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Wednesday,21-October-2026
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राजनीति

मायावती बोलीं, गुप्त ‘चुनावी बॉण्ड स्कीम’ से धनबल के खेल को और भी ज्यादा मिल रही हवा

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बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने चुनाव में राजनीतिक दलों के चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के दावे के साथ लागू किए गए चुनावी बॉण्ड पर चिंता व्यक्त की है। इसके साथ ही उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में इसकी सुनवाई शुरू होने को लेकर उम्मीद भी जताई है। मायावती ने कहा है कि चुनावी बॉण्ड से धनबल के खेल को और ज्यादा हवा मिल रही है।

बसपा प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को ट्वीट करके लिखा कि कारपोरेट जगत व धन्नासेठों के धनबल के प्रभाव ने देश में चुनावी संघर्षों में गहरी अनैतिकता व असमानता की खाई तथा लेवल प्लेइंग फील्ड खत्म करके यहाँ लोकतंत्र एवं लोगों का बहुत उपहास बनाया हुआ है। गुप्त चुनावी बॉण्ड स्कीम से इस धनबल के खेल को और भी ज्यादा हवा मिल रही है।

उन्होंने आगे लिखा कि किन्तु अब काफी समय बाद सुप्रीम कोर्ट चुनावी बॉण्ड से सम्बन्धित याचिका पर सुनवाई शुरू करेगी, उम्मीद की जानी चाहिए कि धनबल पर आधारित देश की चुनावी व्यवस्था में आगे चलकर कुछ बेहतरी हो व चुनिन्दा पार्टियों के बजाय गरीब-समर्थक पार्टियों को खर्चीले चुनावों की मार से कुछ राहत मिले।

गौरतलब है कि चुनावी बॉण्ड योजना के प्रविधानों के अनुसार, यह बांड किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा खरीदा जा सकता है, जो भारत का नागरिक है या यहां पर रहता है। जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी ही चुनावी बांड के जरिये चंदा ले सकती है। हालांकि, इसके लिए पार्टी को पिछले राज्य विधानसभा चुनाव में कम-से-कम एक प्रतिशत वोट मिलना अनिवार्य शर्त है। पार्टी को किसी आधिकारिक बैंक में खातों के जरिये ही बॉण्ड का भुगतान किया जा सकता है।

देश में चुनावी बॉण्ड की शुरूआत राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के घोषित उद्देश्य के साथ की गई थी। कहा गया था कि इससे दलों के पास साफ-सुथरा धन आएगा और काले धन पर रोक लगेगी लेकिन कई राजनीतिक दल और नेता चुनावी बॉण्ड को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनावी बॉण्डों की वजह से पारदर्शिता बढ़ने के बजाए गरीब-समर्थक और संसाधनों के लिहाज से कमजोर पार्टियों के लिए मुश्किल हो रही है। चुनाव दिन ब दिन और खर्चीले होते जा रहे हैं।

हाल में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। पिछले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह चुनावी बॉण्ड जारी करने वाले कानून को चुनौती देने सम्बन्धी याचिका की सुनवाई करेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सीजेआई एन वी रमन्ना के सामने इस मामले को उल्लेख किया था। चुनावी बॉण्ड पर रोक लगाने की मांग एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स सहित कई एनजीओ करते रहे हैं।

अपराध

अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर 4 करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलने वाली महिला गिरफ्तार

