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Saturday,28-March-2026
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सचिन के संन्यास के बाद आईपीएल देखना छोड़ दिया : सुषमा वर्मा

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Sushma-varma

 महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने पूरे विश्व के प्रशंसकों के दिल पर राज किया है। कई ऐसा प्रशंसक मिल जाएंगे, जिन्होंने सचिन के संन्यास के बाद क्रिकेट देखना छोड़ दिया।

भारत की महिला क्रिकेटर सुषमा वर्मा भी ऐसी ही एक प्रशंसक हैं। 27 साल की सुषमा ने बताया है कि वो मुंबई इंडियंस की बहुत बड़ी प्रशंसक हुआ करती थीं, लेकिन सचिन के संन्यास के बाद उन्होंने आईपीएल देखना छोड़ दिया।

सुषमा ने आईएएनएस से कहा, “मैं अब ज्यादा आईपीएल नहीं देखती हूं। जब सचिन मुंबई इंडियंस के लिए खेला करते थे, तब मैं देखा करती थी।”

उन्होंने बताया कि वो टेस्ट क्रिकेट देखना पसंद करती हैं।

भारत के बाकी क्रिकेट प्रशंसक की तरह ही सुषमा भी सचिन की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं। हिमाचल प्रदेश की रहने वाली सुषमा सचिन को बल्लेबाजी करते देखने के लिए धर्मशाला पहुंची थीं, लेकिन वो वहां से निराश होकर लौटीं।

उन्होंने बताया, “मैं सचिन तेंदुलकर को काफी मानती हूं। एक बार मैं मुंबई इंडियंस का मैच देखने के लिए धर्मशाला पहुंची थी और मैं उम्मीद कर रही थी कि सचिन खेलेंगे, लेकिन वो नहीं खेले। तब से मैंने फैसला कर लिया कि दोबारा आईपीएल नहीं देखूंगी।”

भारतीय महिला क्रिकेट टीम में वापसी की राह तलाश रहीं, विकेटकीपर सुषमा ने बताया कि वो हाल ही में संन्यास लेने वाले महेंद्र सिंह धोनी की भी बड़ी प्रशंसक हैं। उन्होंने वो किस्सा याद किया जब उन्हें भारत के महानतम कप्तानों में से एक से मिलने का मौका मिला था।

सुषमा ने कहा, “मैं धोनी से पूरी टीम के साथ मिली थी। मैंने अपना परिचय दिया कि मैं भी विकेटकीपर हूं। उन्होंने मुझसे कहा कि अच्छा काम जारी रखो। मुझे उनकी बल्लेबाजी की शैली काफी पसंद है, वो महान भारतीय कप्तान रहे हैं।”

27 साल की सुषमा ने एक टेस्ट मैच, 38 वनडे और 19 टी-20 मैच खेले हैं।

राष्ट्रीय

मुंबई में ईडी ने की 3.46 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क, मल्टीस्टेट सोसायटी घोटाले से जुड़ा मामला

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मुंबई, 27 मार्च : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल कार्यालय ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत 3.46 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड (डीएमसीसीएसएल) और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है।

गुरुवार को कुर्क की गई संपत्तियां नवी मुंबई के खारघर क्षेत्र में स्थित ऑफिस यूनिट्स हैं, जिन्हें कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया बताया जा रहा है।

ईडी की यह जांच महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन एफआईआर में सुरेश कुटे और अन्य के खिलाफ निवेशकों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि डीएमसीसीएसएल के माध्यम से आकर्षक जमा योजनाएं चलाई गईं, जिनमें निवेशकों को 12 से 14 प्रतिशत तक उच्च रिटर्न का लालच दिया गया। इन योजनाओं में बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया, लेकिन बाद में उन्हें या तो भुगतान नहीं मिला या आंशिक भुगतान किया गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

ईडी की विस्तृत जांच में यह सामने आया कि सोसायटी के फंड का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 2,467 करोड़ रुपए “लोन” के रूप में कुटे ग्रुप की कंपनियों को ट्रांसफर किया गया था। इस समूह का नियंत्रण सुरेश कुटे और उनकी पत्नी अर्चना कुटे के पास था।

जांच एजेंसी के अनुसार, ये लोन बिना किसी पर्याप्त दस्तावेज, कोलैटरल सिक्योरिटी या फंड के अंतिम उपयोग के प्रमाण के दिए गए थे। आगे यह भी पाया गया कि इन फंडों का उपयोग वैध व्यावसायिक गतिविधियों में करने के बजाय निजी लाभ के लिए निकासी या अन्य असंबंधित व्यावसायिक निवेशों में किया गया।

