए नहीं कहा था।
आईएएनएस के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, उन्होंने कहा कि जब उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था, तो ‘कुछ लोगों’ ने उनकी छवि खराब करने की साजिश शुरू कर दी थी।
प्रश्न: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में अपने छोटे कार्यकाल के बारे में आप क्या कहेंगे?
उत्तर: किसी ने मुझसे इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से सलाह मशविरा करने के बाद मैंने संवैधानिक और कानूनी संकट से बचने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। मुझे उत्तराखंड का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए मुझ पर विश्वास दिखाने के लिए मैं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और सभी केंद्रीय नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं। यह सब अचानक बजट सत्र के बीच में हुआ जब पार्टी नेतृत्व ने मुझे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए कहा था।
लेकिन कुछ संवैधानिक प्रावधानों के कारण संकट खड़ा हो गया था। संवैधानिक और कानूनी संकट से बचने के लिए मैंने पार्टी नेतृत्व से सलाह मशविरा करने के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया और उन्होंने मेरे फैसले का समर्थन किया।
प्रश्न: मुख्यमंत्री के रूप में आपके कार्यकाल की शुरूआत में, गलत कारणों से बहुत सारे बयान सुर्खियों में रहे। आप उन विवादित टिप्पणियों के बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर: सुर्खियों में रहे सभी बयान, संदर्भ से बाहर किए गए थे और यह कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया था। मैं एक वैचारिक पृष्ठभूमि से आता हूं और जनता (लोग), क्षेत्र (रीजन) और प्रदेश (स्टेट) के लिए क्या अच्छा है, इस बारे में फैसले किए।
मैंने अपनी मन की बात की लेकिन कुछ लोगों ने संपादित और जोड़-तोड़ वाले बयान दिखाकर मनभ्रम (भ्रम) पैदा कर दिया था।
प्रश्न: आपको कुंभ आयोजित करने की अनुमति देने के लिए बहुत आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसे कोविड की दूसरी लहर के मुख्य कारणों में से एक कहा गया। अब, क्या आपको लगता है कि यह एक गलत निर्णय था?
उत्तर : कुंभ 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता था। मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे दिन मैंने कुंभ को बड़े पैमाने पर आयोजित करने का निर्णय लिया क्योंकि यह लोगों की आस्था और भावना का मामला है। बाद में, प्रधानमंत्री की अपील पर, अखाड़े के प्रमुखों ने अंतिम शाही स्नान में भाग नहीं लिया।
लोगों की भावना को ठेस पहुंचाने के लिए कुंभ के खिलाफ माहौल बनाया गया था, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सभी कोविड प्रोटोकॉल और एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) का पालन करते हुए आयोजित किया गया था। हमने कई लोगों को कोविड निगेटिव रिपोर्ट के अभाव में वापस भी कर दिया। यह अब तक के सबसे अच्छे कुंभों में से एक था।
जो लोग दूसरी लहर के फैलने के लिए कुंभ को जिम्मेदार ठहरा रहे थे, क्या वे बता सकते हैं कि क्या केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में कोई कुंभ आयोजित हुआ था, जहां से कोविड की शुरूआत हुई थी? हरिद्वार कभी भी कुंभ के दौरान शीर्ष तीन संक्रमित जिलों, या दूसरी लहर के चरम पर या अब भी दैनिक मामलों की गिनती के मामले में नहीं रहा है।
जो लोग हिंदू और हिंदुत्व के खिलाफ हैं, उन्होंने कुंभ के खिलाफ माहौल और प्रचार किया।
कोई केरल से सवाल क्यों नहीं कर रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बकरीद त्योहार के लिए छूट की अनुमति देने के लिए कुल दैनिक मामलों की संख्या का 50 प्रतिशत से ज्यादा रिपोर्ट कर रहा है। कुंभ को दोष देना और महामारी के दौरान केरल के तुष्टिकरण के मॉडल के बारे में कुछ नहीं कहना,इन लोगों की हिंदू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
प्रश्न: आप अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी की संभावनाओं को कैसे देखते हैं?
