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Monday,12-October-2026
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असम के बारपेटा में न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने अपनी कार की छत पर बैठकर लोगों का अभिवादन किया; सीएम हिमंत बिस्वा सरमा पर हमला।

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बारपेटा: कांग्रेस नेता और वायनाड सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को असम के बारपेटा में अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा फिर से शुरू की। यात्रा में भारी भीड़ देखने को मिली और यात्रा के दौरान राहुल गांधी अपनी कार की छत पर बैठे नजर आए। राहुल गांधी कार की छत पर बैठकर अपने समर्थकों का अभिवादन करते दिखे। रैली के दौरान वह अपने सुरक्षा गार्डों से घिरे हुए थे और अपने समर्थकों से मिल रहे थे और हाथ मिला रहे थे।

वीडियो में राहुल गांधी भारी भीड़ से घिरे नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का अपनी न्याय यात्रा में शामिल होने आए लोगों से कार की छत पर बैठकर मुलाकात करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में राहुल गांधी भारी भीड़ से घिरे नजर आ रहे हैं और जोश के साथ उनसे मिलते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस ने शेयर किया वीडियो।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, ”भारत जोड़ो न्याय यात्रा DAY 11। नई ऊर्जा और बुलंद हौसलों के साथ ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही है। यह जन समर्थन हमारी ताकत है, जो दे रही है हमें हर अन्याय से लड़ने की ताकत। हम अन्याय के खिलाफ न्याय की जीत की कहानी लिखेंगे जो सदियों तक याद की जाएगी। अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे। न्याय की राह पर चलते रहो। न्याय का अधिकार, जब तक वह प्राप्त न हो जाए।”
यात्रा सुबह बारपेटा से शुरू हुई।
रात्रि विश्राम के बाद राहुल गांधी की न्याय यात्रा सुबह बारपेटा से शुरू हुई। रैली के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राहुल गांधी आमने-सामने हैं। शांतिपूर्ण रैली कल हिंसक हो गई जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए क्योंकि उन्हें राहुल गांधी से बातचीत करने और मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी। वह जिस बस में यात्रा कर रहे थे, उसकी छत से लोगों को संबोधित कर रहे थे।
राहुल गांधी ने हिमंत बिस्वा सरमा पर हमला बोला।
रैली के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने हिमंत बिस्वा सरमा पर हमला बोला। राहुल गांधी ने हिमंत को देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताया। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा पर काजीरंगा नेशनल पार्क में जमीन खरीदने का भी आरोप लगाया और यह भी कहा कि भविष्य में लोग जो पान खाएंगे वह भी सीएम का होगा।

‘असम के सीएम लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं’।

उन्होंने यह भी कहा कि सीएम लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं और उनका पैसा ले रहे हैं. राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि हिमंत बिस्वा सरमा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल सकते और अमित शाह सीएम को नियंत्रित करते हैं।
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना करने वाले राहुल गांधी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यात्रा में लोगों के साथ संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने सीएम पर जमकर निशाना साधा।

राहुल गांधी को गुवाहाटी में प्रवेश करने से भी रोका गया।

राहुल गांधी को यात्रा के दौरान गुवाहाटी में प्रवेश करने से भी रोका गया। हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता को गुवाहाटी में प्रवेश करने की चुनौती दी थी। यात्रा के दौरान पुलिस बैरियर हटाने के लिए लोगों को उकसाने के आरोप में राहुल गांधी के खिलाफ असम में भी मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की झड़प के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र।

यात्रा में हुई अव्यवस्था के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दावा किया कि असम में यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सुरक्षा से समझौता किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों को उनकी यात्रा के करीब आने की अनुमति दी और राहुल गांधी के सुरक्षा घेरे को भी तोड़ने की अनुमति दी।

राजनीति

देशभर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए आंदोलन होगा: इंडिया ब्लॉक

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इंडिया ब्लॉक के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन करने की तैयारी में जुटने वाले हैं। दिल्ली में कई दिनों से इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे।

दिल्ली पहुंचे हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हर राज्य से लोग यहां विरोध प्रदर्शन करने के लिए आए हैं। अभी यह प्रदर्शन केवल दिल्ली में हो रहा है, लेकिन आने वाले समय में पूरे देश में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन होंगे। यह केवल कांग्रेस की बात नहीं है, बल्कि इसमें युवा साथी और छात्र भी शामिल हैं। उन्होंने भी दो-तीन दिन पहले बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने का प्रयास किया था और प्रदर्शन हुआ भी, लेकिन जिस तरह से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और यहां 40 से 50 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, उससे स्पष्ट होता है कि ये लोग लोकतंत्र में बिल्कुल भी विश्वास नहीं रखते हैं और पूरी तरह से डर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से लोकतंत्र का हनन किया जा रहा है और आयोग पर 13 करोड़ वोटों की चोरी का आरोप लगा है, उसमें मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में कई तथ्य सामने आए हैं। दूसरी तरफ, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति भी सरकार ने नहीं दी। यह दर्शाता है कि सरकार पूरी तरह से डर चुकी है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना हर किसी का अधिकार है। यदि आप इसी अधिकार को रोक देंगे और लोगों की आवाज दबा देंगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे चलेगी।

राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि देश में क्रांति आ गई है। यह क्रांति वोट चोरी करने वालों, सत्ता हथियाने वालों, लोकतंत्र की हत्या करने वालों, संविधान की धज्जियां उड़ाने वालों और जनता से वादाखिलाफी करने वालों के खिलाफ है। मोदी सरकार और आरएसएस के खिलाफ भी देश में एक क्रांति आ गई है। अब इन्हें सत्ता से जाना पड़ेगा। इस क्रांति में इनका अस्तित्व खत्म हो जाएगा और इनका कहीं पता नहीं चलेगा। आज जो लोग सत्ता के सिंहासन पर बैठे हैं, उनका स्थान जेल में होना चाहिए।

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह की सूची से हटाए जाने पर कहा कि हमारे लोगों ने पहले ही कहा है कि हम जहां भी बैठेंगे, वही जगह जंतर-मंतर बन जाएगी। हमारे लोगों ने यह बात पहले ही कही है, हालांकि दिल्ली पुलिस ने एक फैसला किया है। जनता इस फैसले से कितना सहमत है, यह साफ हो जाएगा। हम सब मिलकर इस पर चर्चा करेंगे। अगर इसे चुनौती देने की जरूरत पड़ी, तो हम ऐसा भी करेंगे।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

खेतों से स्कूलों तक फ्रांस में बेचैनी, महंगाई से लेकर एआई तक ने बढ़ाई चिंता

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भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को दुनिया का ध्यान उन प्रदर्शनों और घटनाक्रमों की ओर दिलाया जिसका जिक्र संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने अपने उस बयान में नहीं किया था जो नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के खिलाफ दिया गया था। एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था से कहा कि उन्हें अपने पास के क्षेत्रों पर भी नजर दौड़ानी चाहिए। उन्होंने नाम नहीं लिया लेकिन इन पास के क्षेत्रों में से एक फ्रांस भी है, जहां पिछले कुछ दिनों से बवाल मचा हुआ है।

फ्रांस को अक्सर बेहतर जीवन स्तर, मजबूत सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा वाले देश के रूप में देखा जाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से तस्वीर वैसी नहीं रही है। बच्चे अपनी शिक्षण व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं, किसान सूखे की मार से परेशान हैं, अस्पतालों में संसाधनों का दबाव है, परिवार महंगाई से जूझ रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फ्रांसीसी अखबार ‘ले मोंद’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक दबाव, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक सेवाओं की कमजोर स्थिति और राजनीतिक अनिश्चितता एक-दूसरे से जुड़कर लोगों की बेचैनी बढ़ा रहे हैं। यह असंतोष किसी एक वर्ग या समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है।

फ्रांस में हाल के दिनों में हाईस्कूल के विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शनों ने विशेष ध्यान खींचा है। विद्यार्थियों की शिकायत है कि कई स्कूलों में इमारतों की हालत खराब है, कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्र हैं और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाती।

रिपोर्ट बताती है कि, फ्रांस में माध्यमिक स्तर पर फ्रेंच भाषा की एक कक्षा में औसतन 29 विद्यार्थी होते हैं, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों का औसत 26 है। कुछ शहरी स्कूलों में एक कक्षा में 36 या उससे अधिक विद्यार्थी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

समस्या केवल कक्षा के आकार की नहीं है। कुछ स्कूलों में छत से पानी टपकने, शौचालयों की खराब स्थिति, बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं होने और गर्मियों में कक्षाओं का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाने की शिकायतें हैं। कई विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।

दिलचस्प बात यह है कि फ्रांस हाईस्कूल शिक्षा पर ओईसीडी के औसत से अधिक खर्च करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा पर उसका खर्च ओईसीडी के औसत से 28 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद संसाधनों के वितरण, शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे यह बहस तेज हुई है कि अधिक खर्च करने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था सभी विद्यार्थियों को समान अवसर क्यों नहीं दे पा रही है।

फ्रांस की अर्थव्यवस्था और उसकी सामाजिक पहचान में कृषि की अहम भूमिका है। लेकिन किसानों के सामने भी चुनौतियां बढ़ रही हैं। सूखा, भीषण गर्मी, जलवायु परिवर्तन और खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की बढ़ती कीमतें उनकी आय पर दबाव डाल रही हैं।

खेती के लिए जरूरी ऊर्जा, खाद और अन्य सामान महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ती है। दूसरी ओर, मौसम की अनिश्चितता फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि अगली फसल से उन्हें पर्याप्त कमाई होगी या नहीं।

जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। फ्रांस में गर्मी की लहरों और जंगलों में आग की घटनाओं ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। बढ़ते तापमान से खेती, पानी की उपलब्धता और लोगों के स्वास्थ्य पर एक साथ दबाव पड़ सकता है।

इस तरह किसानों की परेशानी केवल कृषि नीति का विषय नहीं रह जाती। इसका संबंध खाद्य पदार्थों की कीमतों, ग्रामीण रोजगार और आम परिवारों के घरेलू बजट से भी है।

फ्रांस में परिवारों के सामने जीवनयापन की लागत एक बड़ी चिंता बन रही है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें, महंगे आवास और रोजमर्रा के खर्च लोगों की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

जब आय की तुलना में जरूरी खर्च तेजी से बढ़ते हैं, तो परिवारों के पास बचत, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए कम पैसा बचता है। जिन लोगों की आय पहले से सीमित है, उनके लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।

आर्थिक दबाव का असर केवल व्यक्तिगत जीवन पर नहीं पड़ता। जब बड़ी संख्या में परिवार भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं, तो सरकारी नीतियों, सार्वजनिक सेवाओं और राजनीतिक नेतृत्व के प्रति असंतोष भी बढ़ सकता है।

तकनीकी विकास ने फ्रांस सहित दुनिया के कई देशों में उत्पादकता बढ़ाने और नए काम पैदा करने की संभावनाएं खोली हैं। लेकिन एआई के तेजी से विस्तार ने रोजगार की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी पैदा की हैं।

एआई आधारित उपकरण कई ऐसे काम कर सकते हैं, जिनके लिए पहले इंसानी श्रम की जरूरत होती थी। इससे कुछ क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदल सकते हैं और कर्मचारियों को नए कौशल सीखने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, कुछ नौकरियों की मांग घटने या रोजगार के स्वरूप में बदलाव आने की आशंका भी है।

वहीं, फ्रांस की सामाजिक व्यवस्था में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन अस्पतालों के कर्मचारियों पर काम का बढ़ता बोझ, संसाधनों की कमी और कामकाज की परिस्थितियों को लेकर असंतोष भी सामने आ रहा है।

जब शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं में समस्याएं एक साथ दिखाई देती हैं, तो नागरिकों के मन में यह सवाल उठता है कि सरकार उनकी बुनियादी जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पा रही है।

यह चुनौती ऐसे समय में और जटिल हो जाती है, जब सरकार के सामने बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज और सीमित बजट के बीच खर्च की प्राथमिकताएं तय करने का दबाव हो। एक ओर नागरिक बेहतर सेवाओं की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को उपलब्ध संसाधनों के भीतर कई प्रतिस्पर्धी जरूरतों का समाधान खोजना पड़ता है।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य 2026 की तीसरी तिमाही में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.3 अरब डॉलर रहा

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भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.3 अरब डॉलर के 67 सौदे दर्ज किए गए। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सौदों का कुल मूल्य तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सौदों की संख्या मामूली रूप से 65 से बढ़कर 67 हो गई।

सौदों के मूल्य में इस तेज वृद्धि के पीछे बड़े मूल्य वाले विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) सौदे और सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की गतिविधियों की अहम भूमिका रही। इनमें दो बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी शामिल थे।

आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) को छोड़कर विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (पीई/वीसी) गतिविधियों के तहत 3 अरब डॉलर के 58 सौदे हुए।

2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ा। साथ ही, सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियों में मजबूती आई, वहीं पीई/वीसी निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट दर्ज की गई।

फिनटेक, बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का संयुक्त रूप से कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत योगदान रहा। यह प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के लगातार बने हुए विश्वास को दर्शाता है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी के पार्टनर और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “जैसे-जैसे पूंजी निवेश के मामले में चयनात्मक रुख बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रोथ को टिकाऊ रिटर्न में बदलने की क्षमता यह तय करेगी कि किन वित्तीय कंपनियों को निवेश मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि अधिक लागत वाले माहौल में मजबूत फंडिंग मॉडल, बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और नियामकीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितना कि कारोबार का विस्तार करने का अवसर।

उन्होंने आगे कहा, “भारत के वित्तीय इकोसिस्टम में विकास की अभी भी काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अगले चरण में उन कारोबारों को फायदा होगा जो केवल तेजी से नहीं, बल्कि टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।”

2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए गतिविधियों के तहत 2.3 अरब डॉलर के 23 सौदे दर्ज किए गए। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन एक बड़े सौदे के कारण कुल मूल्य में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

घरेलू सौदों की कुल संख्या में 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, लेकिन सौदों के कुल मूल्य में उनका योगदान केवल 9 प्रतिशत था। वहीं, विदेश से भारत में किए गए तीन सौदों का एमएंडए के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत योगदान रहा।

विदेशों में भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए सौदों की गतिविधियां भी धीमी रहीं। दूसरी तिमाही में ऐसे सात सौदे हुए थे, जबकि तीसरी तिमाही में इनकी संख्या घटकर दो रह गई।

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