राजनीति
दिल्ली को ‘अनलॉक’ करना अतार्किक, व्यापारियों ने सीएम से फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया
दिल्ली में सोमवार से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसे लेकर यहां के व्यापारियों के संगठन ने सरकार के इस कदम पर गहरी निराशा दिखाई है और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केजरीवाल से अपनी अपील में कहा कि दिल्ली में लगभग 15 लाख व्यापारियों के लिए फैसले का कोई मतलब नहीं है क्योंकि उन्हें अभी भी अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति नहीं है।
दिल्ली सरकार के आदेश का हवाला देते हुए कैट ने कहा कि केवल निर्माण गतिविधियों और कारखानों को खोलने की अनुमति दी गई है, लेकिन बाजार 7 जून से सुबह 5 बजे तक बंद रहेंगे । दिल्ली के व्यापारियों के पास एक और सप्ताह इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, “बाजार खुले बिना, आवश्यक निर्माण सामग्री और अन्य वस्तुओं के अभाव में निर्माण गतिविधियां कैसे संचालित होंगी।”
इसी तरह, खंडेलवाल ने कहा, ” कारखानों को भी उसी मुश्किल का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उत्पादन के लिए उनके द्वारा आवश्यक कच्चा माल भी उपलब्ध नहीं होगा, क्योंकि दिल्ली में बाजार बंद हैं।”
खंडेलवाल ने कहा, “यह याद रखना चाहिए कि निर्माण गतिविधियां, कारखाने और दुकानें एक दूसरे के पर्याय हैं।”
दिल्ली से बहुत बड़ा राज्य होने और पॉजिटिव दर भी तुलनात्मक रूप से अधिक होने के बावजूद, खंडेलवाल ने आगे कहा, पड़ोसी उत्तर प्रदेश ने सोमवार से काम के घंटों के दौरान सभी व्यावसायिक गतिविधियों को खोलने की अनुमति दी है।
उन्होंने कहा, “लेकिन दिल्ली, जिसकी पॉजिटिविटी दर लगभग 1.5 प्रतिशत है और प्रति दिन 900 से कम मामले हैं । एक महीने से अधिक समय से दुकानों को बंद करने के कारण दिल्ली के व्यापारियों को हो रहे दुखों को महसूस किए बिना बाजारों को बंद रखने का विकल्प चुना।”
उन्होंने कहा, “अन्य विकल्प भी हो सकते थे लेकिन दुख की बात है कि दिल्ली सरकार ने व्यापारियों से परामर्श नहीं किया और न ही विभिन्न व्यापार संघों द्वारा दिए गए अभ्यावेदन पर विचार किया गया।”
राजनीति
‘अराजकतावादी मानसिकता’: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर नितिन नबीन ने राहुल गांधी पर निशाना साधा

वाराणसी: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष में हिम्मत है, तो उन्हें उन सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए चुनावों में जीती गई थीं। यह बयान बुधवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में जंतर-मंतर की ओर किए गए एक और विरोध प्रदर्शन के बाद आया। इंडिया ब्लॉक के सांसद जब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध करने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें ले जा रही बस को जनपथ के पास रोक दिया गया और दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया। पत्रकारों से बात करते हुए नितिन नबीन ने कहा, “मैं कहूंगा कि ये लोग अराजकतावादी सोच वाले हैं, जो समाज में सिर्फ जहर घोलना जानते हैं। आखिर, इसी चुनाव आयोग ने केरल में चुनाव कराए थे।”
उन्होंने कहा, “इसने तमिलनाडु में भी चुनाव कराए, जहां वे सत्ता में आए। अगर हिम्मत है, तो राहुल गांधी को पहले इस्तीफा देना चाहिए। जनता उनके खेल को अच्छी तरह देख रही है। विपक्ष के ये नेता घुसपैठियों को बचाने में लगे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वे लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें उनके अधिकार वापस दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा मानना है कि जो लोग यहां के हैं, उनका देश के संसाधनों पर अधिकार है।” नबीन ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की गई व्यवस्थाओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं बिहार से हूं और वाराणसी आना हमारी परंपरा का हिस्सा है। मैं कहूंगा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बहुत अच्छे तरीके से बनाया गया है। भक्तों को भी यह पसंद आ रहा है। यह एक शानदार अनुभव है। इसके लिए मैं पीएम मोदी और सीएम योगी को बधाई देना चाहता हूं।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में युवाओं से बातचीत करेंगे और बाद में गोकुल धाम में आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
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जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