उत्तर: पांच राज्यों-उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होंगे। उत्तराखंड समेत सभी राज्यों में बीजेपी दो-तिहाई बहुमत से जीतेगी और इसका एकमात्र कारण नरेंद्र मोदी का ‘विकास’ मॉडल है। 2014 से प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी को विकास से जोड़ा है और उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाईयों पर पहुंच गया है।
देश को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत राशन उपलब्ध कराकर लोगों का ध्यान भी रखा है और योजना के तहत उत्तराखंड ने भी लोगों को चीनी उपलब्ध कराई है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतीय नागरिकों को मुफ्त टीके प्रदान करने वाला एकमात्र देश बन गया और उत्तराखंड बुजुर्गों और दिव्यांगों को उनके घर पर टीका लगा रहा है।
पिछले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड ने सभी गांवों में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की, नल का पानी उपलब्ध कराने का काम करते हुए, ग्रामीण से राष्ट्रीय राजमार्गों तक सड़क नेटवर्क को मजबूत किया और बढ़ाया गया है। राज्य में रेल संपर्क बढ़ा है। कभी सड़क की मांग करने वाले उत्तराखंड के लोग अब रेल संपर्क की मांग कर रहे हैं।
मैं काम के आधार पर कह रहा हूं कि बीजेपी उत्तराखंड और अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव दो तिहाई बहुमत से जीतेगी।
प्रश्न: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है। क्या आपको आप पार्टी से कोई चुनौती नजर आती है?
उत्तर: लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि वह (केजरीवाल) दिल्ली में अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में क्या कहेंगे। उनका बहुप्रचारित ‘दिल्ली मॉडल’ विफल हो गया है और कोविड की पहली लहर के दौरान उजागर हो गया था जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाना पड़ा था।
महामारी के दौरान केजरीवाल के विश्व स्तरीय ‘मोहल्ला क्लीनिक’ विफल रहा, जबकि उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने ‘घर-घर क्लिनिक’ बनाकर घर-घर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की। जहां वह हर जगह मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहे हैं, वहीं दिल्ली में लोगों के बढ़े हुए बिल आ रहे हैं।
जहां आप और केजरीवाल ने लोगों को गुमराह किया, वहीं बीजेपी ने जो कहा वह किया। उत्तराखंड के लोग अलग प्रकृति के हैं, वे राष्ट्रवादी हैं और मोदी के साथ हैं। केजरीवाल के झूठे वादों से जनता गुमराह नहीं है।
प्रश्न: तो क्या आपको लगता है कि बीजेपी का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है?
उत्तर: हमें किसी पार्टी से कोई चुनौती नहीं मिल रही है, लोग हमारे साथ हैं। कांग्रेस नेता आपस में लड़ रहे हैं। राज्य और देश भर में जमीन खो रहे हैं। लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली भाजपा से भिड़ने से पहले उन्हें अपना घर ठीक करना चाहिए।
राजनीति
दीपावली के बाद 9 नवंबर को तमिलनाडु में सरकारी छुट्टी घोषित, कोयंबेडु सब्जी मंडी भी रहेगी बंद

तमिलनाडु सरकार ने दीपावली के अगले दिन 9 नवंबर को सरकारी दफ्तरों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए छुट्टी घोषित की है, ताकि त्योहार के लिए अपने गृहनगर गए लोगों की वापसी आसान हो सके।
इस साल दीपावली 8 नवंबर (रविवार) को मनाई जा रही है। सोमवार को अतिरिक्त छुट्टी मिलने से छात्रों, माता-पिता, शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों को परिवार के साथ जश्न मनाने के बाद लौटने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
सरकारी आदेश के अनुसार, यह छुट्टी पूरे तमिलनाडु में सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगी।