इस मामले में अब तक ईडी ने कई स्थानों पर छापेमारी की है और कई अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल लगभग 1,625.36 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त, फ्रीज या कुर्क किया जा चुका है। इससे पहले ईडी ने मुख्य आरोपी सुरेश कुटे को गिरफ्तार किया था और मुंबई स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दायर की थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान ले लिया है।

2 मार्च 2026 को ईडी ने अर्चना कुटे को भी गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद उन्हें 7 मार्च 2026 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल इस बहुचर्चित वित्तीय घोटाले में आगे की जांच जारी है और एजेंसी अन्य संबंधित व्यक्तियों एवं संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है।

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राष्ट्रीय

पीएम मोदी 31 मार्च को बनासकांठा में कई प्रोजेक्ट की देंगे सौगात, अंबाजी पेयजल परियोजना भी शामिल

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बनासकांठा, 27 मार्च : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे, जिनमें बनासकांठा जिले के अंबाजी और आसपास के आदिवासी इलाकों के लिए एक बड़ी पेयजल योजना भी शामिल है।

यह अंबाजी पेयजल परियोजना करीब 141 करोड़ रुपए की है। इसके पहले और दूसरे चरण का उद्घाटन किया जाएगा। इस योजना से अंबाजी शहर और 34 गांवों के लगभग 78,000 लोगों को फायदा होगा।

यह योजना डांटा और अमीरगढ़ तालुका के गांवों को कवर करती है। ये इलाके पहाड़ी और पथरीले होने के कारण लंबे समय से पीने के पानी की समस्या झेल रहे हैं। अभी यहां के लोग ज्यादातर भूजल (ग्राउंडवॉटर) पर निर्भर हैं।

जल आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना भूजल के बजाय सतही जल (नदियों, नहरों आदि का पानी) पर आधारित होगी, जिससे लोगों को बेहतर और साफ पानी मिलेगा और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

अंबाजी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए इस योजना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि आगे भी पानी की कमी न हो।

अधिकारियों ने बताया कि गुजरात सरकार पानी प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। यह योजना ‘स्टेटवाइड वॉटर सप्लाई ग्रिड’ का हिस्सा है।

इस ग्रिड के तहत अब तक 3,300 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिससे 15,000 से अधिक गांवों और 251 शहरों को पानी मिल रहा है। इससे करीब 5 करोड़ लोगों को फायदा हुआ है।

राज्य ने नदियों, नहरों और जलाशयों पर आधारित योजनाओं से भूजल पर निर्भरता भी कम की है।

इसके अलावा, जल जीवन मिशन के दूसरे चरण में बाकी ग्रामीण इलाकों तक पानी पहुंचाने का काम तेज किया जाएगा। लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी शुरू की गई है।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान के विदेश मंत्री ने यूएस-इजरायल पर नरसंहार का लगाया आरोप, बोले-‘यूएन का बुनियादी मूल्य संकट में है’

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तेहरान, 27 मार्च : ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर नरसंहार करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के तमाम देशों से अमेरिका-इजरायल के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए अराघची ने शुक्रवार दोपहर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को बताया कि ईरान के मिनाब में शजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुए क्रूर हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसे दबाया जा सकता है। इस पर चुप्पी और बेपरवाही से नहीं देखा जाना चाहिए। यह हमला जानबूझकर बेरहमी से किया गया था। संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार का पूरा ढांचा गंभीर खतरे में हैं।

विदेश मंत्री अराघची ने कहा, “ईरान खुद को दो जबरदस्ती करने वाली न्यूक्लियर सरकारों यानी अमेरिका और इजरायल, की तरफ से थोपे गए एक गैर-कानूनी युद्ध के बीच में पाता है। यह हमला साफ तौर पर बिना किसी वजह के और बहुत बेरहम है। उन्होंने यह हमला 28 फरवरी को शुरू किया जब ईरान और अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अमेरिका की कही जा रही चिंताओं को हल करने के मकसद से एक डिप्लोमैटिक प्रक्रिया में लगे हुए थे। नौ महीने में दूसरी बार, उन्होंने बातचीत को रोककर और पटरी से उतारकर डिप्लोमेसी को धोखा दिया।”

उन्होंने कहा कि इस हमले के सबसे डरावने उदाहरणों में से एक दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर सोची-समझी और धीरे-धीरे किया गया हमला था, जहां 175 से ज्यादा स्टूडेंट्स और टीचर्स को जानबूझकर और बेरहमी से मार डाला गया था। यह हमला केवल एक बड़े संकट की झलक भर है, जिसके पीछे कहीं अधिक गंभीर अत्याचार छिपे हुए हैं। इसमें मानवाधिकारों और मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघनों को सामान्य बना देना और बिना सजा के जघन्य अपराध करने की हिम्मत शामिल है।

