राजनीति
महाराष्ट्र: शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे की सीएम देवेंद्र फडणवीस को कॉल ने बाधाएं तोड़ दीं
मुंबई: यदि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक नहीं हुई होती, तो शिवसेना विधायकों को इस बात को लेकर बड़ी उलझन का सामना करना पड़ता कि वे मुख्यमंत्री से कैसे संपर्क करें।
मानो शिवसेना के विधायक इसी बात का इंतजार कर रहे थे, इसलिए उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लाइन में लगना शुरू कर दिया – जिससे नए राजनीतिक समीकरणों पर बहस शुरू हो गई। ठाकरे और फडणवीस के बीच 17 दिसंबर को नागपुर में मुलाकात हुई और कुछ देर के लिए दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया। इस मुलाकात के दौरान पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे।
अप्रत्याशित बैठक से निकले विभिन्न निष्कर्षों के अलावा, यह भी कहा गया कि वरिष्ठ ठाकरे दोनों नेताओं के बीच पांच साल से चली आ रही दुश्मनी को खत्म करना चाहते थे और अपने बेटे आदित्य और पार्टी नेताओं के बीच बातचीत की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए कोई रास्ता निकालना चाहते थे।
शिवसेना के एक नेता ने कहा, “चूंकि सीएम के पास अपार शक्ति और अधिकार हैं, इसलिए कोई भी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी खुद को लंबे समय तक दूर नहीं रख सकता। विधायकों के पास निपटने के लिए बहुत सारे मुद्दे हैं क्योंकि वे लोगों के प्रति जवाबदेह हैं और समस्याओं का समाधान सरकार के पास है।” उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठक जरूरी थी क्योंकि पार्टी के विधायक वैध कारणों से सीएम से मिलने में हिचकिचा रहे थे। उन्होंने कहा, “और, 17 दिसंबर की बैठक ने हमारे लिए बाधाएं तोड़ दीं।”
ठाकरे और सीएम के बीच बैठक के तुरंत बाद, सुनील प्रभु और अजय चौधरी जैसे कई शिवसेना विधायकों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मुद्दों के लिए सीएम से मुलाकात की। यहां तक कि आदित्य ठाकरे ने भी ज्ञापन सौंपने के लिए फडणवीस से मुलाकात की।
एक नेता ने चुटकी लेते हुए कहा, “अलग-अलग राजनीतिक सुर ऐसे हैं कि चर्चा हो रही है कि भाजपा इस नए रिश्ते का इस्तेमाल एकनाथ शिंदे पर अंकुश लगाने के लिए कर सकती है।”
भाजपा बीएमसी चुनाव में अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को भेजा नोटिस, 12वीं बोर्ड में कैलकुलेटर इस्तेमाल की मांग वाली याचिका पर मांगा जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। सीबीएसई के 12वीं कक्षा के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में साधारण, गैर-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीएसई सहित केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और परख (प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा एवं समग्र विकास के लिए ज्ञान का विश्लेषण) को भी नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले से संबंधित अगली सुनवाई 2 जनवरी 2027 को होगी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि दिसंबर 2024 में हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में सीबीएसई ने कक्षा बारहवीं की एकाउंटेंसी की परीक्षाओं में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने को मंजूरी दी थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पाठ्यक्रम समिति ने दिसंबर 2024 में इस एजेंडे को मंजूरी दे दी थी, लेकिन उसके बाद से इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी को लेकर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई, केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और परख को नोटिस भेजकर 12वीं बोर्ड की एकाउंटेंसी की परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा है।
इसके अतिरिक्त, सीबीएसई की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए एक और अहम खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इन दोनों कक्षाओं के छात्रों को पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान दर्ज की गई जानकारियों को अच्छे से चेक करने का निर्देश और उनमें सुधार करने का मौका अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके दिया है।
सीबीएसई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) जारी कर दी है, जिसमें स्टूडेंट्स अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल चेक कर सकते हैं। अगर छात्रों को अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल में कोई संशोधन करना है, तो वे स्कूल से संपर्क करके उसमें 7 नवंबर तक सुधार करवा सकते हैं।
