राष्ट्रीय समाचार
मणिपुर के मोरेह में म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ जारी
इंफाल, 9 जनवरी। भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित मणिपुर का मोरेह परेशानी पैदा करने वाला स्थान बना हुआ है। क्षेत्र में सोमवार को दूसरे दिन भी संदिग्ध उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी जारी है।
पुलिस ने कहा कि रविवार और सोमवार को मोरेह में संदिग्ध आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी की सूचना मिली है, लेकिन दोनों तरफ से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए हैं और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
30 दिसंबर के बाद से टेंग्नौपाल जिले के मोरेह में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों के हमलों की विभिन्न घटनाओं में मणिपुर पुलिस के 10 कमांडो और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक जवान घायल हो गया है।
मोरेह, जो म्यांमार के सबसे बड़े सीमावर्ती शहर तमू के पश्चिम में सिर्फ 4 किमी दूर है, राज्य की राजधानी इंफाल से 110 किमी दक्षिण में है।
कुछ आदिवासी संगठन इलाके में राज्य बलों की तैनाती का विरोध कर रहे हैं। मिश्रित आबादी वाले सीमावर्ती क्षेत्र में 3 मई के बाद से कई हिंसक घटनाएं भी देखी गईं।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने पहले कहा था कि सीमावर्ती शहर मोरेह में सुरक्षा बलों पर हमलों में म्यांमार के विदेशी भाड़े के सैनिक शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, ”हमने ऐसी चरमपंथी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए हैं।राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए हुए है और राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा संयुक्त रूप से आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं।”
सिंह ने लोगों के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता भी जताई और कहा कि वह इस तरह की धमकियों और दबाव के आगे नहीं झुकेगी और ऐसी उग्रवादी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
आरबीआई अगले हफ्ते होने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कर सकता है बढ़ोतरी : एसबीआई रिपोर्ट

मौजूदा समय में जोखिमों का संतुलन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 25 आधार अंक (0.25 प्रतिशत) की ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में निर्णायक रूप से झुक गया है। इसकी वजह महंगाई का दबाव बढ़ना, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का बिगड़ना, तरलता की बदलती स्थिति और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के नए सिरे से उभरना है। यह जानकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दी गई।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होनी है, जिसमें बेंचमार्क रेपो रेट पर फैसला किया जाएगा।
एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के पुनर्मूल्यांकन को देखते हुए, “हमारे लिए बेहतर होगा कि हम स्थिति से पीछे रहने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाएं।”
रिपोर्ट में कहा गया, “हमें यह भी उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान में 30 आधार अंक और महंगाई के अनुमान में 20 आधार अंक की बढ़ोतरी करेगा।”
महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया लगातार गिरावट के दौर में है, डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है और पिछले शुक्रवार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली के कारण 4.45 अरब डॉलर की निकासी हुई है। ऐसे में सट्टेबाजी वाली ताकतों को रोकने और प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने की आरबीआई की क्षमता पर भरोसा उसकी आंतरिक मजबूती की बड़ी परीक्षा होगी।
रिपोर्ट में कहा गया, “भले ही ब्याज दर में बढ़ोतरी अब करीब आती दिख रही है, लेकिन मानसून की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। 2026 का मानसून वर्ष 2000 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा, जो दीर्घकालिक औसत (एपीए) का केवल 87 प्रतिशत रहा। वहीं, 43 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई।”
मजबूत अल नीनो परिस्थितियां और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी फसलों के उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा कर सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर तरलता भले ही अधिक है, लेकिन वास्तविक स्तर पर प्रभावी तरलता का सृजन काफी कम है।
विशेष स्वैप सुविधा के तहत रिकॉर्ड 143.5 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह के बावजूद, नियामकीय आवश्यकताएं (सीआरआर/एसएलआर/एलसीआर) बैंकों द्वारा अतिरिक्त जमा राशि के इस्तेमाल को सीमित करती हैं।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में अनुमानित 16 प्रतिशत ऋण वृद्धि को समर्थन देने के लिए, नियामकीय प्रावधानों, यूपीआई और स्पर्श संबंधी आवश्यकताओं के कारण बैंकों के स्तर पर जमा सृजन में अभी भी 8.2 लाख करोड़ रुपए का अंतर रहेगा।”
रिपोर्ट में कहा गया कि फिलहाल भारत को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नीति निर्माताओं और नियामकों के लिए यह बेहतर होगा कि वे ऐसी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहें, जहां बदलती व्यापक आर्थिक परिस्थितियां व्यापक हितों की सुरक्षा के लिए कुछ असामान्य ब्याज दर संबंधी उपायों को अपनाने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
राजनीति
राज्यसभा उम्मीदवार के नाम को लेकर मायावती का अखिलेश पर निशाना, बोली-पीडीए के नाम पर छलावा कर रही सपा

