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Friday,04-April-2025
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राष्ट्रीय समाचार

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भुवनेश्वर में डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस को दी धमकी, सुरक्षा कड़ी

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भुवनेश्वर, 28 नवंबर: अमेरिका स्थित खालिस्तान समर्थक आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने शुक्रवार से भुवनेश्वर में होने जा रहे तीन दिवसीय पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के सम्मेलन-2024 को बाधित करने की धमकी वाला एक वीडियो जारी किया है।

प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) संगठन के संस्थापक ने गुरुवार को जारी एक वीडियो में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को “बुराई की धुरी” कहा, जो भुवनेश्वर में सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा लेकर आ रहे हैं।

“भुवनेश्वर मंदिरों का शहर नहीं बल्कि आतंक का शहर है जहाँ CISF, BSF, सीआरपीएफ, NSG, NIA और IB के 200 भारतीय आतंकवादी अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक कर रहे हैं, जिन्होंने साहिद निज्जर की हत्या का निर्देशन और समन्वय किया था। हिंसक हिंदुत्व विचारधारा के प्रभाव में खालिस्तान समर्थक सिखों, कश्मीरी लड़ाकों, नक्सलियों और माओवादियों की हत्याओं की साजिश रचने वाले डीजीपी आतंकी सम्मेलन को बाधित करें और रोकें,” पन्नू ने वीडियो में कहा।

पन्नुन ने कहा, “नक्सलियों, माओवादियों, कश्मीरी लड़ाकों, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप अपने मुद्दों का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने के लिए भुवनेश्वर के मंदिरों और होटलों में शरण लें।”

यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए राज्य की राजधानी को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है।

बुधवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “देश भर में वीवीआईपी और प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपाय किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। बीएसएफ/सीआरपीएफ/त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) की तैनाती और पूरी तरह से तोड़फोड़ विरोधी जांच के साथ व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। विभिन्न क्षेत्रों में गश्त और नाकाबंदी बढ़ा दी गई है। पूरे शहर में सीसीटीवी निगरानी और मानव खुफिया टीमों को तैनात किया गया है।”

तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए अजीत डोभाल, खुफिया ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी, सभी राज्यों के डीजीपी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के प्रमुख शामिल होंगे।

राष्ट्रीय समाचार

झारखंड हाईकोर्ट के त्योहारों के दौरान बिजली नहीं काटने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रोका

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नई दिल्ली/रांची, 4 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में रामनवमी सहित अन्य त्योहारों के दौरान बिजली काटने पर रोक लगाने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट की ओर से 3 अप्रैल को जारी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

झारखंड सरकार के निर्देश पर राज्य बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) त्योहारों पर निकलने वाली शोभायात्रा या जुलूस में शामिल लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर एहतियात के तौर पर कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बंद कर देता है। 1 अप्रैल, 2025 को सरहुल त्योहार की शोभायात्रा के दौरान भी रांची में पांच से दस घंटे तक बिजली काटी गई थी।

इस पर झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रौशन ने 3 अप्रैल को स्वतः संज्ञान लेते हुए त्योहारों के दौरान बिजली आपूर्ति बंद करने के झारखंड सरकार के निर्देश पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार और जेबीवीएनएल से पूछा था कि सरहुल के दिन घंटों बिजली आपूर्ति बाधित क्यों रही? इससे होने वाली परेशानी को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया? बिजली काटे जाने से लोगों को होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए क्या वैकल्पिक उपाय किए जाते हैं?

हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की।

झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि रामनवमी के जुलूस में लोग लंबे झंडे लेकर चलते हैं, जिससे करंट लगने की आशंका बनी रहती है। पूर्व में झारखंड में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिजली कटौती केवल शोभायात्रा मार्गों तक सीमित रहे और उसे न्यूनतम स्तर पर रखा जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं की बिजली आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।

शीर्ष अदालत ने जेबीवीएनएल के प्रबंध निदेशक को यह अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया है कि कम समय के लिए बिजली काटी जाएगी और अस्पताल एवं अन्य जरूरी सेवा वाली संस्थाओं को बिजली आपूर्ति की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई आठ अप्रैल को मुकर्रर की है।

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राजनीति

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले पर राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

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नई दिल्ली, 4 अप्रैल। राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को प्रारंभ होने के कुछ देर बाद ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले को सदन में उठाया। भाजपा सांसदों का कहना था कि पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि पश्चिम बंगाल में शिक्षक और गैर शिक्षक भर्ती में अनियमितता बरती गई।

इस विषय पर सदन में काफी हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

भाजपा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल में 25 हजार शिक्षकों और गैर-शिक्षक पदों पर बहाली हुई थी। अनियमितताओं को देखते हुए पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने भर्तियां निरस्त कर दी थीं। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी चीफ जस्टिस की बेंच ने हाईकोर्ट के निर्णय को यथावत रखा है। इसके साथ कोर्ट ने कहा कि हटाए गए कर्मचारियों से वेतन की रिकवरी न की जाए। पश्चिम बंगाल की सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ अन्याय किया है। पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को कलंकित किया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने वहां स्थापित नियमों और कानून का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर यह बात साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनका केवल इतना कहना है कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने ओबीसी के साथ अन्याय किया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे को पूरा नहीं किया गया।

उन्होंने जैसे ही अपनी बात पूरी की, सदन में एक बार फिर जमकर हंगामा शुरू हो गया। दोनों ओर से सांसदों ने नारेबाजी की। इस विषय पर सदन में जमकर हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की।

सदन में हो रहे जबरदस्त हंगामे के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन को अपनी बात रखने का अवसर दिया। सदन में हो रहे जबरदस्त हंगामा के बीच डेरेक ने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि सत्ता पक्ष से जुड़े भाजपा सांसद सदन में नारेबाजी और हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस बीच सदन में हंगामा बढ़ता चला गया, जिसके चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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अपराध

झारखंड में आयुष्मान भारत घोटाले में रांची सहित 21 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

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रांची, 4 अप्रैल। आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने रांची में शुक्रवार सुबह से कई स्थानों पर छापेमारी शुरू की है। शहर के अशोक नगर, पीपी कंपाउंड, एदलहातु, बरियातू, लालपुर और चिरौंदी इलाके में कई ठिकानों पर कड़ी सुरक्षा के बीच तलाशी चल रही है।

बताया जा रहा है कि रांची के अलावा कुल 21 ठिकानों पर यह रेड चल रही है। ईडी ने आयुष्मान भारत योजना में झारखंड में हुई गड़बड़ियों को लेकर हाल में ईसीआईआर (इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज कर जांच शुरू की है। यह छापेमारी इसी मामले में उन लोगों के खिलाफ की जा रही है, जिनके घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त होने की संभावना है।

एक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के दफ्तर में भी तलाशी की जा रही है। संसद में पेश भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट (सीएजी) में भी आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ियों का खुलासा किया गया था। इसमें बताया गया था कि झारखंड में भी कई अस्पतालों ने मरीजों के फर्जी इलाज का बिल बनाकर सरकार से करोड़ों की राशि का भुगतान ले लिया।

यहां तक कि कई ऐसे लोगों के इलाज के नाम पर राशि निकाली गई, जिनकी मौत हो चुकी थी। सीएजी की इस रिपोर्ट के बाद ईडी ने झारखंड स्टेट हेल्थ सोसायटी और स्वास्थ्य विभाग से आयुष्मान योजना में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने कुछ अस्पतालों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर की सूचना ईडी को भेजी थी।

बताया जा रहा है कि ईडी ने इसी एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर के रूप में दर्ज कर जांच शुरू की है। झारखंड में आयुष्मान योजना के तहत करीब 750 से अधिक अस्पताल सूचीबद्ध हैं। इनमें से कई अस्पतालों में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा करने की शिकायतें हैं।

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