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मुंबई; घाटकोपर में रहने वाले एक शिकायतकर्ता को अश्लील वीडियो के ज़रिए बदनाम करने की धमकी देने और करीब 4 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगकर जान से मारने की धमकी देने और एक और हफ़्ता वसूलने के मामले में क्राइम ब्रांच यूनिट 7 ने एक महिला को गिरफ्तार किया है। शिकायतकर्ता एक ज्वेलरी शॉप में मैनेजर का काम करता है। दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच उसकी एक जान-पहचान वाली महिला ने वीडियो कॉल के ज़रिए व्हाट्सएप पर अश्लील वीडियो चैट करके उसे प्राइवेट करने की धमकी दी और शिकायतकर्ता से कहा कि उक्त अश्लील वीडियो चैटिंग इंटरनेट के ज़रिए पुलिस, कोर्ट और सीबीआई को भेज दी जाएगी और उसे जांच के लिए बुलाया जाएगा। इस धमकी के कारण, शिकायतकर्ता ने बदनामी के डर से 2024 से अब तक शिकायतकर्ता से 4 करोड़ रुपये वसूल लिए और उक्त महिला और पैसे मांग रही थी। उक्त महिला ने शिकायतकर्ता को और पैसे न देने पर उसके हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी भी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, क्राइम ब्रांच यूनिट 7, घाटकोपर, मुंबई ने जाल बिछाया और 19 अक्टूबर को पैसे मांगने वाली महिला को क्राइम ब्रांच यूनिट 7, घाटकोपर, मुंबई ने रंगे हाथों पकड़ा। महिला ने शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपये लिए। यह घटना आरके रेस्टोरेंट, एलबीएस रोड, घाटकोपर वेस्ट, मुंबई में हुई। शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर, घाटकोपर पुलिस स्टेशन में इंडियन पीनल कोड की धारा 308(2), 308(7) के तहत मामला दर्ज किया गया है और इस अपराध की जांच शुरू कर दी गई है। इस अपराध के लिए महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच घाटकोपर यूनिट 7 कर रही है। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, बरनिल कानभारे, एडिशनल कमिश्नर कृष्णकांत उपाध्याय, डीसीपी, नूनाथ यूनिट 7 की टीम ने की है।

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राष्ट्रीय समाचार

गुजरात : बिजली डिमांड में 36.6 प्रतिशत की उछाल, केंद्र से अतिरिक्त 5,000 मेगावाट की मांग की गई

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गुजरात में 16 अक्टूबर को बिजली की अब तक की सबसे अधिक मांग 29,822 मेगावाट दर्ज की गई। यह पिछले साल अक्टूबर में दर्ज की गई 21,822 मेगावाट की मांग से 36.6 प्रतिशत अधिक है। इसके चलते राज्य सरकार ने कोयले की आपूर्ति बढ़ाने, बैटरी स्टोरेज का विस्तार करने और केंद्र से अतिरिक्त बिजली आवंटित करने की मांग की है।

राज्य में बिजली की दैनिक खपत 16 अक्टूबर को बढ़कर 574 मिलियन यूनिट हो गई, जो पिछले साल अक्टूबर में 457 मिलियन यूनिट थी। यह लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में दी गई प्रस्तुति के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में सितंबर और अक्टूबर के दौरान बिजली की मांग में लगभग 12 प्रतिशत (यानी 4,000 मेगावाट) की वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में किसानों, उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा की गई। साथ ही, गुजरात की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

इस बैठक में ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल, ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

सरकार ने मांग में इस वृद्धि का कारण कमजोर मानसून के बाद लगातार बना हुआ उच्च तापमान और ‘अल नीनो’ के प्रभाव को बताया है, जिसके कारण कूलिंग से जुड़ी बिजली की खपत बढ़ गई है।

कृषि क्षेत्र में भी बिजली की मांग बढ़ी है, क्योंकि सरकार खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध करा रही है। इससे कृषि क्षेत्र का दैनिक लोड 12,000 मेगावाट के पीक स्तर तक पहुंच गया है।

दीपावली से पहले औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से भी बिजली की मांग बढ़ी है। प्रस्तुति में बताया गया कि गुजरात और पड़ोसी राज्यों में कम बारिश होने से जलविद्युत उत्पादन कम हो गया है, जबकि हवा की गति कम होने से पवन ऊर्जा के उत्पादन पर भी असर पड़ा है।

सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन शून्य हो जाता है, जिससे शाम के पीक आवर्स (शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच) में बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्य सरकार कोयले और गैस पर आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भर है।

बैठक में बताया गया कि ‘स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर’ और बिजली वितरण कंपनियां ग्रिड की फ्रीक्वेंसी और संतुलन बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।

कोयले की उपलब्धता को मजबूत करने के लिए, राज्य सरकार ने दिल्ली में उच्च-स्तरीय चर्चा की, ताकि ‘गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (जीएसईसीएल) के लिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने गुजरात को नवंबर तक हर दिन कोयले की 10 से 11 रेलवे रेक (मालगाड़ी के डिब्बे) उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। नवंबर के बाद यह आपूर्ति बढ़कर 13 से 14 रेक प्रतिदिन हो जाएगी।

