राष्ट्रीय
मुंबई: डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुरुलकर की जमानत पर फैसला सुरक्षित
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मुंबई, 16 मार्च : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुरुलकर की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में मामले को लेकर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई, जिसके बाद कोर्ट ने आदेश बाद में सुनाने का निर्णय लिया।
दरअसल, डॉ. प्रदीप कुरुलकर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का गंभीर आरोप है। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने मई 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़ी एक महिला एजेंट के संपर्क में आकर देश की रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की। जांच के मुताबिक, कुरुलकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए एक महिला के संपर्क में आए थे। बताया गया कि वह महिला खुद को डिफेंस रिसर्च में रुचि रखने वाली बताती थी, लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि उसका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से हो सकता है।
एटीएस के अनुसार, बातचीत के दौरान कुरुलकर ने भारत के कई संवेदनशील रक्षा प्रोजेक्ट्स से जुड़ी जानकारी साझा की। इनमें मिसाइल और रक्षा प्रणालियों से संबंधित तकनीकी जानकारियां भी शामिल होने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि बातचीत में कई बार बेहद गोपनीय विषयों पर चर्चा हुई, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला है।
सुनवाई के दौरान एटीएस ने अदालत में कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला है। एजेंसी का कहना है कि कुरुलकर जिस पद पर कार्यरत थे, वहां से उन्हें कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं तक पहुंच थी। एटीएस ने यह भी दलील दी कि जांच अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई है और कई डिजिटल सबूतों की जांच जारी है। ऐसे में आरोपी को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं, कुरुलकर की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि बातचीत में ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की गई जो आधिकारिक रूप से गोपनीय श्रेणी में आती हो।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कुरुलकर लंबे समय तक देश के रक्षा अनुसंधान से जुड़े रहे हैं और उनका पूरा करियर बेदाग रहा है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है।
राष्ट्रीय
नौसेना की आईओएस सागर पहल, 16 देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूती

नई दिल्ली, 18 मार्च : भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है। ऐसा करते हुए नौसेना ने ‘आईओएस सागर’ के दूसरे संस्करण की शुरुआत कर दी है।
दरअसल भारतीय नौसेना द्वारा शुरू किया गया ‘आईओएस सागर’ एक विशेष ऑपरेशनल कार्यक्रम है। इसका मूल उद्देश्य मित्र राष्ट्रों के नौसैनिकों को भारतीय नौसेना के जहाज पर एक साथ प्रशिक्षण और समुद्री अनुभव प्रदान करना है। यह कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है।
नौसेना ने 16 मार्च से इसकी शुरुआत कर दी है। भारतीय नौसेना के मुताबिक इस पहल के तहत विभिन्न देशों के इन अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जहाज पर होने वाली गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण में शामिल किया जाता है। इससे अलग-अलग देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी तालमेल, सहयोग और समुद्री अभियानों की समझ को बढ़ावा मिलता है। प्रारंभ किए गए इस संस्करण में 16 मित्र देशों के नौसैनिक भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण व मूल शुरुआत केरल के कोच्चि स्थित नौसेना प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों से होगी। यहां विभिन्न देशों की नौसेनाओं से आए प्रतिभागियों को नौसैनिक संचालन, समुद्री कौशल और समुद्री सुरक्षा से जुड़े प्रमुख पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद प्रतिभागी भारतीय नौसेना के एक जहाज पर तैनात होकर समुद्र में संयुक्त रूप से संचालन गतिविधियों में भाग लेंगे। इस दौरान वे भारतीय नौसेना के साथ मिलकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।
यात्रा के दौरान नौसेना का यह समुद्री जहाज विभिन्न बंदरगाहों का दौरा करेगा। इन समुद्री यात्राओं में क्षेत्रीय नौसेनाओं तथा समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना और साझा समुद्री चुनौतियों की गहन समझ विकसित करना है।
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में भारतीय नौसेना ने इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम की अध्यक्षता संभाली है। इसी के तहत इस संस्करण में हिंद महासागर क्षेत्र के 16 सदस्य देशों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अब नौसेना की यह पहल भारत की दीर्घकालिक समुद्री सहयोग नीति को आगे बढ़ाती है।
यह पहल, क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) संबंधी भारत सरकार के दृष्टिकोण को साकार करती है। साथ ही यह व्यापक महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र प्रगति) ढांचे को भी मजबूती देती है। नौसेना का मानना है कि यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भारत की सक्रिय भूमिका को और सुदृढ़ करती है।
राष्ट्रीय
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को संगमनेर में खराब चिकित्सा सुविधाओं पर बयान पेश करने का दिया निर्देश