अराघची ने कहा कि अमेरिका और इजरायल हमेशआ खुद को सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सबसे सटीक सैन्य और डेटा सिस्टम होने का दावा करते हैं। ऐसे में अगर वो यह कहते हैं कि ये हमला जानबूझकर और पहले से प्लान किया गया नहीं था, तो इसे माना नहीं जाना चाहिए। उम्होंने कहा कि स्कूल को टारगेट करना एक वॉर क्राइम और इंसानियत के खिलाफ एक ऐसा अपराध है जिसकी सभी को साफ और बिना शर्त निंदा करनी चाहिए। इसके अपराधियों की साफ और साफ जवाबदेही तय करनी चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्री ने वीडियो जारी कर कहा कि इस दुखद घटना को न तो सही ठहराया जा सकता है, न ही छिपाया जा सकता है, और न ही इसे चुपचाप या नजरअंदाज करके देखा जाना चाहिए। मिनाब में शजारेह तैयबेह स्कूल पर हमला न तो कोई हादसा था और न ही कोई गलत अंदाजा। इस जुर्म को सही ठहराने की कोशिश में अमेरिका के उलटे-सीधे बयान किसी भी तरह से उन्हें जिम्मेदारी से बरी नहीं करते। एक आम नागरिक जगह पर ऐसे बेरहम हमले की बुराई करना, जहां सबसे मासूम लोग शिक्षा की तलाश में इकट्ठा होते हैं, यह सिर्फ मानवाधिकार के दायरे में एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है; यह एक नैतिक और जरूरी बात है। हमारी अंतरात्मा हमें किसी भी अदालत से कहीं ज्यादा गहराई से जज करेगी।

उन्होंने कहा, “शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल इस गैर-कानूनी युद्ध के पिछले सत्ताईस दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए घिनौने जुर्मों का अकेला शिकार नहीं है। हमलावरों ने मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बड़े पैमाने पर और सिस्टमैटिक तरीके से, पहले कभी नहीं देखे गए और बहुत बेरहम तरीके से उल्लंघन किया है। युद्ध के कानूनों या इंसानियत और सभ्यता के बुनियादी उसूलों की कोई परवाह किए बिना, उन्होंने आम लोगों और आम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। पूरे ईरान में 600 से ज्यादा स्कूल तबाह हो गए हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण हजार से ज्यादा छात्र और शिक्षक मारे गए या घायल हुए हैं। हमलावर घमंड से कोई रहम नहीं, कोई राहत नहीं का नारा लगाते हैं। वो ईरान के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की धमकी देते हैं, उन्होंने अस्पतालों, एम्बुलेंस, मेडिकल कर्मचारियों, रेड क्रिसेंट के मदद करने वाले कर्मचारियों, रिफाइनरियों, पानी के सोर्स और रहने की जगहों को निशाना बनाया है।”

अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए, उन्होंने कहा कि सिर्फ “वॉर क्राइम” और “मानवता के खिलाफ अपराध” शब्द उनके किए जा रहे जुल्मों की गंभीरता को बताने के लिए काफी नहीं हैं। टारगेट करने का तरीका और उनकी बयानबाजी, इस बात में कोई शक नहीं छोड़ती कि उनका साफ इरादा नरसंहार करना है।

अराघची ने कहा, “ईरान के नेक लोगों के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का यह गलत और मनमाना युद्ध, कब्जे वाले फिलिस्तीन, लेबनान और दूसरी जगहों पर पहले हुई अराजकता और अपराधों के सामने चुप्पी का सीधा नतीजा है। नाइंसाफी के सामने बेपरवाही और चुप्पी कभी भी शांति और सुरक्षा नहीं लाएगी; बल्कि, इससे और ज्यादा असुरक्षा और अधिकारों का और ज्यादा उल्लंघन होगा। संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार का पूरा ढांचा गंभीर खतरे में हैं।

ईरानी विदेश मंत्री ने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका-इजरायल के हमले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा, “आप सभी को हमलावरों की खुलकर निंदा करनी चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि देशों का समुदाय और इंसानियत की सामूहिक अंतरात्मा उन्हें ईरान के लोगों के खिलाफ किए जा रहे भयानक अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराएगी। ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। ईरानी लोग एक शांतिप्रिय और इज्जतदार देश हैं, जो दुनिया की सबसे अमीर सभ्यताओं में से एक के वारिस हैं। हालांकि, उन्होंने बेरहम हमलावरों के खिलाफ खुद का बचाव करने का पक्का इरादा और संकल्प दिखाया है, जो अपराध करने की कोई सीमा नहीं मानते; यह बचाव तब तक जारी रहेगा जब तक जरूरी है।”

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