राजनीति
प्रधानमंत्री से पहले सपाइयों ने पुलिस को चकमा देकर किया पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का सांकेतिक उद्घाटन
समाजवादी पार्टी के कार्यकतार्ओं ने प्रधानमंत्री से पहले पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का ‘सांकेतिक’ उद्घाटन कर दिया है। इस दौरान उन्होंने साइकिल यात्रा भी निकाली है।
समाजवादी पार्टी के विधायक व पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव व सपा विधायक नफीस अहमद समेत सैकड़ों कार्यकर्ता साइकिल से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर पुलिस को चकमा देकर पहुंच गए। एक्सप्रेस-वे पर सपा नेताओं ने साइकिल को खड़ा कर पुष्प वर्षा की और सांकेतिक रूप से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का सांकेतिक लोकार्पण कर दिया। लोकार्पण के बाद सपा नेताओं के साथ कार्यकतार्ओं ने कई किलोमीटर तक एक्सप्रेस वे पर साइकिल चलाई।
इस दौरान सपा विधायक नफीस अहमद ने कहा, “पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की आधारशिला और इसको बनाने का काम अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्री काल में शुरू किया था और समाजवादी एक्सप्रेस वे पूर्वांचल को एक सौगात दी थी, जिससे पूर्वांचल की तरक्की का रास्ता खुल सके। भाजपा सरकार लगातार अखिलेश यादव के कामों पर अपना मुहर लगाकर अपना नाम कर रही है, इनकी कोई सोच नहीं है। आज उसी तरीके से जो है समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का नाम बदलकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन करने जा रहे हैं लेकिन हम लोगों ने दुर्गा प्रसाद यादव के नेतृत्व में आज तमाम कार्यकर्ता नेता साथियों ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन कर दिया। फूल वर्षा कर दी जिससे यह संदेश जा सके की इस उत्तर प्रदेश का तरक्की का रास्ता कोई बना सकता है, इसको कोई आगे ले जा सकता है, उत्तम प्रदेश कोई बना सकता है, तो उसका नाम अखिलेश यादव है।”
हालांकि सांकेतिक लोकार्पण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहले ही सूचना दे दी थी, बावजूद इसके पुलिस महकमा व जिला प्रशासन इसे लेकर संजीदा नहीं रहा। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है।
सुल्तानपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 16 नवंबर यानी आज मंगलवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण किया जाना है। इसे लेकर सारी तैयारियां पूरी भी कर ली गई हैं। उधर अखिलेश यादव की विजय यात्रा निकालने के लिए प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। इस बात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहले ही कार्यकतार्ओं से कह दिया था कि वह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का संकेतिक लोकार्पण करेंगे।
सपाइयों का कहना है कि इस समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही कर चुके हैं। इसलिए हम इसका सांकेतिक लोकार्पण आज कर रहे हैं।
सपाइयों ने कहा कि समाजवादी पार्टी द्वारा कराए गए कार्यों को भाजपा अपना कार्य बता रही है। साथ ही उसका नाम भी बदल रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का भी नाम बदला गया है। इस पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का नाम समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे था, जिसे भाजपा ने बदलकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे कर दिया।
राष्ट्रीय समाचार
एमएलएस: 2-2 से ड्रॉ रहा इंटर मियामी और सैन डिएगो के बीच खेला गया मुकाबला, मेसी ने दागा एक गोल

एमएलएस रेगुलर सीजन में इंटर मियामी सीएफ और सैन डिएगो एफसी के बीच मुकाबला 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ। इंटर मियामी को इस मैच में एक अंक मिला। टीम के लिए कप्तान लियोनेल मेसी और स्टार स्ट्राइकर लुइस सुआरेज ने गोल किए।
मेहमान टीम सैन डिएगो एफसी ने मैच के 12वें मिनट में एंडर्स ड्रायर के गोल की मदद से बढ़त हासिल की। इसके बाद 24वें मिनट में लियोनेल मेसी ने इंटर मियामी की ओर से शानदार गोल दागते हुए स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया। मेसी की फ्री-किक सीधे गोल के ऊपरी बाएं कोने में गई और गोलकीपर उसे रोक नहीं पाया।