मुंबई, 18 मार्च : महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने बुधवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अहिल्यानगर जिले के संगमनेर में मेडिकल उपकरणों की कमी के मामले पर तुरंत संज्ञान ले। उन्होंने सरकार से सदन में जवाब भी मांगा है।
विधानसभा में संगमनेर क्षेत्र में जरूरी मेडिकल जांच सुविधाओं, खासकर एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों की भारी कमी का मुद्दा उठाया गया था। सदन के सदस्यों ने आम नागरिकों को हो रही मुश्किलों पर गहरी चिंता जताई। सरकारी सुविधाओं में इन मशीनों के उपलब्ध न होने के कारण नागरिकों को बुनियादी जांचों के लिए निजी अस्पतालों या बड़े शहरों तक लंबी दूरी तय करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए, स्पीकर नार्वेकर ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में ऐसी गंभीर कमियों को दूर करने में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले भी यह मामला सामने आने के बावजूद, इस कमी के संबंध में कोई ठोस समाधान या डेटा पेश नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, “सरकार को संगमनेर की स्थिति का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।”
उन्होंने प्रशासन को आगे निर्देश दिया कि वह चल रहे सत्र के समाप्त होने से पहले, पूरे राज्य में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों की कुल कमी से संबंधित डेटा संकलित करके पेश करे, जिसमें संगमनेर के मामले पर विशेष ध्यान दिया जाए।
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए, स्पीकर नार्वेकर ने कहा कि सदन के पीठासीन अधिकारी के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी यह मानता है कि वह विधायी पीठासीन अधिकारी के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह लंबित ‘ध्यानाकर्षण प्रस्तावों’ के जवाब सदन के पटल पर रखे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये जवाब अगले कार्य दिवस के अंत तक जमा नहीं किए जाते हैं, तो मुख्य सचिव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार को संगमनेर में एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों की कमी पर एक विस्तृत बयान देना चाहिए और सत्र समाप्त होने से पहले पूरे राज्य का डेटा भी पेश करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर जवाब देने में विफलता के परिणामस्वरूप शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई हो सकती है।
राजनीति
सांसद बोरदोलोई दे सकते हैं इस्तीफा, पार्टी को नहीं थी जानकारी : प्रियंका गांधी वाड्रा

नई दिल्ली, 18 मार्च : असम के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पत्रकारों से संभावना जताई कि बोरदोलोई टिकट बंटवारे को लेकर परेशान थे। उन्होंने कहा कि काश पार्टी को इस बारे में उनसे बात करने का मौका मिलता। अगर कुछ बात होती तो उसको बैठकर दूर किया जाता लेकिन इस तरह होगा, इसकी जानकारी नहीं हो पाई।
वहीं, कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, “मैं ओडिशा के नेताओं, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का धन्यवाद करना चाहूंगा। गलत काम करने वालों और गद्दारों को निलंबित कर दिया गया है। मैं मांग करता हूं कि ओडिशा की तर्ज पर इसी तरह का कदम बिहार में भी उठाया जाए। कार्रवाई बहुत ज़रूरी है।”
पूर्व कांग्रेस नेता नवज्योति तालुकदार ने कहा, “मैं असम जाकर भाजपा ज्वाइन करूंगा। सांसद प्रद्युत बोरदोलोई भाजपा में शामिल हो रहे हैं और हमारी असम के मुख्यमंत्री से बात हुई है।”
असम के सांसद बोरदोलोई से जब पूछा गया कि क्या वह भाजपा में शामिल हो रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि मुझे बुलाया गया है।
बता दें कि बोरदोलोई ने पिछले दिनों पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राइमरी सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अपना पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था। उन्होंने इस्तीफे में लिखा, “बहुत दुख के साथ मैं कांग्रेस के सभी पदों, खास अधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे रहा हूं।” पत्र में शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने पार्टी को अलविदा कहा।
बोरदोलोई असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। डिब्रूगढ़ एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और चाय उत्पादन क्षेत्र है, जहां भाजपा की मजबूत पकड़ रही है। वे जल्द ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं और पार्टी की असम इकाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह घटना कांग्रेस के लिए असम में बड़ा झटका मानी जा रही है, जहां पार्टी पहले से ही संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक कलह से जूझ रही है।
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