राष्ट्रीय समाचार
मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स के सहारे बेहतर स्थान पर है भारत : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 25 जनवरी। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स के सहारे वैश्विक स्तर पर बेहतर स्थान बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को राजकोषीय विवेक पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और राजकोषीय को मजबूत बनाए रखने के मार्ग पर चलना चाहिए।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बजट 2025-26 से पहले वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि 10.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। फिलहाल वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.2 से 6.4 प्रतिशत और मुद्रास्फीति 4 से 3.8 प्रतिशत है।”
जीडीपी के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 26 में 4.5 प्रतिशत (15.9 लाख करोड़ रुपये) पर आ सकता है।
रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि हमें यह भी समझना चाहिए कि बाहरी क्षेत्र के लिए अनिश्चितताओं की दुनिया में, विकास को बढ़ावा देने के लिए रास्ते को थोड़ा सा बदलने में कोई बुराई नहीं है।
वित्त वर्ष 26 में सकल बाजार उधार (14.4 लाख करोड़ रुपये) की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि कोविड-19 महामारी उधार का कुछ हिस्सा पुनर्भुगतान के लिए देय है, जिसके परिणामस्वरूप ऋण में वृद्धि होगी। 11.2 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध उधारी (वित्त वर्ष 26 में 4.05 लाख करोड़ रुपये का मोचन और 75,000 से 100,000 करोड़ रुपये का अपेक्षित स्विच)।
3सरकार ने वित्त वर्ष 25 में अब तक 1.1 लाख करोड़ रुपये की पुनर्खरीद और 1.46 लाख करोड़ रुपये के स्विच किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, “नीति निर्माताओं और नियामकों से संचार स्पष्ट होना चाहिए और बाजार सहभागियों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखना चाहिए। जस्ट-इन-टाइम (जेआईटी) जैसी योजनाएं जो प्रणालीगत तरलता पर प्रभाव डाल सकती हैं, उन्हें पहले क्रम के साथ-साथ दूसरे क्रम के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक पुनर्संतुलन की आवश्यकता है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी की बात करें तो जीएसटी (जीएसटी 2.0) में कर दरों के युक्तिकरण और बिजली शुल्क, फिर एविएशन टर्बाइन ईंधन और अंत में पेट्रोल/डीजल को शामिल करने के साथ सुधारों के दूसरे दौर की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य बीमा उत्पादों को जीएसटी से छूट देना/कम करना, कम से कम सभी खुदरा और स्वास्थ्य केंद्रित उत्पादों के लिए, भी आवश्यक है।
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भारत के प्राइवेट सेक्टर में गतिविधियां अप्रैल में बढ़ीं, रोजगार सृजन 10 महीनों के उच्च स्तर पर

भारत के प्राइवटे सेक्टर में अप्रैल में गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह क्षमता में विस्तार, बेहतर मांग, नए ऑर्डर्स और टेक्नोलॉजी निवेश में बढ़ोतरी होना है। यह जानकारी एचएसबीसी ‘फ्लैश इंडिया पीएमआई कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स’ में गुरुवार को दी गई।
यह इंडेक्स मासिक आधार पर भारत के सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों को दिखाता है। अप्रैल में यह 58.3 पर रहा है, मार्च में यह 57.0 पर था।
एचएसबीसी की ओर से बताया गया कि अप्रैल में नए ऑर्डर मार्च की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़े हैं।
सर्वेक्षण में बताया गया कि भारत में निजी क्षेत्र में रोजगार में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल में रोजगार सृजन में वृद्धि 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी बाधाओं के कारण मार्च में आई सुस्ती के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है। उत्पादन और नए ऑर्डर में तेजी से वृद्धि के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने इस सुधार का नेतृत्व किया।”
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि कंपनियां आपूर्ति पक्ष के झटके की अवधि को लेकर अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर स्टॉक बना रही हैं।
भंडारी ने कहा, “खरीद की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी वृद्धि हुई है। इनपुट लागत का दबाव उच्च बना हुआ है और कंपनियों ने बढ़ी हुई बिक्री कीमतों के माध्यम से इस वृद्धि का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूला।”
मुद्रास्फीति दरें ऐतिहासिक रूप से उच्च बनी रहीं, लेकिन सेवा क्षेत्र में मंदी के कारण पिछले महीने की तुलना में इनमें कुछ कमी आई।
एस एंड पी ग्लोबल द्वारा संकलित पीएमआई रिपोर्ट में कहा गया है, “उत्पादन और बिक्री में मजबूत उछाल के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने रिकवरी का नेतृत्व किया, लेकिन यहां कीमतों का दबाव बढ़ गया।”
रिपोर्ट के अनुसार, सेवा प्रदाताओं की तुलना में वस्तु उत्पादकों ने नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी से वृद्धि दर्ज की।
सेवा कंपनियों ने भी वृद्धि दर्ज की, हालांकि यह तुलनात्मक रूप से मामूली थी। निर्यात के रुझान क्षेत्र स्तर पर मिश्रित रहे, क्योंकि सेवा प्रदाताओं में वृद्धि की धीमी गति वस्तु उत्पादकों में तेजी से वृद्धि के विपरीत थी।
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2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चार आरोपी हुए बरी

