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Tuesday,02-June-2026
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माइक्रोसॉफ्ट ने चीन समर्थित हैकरों द्वारा उपयोग की जाने वाली वेबसाइटों पर किया नियंत्रण

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 माइक्रोसॉफ्ट ने चीन स्थित हैकिंग समूह की गतिविधियों पर लगाम लगाने में कामयाबी हासिल कर ली है। यह समूह अमेरिका और दुनिया भर के 28 अन्य देशों में संगठनों पर हमला करता था। माइक्रोसॉफ्ट डिजिटल क्राइम यूनिट (डीसीयू) ने एक बयान में कहा कि वर्जीनिया में एक संघीय अदालत ने ‘निकेल’ नामक हैकिंग ग्रुप की वेबसाइटों को जब्त करने के अपने अनुरोध को स्वीकार कर लिया, जिससे कंपनी को अपने पीड़ितों तक निकेल की पहुंच में कटौती करने और वेबसाइटों को हमलों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल होने से रोकने में सक्षम बनाया गया।

माइक्रोसॉफ्ट में ग्राहक सुरक्षा और ट्रस्ट के कॉर्पोरेट उपाध्यक्ष टॉम बर्ट ने कहा, “हम मानते हैं कि इन हमलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सरकारी एजेंसियों, थिंक टैंक और मानवाधिकार संगठनों से खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा रहा था।

दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों पर नियंत्रण प्राप्त करने और उन साइटों से ट्रैफिक को माइक्रोसॉफ्ट के सुरक्षित सर्वर पर पुनर्निर्देशित करने से कंपनी को निकेल की गतिविधियों के बारे में अधिक जानने के साथ-साथ मौजूदा और भविष्य के पीड़ितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।

बर्ट ने सोमवार देर रात कहा, “हमारा व्यवधान निकेल को अन्य हैकिंग गतिविधियों को जारी रखने से नहीं रोकेगा, लेकिन हमें विश्वास है कि हमने बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हटा दिया है, जिस पर ग्रुप हमलों की इस लेटेस्ट लहर के लिए भरोसा कर रहे है।”

आज तक, 24 मुकदमों में पांच राष्ट्र-राज्य अभिनेताओं के खिलाफ माइक्रोसॉफ्ट ने साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग की जाने वाली 10,000 से अधिक दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों और राष्ट्र-राज्य अभिनेताओं द्वारा उपयोग की जाने वाली लगभग 600 साइटों को हटा दिया है।

तकनीकी दिग्गज ने बताया, “हमने आपराधिक अभिनेताओं से आगे निकलने के लिए 600,000 साइटों के रजिस्ट्रेशन को सफलतापूर्वक अवरुद्ध कर दिया है, जिन्होंने भविष्य में उनका दुर्भावनापूर्ण उपयोग करने की योजना बनाई है।”

कंपनी ने बताया, “हालांकि, हमने इन हमलों के हिस्से के रूप में माइक्रोसॉफ्ट उत्पादों में कोई नई भेद्यता नहीं देखी है। माइक्रोसॉफ्ट ने हमारे सुरक्षा उत्पादों, जैसे माइक्रोसॉफ्ट 365 डिफेंडर के माध्यम से ज्ञात निकेल गतिविधि का पता लगाने और उससे सुरक्षा के लिए अद्वितीय हस्ताक्षर बनाए हैं।”

निकेल ने निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में संगठनों को लक्षित किया है, जिसमें राजनयिक संगठन और उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, कैरिबियन, यूरोप और अफ्रीका में विदेशी मामलों के मंत्रालय शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय

अल-अक्सा मस्जिद में घुसपैठ पर कतर ने जताया विरोध, अंतरराष्ट्रीय कानून का बताया उल्लंघन

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दोहा, 1 जून: कतर ने सोमवार को अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने की निंदा की। कतर ने घटना को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और दुनियाभर के करोड़ों मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने वाली अस्वीकार्य कार्रवाई’ बताया।

कतर ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद मुसलमानों का इबादतगाह है और यरुशलम तथा उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिश करने वाले सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “कतर अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली कट्टरपंथियों के घुसने और कब्जा करने वाली सेना की सुरक्षा में की गई उनकी उकसाने वाली गतिविधियों की निंदा करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है, दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली अस्वीकार्य हरकत है, और कब्जे वाले यरुशलम तथा उसके इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों में नई स्थिति थोपने की खतरनाक कोशिश है।”

मंत्रालय ने कहा क‍ि अल-अक्सा मस्जिद केवल मुसलमानों का इबादत स्थल है। यरुशलम और उसके पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति बदलने के लिए उठाए गए सभी एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमान्य हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह के उल्लंघन और बार-बार होने वाली उकसाने वाली घटनाएं क्षेत्र में हिंसा और तनाव को और बढ़ा सकती हैं, जिससे शांति और स्थिरता की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा।

बयान में कहा गया, “मंत्रालय चेतावनी देता है कि इस तरह के उल्लंघनों और लगातार हो रही उकसाने वाली कार्रवाइयों से क्षेत्र में और अधिक हिंसा तथा तनाव पैदा हो सकता है। इससे तनाव कम करने और स्थिरता लाने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगी।”

कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह तुरंत कदम उठाए और इजरायल को एक कब्जा करने वाली शक्ति के रूप में, फि‍लिस्तीनी लोगों और उनके पवित्र स्थलों के खिलाफ जारी उल्लंघनों को रोकने तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का पालन करने के लिए मजबूर करे।

मंत्रालय ने दोहराया कि कतर फि‍लिस्तीनी मुद्दे और फि‍लिस्तीनी जनता के समर्थन में मजबूती से खड़ा है। कतर का मानना है कि कब्जे का अंत होना चाहिए और फि‍लिस्तीनी लोगों को उनके वैध अधिकार मिलने चाहिए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फि‍लिस्तीनी राज्य की स्थापना है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो।

