अंतरराष्ट्रीय
भारत भरोसे पर आधारित एआई गवर्नेंस विजन पर काम कर रहा है: मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार
वाशिंगटन, 31 जनवरी : भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संचालन के लिए भरोसे पर आधारित नीति अपना रहा है। इस नीति में सख्त नियमों के बजाय समावेश, नवाचार और सुरक्षा पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। यह बात देश के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने थिंक-टैंक समुदाय से बातचीत में कही।
नई दिल्ली से वर्चुअली बोलते हुए, मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने सीएसआईएस के सम्मेलन में कहा कि एआई का संचालन अब देश की आर्थिक और रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा बन गया है।
उन्होंने कहा कि एआई अब केवल कुछ कंपनियों या सीमित प्रयोगों तक नहीं रह गया है, बल्कि यह हर क्षेत्र में शामिल हो चुका है और अर्थव्यवस्था की डिजिटल रीढ़ बन गया है।
अजय कुमार सूद ने बताया कि दुनिया भर में एआई के इस्तेमाल में तेजी आई है, जेनरेटिव एआई में निवेश बढ़ रहा है और डाटा केंद्रों की ऊर्जा जरूरतें भी लगातार बढ़ रही हैं। इन बदलावों से यह साफ हो गया है कि एआई का संचालन अब कोई सीमित नीति विषय नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति, जनविश्वास और सतत विकास से सीधे जुड़ा मामला है।
उन्होंने कहा कि भारत की एआई नीति में सुरक्षा, जवाबदेही, पारदर्शिता और सभी को साथ लेने पर ध्यान दिया गया है, साथ ही नवाचार को बढ़ावा देने के लिए जरूरी लचीलापन भी रखा गया है।
भारत में एआई नीति को वर्ष 2024 में शुरू की गई इंडियाएआई मिशन के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इस मिशन के तहत साझा कंप्यूटिंग सुविधा, एकीकृत डाटा मंच, स्वदेशी एआई मॉडल का विकास और लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों को रियायती दरों पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा दी जा रही है, जिससे उनकी लागत काफी कम हुई है। राष्ट्रीय एआई डाटा मंच पर कई क्षेत्रों से जुड़े हजारों डाटा सेट और मॉडल उपलब्ध हैं, जो देश में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत एआई शिक्षा और वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में भी निवेश कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय एआई संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हाल ही में भारत ने राष्ट्रीय एआई संचालन रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कानूनी निगरानी और तकनीकी उपायों को साथ जोड़ने वाला तरीका बताया गया है। इससे जोखिम कम करते हुए बड़े स्तर पर नवाचार संभव हो सकेगा।
एआई इम्पैक्ट समिट को देखते हुए, सूद ने कहा कि भारत एक साझा ग्लोबल विजन को बढ़ावा देना चाहता है जिसमें एआई डेवलपमेंट के लिए एक यूनिवर्सल इनेबलर के रूप में काम करे। सूद ने कहा, “फोकस कंप्यूट, डेटा और फाउंडेशनल मॉडल जैसे मुख्य एआई संसाधनों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर होगा, ताकि ये संसाधन कुछ ही जगहों या कंपनियों तक सीमित न रहें, और देश अपने समाज, भाषाओं और सार्वजनिक प्रणालियों के लिए संदर्भ-विशिष्ट समाधान बना सकें।”
अजय कुमार सूद के अनुसार, सफलता का पैमाना केवल एआई की क्षमता नहीं होगा, बल्कि यह देखा जाएगा कि वह क्षमता कितनी व्यापक जनहित और सामाजिक लाभ में बदलती है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ईरान की ओर पहले से बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है, सभी विकल्प खुले : ट्रंप