अतिरिक्त छुट्टी की भरपाई के लिए 28 नवंबर को कामकाजी दिन घोषित किया गया है। इस फैसले से आदेश के दायरे में आने वाले लोग रविवार को जश्न के तुरंत बाद यात्रा करने के बजाय सोमवार को अपनी वापसी की योजना बना सकेंगे।
एक साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए यह सरकारी कर्मचारियों और छात्रों की छुट्टी व्यवस्था को भी एक जैसा बनाता है। भरपाई वाला कामकाजी दिन शनिवार को पड़ रहा है। इसलिए घोषणा के दायरे में आने वाले कार्यालय और संस्थान संशोधित शेड्यूल का पालन करेंगे, जिसमें 9 नवंबर को छुट्टी होगी और महीने के अंत में निर्धारित भरपाई वाली तारीख को काम फिर से शुरू होगा।
इस बीच, चेन्नई की कोयंबेडु सब्जी मंडी त्योहार से पहले व्यापारी संघों द्वारा लिए गए अलग फैसले के बाद 9 नवंबर को एक दिन के लिए बंद रहेगी।
यह बंदी एकीकृत बाजार संघ महासंघ के अध्यक्ष जीटी राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई सलाहकार बैठक में सर्वसम्मति से मंजूर की गई। बैठक में तय किया गया कि दीपावली तक सभी सब्जियों की दुकानें खुली रहेंगी, ताकि ग्राहक और व्यापारी छुट्टी से पहले अपनी खरीदारी पूरी कर सकें। संघ ने कहा कि बाजार मंगलवार, 10 नवंबर से अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू करेगा।
यह बंदी सिर्फ दीपावली के अगले दिन सब्जी बाजार तक ही सीमित है। लोगों और व्यापारियों से कहा गया है कि वे सोमवार की बंदी को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरी खरीदारी पहले से ही कर लें।
मनोरंजन
जब धुन चोरी के आरोपों से घिरे थे अनु मलिक, कहा था- ‘ईश्वर के अलावा कोई ओरिजिनल नहीं’

यह कहानी है, हंगामाखेज संगीतकार की, जिन्होंने महज सात साल की उम्र में हुनर दिखाना शुरू कर दिया था। पता चल गया था कि आगे चलकर यह बालक एक बड़ा संगीतकार बनेगा। जिनका नाम है, अनवर मलिक और उन्हें अब सभी लोग अनु मलिक के नाम से जानते हैं।
2 नवंबर 1960 को जन्मे अनु मलिक के घर में संगीतमय माहौल रहता था, जिसका गहरा असर बचपन से ही उन पर रहा। उन पर शंकर-जयकिशन के गानों ने गहरा असर छोड़ा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं खुशनसीब हूं कि सरदार मलिक (संगीत निर्देशक) का बेटा हूं और मेरे मामा हसरत जयपुरी (जाने-माने गीतकार) हैं। मैं बचपन से उस माहौल में पला-बढ़ा हूं।”
जब अनु मलिक ने एक मराठी कविता को कंपोज किया था, जिसे बाद में अपने पिता सरदार मलिक को सुनाया तो वह हैरान थे। इसके बाद उन्होंने बेटे का इम्तिहान लिया और बहुत सारे अलग-अलग गाने उनके सामने रख दिए। अनु मलिक को उन गानों की धुन बनाने को कहा गया था। फिर अनु मलिक ने धुन बनाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक अलग-अलग धुन बना डाली। उन धुनों को सुनकर पिता बेहद खुश हुए और अनु मलिक को गले लगा लिया।
बहुत ही कम उम्र में अनु मलिक गानों को कंपोज करने लगे थे। मामा हसरत जयपुरी के लिखे गाने को जब उन्होंने कंपोज किया, तब उसे सुनकर सब दीवाने हो गए। 16-17 साल की उम्र में अनु मलिक को बतौर म्यूजिक कंपोजर काम करने का अवसर मिला। अपने जमाने के कमीडियन मोहन चोटी की 1978 में फिल्म ‘हंटरवाली 77’ आई, जिसमें पिता सरदार मलिक की जगह अनु मलिक को काम करने का मौका मिला।
“जुल्मों सितम पर इतराने वाले, तू भी तो इक दिन मिट जाएगा। तेरा जमाना है मैंने माना, मेरा भी एक दिन आ जाएगा।” इस गाने को मशहूर गायिका आशा भोसले ने गाया था, जिसे संगीत अनु मलिक ने दिया। यह उनका पहला गाना था। इस गाने के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे। एफसी मेहरा की फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से अनु मलिक को सही शुरुआत मिली और फिर एक फिल्म मिली ‘सोनी महिवाल’, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा।