कतर का यह बयान उस घटना के बाद आया जब कुछ इजरायली बसने वालों ने ‘डोम ऑफ द रॉक’ की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर इजरायली झंडे लहराए और पुलिस की सुरक्षा में इजरायल का राष्ट्रगान गाया।

अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग ‘अल-मघराबा गेट’ से मस्जिद परिसर में दाखिल हुए, जिस पर पूरी तरह इजरायली अधिकारियों का नियंत्रण है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 1967 में पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद से अल-अक्सा मस्जिद परिसर में अक्सर झड़पें होती रही हैं। इनमें इजरायली बसने वालों के छापे और मुस्लिम श्रद्धालुओं पर लगाए गए प्रतिबंध शामिल हैं।

मस्जिद परिसर का प्रशासन जॉर्डन के औकाफ मंत्रालय के पास है, जिसके पास इस क्षेत्र के प्रबंधन और प्रवेश नियंत्रण का कानूनी अधिकार है। जॉर्डन ने भी चेतावनी दी है कि कोई भी ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक स्थल को समय और क्षेत्र के आधार पर विभाजित करने वाली नई व्यवस्था लागू करना हो।

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अंतरराष्ट्रीय

अंतहीन प्रक्र‍िया की ओर बढ़ रहा ईरान-अमेरिका समझौता, दोनों देश नई शर्तों के साथ कर रहे संशोधन की तैयारी

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वाशिंगटन, 1 जून: अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे समझौते की शर्तों में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ तेहरान नए बदलाव जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

सूत्रों से म‍िजी जानकारी के अनुसार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने बताया क‍ि इस अंतहीन प्रक्र‍िया में व्हाइट हाउस बातचीत में ईरान की नई प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। लगता है क‍ि यह बातचीत फिर से शुरुआती और मुश्किल स्थिति में पहुंच सकती है।

एडनक्रोनोस समाचार एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया क‍ि ट्रंप बातचीत को तेज करना चाहते हैं और दूसरी तरफ दबाव बढ़ाकर समझौता जल्दी करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें ईरान की जटिल सत्ता व्यवस्था से भी निपटना पड़ रहा है।

तेहरान में किसी भी बदलाव या समझौते को अंतिम मंजूरी सर्वोच्च नेता के पास होती है। अगर समझौते के मसौदे में बदलाव होता है, तो बातचीत और लंबी हो सकती है।

तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के नए प्रस्ताव के बाद ईरान भी समझौते के ड्राफ्ट में कुछ नए बदलाव जोड़ना चाहता है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप 60 प्रत‍िशत तक समृद्ध किए गए यूरेनियम के भंडार को लेकर ज्यादा साफ और सख्त नियम चाहते हैं, जो अभी ईरान के पास हैं। साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोलने के तरीके साफ किए जाएं।

जो मौजूदा ड्राफ्ट समझौता है, उसमें ईरान यह मानने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। साथ ही इसमें 60 दिनों की एक समय-सीमा भी है, जिसमें दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जमा हुए संवर्धित यूरेनियम के भविष्य पर बातचीत करेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें और साफ नियम जोड़ना चाहते हैं, खासकर इस बात पर कि अमेरिका उस सामग्री को कब और कैसे हासिल करेगा।

ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, “मुझे बस यही गारंटी चाहिए कि परमाणु हथियार नहीं बनेंगे। उन्होंने यह मान लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ईरान ने सिर्फ यह कहा था कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, लेकिन अब समझौते में यह भी शामिल किया गया है कि वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार न तो बनाएंगे और न ही हासिल करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा, “उन लोगों से बातचीत करना बहुत मुश्किल है और इसमें समय लगता है, लेकिन मुझे जल्दी नहीं है।”

व्हाइट हाउस अभी भी इस समझौते को पूरा होने को लेकर आशावादी है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक सरकारी टीवी पर कहा क‍ि अमेरिका के साथ ‘बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान’ अभी भी जारी है, लेकिन जब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक इन पर कोई पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “इस समय जो भी बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं और उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।”

हालांकि, तेहरान से कई बड़े नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विदेश मंत्री अराघची के नरम रुख के उलट, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने सख्त बयान दिया।

उन्होंने कहा, “जब तक हमें यह पूरी तरह भरोसा नहीं हो जाता कि ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित हैं, हम किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देंगे।” गालिबाफ ने कहा कि जो लोग कूटनीति से जुड़े हैं, वे अमेरिका के वादों या बातों पर भरोसा नहीं करते।

इस बीच, ईरान की राजनीति को लेकर स्थिति और भी जटिल बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने मोज्तबा खामेनेई को अपना इस्तीफा सौंपने का एक पत्र भेजा है। यह जानकारी लंदन स्थित ईरानी विपक्षी वेबसाइट ‘ईरान इंटरनेशनल’ से जुड़े एक सूत्र ने दी है, लेकिन ईरान सरकार ने इस खबर को तुरंत खारिज कर दिया और इसे ‘झूठी मीडिया रिपोर्ट’ बताया।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 76,000 के ऊपर

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अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 720 अंक या 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,135 और निफ्टी 247 या 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,967 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को ऑटो शेयर लीड कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी पीएसई के साथ ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183 अंक या 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,149 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 433 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 61,847 पर था।

सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एसबीआई, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, सन फार्मा और एनटीपीसी लूजर्स थे।

ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ खुले। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक हरे निशान में थे। वहीं, जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट खुलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ अमेरिकी की बातचीत अंतिम दौर में है।

इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है।

खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 5.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 97.90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 91.12 डॉलर प्रति बैरल पर था।

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