अंतरराष्ट्रीय
विवाद खड़ा करने के बाद टोक्यो लौटेंगे आईओसी प्रमुख थॉमस बाक
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ओलंपिक खेलों के दौरान एक महीने से अधिक समय बिताने के बाद पैरालंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए टोक्यो लौट रहे हैं। जापान की क्योडो समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बाक 23 अगस्त (सोमवार) को टोक्यो आ सकते हैं। नेशनल स्टेडियम में पैरालंपिक खेलों का उद्घाटन समारोह 24 अगस्त को होना है।
बाक ने ओलंपिक खेलों के दौरान अपनी यात्रा पर उस समय विवाद को हवा दी थी, जब टोक्यो में कोरोनोवायरस आपातकाल लागू होने के बावजूद वह एक अपकमिंग टोक्यो शॉपिंग डिस्ट्रिक्ट में चले गए थे।
67 वर्षीय बाक को कोविड -19 महामारी के कारण गैर-जरूरी सैर से बचने के लिए सरकार द्वारा सार्वजनिक आदेश के बावजूद अपने अंगरक्षकों के साथ गिन्जा डिस्ट्रिक्ट में टहलते हुए देखा गया था।
टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 23 जुलाई से 8 अगस्त तक हुआ था। अब पैरालंपिक खेलों की बारी है। पैरालंपिक खेल 5 सितम्बर तक चलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने पर दिया जोर, रिश्ते को ‘जटिल’ बताया

वॉशिंगटन, 27 मार्च : अमेरिका के वरिष्ठ विधायकों और अधिकारियों ने पाकिस्तान के साथ अधिक गहरे और परिणाम-उन्मुख संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है और इस रिश्ते को “जटिल” बताया है।
कैपिटल हिल पर बुधवार को टाम सुओजी और जैक बर्गमैन द्वारा आयोजित एक द्विदलीय संगोष्ठी में 200 से अधिक नीति-निर्माताओं, राजनयिकों और विशेषज्ञों ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की दिशा का आकलन किया।
सुओज़ी ने कहा, “ऐसे समय में जब हमारा देश और दुनिया बढ़ती विभाजन की भावना महसूस कर रहे हैं, पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक जरूरी है।” संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध जटिल रहे हैं।
बर्गमैन ने विभाजनों के पार संवाद और सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसी एकता संयोग से नहीं होती। यह बातचीत से शुरू होती है। यह इस साझा विश्वास से शुरू होती है कि जब लोग साथ आते हैं, खुले तौर पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं और सम्मानपूर्वक जुड़ते हैं, तो प्रगति संभव है।” उन्होंने जोड़ा कि स्थायी प्रगति के लिए असहमतियों को “सम्मान के साथ” संभालना आवश्यक है।
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सईद शेख ने इस रिश्ते को दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का यह संबंध निश्चित रूप से सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली संबंधों में से एक है, जो लगभग आठ दशकों में कई सफल साझेदारियों के रूप में सामने आया है। हर बार जब हम साथ आए हैं, इसका प्रभाव द्विपक्षीय दायरे से परे रहा है और पूरी दुनिया को लाभ हुआ है।”
अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव एस पॉल कपूर ने कहा कि वाशिंगटन ठोस परिणाम चाहता है। “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिका-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों में सद्भावना और उच्च-स्तरीय ध्यान अमेरिकी और पाकिस्तानी लोगों के लिए ठोस लाभ में बदलें।”
इस संगोष्ठी में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर पैनल चर्चाएं हुईं। विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय स्थिरता, जिसमें भारत व चीन के साथ पाकिस्तान के संबंध भी शामिल हैं और व्यापार व निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।
माइकल कगलमैन (अटलांटिक काउंसिल) ने कहा कि यह साझेदारी “अच्छी स्थिति में है,” लेकिन इसे समय के साथ अधिक टिकाऊ बनाने की जरूरत है। पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने चेतावनी दी कि अमेरिकी नीति केवल दिखावे से आगे बढ़नी चाहिए। “अगर अमेरिका अच्छे साझेदार चाहता है, तो उसे अच्छी नीतियां बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अच्छी नीति का मापदंड केवल यह नहीं होना चाहिए कि वह वाशिंगटन में अच्छी दिखती है।
सुरक्षा चिंताएं भी प्रमुख मुद्दा रहीं। लीसा कर्टिस ने चेतावनी दी कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अब भी “एक खतरनाक और घातक संगठन” है और पाकिस्तान की स्थिरता सुनिश्चित करने में अमेरिका की रुचि पर जोर दिया। हसन अब्बास ने आतंकवाद, संगठित अपराध और सीमा-पार खतरों से निपटने के लिए नागरिक कानून-प्रवर्तन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
आर्थिक मोर्चे पर सोफयां युसूफी ने पाकिस्तान में डिजिटलीकरण और व्यापक आर्थिक सुधारों की ओर बढ़ते प्रयासों का उल्लेख किया लेकिन निर्यात और विदेशी मुद्रा बढ़ाने के लिए स्पष्ट औद्योगिक नीति की जरूरत बताई। एसपेरेंजा (यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स) ने कहा कि नए सिरे से जुड़ाव ने निजी क्षेत्र के निवेश के अवसर खोले हैं और द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों को सुलझाने का आह्वान किया।
अंत में सुओज़ी ने कहा, “यह सम्मेलन अतीत से सीखने, वर्तमान को समझने और हमारे दोनों देशों के बीच अधिक समझदारी व सहयोगपूर्ण भविष्य का मार्ग तैयार करने के बारे में है।”
अंतरराष्ट्रीय
अबू धाबी: मारे गए 2 लोगों में से एक भारत, दूसरा पाकिस्तान का