यह मेसी का इस सीजन का 20वां गोल रहा। वह एमएलएस 2026 गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही मेसी एमएलएस इतिहास के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने लगातार तीन सीजन में 20 या उससे अधिक गोल किए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि एलएएफसी के डेनिस बुआंगा ने 2023 से 2025 के बीच हासिल की थी।
मेसी के इस गोल ने गोल्डन बूट की रेस में उनकी बढ़त को और मजबूत कर दिया है; उनके नाम लीग में सबसे ज्यादा 33 गोल योगदान (गोल + असिस्ट) हैं और वह एमएलएस में गोल (20) और असिस्ट (13) के मामले में सबसे आगे हैं। हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 रहा, जिसके बाद दूसरे हाफ में इंटर मियामी ने जीत हासिल करने के लिए लगातार 45 मिनट तक हमले जारी रखे।
मेजबान टीम की कोशिशों का फल उन्हें 74वें मिनट में मिला। डी पॉल ने बॉक्स के दाईं ओर सुआरेज को एक सटीक पास दिया, जहां उरुग्वे के दिग्गज फॉरवर्ड ने अपने दाहिने पैर से पहला शॉट लेते हुए गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। यह इस रेगुलर सीजन में सुआरेज का 13वां गोल था, जबकि इस असिस्ट के साथ डी पॉल के असिस्ट की संख्या 12 हो गई।
सैन डिएगो ने 82वें मिनट में एक बार फिर स्कोर को 2-2 से बराबर कर दिया। मैच के आखिरी पलों में इंटर मियामी को हमले के कई मौके मिले, लेकिन 90+6वें मिनट में मैच के आखिरी प्ले के दौरान गोलकीपर सेंट क्लेयर ने सैन डिएगो के कीरन सार्जेंट के शॉट को रोककर टीम की हार को टाला। इसके बाद इंटर मियामी अपने अगले एमएलएस मुकाबले के लिए 28 सितंबर को ओहायो के कोलंबस शहर जाएगी। वहां टीम का सामना स्कॉट्समिरेकल-ग्रो फील्ड में कोलंबस क्रू से होगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश के निर्यातकों पर बढ़ा लागत का दबाव, भारत-वियतनाम-चीन से मुकाबले में पिछड़ रहे: रिपोर्ट

ऊर्जा, वित्तपोषण और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण बांग्लादेश के निर्यातक भारत, वियतनाम और चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी खो रहे हैं। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती लागत का बोझ निर्यातकों के लिए उठाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि वे इसका पूरा असर विदेशी खरीदारों पर नहीं डाल पा रहे हैं। इससे निर्यात ऑर्डर घटने और बाजार हिस्सेदारी कम होने का खतरा बढ़ गया है।
उद्योग के अनुमान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गैस और बिजली की कीमतों में वृद्धि, मजदूरी, ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दर में गिरावट के कारण उत्पादन लागत में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश का वस्तु निर्यात लगभग 5 प्रतिशत घटकर 47.74 अरब डॉलर रह गया। वहीं, इसी अवधि में वियतनाम का निर्यात 16.8 प्रतिशत और चीन का 5.5 प्रतिशत बढ़ा।
उद्योग जगत का कहना है कि कीमत में मामूली अंतर भी ऑर्डर प्रतिस्पर्धी देशों की ओर मोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ ने भी निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट में एक उद्योग विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि यदि बांग्लादेश का एफओबी (फ्री-ऑन-बोर्ड) मूल्य किसी प्रतिस्पर्धी देश से केवल 1-2 प्रतिशत अधिक हो, तो खरीदार ऑर्डर दूसरी जगह भेज सकते हैं।
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक पूर्व निदेशक के अनुसार, 4 डॉलर कीमत वाले परिधान के 10 लाख पीस के ऑर्डर में केवल 1-2 प्रतिशत कीमत का अंतर 40,000 से 80,000 डॉलर तक का फर्क पैदा कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चटग्राम बंदरगाह की नई टैरिफ व्यवस्था के तहत सेवा शुल्क में औसतन 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। वहीं, 20 फुट के कंटेनर का शुल्क 11,849 टका से बढ़कर 16,243 टका हो गया, जो करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि है।
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष फजलि शमीम एहसान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं या वित्तपोषण मंजूर करने में काफी समय लगा रहे हैं, जबकि सरकार लगातार समर्थन देने की अपील कर रही है।
राष्ट्रीय समाचार
एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।
अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।
रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
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