अनन्य
मुंबई के कांदिवली में 400 लोग हैरान-परेशान, 1400 रुपये लेकर वैक्सीन लगा गए…पर असली या नकली?
कोरोना को मात देने के लिए सरकार लोगों से टीका लगवाने की अपील कर रही है। इस अपील का असर भी दिख रहा है। इसी का फायदा कुछ बहरूपिया भी उठा रहे हैं और टीकाकरण के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला मुंबई के कांदिवली इलाके में सामने आया है। यहां के हीरानंदानी हेरिटेज सोसाइटी में बीते दिनों लगे कैम्प में 400 लोगों का टीकाकारण किया गया, लेकिन टीके के बाद जारी सर्टिफिकेट से वैक्सीनेशन संदेह के घेरे में आ गया है। अब लोग यह जानने में जुटे हैं कि वाकई उन्हें कोरोना का टीका लगा है या फिर कुछ और। लोगों ने स्थानीय कांदिवली पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। इस घटना के बाद लोगों के मन में वैक्सीनेशन को लेकर शक गहरा हो गया है। ऐसे में वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है। अगर आपके इलाके या सोसाइटी में प्राइवेट वैक्सीनेशन कैंप लगा है तो सावधानी बरतें। लोगों का आरोप है कि उनसे प्रति व्यक्ति 1400 रूपये लेकर वैक्सीन लगाई गई है।
कांदिवली में हीरानंदानी हेरिटेज सोसाइटी में 30 मई को कैम्प में यहां के 400 लोगों को कोविशील्ड का टीका लगाया गया था। सोसायटी के निवासी हितेश पटेल ने बताया कि कैम्प में उनके बेटे का भी टीकाकरण हुआ। सोसाइटी ने महेंद्र सिंह नामक व्यक्ति को नियुक्त किया था। उसने टीकाकरण मुंबई के एक बड़े अस्पताल के मार्फत आयोजित कराने का दावा किया था। लेकिन टीकाकरण के समय ऐसा कुछ नहीं दिखा। पटेल ने बताया कि टीकाकरण के बाद जब लाभार्थियों को सर्टिफिकेट काफी दिनों तक जारी नहीं हुआ, तो सोसाइटी ने संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया। इसके बाद जब लोगों को सर्टिफिकेट मिला तो उनके होश उड़ गए। किसी को नानावटी अस्पताल, किसी को बीएमसी के नेस्को तो किसी को वहां के शिवम अस्पताल तो किसी को अन्य अस्पताल का सर्टिफिकेट जारी हुआ। यह सभी सर्टिफिकेट एक साथ नहीं जारी हुए, बल्कि अलग-अलग दिन जारी हुए।
संबंधित व्यक्ति सोसाइटी के प्रत्येक लोगों से संपर्क कर उनके मोबाइल पर आए ओटीपी मांगकर उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर रहा था। पटेल ने बताया कि जब नानावटी अस्पताल से संबंधित लाभार्थी को जारी सर्टिफिकेट की सत्यता जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने संबंधित व्यक्ति का वैक्सीनेशन उनके द्वारा नहीं किए जाने की बात कही। सच को जानने के लिए सोसाइटी ने पुलिस में लिखित शिकायत दी है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाबासाहेब सालुंखे ने बताया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की गई है, वह फिलहाल भूमिगत है। नानावटी अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि उनके अस्पताल की ओर से इस सोसाइटी में कोई भी कैम्प आयोजित नहीं किया गया है। अस्पताल ने इस संबंध में विभागों को सूचित भी किया है और जल्द पुलिस स्टेशन में शिकायत भी की जाएगी। इस मामले में स्थानीय विधायक ने बताया कि जिस कोविशील्ड वायल का इस्तेमाल किया गया था, उसके लेबल पर नॉट फॉर सेल लिखा हुआ था। इससे यह लग रहा है कि किसी सरकारी केंद्र से यह वैक्सीन जारी हुई है। जांच में बहुत बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है।
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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।
आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।
शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।
बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।
सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।
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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।
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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।
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