इंडिया ब्लॉक के नेताओं को बुधवार को जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी, सीईसी ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ये सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे। यह मेरी गारंटी है कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह सब घबराहट में की गई प्रतिक्रिया है। यह सब डर है।”
पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को धक्का देते हुए बसों में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को ले जा रही बस का टायर कथित तौर पर पंक्चर कर दिया।
इससे पहले प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी के बीच सड़क पर लेट गईं और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति दिए जाने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया।
प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से कहा, “यह है कि वे सांसदों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जो सिर्फ चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग कर रहे हैं।”
उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर सांसदों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिसकर्मियों ने मुझे पूरी तरह खरोंच दिया है। उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया। अब हम यहां से नहीं हटेंगे। उन्हें अपनी फोर्स वापस बुलाने दीजिए। मैं यहां से नहीं हटूंगी।”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुरक्षाकर्मियों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल जी और मैं बस में थे। जब राहुल जी बस से नीचे उतरे तो राहुल जी और प्रियंका जी के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उन्होंने गुंडागर्दी की है और गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “जब तक हमें अपने सवालों के जवाब नहीं मिलते, हमारी आवाज मजबूत बनी रहेगी।”
वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेताओं को बसों में भरकर पुलिस थानों ले जाया गया और दुर्भाग्य से सुबह उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर जाना, धरना देना, विरोध प्रदर्शन करना या मार्च निकालना देश में गैरकानूनी है।
इससे पहले जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर नौ घंटे से अधिक समय तक धरना देने के मामले में अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही 45 मामले हैं और उनका “लक्ष्य 100 प्राथमिकी” का है।
मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए प्रदर्शन किया था। बुधवार को भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।
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पिंक पास को लेकर सौरभ भारद्वाज बोले- जनता को परेशान करना इनकी आदत

दिल्ली की बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए पिंक पास को अनिवार्य किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिंक पास बनवाने के लिए महिलाओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। उनका दावा है कि दिनभर लाइन में लगने के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं के पास नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जनता को परेशान करना इस सरकार की आदत बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से आसानी से मिल रही सुविधाओं को भी जटिल बना दिया गया है और आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सड़कों पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हर आसान काम और पहले से चल रही सुविधा के लिए लोगों को लाइनों में खड़ा कर दिया है।
उन्होंने नोटबंदी, एसआईआर और पिंक पास के साथ-साथ एलपीजी सिलेंडर से जुड़ी परेशानियों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि लोगों को इतना परेशान कर दिया जाए कि वे सरकार से किसी नई सुविधा की मांग ही न करें और अपनी रोजमर्रा की परेशानियों में उलझे रहें। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में पहले सभी महिलाएं बसों में मुफ्त सफर करती थीं और इसके लिए किसी विशेष पास की जरूरत नहीं होती थी।
उनके मुताबिक, अब पिंक पास को अनिवार्य किए जाने से महिलाओं को पास बनवाने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में महिलाओं के वोट काटे गए हैं और ऐसे में उन्हें पिंक पास की सुविधा से वंचित किया जा रहा है। वहीं, जिन महिलाओं को पास मिलने की उम्मीद है, उन्हें भी इसे बनवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
आप नेता ने दिल्ली में रहने वाली दूसरे राज्यों की महिलाओं को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित आसपास के राज्यों से दिल्ली आने वाली महिलाएं, जिनमें नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत से आने वाली महिलाएं शामिल हैं, उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में रोजगार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं पड़ोसी शहरों से आती-जाती हैं। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का सीधा असर इन महिलाओं पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से व्यवस्था को सरल बनाने और महिलाओं की परेशानियों को तत्काल दूर करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि पहले से उपलब्ध मुफ्त बस यात्रा की सुविधा को आसान बनाए रखने के बजाय पिंक पास की अनिवार्यता से महिलाओं के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार को महिलाओं को राहत देने के लिए व्यवस्था को सरल करना चाहिए, न कि उन्हें पास बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा करना चाहिए।
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