राष्ट्रीय
उद्योगों पर निवेश करने के लिए कर्नाटक सर्वश्रेष्ठ: सीतारमण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि चीन और यूरोप से बाहर जाने वाले उद्योगों के लिए कर्नाटक निवेश के लिए सबसे अच्छी जगह है। सीतारमण तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट (जीआईएम) के उद्घाटन सत्र में अपना भाषण दे रही थीं। उन्होंने समझाते हुए कहा- वह अन्य गंतव्यों की ओर बढ़ रहे हैं जो केवल कर प्रोत्साहन से अधिक की पेशकश कर रहे हैं। कर्नाटक देश में प्रमुख रोजगार जनरेटर है। राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 8.8 प्रतिशत का योगदान करते हुए, जबकि इसकी जनसंख्या कुल राष्ट्रीय जनसंख्या का सिर्फ पांच प्रतिशत है, सभी औपचारिक नौकरियों में से 10 प्रतिशत यहां सृजित होते हैं।
मंत्री ने कहा- मैं सभी निवेशकों को आश्वस्त करना चाहती हूं कि राज्य पूरी तरह से बहुत फुर्तीला है, नीतियों को वैश्विक विकास के साथ ऐसे समय में रखा जाता है जब आप सभी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस राज्य ने अपनी पिछली उपलब्धियों से खुद को प्रदर्शित किया हैं और यह आश्वासन दिया है कि अब भी और अगले 25 वर्षों तक अमृत काल के दौरान, कई निवेशकों के भारत में आने के लिए, यहां से पूरे विश्व में कर्नाटक एक आवश्यक आधार होगा।
उन्होंने कहा- मैं विश्व स्तर पर भारत के आसपास जो कुछ भी विकसित हो रहा है, उससे भी आकर्षित करना चाहूंगा। हर तरफ अनिश्चितता का माहौल जरूर है। भारी मात्रा में चुनौतियां, जो केवल भारत के लिए नहीं है, दुनिया के हर देश को लगता है कि प्रतिकूलता निश्चितता की भावना के बहुत मजबूत तत्व हैं जो पूरी तरह से अनुपस्थित हैं, यहां तक कि हम सभी चीन प्लस वन के बारे में बात करने लगे।
वित्त मंत्री ने कहा- जब आप मूल्य श्रृंखलाओं में विविधता लाना चाहते थे, या जब आप यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि आपके द्वारा उत्पादित कच्चे माल या मध्यस्थ उत्पादों के लिए एक से अधिक स्रोत हैं। आपके पास युद्ध की वैश्विक स्थिति थी। युद्ध, विशेष रूप से उन देशों से, जिन्होंने कच्चे माल की आपूर्ति की, चाहे वह ईंधन, उर्वरक या भोजन से संबंधित हो। तो, आपके पास ये देश युद्ध में हैं जो विशेष रूप से ईंधन और भोजन के क्षेत्र में दुनिया के लिए असुरक्षा पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा- परिणामस्वरूप, देश दुनिया के विभिन्न हिस्सों से इन सामग्रियों के स्रोत के लिए खुद को समायोजित कर रहे हैं। इसका उद्योगों, अर्थव्यवस्था, व्यापार और वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ा है। इन व्यवधानों के परिणाम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में देखे गए थे जो कि मध्यवर्ती उत्पादों के लिए कच्चे माल के आवश्यक स्रोत, जो उभरते बाजारों के लिए बाजार थे..सभी भारी मंदी के संदेह से गुजर रहे हैं।
वे तकनीकी रूप से मंदी की दहलीज पर हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में इस पर कोई सस्पेंस या सदमे से बाहर नहीं हैं कि क्या वे भविष्य में और कठोर मंदी में आ जाएंगे.. इन सभी अनिश्चितताओं के साथ, मैं इसे आपके सामने रखने के लिए यहां हूं क्योंकि सावधानीपूर्वक योजना, लक्षित सुविधा और राजकोषीय विवेक के कारण, प्रधानमंत्री ने सामने से नेतृत्व किया और यह सुनिश्चित किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहर के इन विकासों से गंभीर रूप से खतरा नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप, 2020 और आज के बीच, हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं जहां चुनौतियां जारी हैं, नई चुनौतियां भी बन रही हैं। लेकिन, भारत शांत द्वीप के रूप में बना हुआ है। हमारी अपनी चुनौतियां होंगी लेकिन अन्य देशों के रूप में नहीं जैसा कि वे सोचते हैं कि भारत को इससे खतरा होगा।
मंत्री ने कहा- एक तरह से मैं अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान, नई दिल्ली में आगंतुकों के माध्यम से भी सुन रही हूं कि भारत शांति का नखलिस्तान प्रतीत है और चुनौतियों को सावधानी से दूर करता है और हमारी अर्थव्यवस्था अब निवेशकों के लिए बहुत आकर्षक है।
राष्ट्रीय
पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।
एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।
डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।
वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।
राष्ट्रीय
राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।
यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।
न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।
साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राजनीति
बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।
आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”
आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”
अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”
कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।
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