फिल्म ‘बाजीगर’ में दिए गए संगीत ने अनु मलिक को नई पहचान दिलाई। फिर फिल्म ‘बॉर्डर’ में अनु मलिक के संगीतबद्ध सभी गाने हिट रहे। फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
शौहरत की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद अनु मलिक पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गानों की धुनें और संगीत संयोजन (अरेंजमेंट) चुराने के आरोप भी लगते रहे। 2017 में ‘एंटरटेनमेंट की रात’ शो के दौरान ‘रोडीज’ फेम रघु राम ने उनसे सीधे तौर पर धुनें चुराने के बारे में सवाल किया। इसके जवाब में मलिक ने अपना बचाव करते हुए कहा कि ‘ईश्वर के अलावा कोई भी मौलिक (ओरिजिनल) नहीं है’ और प्रेरणा लेना, चोरी करने से बिल्कुल अलग बात है। उन्होंने इस संदर्भ में ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘मैं हूं ना’ जैसी फिल्मों के अपने काम का उदाहरण दिया था।
राजनीति
पंजाब : विधायक हरमीत और चेतन का ‘आप’ से इस्तीफा, पार्टी बोली- ऐसे लोग ही भाजपा को चाहिए

पंजाब के पटियाला जिले की दो विधानसभा सीटों से आम आदमी पार्टी के विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पार्टी ने कहा है कि इन दोनों विधायकों को कार्रवाई के तहत निकाला गया है।
सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हरमीत सिंह पठानमाजरा पंजाब विधानसभा में सनौर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। वे 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे।
बताया जा रहा है कि उनकी अपनी ही सरकार ने विधायक पठानमाजरा के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के खिलाफ तीखे तेवर अपना लिए थे और अब इस्तीफा दे दिया है।
वहीं समाना से विधायक चेतन सिंह जोड़ामाजरा ने भी अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इसकी जानकारी दी। उन्होंने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में आई आम आदमी पार्टी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं था, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया है।
चेतन सिंह जोड़ामाजरा साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर समाना से भारी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद वे भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर पंजाब ‘आप’ प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने एक्स पोस्ट में लिखा, “आम आदमी पार्टी ने हमेशा पंजाब को प्राथमिकता दी है। अगर हमारे किसी नेता ने कभी भ्रष्टाचार किया या पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने की कोशिश की, तो हमने बिना किसी हिचकिचाहट के उनके खिलाफ कार्रवाई की और ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर निकाल दिया। अब, भाजपा इन्हीं निकाले गए लोगों को इकट्ठा कर रही है, क्योंकि उसका अपना कोई आधार नहीं है और उसे पंजाब के हितों की कोई परवाह नहीं है। जो व्यक्ति पंजाब पुलिस पर गोलियां चलाकर भाग गया हो, और जिसे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दुष्कर्म के आरोप में जेल भेजा हो, वह पंजाब का क्या भला करेगा? लेकिन भाजपा को ठीक ऐसे ही लोग चाहिए। इससे साफ पता चलता है कि पंजाब में भाजपा पूरी तरह से खोखली है। उसके पास अपना कुछ भी नहीं है।”
आम आदमी पार्टी के महासचिव और मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने आज पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इन दोनों की हरकतों की वजह से पार्टी ने इन्हें पहले ही किनारे कर दिया था। अब ये दोनों उस भाजपा में शामिल होंगे जिसे पंजाब में उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे। भाजपा असल में ऐसे लोगों की पार्टी बन गई है जिन्हें कहीं और से निकाल दिया गया हो। यहां बस दूसरी पार्टियों से निकाले गए लोग ही जाते हैं।”
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