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर परिवारवाद और धनबल की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सपा अपने आपको समाजवादी और पीडीए की पार्टी बताती है, लेकिन उसके काम इसके विपरीत नजर आते हैं।
मायावती ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवार प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सपा ने 30 सितंबर को दोनों उम्मीदवारों का नामांकन कराया था।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेफॉर्म एक्स पर लिखा कि बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में परिवार, सगे-संबंधियों, भाई-भतीजों और बड़े पूंजीपतियों को टिकट नहीं देती। उनके मुताबिक पार्टी सर्वसमाज के गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों से जुड़े कर्मठ अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाती है।
उन्होंने कहा, ”बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, करीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल गरीब, मध्यम वर्ग व कमजोर तबकों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बसपा की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ‘पीडीए’ की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज्यादा नजर आती है।”
मायावती ने कहा कि इसका एक और खास व ताजा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिए द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नजदीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ‘फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिए होगा।
मायावती ने कहा कि इस प्रकार का है सपा, उसका ‘पीडीए’ व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ‘पीडीए’ का चाहिए, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूंजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ‘पीडीए’ के बहकावे में ना आए तो यह सही।
उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिए खासकर अपरकास्ट समाज के गरीबों तथा ‘बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब खासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही जरूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिए कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बसपा में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
राजनीति
आध्यात्मिक नेताओं ने बाबा रामदेव के इस बयान का स्वागत किया है कि भारतीय मुसलमान धर्म-परिवर्तित हैं; उनका कहना है कि सनातन परंपरा प्राचीन है।

नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव के इस बयान पर कि “भारत में सभी मुसलमान धर्म बदलने वाले हैं” गुरुवार को कई हिंदू आध्यात्मिक नेताओं ने अच्छी प्रतिक्रिया दी। कुछ नेताओं ने कहा कि सनातन परंपरा सबसे पुरानी है और दूसरे धर्म भारत में बाद में आए। मीडिया से बात करते हुए, ‘तपसी चांद’ के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “इंटरनेशनल योग गुरु और पतंजलि पीठ के संस्थापक, परम आदरणीय बाबा श्री रामदेव ने बहुत कड़वा सच कहा है। जो भी इसे समझ लेगा, उसका जीवन सुधर जाएगा। भारत में सभी मुसलमानों के पूर्वज राम और कृष्ण हैं। हर कोई सनातनी है और सभी के पूर्वज हिंदू थे। जिस दिन वह ‘घर लौटेगा’, उसके सभी पाप माफ हो जाएंगे।” जगतगुरु रामदिनेश आचार्य ने कहा, “मेरा मानना है कि सनातन परंपरा (भारत में) सबसे पुरानी रही है। दूसरे धर्म उसके बाद आए, इसलिए लोग मूल रूप से सनातन परंपरा का हिस्सा थे। बाद में कुछ लोगों ने धर्म बदला, इसलिए मुझे लगता है कि वे भी हिंदू हैं। बाबा रामदेव जी की बात मुझे सही और लॉजिकल लगती है।” महा मंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने कहा, “योग गुरु बाबा रामदेव ने अपनी मर्ज़ी या सनक से कुछ नहीं कहा; उन्होंने धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कहा। जब किसी का खतना होता है और उसे कलमा सिखाया जाता है, तो वह मुसलमान बन जाता है।
हर इंसान हिंदू पैदा होता है। और मैं आपको बता दूं कि भगवान एक है। यहां लोगों ने इस्लाम धर्म अपना लिया और भगवान को अल्लाह या गॉड कहने लगे। मेरा मानना है कि सभी मुसलमान, चाहे भारत में हों या विदेश में, असल में ‘सनातनी’ हैं।” महंत महा मंडलेश्वर श्री गिरीश दास महाराज ने कहा, “हम बाबा रामदेव जी के इस बयान का स्वागत करते हैं। मेरा मानना है कि मुगल काल में हिंदुओं पर या तो ज़बरदस्ती दबाव डाला जाता था या उन्हें तरह-तरह के लालच देकर इस्लाम अपनाने के लिए मनाया जाता था। आज भी, अगर वे ‘घर लौटना’ चाहते हैं, तो सनातन और हिंदू धर्म खुले दिल से उनका स्वागत करते हैं।” संत कृपालु जी महाराज ने कहा, “बाबर, हुमायूं और औरंगजेब के राज में बहुत से हिंदुओं का धर्म बदला गया।” यह बयान बाबा रामदेव के मिडिया से कहा गया था, “मैं अपने सभी मुस्लिम भाइयों से अपील करूंगा कि वे यह मान लें कि हमारे पुराने ऋषि-मुनि (पुरुष और महिला) उनके भी पूर्वज हैं; राम और कृष्ण भी उनके पूर्वज हैं। अगर मुसलमान अपनी पुरखों की जड़ों से जुड़ेंगे, तो वे कभी कमजोर महसूस नहीं करेंगे। आखिर भारत का हर मुसलमान धर्म बदलने वाला है। अगर हिंदू और मुसलमान एक होकर रहेंगे, तो वे खुद भी मजबूत होंगे और देश भी मजबूत होगा।”
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