स्टूडेंट्स ध्यान दें कि केवल वही छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जिनके नाम सीबीएसई की ओर से जारी एलओसी में होंगे।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई को भेजा नोटिस, 12वीं बोर्ड में कैलकुलेटर इस्तेमाल की मांग वाली याचिका पर मांगा जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। सीबीएसई के 12वीं कक्षा के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में साधारण, गैर-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीएसई सहित केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और परख (प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा एवं समग्र विकास के लिए ज्ञान का विश्लेषण) को भी नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले से संबंधित अगली सुनवाई 2 जनवरी 2027 को होगी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि दिसंबर 2024 में हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में सीबीएसई ने कक्षा बारहवीं की एकाउंटेंसी की परीक्षाओं में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने को मंजूरी दी थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पाठ्यक्रम समिति ने दिसंबर 2024 में इस एजेंडे को मंजूरी दे दी थी, लेकिन उसके बाद से इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी को लेकर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई, केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और परख को नोटिस भेजकर 12वीं बोर्ड की एकाउंटेंसी की परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा है।
इसके अतिरिक्त, सीबीएसई की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए एक और अहम खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इन दोनों कक्षाओं के छात्रों को पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान दर्ज की गई जानकारियों को अच्छे से चेक करने का निर्देश और उनमें सुधार करने का मौका अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके दिया है।
सीबीएसई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्रों के लिए लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) जारी कर दी है, जिसमें स्टूडेंट्स अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल चेक कर सकते हैं। अगर छात्रों को अपनी रजिस्ट्रेशन डिटेल में कोई संशोधन करना है, तो वे स्कूल से संपर्क करके उसमें 7 नवंबर तक सुधार करवा सकते हैं।
स्टूडेंट्स ध्यान दें कि केवल वही छात्र कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जिनके नाम सीबीएसई की ओर से जारी एलओसी में होंगे।
राजनीति
‘मस्जिद से एलर्जी है’, कदीमी मस्जिद मामले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना

एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नई दिल्ली में कृषि भवन कंपाउंड में मौजूद सौ साल पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसे मस्जिद से एलर्जी है।
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) के रीडेवलपमेंट के लिए नई दिल्ली में कृषि भवन कंपाउंड में मौजूद 100 वर्ष पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना होगा। सरकार का तर्क है कि मस्जिद ‘नाजायज है और सरकारी प्रॉपर्टी के सेक्युलर नेचर के साथ मेल नहीं खाती’। मोदी सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का उद्घाटन भूमि पूजा के साथ किया। साफ है, सेक्युलरिज्म को किसी पब्लिक प्रोजेक्ट के लिए एक धर्म के रीति-रिवाजों के इस्तेमाल से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उसे एक ऐसी मस्जिद से एलर्जी है जो 1912 से भी पहले से, कृषि भवन के बनने से बहुत पहले से वहां मौजूद है।”
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। अपने हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि कृषि भवन में मौजूद मस्जिद सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ है और इसे हटाया जाना चाहिए। बीते दिन केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को हटाने की जरूरत है, ताकि सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट मास्टर प्लान के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास हो सके। सरकार का कहना है कि यह निर्माण राष्ट्रीय महत्व की सर्वोपरि जन परियोजना है और प्रोजेक्ट साइट पर फिलहाल मस्जिद मौजूद होने से इसके कार्यान्वयन में बाधा आ रही है।
हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्पष्ट तर्क दिया है कि किसी भी केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर की सीमा के भीतर स्थायी धार्मिक ढांचा स्थापित करना, बनाए रखना या दावा करना अस्वीकार्य है और यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विपरीत है। सरकार ने कहा कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव एरिया में स्थित सार्वजनिक भूमि पर कोई स्थायी धार्मिक निर्माण नहीं हो सकता।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं, जो विशेष रूप से सरकारी, प्रशासनिक और जनसेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं। ऐसे में परिसर के भीतर धार्मिक ढांचे को बनाए रखना उचित नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि सीसीएस बिल्डिंग 4 और 5 का निर्माण सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का अहम हिस्सा है। इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट साइट पर मौजूद मस्जिद को हटाना जरूरी है।
केंद्र ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि कृषि भवन के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्तागंज स्थित है, जो आसपास के किसी भी व्यक्ति को नमाज की पूरी सुविधा प्रदान करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। ऐसे में कृषि भवन परिसर के भीतर अलग से मस्जिद की आवश्यकता नहीं है।
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