राजनीति
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई दिल्ली के लिए रवाना, शीर्ष नेताओं से कर सकते है मुलाकात
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई 13 दिसंबर से होने वाले शीतकालीन विधानसभा सत्र से पहले गुरुवार को नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए है। मुख्यमंत्री बोम्मई के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहले वह दो दिवसीय यात्रा पर जा रहे थे। हालांकि एयरपोर्ट के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह गुरुवार शाम तक लौट आएंगे।
उनकी बार-बार नई दिल्ली की यात्राएं भी राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई हैं।
बोम्मई के शीर्ष नेताओं से मिलने और बिटकॉइन घोटाले, ठेकेदारों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों और इसरो कार्यक्रम को बेंगलुरु से गुजरात स्थानांतरित करने पर सत्र के दौरान विपक्ष से निपटने के लिए उनका मार्गदर्शन लेने की संभावना है।
कांग्रेस खेमा उत्साहित है और राज्य में 2023 के आगामी चुनावों के लिए इन मुद्दों को उठाकर सत्ताधारी पार्टी की छवि को धूमिल करने के लिए सत्र की प्रतीक्षा कर रहा है।
सत्तारूढ़ भाजपा खेमा विभाजित है। सूत्रों ने कहा कि वह शीर्ष नेतृत्व से भाजपा नेताओं की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कह सकते हैं।
उनका एक निजी टेलीविजन चैनल कार्यक्रम में भाग लेने का भी कार्यक्रम तय है। उनके केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की संभावना है। वह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ फ्रंटलाइन वर्कर्स को बूस्टर डोज देने पर भी चर्चा करेंगे। बोम्मई कृष्णा नदी जल बंटवारे और मेकेदातु परियोजना सहित अंतर्राज्यीय जल विवादों पर चर्चा के लिए जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेकावत से मिलने की भी योजना बना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।
बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”
प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”
हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”
राष्ट्रीय समाचार
तिरंगा फहराने पर गिरफ्तारी को लेकर ‘आप’ बोली- क्या अपने ही देश में झंडा फहराना अपराध है?

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा है। पार्टी ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। आप नेताओं ने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की और आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि क्या अब अपने ही देश में तिरंगा फहराना भी अपराध हो गया है? उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को हास्यास्पद बताते हुए इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने सवाल किया कि क्या देश में अंग्रेजों का शासन चल रहा है, जो तिरंगा फहराने और भारत माता की जय के नारे लगाने पर युवाओं को जेल भेजा जा रहा है?
संजय सिंह के अनुसार, सीजेपी नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए थे। उन्होंने कहा कि देश के युवा आगे भी भारत माता की जय बोलेंगे और तिरंगा फहराएंगे। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजकर सरकार युवाओं की आवाज दबाने में सफल नहीं होगी। संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी कार्रवाइयों से लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर जनता की आवाज को रोका नहीं जा सकता।
आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की। उन्होंने कहा कि उस समय भी चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप, छात्र और मजदूर आंदोलन, आर्थिक संकट तथा राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा में थे। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में भी चुनावी धांधली के आरोपों, युवाओं के आंदोलनों और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले युवाओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। उन्होंने आगे कहा कि 1975 के आपातकाल के दौरान राज नारायण और मोरारजी देसाई जैसे नेताओं समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
भारद्वाज के अनुसार, मौजूदा समय में भी विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार औपचारिक रूप से आपातकाल घोषित किए बिना भी ऐसे कदम उठा सकती है, जिनसे लोकतांत्रिक गतिविधियां प्रभावित हों। सौरभ भारद्वाज ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेश नीति और भाजपा के आंतरिक राजनीतिक हालात को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि देश आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और चीन की ओर से लद्दाख पर किए जा रहे दावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। भारद्वाज ने भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर कथित मतभेदों का भी जिक्र किया। तिरंगा फहराने के मामले में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को लेकर आम आदमी पार्टी ने इसे नागरिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा के हालात नाजुक, पुलिस फायरिंग में एक शख्स की मौत

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रांत में आपातकाल लागू होने के बाद राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
संघीय सरकार की ओर से रविवार को आपातकाल की घोषणा और खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने के बाद हालात बिगड़ गए हैं। इस कदम से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित हो गया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में सड़क पर गोलीबारी होती दिखाई दे रही है। वीडियो में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी लोगों का पीछा करते नजर आ रहे हैं, जबकि कई लोग जान बचाने के लिए भागते दिख रहे हैं। एक अन्य वीडियो में पुलिसकर्मियों को लाठियों से लोगों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि मंगलवार को गवर्नर शासन के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रांत के बारा बाजार इलाके में राष्ट्रीय डेटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (नादरा) के एक कार्यालय में आग लगा दी। इस दौरान कथित तौर पर 15 पुलिसकर्मियों को भी बंधक बना लिया गया।
पीटीआई के विधायक इकबाल अफरीदी ने दावा किया कि हिंसा में पार्टी के 11 कार्यकर्ता घायल हुए और एक की मौत हो गई। पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, इन हताहतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
खैबर जिले के पुलिस अधिकारी वकार अहमद के मुताबिक, मंगलवार दोपहर पीटीआई के सैकड़ों समर्थक गवर्नर शासन के विरोध में बारा बाजार में एकत्र हुए थे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कथित तौर पर गोलियां चलाईं। इसके बाद प्रदर्शनकारी कुछ समय के लिए वहां से हट गए।
करीब 90 मिनट बाद तनाव फिर बढ़ गया, जब प्रांतीय विधानसभा के सदस्य अब्दुल गनी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों का एक और बड़ा समूह मीनार चौक से बारा चौक की ओर मार्च करते हुए पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए।
वकार अहमद ने बताया कि चौराहे पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और यातायात संकेतकों में आग लगा दी।
इसके बाद हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने तहसील नगरपालिका कार्यालय के भीतर 15 पुलिसकर्मियों को बंद कर दिया और उनके हथियार तथा वर्दियां अपने कब्जे में ले लीं।
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि कम से कम पांच प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अशांति फैलाने की कथित कोशिश के आरोप में 50 लोगों को गिरफ्तार भी किया।
हालांकि, पेशावर के तीन प्रमुख अस्पतालों में शामिल हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स के एक डॉक्टर ने ‘डॉन’ को बताया कि अस्पताल में एक दर्जन से अधिक घायलों को लाया गया है। इनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
प्रदर्शन खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में किए गए। इस फैसले के बाद पीटीआई नेता सोहेल अफरीदी की प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में भूमिका भी प्रभावहीन हो गई है।
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