खेल
आईएनएस सीवोटर-इंडियाट्रैकर पोल: खराब फॉर्म से जूझ रहे कोहली को फिर से मौका देने पर राय अलग-अलग
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विराट कोहली लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। वह सबसे बढ़िया ऑल-फॉर्मेट बल्लेबाजों में से एक रहे हैं, लेकिन लगभग पिछले दो सालों में खेल के दौरान अपने बल्ले से कोई खास कमाल नहीं किया है। 33 वर्षीय कोहली ने नवंबर 2019 के बाद से शतक नहीं जड़ा है। उन्होंने कोलकाता में बांग्लादेश के खिलाफ 136 रन बनाए थे। हाल ही में कोहली इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। कोहली ने दो पारियों में 11 और 20 रन बनाए, जिससे इंग्लैंड 7 विकेट से टेस्ट मैच में जीत हासिल करने में कामयाब रहा।
यह नहीं, कोहली 7 जुलाई 2022 को जारी पुरुष क्रिकेटरों की आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में टॉप 10 बल्लेबाजों की लिस्ट में जगह बनाने में नाकाम रहे।
खराब फॉर्म की वजह से कपिल देव जैसे दिग्गज क्रिकेटर भी विराट कोहली को टीम से बाहर निकालने की वकालत कर चुके हैं।
आईएनएस की ओर से सीवोटर-इंडियाट्रैकर ने कोहली के खराब फॉर्म और उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में बनाए रखने के बारे में लोगों की राय जानने के लिए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे किया। सर्वे के दौरान इस पर लोगों की राय बंटी हुई दिखी।
सर्वे के मुताबिक, जहां 52 फीसदी लोगों का मानना है कि तेजतर्रार कोहली को भारतीय टीम में बरकरार रखा जाना चाहिए, वहीं 48 फीसदी लोगों ने कोहली के टीम में बने रहने पर असहमति दर्ज करायी।
अलग-अलग उम्र के समूहों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे, जो एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे। सर्वे के दौरान, 18-24 के बीच उम्र वाले 57 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कोहली जल्द ही अपने पहले वाले फॉर्म में वापस आ जाएंगे। उन्हें टीम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं 55 वर्ष से अधिक उम्र के 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कोहली को टीम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
इसी मुद्दे पर शहरी और ग्रामीण मतदाताओं के विचार भी बंटे हुए दिखे। सर्वे के दौरान, 51 प्रतिशत शहरी मतदाताओं और 54 प्रतिशत ग्रामीण मतदाताओं ने कहा कि कोहली जल्द ही मैच में ताबड़तोड़ रनों की बरसात करेंगे। उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम से नहीं हटाया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बड़ी राहत, विवेक तनखा ने मानहानि के मामले को वापस लेने पर जताई सहमति

नई दिल्ली, 3 फरवरी : केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस नेता, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तनखा ने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ दायर मानहानि के मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। तनखा ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निस्तारण कर दिया और आगे की सुनवाई बंद कर दी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विवेक तनखा की ओर से अदालत को बताया गया कि इस पूरे मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान के साथ आपसी समझौता हो गया है। समझौते के तहत विवेक तनखा शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले और सिविल सूट दोनों को वापस ले रहे हैं। कोर्ट ने इस सहमति को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में दर्ज किया।
गौरतलब है कि यह सुनवाई केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर हो रही थी। शिवराज चौहान ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए अपने खिलाफ चल रहे मानहानि के मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी यह मांग खारिज कर दी थी, जिसके बाद वे शीर्ष अदालत पहुंचे थे।
कांग्रेस सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तनखा ने शिवराज सिंह चौहान सहित तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। इन नेताओं में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह भी शामिल थे।
विवेक तनखा का आरोप था कि इन नेताओं ने मीडिया में उनके खिलाफ बयान दिए, जिससे उनकी सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर उन्होंने आपराधिक मानहानि का मामला और सिविल सूट दायर किया था।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान समेत तीनों भाजपा नेताओं को निचली अदालत में व्यक्तिगत पेशी से राहत दी थी। हालांकि, इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया था, जिसके चलते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। हालांकि, अब विवेक तनखा की ओर से सभी मानहानि के मामले वापस लेने की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रकरण का निस्तारण कर दिया है।
राजनीति
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से घोषणा पर विपक्ष ने जताई आपत्ति, सरकार से पूछे सवाल

नई दिल्ली, 3 फरवरी : भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद विपक्षी पार्टियां सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इन समझौते की घोषणा किए जाने पर आपत्ति जताई और सरकार से सवाल पूछे हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पूछा, “सरकार बताए कि क्या देश की राजधानी दिल्ली से वाशिंगटन शिफ्ट हो गई है।” उन्होंने कहा, “‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने की घोषणा वाशिंगटन करता है, अभी डील की घोषणा भी वाशिंगटन से हो रही है। भारत तेल कहां से खरीदेगा, यह घोषणा भी वाशिंगटन से हो रही है।”
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो चाहते हैं, वह कहते हैं, लेकिन हमारी सरकार से आवाज नहीं आती है। जब ट्रंप ने 100 प्रतिशत टैरिफ किया था, तब खड़े होकर किसी ने नहीं बोला। जब इसे 50 प्रतिशत किया, तब भी किसी ने नहीं बोला। डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने से इनकार किया और वेनेजुएला से खरीदने को कहा, तब भी सरकार ने कुछ नहीं बोला। उन्होंने पाकिस्तान के साथ सीजफायर कराने की घोषणा भी की थी, तब भी सरकार ने कुछ नहीं कहा। लेकिन जब अमेरिकी टैरिफ को 18 प्रतिशत किया गया, तो सरकार में बैठे लोग बड़े खुश हो रहे हैं।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि भारत का टैरिफ अब शून्य है। लेकिन क्या यह सही है कि अमेरिका को होने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जबकि भारत को होने वाले अमेरिकी एक्सपोर्ट पर शून्य टैरिफ लगेगा? ये वे अहम मुद्दे हैं, जिन पर हम स्पष्ट जवाब चाहते हैं।”
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “अभी अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है, लेकिन इससे पहले यह टैरिफ कई गुना कम था। अभी 18 प्रतिशत टैरिफ अपने आप में सवाल खड़े करता है। इसकी घोषणा भारत सरकार की तरफ से भी नहीं की गई है।”
डिंपल यादव ने कहा कि यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने की है। जिस तरह से अमेरिका भारत के साथ बर्ताव कर रहा है, उससे पता चलता है कि भारत सरकार उस तरह से डील नहीं कर पा रही है, जैसा अमेरिका को करना चाहिए।
राजनीति
पश्चिम बंगाल एसआईआर विवाद पर बुधवार को सुप्रीम सुनवाई, ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल

नई दिल्ली, 3 फरवरी : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई होगी। प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर भी शीर्ष अदालत सुनवाई करेगी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है। सीएम ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। याचिका में इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया है और कहा गया है कि इसका सीधा असर निष्पक्ष चुनाव पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे बिना पर्याप्त परामर्श व स्पष्ट दिशा-निर्देशों के लागू किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की प्रक्रिया से आम नागरिकों में भ्रम और भय का माहौल बन रहा है। अपनी याचिका में सीएम ममता ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जिस संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है, वही संस्था अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव आयोग का यह रवैया संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक संतुलन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ममता ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले में सीधी दखल देने और समुचित निर्देश जारी करने की मांग की है।
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