अंतरराष्ट्रीय
इजरायल ने गाजा पर हमले तेज किए, तनाव बढ़ा
गाजा/येरूशलेम, 7 अप्रैल : इजराइल के कुछ हिस्सों पर रॉकेट हमलों के बाद यहूदी राष्ट्र ने शुक्रवार को गाजा पट्टी और लेबनान में सैन्य चौकियों पर हवाई हमले तेज कर दिए। पिछले तीन दिन से फिलिस्तीन के साथ बढ़े तनाव के बीच पूर्वी येरूशलेम के अल-अक्सा मस्जिद में इजरायली पुलिस और फिलिस्तीनी उपासकों के बीच झड़प हुई। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हमास के सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि इजरायली टोही ड्रोन और लड़ाकू विमानों ने आतंकवादी समूह की सशस्त्र शाखा अल-कस्सम ब्रिगेड की सैन्य चौकियों तथा ठिकानों पर दर्जनों हवाई हमले किए।
स्थानीय लोगों ने शिन्हुआ को बताया कि उन्होंने हमास के नियंत्रण वाली गाजा पट्टी के ऊपर लड़ाकू विमानों और ड्रोनों की आवाजें सुनीं और पूरे तटीय इलाके में बम के धमाके सुनाई देते रहे।
गाजा में चिकित्सा सूत्रों ने कहा कि किसी के घायल होने की तत्काल सूचना नहीं मिली है लेकिन अस्पताल और क्लीनिकों ने आपात स्थिति घोषित कर दी है और घायलों के उपचार के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अल-कस्सम ब्रिगेड और अन्य छोटे उग्रवादी समूहों ने अलग-अलग बयानों में कहा कि उनके सदस्यों ने गाजा पट्टी के ऊपर उड़ान भरने वाले इजरायली जेट विमानों पर एंटी-क्राफ्ट मिसाइलें दागीं।
संयुक्त फिलिस्तीनी चैंबर ऑफ ऑपरेशंस, जिसमें हमास और इस्लामिक जिहाद सहित कई फिलिस्तीनी सशस्त्र गुट शामिल हैं, ने पहले दावा किया था कि उनके लड़ाके किसी भी इजरायली हमले का सामना करने के लिए तैयार हैं।
बयान में कहा गया था, हमारे प्रतिरोध और गाजा में हमारे लोगों के लिए दुश्मन की धमकियों के मद्देनजर, हम किसी भी आक्रमण का सामना करने और पूरी ताकत के साथ उसका जवाब देने तथा किसी भी स्थान पर अपने लोगों और अपने पावन स्थलों की रक्षा करने के लिए तत्पर हैं।
इस बीच, इजरायली सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि गाजा पट्टी से रॉकेट दागे जाने के बाद दक्षिणी इजरायल में सायरन चालू कर दिए गए। इजरायल के लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी, मध्य, पश्चिमी और उत्तरी गाजा पट्टी में हमास की कई चौकियों और ठिकानों पर बमबारी की।
प्रवक्ता ने कहा, इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने आज रात एक भारी लॉन्चर पर हमला किया जिससे आईडीएफ के विमानों और इजरायली क्षेत्र में मिसाइलें दागी गई थीं।
इजराइली सेना ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसकी वायु सेना ने दक्षिणी लेबनान पर हमला किया। उसने हमास और अन्य आतंकवादी समूहों पर दक्षिण लेबनान से उत्तरी इजराइल में कम से कम 34 रॉकेट दागने का आरोप लगाया।
सेना के अनुसार, 25 रॉकेटों को आईडीएफ के हवाई सुरक्षा तंत्र ने नष्ट कर दिया जबकि पांच इजरायली सीमा के भीतर गिरे। चार अन्य के बारे में दोबारा तथ्य जुटाए जा रहे हैं।
इजरायल की सेना ने चेतावनी दी कि वह गाजा पट्टी और इजरायल के कब्जे वाले पश्चिमी तट पर नियंत्रण रखने वाले हमास को लेबनान से हमले करने की अनुमति नहीं देगा। उसने लेबनान की सीमा से होने वाले हर सीधे हमले के लिए वहां की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
इजराइली हवाई हमले तब शुरू हुए जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लेबनान से दागे गए रॉकेटों के लिए संभावित सैन्य प्रतिक्रिया पर अपने सुरक्षा मंत्रिमंडल कके साथ चर्चा कर रहे थे। यह पिछले 17 साल में लेबनान की सीमा से इजरायल पर सबसे बड़ा हमला था।
तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब रमजान केमहीने में छुट्टी के दिन अल-अक्सा मस्जिद परिसर में प्रार्थना चल रही थी।
इजराइली पुलिस द्वारा मुसलमानों के तीसरे सबसे पवित्र स्थल अल-अक्सा मस्जिद परिसर में लगातार दो दिनों तक छापा मारने के बाद ये झड़पें हुईं जिसमें इजरायली पुलिस ने नमाजियों पर गैस के कनस्तर और स्टन ग्रेनेड दागे।
इस सप्ताह की शुरूआत में, गाजा में आतंकवादियों ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली छापे के जवाब में दक्षिणी इजराइल में लगभग 20 रॉकेट दागे थे।
अतीत में भी, इस मस्जिद में फिलिस्तीनी उपासकों और इजरायली सुरक्षा बलों के बीच अक्सर झड़पें होती रही हैं जिनसे अशांति का माहौल बन जाता है।
मई 2021 में, एक इजराइली छापे के बाद इजराइल और हमास के बीच 11 दिन तक संघर्ष चला।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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