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अबू धाबी, 26 मार्च : संयुक्त अरब अमीरात में गुरुवार को मिसाइल के टुकड़े गिरने से मारे गए दोनों लोगों की पहचान हो गई गई है। अधिकारियों के अनुसार इनमें से एक भारत और दूसरा पाकिस्तान का नागरिक था। वहीं घायलों में भी एक भारतीय शामिल है।
अबू धाबी मीडिया ने सुबह हुए हादसे का अपडेट दिया है। एक्स पोस्ट के जरिए बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोकने के बाद गिरे टुकड़े की चपेट में आने से पाकिस्तानी और भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। वहीं तीन घायलों में से एक अमीराती, दूसरा जॉर्डन और तीसरा भारतीय नागरिक है। इनमें से किसी को गंभीर तो किसी को सामान्य चोट आई है।
मीडिया कार्यालय ने इस जानकारी के साथ लोगों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है और कहा है कि अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक सोर्स से ही जानकारी लें।
गुरुवार सुबह ही बताया गया था कि मिसाइल को सफलता से इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन इसी दौरान जो टुकड़े गिरे, उसकी जद में आए दो लोगों की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए।
अधिकारियों का मानना है कि भले ही मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम हवा में ही नष्ट कर दे रहा है, लेकिन उनके गिरते हुए टुकड़े या मलबा लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच का ये संघर्ष अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ईरान खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य बेस मौजूद हैं। वो कहता रहा है कि जो देश अमेरिकी जमीनी सेना की मदद करेंगे, वे भी निशाने पर रहेंगे। हालांकि खाड़ी देशों का कहना है कि वे इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं।
जब से ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल का संघर्ष शुरू हुआ है, तब से यूएई में ईरानी स्ट्राइक में गुरुवार को मारे गए दो लोगों को मिलाकर 10 लोग मारे गए हैं। शनिवार (21 मार्च) को यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि आठ लोग मारे गए, “जिनमें सेना के दो सदस्य और पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी और फिलिस्तीनी देशों के छह आम नागरिक शामिल हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-इजरायल और ईरान के हमलों में हूती की ‘एंट्री’, ईरानी मीडिया ने किया बड़ा दावा

तेहरान, 26 मार्च : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हमलों का दौर अब भी जारी है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस हमले को लगभग एक महीना होने वाला है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब तक कोई बात नहीं बनी है। इस बीच अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के खिलाफ हूती विद्रोहियों की एंट्री हो सकती है।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही इजरायल के खिलाफ जंग में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट में बिना नाम बताए सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि हूती, जिन्हें यमनी अंसारुल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, बाब अल-मंदाब स्ट्रेट पर कब्जा करने के लिए तैयार हैं।
अक्टूबर 2023 से विद्रोही समूह ने लाल सागर में पहले ही तनाव की स्थिति बना रखी है और गाजा पर इजरायल के हमलों का बदला लेने के लिए सैकड़ों इजरायली ठिकानों पर गोलाबारी की है।
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, हूती ने अमेरिका और ब्रिटेन से जुड़े जहाजों को भी निशाना बनाया है, जिससे दुनिया भर में व्यापार में रुकावट आई है। अमेरिका और दूसरी पश्चिमी नौसेनाएं समुद्र के रास्ते जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही हैं, लेकिन अगर हूती बाब अल-मंदाब स्ट्रेट पर कब्जा करने का फैसला करते हैं, तो इससे उनके विकल्प और कम हो सकते हैं।
बाब अल-मंदाब स्ट्रेट भूमध्य सागर और अरब सागर के बीच एक जरूरी रास्ता है, जो यूरोप को अफ्रीका और उससे आगे के महासागरों में एशिया से जोड़ता है। इन सबके बीच अमेरिका और ईरान के बातचीत को लेकर चर्चाएं हो रही हैं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, ईरान ने इन दावों खारिज करते हुए यह कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे पार्टी के जरिए हल्का-फुल्का संदेशों का आदान-प्रदान हुआ।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मध्यस्थों के माध्यम से ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच विभिन्न संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है, जबकि पिछले महीने के अंत में देश पर अमेरिकी और इजरायली हमलों की शुरुआत के बाद से तेहरान ने वाशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की।
अराघची ने कहा, “कुछ दिनों पहले से अमेरिकी पक्ष विभिन्न मध्यस्थों के माध्यम से अलग-अलग संदेश भेज रहा है। जब मित्र देशों के माध्यम से हमें संदेश भेजे जाते हैं और हम जवाब में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं या आवश्यक चेतावनी जारी करते हैं तो इसे न तो बातचीत कहा जाता है और न ही संवाद। यह केवल हमारे मित्रों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान है, और हमने अपने सैद्धांतिक रुख को दोहराया है।
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