राज्य के बिजली संयंत्रों में कोयले के इस्तेमाल की कार्यक्षमता सुधारने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं। गुजरात ने नवंबर के लिए एनटीपीसी के फरक्का संयंत्र से 329 मेगावाट बिजली और केंद्रीय बिजली उत्पादन में असम के हिस्से से लंबी अवधि के लिए 551 मेगावाट बिजली हासिल की है।

एनटीपीसी के बरौनी-I और दादरी-I थर्मल पावर स्टेशनों के साथ 716 मेगावाट बिजली खरीद के मौजूदा समझौते की अवधि को एक साल बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दिया गया है। राज्य ने केंद्र के ‘अनएलोकेटेड पावर पूल’ (बिना आवंटित बिजली के भंडार) से अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की भी मांग की है।

इसके साथ ही, सरकार ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज’ क्षमता का भी विस्तार कर रही है, ताकि दिन के समय बनने वाली सौर ऊर्जा को स्टोर किया जा सके और शाम के पीक आवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है) में उसका इस्तेमाल किया जा सके।

गुजरात में अभी 192 मेगावाट क्षमता का ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (बीईएसएस) काम कर रहा है। इसके अलावा, कुल 2,742 मेगावाट क्षमता और 5,517 मेगावाट हॉवर (एमडब्ल्यूएच) स्टोरेज क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए अनुबंध पूरे किए जा चुके हैं।

राज्य में दिन के समय लगभग 12,000 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा होती है। राज्य सरकार इसका अधिकतम उपयोग करने की योजना बना रही है, जिसमें कृषि कार्यों के लिए बिजली की खपत को दिन के उजाले वाले घंटों में तय करना भी शामिल है।

उम्मीद है कि गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ‘शक्ति’ योजना के तहत 4,000 मेगावाट के लिए टेंडर जारी करेगा, जिससे 2030-31 से बिजली की आपूर्ति शुरू होने की संभावना है।

इसके अलावा, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ 4,200 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना की पहली इकाई के 2032 में चालू होने की उम्मीद है।

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राजनीति

नामांकन तिथि विवाद: वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

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विपक्षी उम्मीदवारों के खिलाफ हिंसा और बाधा डालने के आरोपों के मद्देनजर आंध्र प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने से इनकार करने वाले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित मामले की सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ बुधवार को सुबह 10:30 बजे इस मामले की सुनवाई करेगी।

संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें नामांकन प्रक्रिया के दौरान कथित व्यवधानों के मद्देनजर नामांकन प्राप्त करने की तिथि में एक दिन का विस्तार करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

वाईएसआरसीपी का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन, 16 अक्टूबर को, पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति सहित कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया था।

याचिका के अनुसार, कडप्पा में पार्टी के एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र कथित तौर पर जब्त कर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति में कई उम्मीदवारों को संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के कमरों में प्रवेश करने से शारीरिक रूप से रोका गया।

इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए यात्रा कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और सांसद पीवी मिथुन रेड्डी पर हमला किया गया।

वाईएसआरसीपी ने इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में पर्याप्त सुरक्षा वाले वैकल्पिक नामांकन केंद्रों के लिए निर्देश देने की मांग की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुरक्षित और निष्पक्ष नामांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने में विफलता संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

हालांकि, 15 अक्टूबर को एक एकल न्यायाधीश ने पार्टी द्वारा मांगी गई व्यापक राहत देने से इनकार कर दिया, जबकि धमकियों का सामना कर रहे व्यक्तिगत उम्मीदवारों को वैकल्पिक स्थानों पर नामांकन दाखिल करने की अनुमति के लिए संबंधित चुनाव अधिकारियों से संपर्क करने की अनुमति दी।

वाईएसआरसीपी ने बाद में अपील दायर की और नामांकन की समय सीमा बढ़ाने की मांग की, जिसमें कहा गया कि कथित बाधाओं के कारण उसके उम्मीदवार चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सके।

18 अक्टूबर को याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है और इस स्तर पर कोई भी निर्देश देना चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान होगा।

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