वाशिंगटन, 31 जनवरी : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की ओर पहले से ज्यादा बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन बातचीत के जरिए समझौता चाहता है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो दूसरे रास्तों के लिए भी तैयार है।
ट्रंप ने बताया कि यह तैनाती अमेरिका की उस नौसैनिक मौजूदगी से भी बड़ी होगी, जो पहले वेनेजुएला के पास थी। उन्होंने इसे एक बड़ा जहाज़ी बेड़ा बताया। उनका कहना था कि इस कदम का मकसद दबाव बढ़ाना है, जबकि बातचीत की कोशिशें जारी रहेंगी।
ट्रंप ने कहा, “हम अब ईरान की ओर ज्यादा संख्या में जहाज भेज रहे हैं। उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को कोई समय-सीमा दी गई है, तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बात केवल ईरान ही ठीक से जानता है।
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उनका ईरान से सीधे संपर्क हुआ है। जब उनसे पूछा गया कि क्या संदेश ईरान के नेताओं तक पहुंचा है, तो उन्होंने कहा, “हां, पहुंचा है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत से हल निकालना चाहता है, लेकिन हालात बिगड़ने की संभावना को भी नकारा नहीं। ट्रंप बोले, “अगर समझौता हो गया तो अच्छा है। अगर नहीं हुआ, तो आगे देखा जाएगा।”
सवालों के जवाब में ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य ताकत पर जोर दिया, लेकिन किसी खास कार्रवाई का विवरण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास “दुनिया के सबसे शक्तिशाली जहाज” हैं और इस तैनाती को रोकथाम की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया।
उन्होंने सैन्य योजनाओं के समय और नियमों पर बात करने से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य मामलों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताना चाहते।
ये बयान व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान आए, जहां घरेलू आयोजनों के बीच ट्रंप ने विदेश नीति, रक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
अमेरिका और ईरान के रिश्ते कई सालों से तनाव में हैं। इसकी वजह प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे रहे हैं। पहले भी बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन सीमित सफलता मिली और टकराव की स्थिति बार-बार बनी।
अमेरिका ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के समय नौसैनिक तैनाती का इस्तेमाल अक्सर रोकथाम और संकेत दोनों के रूप में किया है, जबकि यह भी कहा है कि वह कूटनीतिक समाधानों के लिए खुला है।
व्यापार
कमजोर ग्लोबल संकेतों से लाल निशान में खुला शेयर बाजार, मेटल स्टॉक्स में बिकवाली

मुंबई, 30 जनवरी : कमजोर ग्लोबल संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 444 अंक या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,100 और निफ्टी 157 अंक या 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,261 पर था।
शुरुआती बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल और कमोडिटीज स्टॉक्स कर रहे थे। इस कारण सभी सूचकांको में निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज टॉप लूजर्स थे। आईटी, मीडिया, एनर्जी, पीएसई, रियल्टी, पीएसयू बैंक और डिफेंस इंडेक्स भी लाल निशान में थे। केवल हेल्थकेयर, फार्मा और एफएमसीजी हरे निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में मारुति सुजुकी, इंडिगो, टाइटन, आईटीसी और सन फार्म गेनर्स थे। टाट स्टील, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एनटीपीस, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एमएंडएम, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक लूजर्स थे।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 579.75 अंक या 0.99 प्रतिशत की बिकवाली के साथ 57,961.25 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 182.70 अंक या 1.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,642.30 पर था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली देखने को मिल रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक लाल निशान में थे, जबकि सोल और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार गुरुवार को मिलेजुले बंद हुए थे, जिसमें डाओ 0.11 प्रतिशत की मजबूती के साथ, जबकि नैस्डैक 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिल रही है। खबर लिखे जाने तक सोना 1.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,250 डॉलर प्रति औंस और चांदी 3.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 110 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
वहीं, कच्चे तेल में भी नरमी देखी जा रही है। डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 64.31 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 1.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 68.51 प्रति बैरल पर था।
राष्ट्रीय
बजट से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पेश पेश करेंगी आर्थिक सर्वेक्षण 2026, जीडीपी ग्रोथ पर रहेगी सबकी नजर

नई दिल्ली, 29 जनवरी : केंद्र सरकार गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 (इकोनॉमिक सर्वे) पेश करने जा रही हैं। यह सर्वे 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले पेश किया जाएगा। इससे यह साफ होगा कि दुनिया में चल रही अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी। इस दौरान सभी की नजरें चालू वित्त वर्ष 2025-26 और आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान पर टिकी रहेंगी।
इकोनॉमिक सर्वे एक महत्वपूर्ण प्री-बजट दस्तावेज होता है, जिसमें देश की पूरे साल की आर्थिक स्थिति, विकास की रफ्तार और आने वाले समय के छोटे व मध्यम अवधि के आर्थिक अनुमान बताए जाते हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को प्रकाशित एक मीडिया लेख में रुपए की कमजोरी, भू-राजनीतिक तनाव और अन्य कई आर्थिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी।
इससे पहले बुधवार को संसद का बजट सत्र शुरू हुआ। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण व्यापक और दूरदर्शी था और इसमें विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही इसमें एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्र की साझा आकांक्षा को प्रतिबिंबित किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण में पिछले वर्षों में देश की विकास यात्रा को दिखाया गया है और साथ ही भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी पेश किया गया है।
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में 2026 को ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में राष्ट्र के महत्वाकांक्षी पथ में एक महत्वपूर्ण आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि नया सहस्राब्दी के पहले 25 वर्षों में भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं और देश ने गर्व के कई पल देखे हैं।
पिछले करीब एक दशक में भारत ने हर बड़े सेक्टर में अपनी नींव मजबूत की है, जिससे भविष्य में तेज विकास की मजबूत संभावना बनी है।
राष्ट्रपति का यह औपचारिक भाषण संसद के अहम दौर की शुरुआत है। इसके बाद 29 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे और फिर 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया जाएगा।
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