राजनीति
मध्य प्रदेश: राष्ट्रपति मुर्मू ग्वालियर में मंत्री सिंधिया के शाही जय विलास पैलेस में दोपहर के भोजन का आनंद लेंगे
ग्वालियर (मध्य प्रदेश): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ग्वालियर में मौजूदगी ने राजनीतिक विश्लेषकों के बीच उनकी यात्रा के निहितार्थों की जांच को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। मुर्मू के यात्रा कार्यक्रम में जय विलास महल का दौरा भी शामिल है। ग्वालियर में अपने प्रवास के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू दोपहर के भोजन में भाग लेंगी और स्थानीय संग्रहालय का भ्रमण करेंगी। यह ध्यान देने योग्य है कि मूल जिला प्रशासन कार्यक्रम में एयरबेस सेंटर से ट्रिपल आईटीएम की सीधी यात्रा के साथ राष्ट्रपति के लिए एक अलग एजेंडे की रूपरेखा तैयार की गई थी। पिछले अक्टूबर में गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा ने एक अमिट छाप छोड़ी, क्योंकि उन्होंने जय विलास पैलेस में काफी समय बिताया। राष्ट्रपति मुर्मू की ग्वालियर यात्रा एयरबेस पर उनके आगमन के साथ शुरू होती है, जिसके बाद जय विलास पैलेस में उनका औपचारिक स्वागत किया जाता है, जहां उनकी उपस्थिति का सम्मान करने के लिए कई कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है। इसके बाद, वह मराठा गैलरी और महल के अन्य हिस्सों का दौरा करेंगी और मराठा गैलरी के भीतर ग्वालियर के युवाओं के साथ बातचीत करेंगी। संग्रहालय के दौरे के बाद, दोपहर 1 बजे एक औपचारिक लंच का आयोजन किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल होंगे। दिन का समापन आईआईटीएम के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू की भागीदारी के साथ हुआ। यात्रा के दौरान मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस सहित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरानी शिक्षा मंत्री का दावा, ‘1,300 में से आधे से अधिक स्कूलों की मरम्मत पूरी’

अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक के बाद 40 दिन तक चले संघर्ष में ईरान की कई इमारतों और बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा। कई शैक्षिक संस्थान तबाह हो गए। इस बीच ईरान में शिक्षा व्यवस्था को बहाल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी ने कहा है कि संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए 1,300 स्कूलों में से 775 की मरम्मत अब तक पूरी कर ली गई है।
ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, शिक्षा मंत्री ने बताया कि करीब 20 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए थे, जबकि सबसे अधिक नुकसान तेहरान, केर्मानशाह, इस्फहान और होर्मोजगान प्रांतों में हुआ। उन्होंने कहा कि बुरी तरह से क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है।
काजेमी ने यह भी बताया कि हमलों के बावजूद देश में शैक्षिक गतिविधियां जारी रहीं। कई स्थानों पर कक्षाएं ऑफलाइन चलाई गईं, जबकि अन्य जगहों पर ऑनलाइन माध्यम अपनाया गया, जिसमें इरानियन टेलीविजन स्कूल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
छात्रों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही स्कूलों में उन 170 लोगों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो मिनाब स्थित शजराह तैयबा प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे। इनमें अधिकांश छात्राएं और शिक्षक थे। अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के पहले दिन (28 फरवरी) ही प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ। हमले का शिकार हुई बच्चियों की उम्र 7 से 12 बरस के बीच की बताई गई थी।
ईरान सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, ताकि युद्ध के असर को कम किया जा सके और छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
राष्ट्रीय समाचार
ऑपरेशन सिंदूर में क्रीक और रन के इलाके में भारतीय सेना के शौर्य की अनसुनी कहानी

ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो चुका है। पाकिस्तान की साजिशों को भारतीय सेना ने लद्दाख से लेकर गुजरात के भुज इलाके तक जमींदोज कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है, और तैयारियों को पिछले एक साल से लगातार धार दी जा रही है। इसी कड़ी में गुजरात के सबसे विषम इलाकों—क्रीक और रन—में भी सेना रोज पसीना बहा रही है। भारतीय सेना क्रीक के 96 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में अपनी हाई-स्पीड बोट के जरिए निगरानी को लगातार मजबूत बनाए हुए है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यही स्थिति रही और पिछले एक साल में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। क्रीक का पूरा इलाका सेना की 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड के अधीन आता है। ब्रिगेड कमांड ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उठाए गए कदमों का खुलासा किया। ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने बताया कि शुरुआती चरणों में उन्होंने तेजी से सेना की तैनाती कर सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही, उन्होंने संतुलित और सुदृढ़ तैनाती बनाए रखी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी आक्रामक ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सके।
ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने यह भी बताया कि 7 से 12 मई के बीच पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए हमारे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की। इसका जवाब भारतीय सेना ने सभी एजेंसियों के साथ मिलकर मुंहतोड़ तरीके से दिया। एक मजबूत और बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया, जिसमें एंटी-ड्रोन सिस्टम, आर्मी एयर डिफेंस के दस्ते और इंटीग्रेटेड सर्विलांस टीमें शामिल थीं। इन सभी ने मिलकर दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर दिया और रन-क्रीक जैसे संवेदनशील इलाके में होम ऑपरेशन कंट्रोल स्थापित करने में भी मदद की।
अगर 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड की बात करें तो यह देश की एक अनोखी फॉर्मेशन है, जिसमें इंफैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और आर्मी इंजीनियर्स एक साथ शामिल हैं। पैंगोंग झील में पेट्रोलिंग करने वाली आर्मी की हाई-स्पीड पेट्रोल बोट क्रीक इलाके में भी तैनात हैं। इनका मुख्य कार्य बीएसएफ और कोस्ट गार्ड के साथ मिलकर क्रीक क्षेत्र में पेट्रोलिंग करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यह भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा है और यहां विवाद भी पुराना है, इसलिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स शांतिकाल में निगरानी करती है, जबकि भारतीय सेना दूसरी परत (सेकेंड लेयर) के रूप में तैनात रहती है। युद्ध के समय सेना बीएसएफ उसके साथ मिलकर नेतृत्व संभालती है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरता और सूझबूझ के लिए कई सैनिकों को सम्मानित भी किया गया। एक सैनिक ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तानी ड्रोन को न केवल ट्रैक किया, बल्कि उन्हें मार गिराया। भारतीय सेना की एयर डिफेंस गन एल-70 ने पाकिस्तान की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया। पाकिस्तान की ओर से इस इलाके में लगभग 100 ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जिन्हें विफल कर दिया गया।
अगर पूरे पश्चिमी सीमा की बात करें तो भारतीय सेना के एयर डिफेंस गन और मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के 600 से अधिक ड्रोन मार गिराए, जिसमें एल-70 की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कच्छ क्षेत्र में तैनात एयर डिफेंस यूनिट के कमांडिंग अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिट ने तेजी से कार्रवाई की और तुरंत सक्रिय हो गई।
राजस्थान और कच्छ सेक्टर में सेना और महत्वपूर्ण नागरिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। 7 मई तक सभी एयर डिफेंस सिस्टम और टुकड़ियां पूरी तरह ऑपरेशनल तैनाती में आ चुकी थीं।अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के ड्रोन को लगातार मार गिराया गया और पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं हुआ। पाकिस्तान को उसकी गुस्ताखी का सबक सिखाने के लिए भारतीय टैंक और तोपों को भी अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया था। रन के इलाके में आवश्यकता पड़ने पर ऐसा जवाब दिया जाता कि दुश्मन उसे कभी भूल नहीं पाता।
महाराष्ट्र
मुंबई में मसाला दुकान से चोरी करने के आरोप में कर्मचारी यूपी से गिरफ्तार, कैश बरामद

पुलिस ने दावा किया है कि उसने मुंबई के काला चौकी इलाके में एक मसाले की दुकान से 13,86,200 रुपये चुराने वाले एक कर्मचारी चोर को यूपी के अयोध्या से गिरफ्तार किया है। काला चौकी इलाके में मसाले की दुकान पर 8 दिनों से जमा किए गए पैसे अनाज में रखे गए थे और अगले दिन शिकायतकर्ता दुकान मालिक ने अनाज में पैसे ढूंढे लेकिन नहीं मिले। उसके बाद उसने पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस ने जांच की तो पाया कि दुकान पर काम करने वाला कर्मचारी सुबह से गायब था, जिससे पुलिस को शक हुआ और पुलिस ने अजय कुमार श्याम सुंदर को यूपी के अयोध्या से गिरफ्तार कर लिया और उसके पास से 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश बरामद किया। इस ऑपरेशन को मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर डीसीपी रागसुधा ने सुलझाया और पुलिस ने आरोपी को यूपी से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
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