2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने बुधवार को चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर करते हुए उन्हें बरी कर दिया। मालेगांव में इन धमाकों में 37 लोगों की जान चली गई थी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की ओर से एक स्पेशल कोर्ट के सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इस अपील में ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के तरीके और मामले में कई सह-आरोपियों को बरी किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने जिन चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द किया है, उनमें राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया और लोकेश शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के आज के फैसले से इन आरोपियों के खिलाफ मामला बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल भी खत्म हो गया।
बेंच ने इससे पहले अपील दायर करने में हुई 49 दिन की देरी को माफ कर दिया था, यह देखते हुए कि यह चुनौती राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (एनआईए अधिनियम) की धारा 21 के तहत एक वैधानिक अपील थी।
मालेगांव मामला 8 सितंबर 2006 का है, जब इस शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच सबसे पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिसंबर 2006 में चार्जशीट दायर की।
इसके बाद फरवरी 2007 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और बाद में एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया। एनआईए ने आगे की जांच के बाद अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों को भी आरोपी बनाया था और एक नई चार्जशीट दायर की थी।
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ऑपरेशन सिंदूर में क्रीक और रन के इलाके में भारतीय सेना के शौर्य की अनसुनी कहानी

ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो चुका है। पाकिस्तान की साजिशों को भारतीय सेना ने लद्दाख से लेकर गुजरात के भुज इलाके तक जमींदोज कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है, और तैयारियों को पिछले एक साल से लगातार धार दी जा रही है। इसी कड़ी में गुजरात के सबसे विषम इलाकों—क्रीक और रन—में भी सेना रोज पसीना बहा रही है। भारतीय सेना क्रीक के 96 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में अपनी हाई-स्पीड बोट के जरिए निगरानी को लगातार मजबूत बनाए हुए है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यही स्थिति रही और पिछले एक साल में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। क्रीक का पूरा इलाका सेना की 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड के अधीन आता है। ब्रिगेड कमांड ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उठाए गए कदमों का खुलासा किया। ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने बताया कि शुरुआती चरणों में उन्होंने तेजी से सेना की तैनाती कर सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही, उन्होंने संतुलित और सुदृढ़ तैनाती बनाए रखी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी आक्रामक ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सके।
ब्रिगेडियर नीरज खजुरिया ने यह भी बताया कि 7 से 12 मई के बीच पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए हमारे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की। इसका जवाब भारतीय सेना ने सभी एजेंसियों के साथ मिलकर मुंहतोड़ तरीके से दिया। एक मजबूत और बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया, जिसमें एंटी-ड्रोन सिस्टम, आर्मी एयर डिफेंस के दस्ते और इंटीग्रेटेड सर्विलांस टीमें शामिल थीं। इन सभी ने मिलकर दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर दिया और रन-क्रीक जैसे संवेदनशील इलाके में होम ऑपरेशन कंट्रोल स्थापित करने में भी मदद की।
अगर 75 (इंडिपेंडेंट) इंफैंट्री ब्रिगेड की बात करें तो यह देश की एक अनोखी फॉर्मेशन है, जिसमें इंफैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और आर्मी इंजीनियर्स एक साथ शामिल हैं। पैंगोंग झील में पेट्रोलिंग करने वाली आर्मी की हाई-स्पीड पेट्रोल बोट क्रीक इलाके में भी तैनात हैं। इनका मुख्य कार्य बीएसएफ और कोस्ट गार्ड के साथ मिलकर क्रीक क्षेत्र में पेट्रोलिंग करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यह भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा है और यहां विवाद भी पुराना है, इसलिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स शांतिकाल में निगरानी करती है, जबकि भारतीय सेना दूसरी परत (सेकेंड लेयर) के रूप में तैनात रहती है। युद्ध के समय सेना बीएसएफ उसके साथ मिलकर नेतृत्व संभालती है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरता और सूझबूझ के लिए कई सैनिकों को सम्मानित भी किया गया। एक सैनिक ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तानी ड्रोन को न केवल ट्रैक किया, बल्कि उन्हें मार गिराया। भारतीय सेना की एयर डिफेंस गन एल-70 ने पाकिस्तान की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया। पाकिस्तान की ओर से इस इलाके में लगभग 100 ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जिन्हें विफल कर दिया गया।
अगर पूरे पश्चिमी सीमा की बात करें तो भारतीय सेना के एयर डिफेंस गन और मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के 600 से अधिक ड्रोन मार गिराए, जिसमें एल-70 की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कच्छ क्षेत्र में तैनात एयर डिफेंस यूनिट के कमांडिंग अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिट ने तेजी से कार्रवाई की और तुरंत सक्रिय हो गई।
राजस्थान और कच्छ सेक्टर में सेना और महत्वपूर्ण नागरिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। 7 मई तक सभी एयर डिफेंस सिस्टम और टुकड़ियां पूरी तरह ऑपरेशनल तैनाती में आ चुकी थीं।अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के ड्रोन को लगातार मार गिराया गया और पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं हुआ। पाकिस्तान को उसकी गुस्ताखी का सबक सिखाने के लिए भारतीय टैंक और तोपों को भी अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया था। रन के इलाके में आवश्यकता पड़ने पर ऐसा जवाब दिया जाता कि दुश्मन उसे कभी भूल नहीं पाता।
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