व्यापार
भारतीय शेयर बाजार सपाट खुला, आरबीआई एमपीसी के ऐलान पर निवेशकों का फोकस
मुंबई, 6 फरवरी : वैश्विक बाजारों में बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में खुला। सुबह 9:18 पर सेंसेक्स 78 अंक की मामूली गिरावट के साथ 83,235.55 और निफ्टी 56 अंक की कमजोरी के साथ 25,586 पर था।
शुरुआती कारोबार में सूचकांकों में ऑयल एवं गैस, निजी बैंक, एनर्जी और फाइनेंशियल सर्विसेज में खरीदारी थी। वहीं, आईटी, फार्मा, हेल्थकेयर, मीडिया, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसई सूचकांक में दबाव था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवली देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 315 अंक या 0.53 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,201 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 193 अंक या 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,790 पर था।
सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, एलएंडटी, टाइटन और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, एनटीपीसी, बीईएल, एशियन पेंट्स, इटरनल, इंडिगो और ट्रेंट लूजर्स थे।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) के फैसलों का ऐलान गवर्नर संजय मल्होत्रा की ओर से सुबह 10 बजे किया जाएगा। निवेशकों का फोकस इस फैसले पर निगाहें होंगी।
जानकारों के मुताबिक, आरबीआई फरवरी एमपीसी में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकता है। साथ ही, जीडीपी और महंगाई के अनुमान को भी यथावत रख सकता है। हालांकि, ईयू और अमेरिका से ट्रेड डील के बाद केंद्रीय बैंक की टिप्पणी अहम होगी।
इससे पहले आरबीआई ने दिसंबर में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कमी की थी।
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे, जबकि बैंकॉक हरे निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए थे।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना करीब एक प्रतिशत और चांदी करीब 5 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था।
राजनीति
निशिकांत दुबे ने 1978 में इंदिरा गांधी को निकाले जाने का किया जिक्र, मूल प्रस्ताव के जरिए राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की मांग

नई दिल्ली, 14 फरवरी : भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव लाने के फैसले के साथ 1978 की ऐतिहासिक संसदीय कार्रवाई का हवाला देकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
निशिकांत दुबे ने दिसंबर 1978 की उस घटना से तुलना की, जब इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी और उन्हें जेल भी भेजा गया था।
संसदीय प्रक्रिया में मूल प्रस्ताव एक स्वतंत्र और स्पष्ट प्रस्ताव होता है, जिसे सदन के सामने निर्णय या राय व्यक्त करने के लिए रखा जाता है। इसे स्वीकार कर सदन में पेश किए जाने के बाद इस पर बहस होती है और अंत में मतदान कराया जाता है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए उनके लोकसभा सदस्य पद को रद्द करने और भविष्य के चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में 1978 के संसदीय रिकॉर्ड के अंश भी दिखाए और लिखा कि इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर इंदिरा गांधी की सदस्यता समाप्त हुई थी और उन्हें जेल भेजा गया था।
1978 का मामला 22 नवंबर 1978 को लोकसभा में पेश किए गए मूल प्रस्ताव से जुड़ा था। यह प्रस्ताव विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर लाया गया था, जिसमें इंदिरा गांधी को सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का दोषी पाया गया था। आरोप 1975 के आपातकाल के दौरान की गई कार्रवाई से जुड़े थे, जिनमें उनके पुत्र संजय गांधी की मारुति परियोजना की जांच कर रहे चार सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से बाधित करने, डराने-धमकाने और झूठे मामले दर्ज कराने का उल्लेख था।
लंबी बहस के बाद 19 दिसंबर 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा लाया गया प्रस्ताव पारित हुआ। इसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया और उन्हें संसदीय सत्र की शेष अवधि के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया। हालांकि, यह निष्कासन स्थायी नहीं रहा और 7 मई 1981 को सातवीं लोकसभा ने निर्णय वापस ले लिया, जब वे फिर सत्ता में लौटीं।
गुरुवार को निशिकांत दुबे ने कहा था कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव शुरू किया है और उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ के साथ होने का आरोप लगाया। यह कदम लोकसभा में एक दिन पहले हुई तीखी बहस के बाद सामने आया, जब राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस समझौते में भारत और उसके नागरिकों के हितों से समझौता किया गया है और ‘भारत माता को बेच दिया गया’ है।
उनके बयान पर सत्तापक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया और इसे ‘असंसदीय’ बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। इसके बाद भाजपा सांसदों ने विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की घोषणा की और राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, खासकर जब देश के ऊर्जा और किसान हितों से जुड़े मुद्दे हों।
बाद में गुरुवार शाम को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने फिलहाल अपना प्रस्ताव स्थगित कर दिया है, क्योंकि निजी सदस्य के रूप में निशिकांत दुबे का मूल प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है।
राजनीति
‘बलिदान के लिए देश सदैव ऋणी रहेगा’, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलवामा हमले के शहीदों को याद किया

नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा हमले की 7वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने शहीदों को याद किया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पुलवामा में 2019 के दुस्साहसी आतंकी हमले में शहीद हुए हमारे वीर जवानों को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि। भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।” राहुल गांधी ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे की तस्वीर भी शेयर की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलवामा आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “हम सब अपने शहीदों और उनके परिवारजनों के सदैव ऋणी रहेंगे। हमारे जांबाज सैनिकों का साहस, समर्पण, सेवा और शहादत हम सबके लिए अनुकरणीय है।”
इससे पहले, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी। बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
वहीं, एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लिखा, “मैं 2019 में आज ही के दिन पुलवामा हमले में शहीद हुए बहादुर सीआरपीएफ जवानों को सलाम करती हूं।”
राष्ट्रीय
मुंबई कोस्टल रोड नॉर्थ परियोजना: वर्सोवा में 348 पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें नाना नानी पार्क के अंदर 80 पेड़ शामिल हैं, जिससे निवासियों में आक्रोश फैल गया है।

मुंबई, 13 फरवरी: मुंबई कोस्टल रोड (एमसीआरपी) नॉर्थ प्रोजेक्ट के तहत वर्सोवा में 348 पेड़ प्रभावित होने वाले हैं। जिनमें नाना नानी पार्क के अंदर स्थित 80 पेड़ भी शामिल हैं। बीएमसी ने पार्क के अंदर नोटिस लगा दिए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में गुस्सा है, जो कहते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ पेड़ों का मामला नहीं है। यह एक ऐसे उपनगर में बची हुई कुछ गिनी-चुनी खुली जगहों में से एक के खो जाने का मामला है, जो पहले से ही घुटन से जूझ रहा है।
20 किलोमीटर लंबी तटीय सड़क वर्सोवा को दहिसर से 20,000 करोड़ रुपये की लागत से जोड़ेगी। बांद्रा-वर्ली सी लिंक के मरीन ड्राइव से वर्ली छोर तक का पहला चरण पहले ही खुल चुका है। दूसरे चरण का उद्देश्य द्वीप शहर को पश्चिमी उपनगरों से जोड़ना है, लेकिन इसकी पर्यावरणीय लागत काफी अधिक होगी।
हालांकि, वर्सोवा इंटरचेंज से बांगुर नगर तक के ऊंचे हिस्से से 348 पेड़ प्रभावित होने वाले हैं, जबकि इंटरचेंज पर पैकेज ए संरेखण के साथ 1,113 पेड़ों की पहचान की गई है।
तटीय सड़क चरण II परियोजना के पैकेज ए के तहत काटे जाने वाले नाना नानी पार्क के 80 पेड़ों में से कई पर बीएमसी ने नोटिस चिपका दिए हैं। ये नोटिस पार्क के पश्चिमी किनारे पर लगे पेड़ों पर लगाए गए हैं, जो उस क्षेत्र को इंगित करते हैं जहां पेड़ों की कटाई होने की सबसे अधिक संभावना है।
महाराष्ट्र (शहरी क्षेत्र) वृक्ष संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, 1975 की धारा 8(3) का हवाला देते हुए, नोटिस में कहा गया है कि वर्सोवा इंटरचेंज से बांगुर नगर तक के के/पश्चिम वार्ड में पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगी गई है – एक प्रक्रियात्मक कदम जो इन पार्क के पेड़ों के संभावित नुकसान का संकेत देता है।
तटीय सड़क के दूसरे चरण के लिए, दहिसर तक की पूरी लंबाई में कुल 1,244 पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका है। पिछले साल, स्थानीय मछुआरा समुदायों ने कड़ा विरोध जताते हुए चेतावनी दी थी कि यह परियोजना मालवानी, मार्वे और चारकोप क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियों को बुरी तरह से बाधित करेगी, जिससे आजीविका खतरे में पड़ जाएगी और कई छोटे, पारंपरिक मछुआरों को अपना काम बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
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