राजनीति
मैं किसी भाषा का विरोधी नहीं, मगर अपनी मातृभाषा को जिंदा रखना होगा: अमित शाह
सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर दिल्ली के सरदार पटेल स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिरकत की। इस मौके पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा मैं किसी भाषा के सीखने का विरोधी नहीं हूं, मगर अपनी मातृभाषा को जिंदा रखना होगा।
अमित शाह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बुनियादी शिक्षा स्थानीय भाषा में दी जानी चाहिए, मैं छात्रों से अपनी मूल भाषा और बोली को जीवित रखने का आग्रह करता हूं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अंग्रेजी की जानकारी को बुद्धि की क्षमता के साथ जोड़ दिया गया है। भाषा सिर्फ अभिव्यक्ति है, क्षमता का परिचायक नहीं है। अगर आपके अंदर क्षमता है, तो दुनिया को आपको सुनना ही होगा, चाहे आप किसी भी भाषा में बोले।
अमित शाह ने कहा कि अगर आपको अपनी क्षमता बढ़ाना है, तो ये आपकी अपनी मातृभाषा में ही होगा। दूसरी भाषा में सोचने से उसकी प्रिक्रिया कम हो जाती है। मातृभाषा को जिंदा रखना होगा और उसे आगे बढ़ाना होगा। अगर हम सोचते हैं कि अंग्रेजी जिसको अच्छी आती है, वो ही देश के विकास में योगदान कर सकता है, तो हम सिर्फ 5 प्रतिशत लोगों को ही देश के विकास से जोड़ते हैं। अगर अपनी भाषा में बोलने, लिखने और अनुसंधान करने वाला बच्चा देश के विकास की प्रक्रिया में नहीं जुड़ता है, तो हम 95 प्रतिशत बच्चों को देश के विकास की प्रक्रिया से काट देते हैं।
अमित शाह ने कहा कि इससे समाज के दो हिस्से हो जाते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि बच्चों से अपनी मातृभाषा में ही बात करें। उन्होंने बताया कि हमारी नई शिक्षा नीति जो आई है, उसमें सबसे महत्वपूर्ण आयाम है कि बच्चों की प्राथमिक शिक्षा अपनी भाषा में होनी चाहिए। टेक्निकल शिक्षा और मेडिकल शिक्षा भी अपनी भाषा में उपलब्ध होना चाहिए। अनुसंधान भी स्थानीय भाषा में ही होना चाहिए।
अपराध
महाराष्ट्र में एलपीजी संकट: कमी के बीच साइबर अपराध में वृद्धि, कल्याण-डोम्बिवली में ‘गैस अपडेट’ ऑनलाइन घोटाले में 2 महिलाओं ने ₹4 लाख गंवाए

ठाणे: पुलिस ने शुक्रवार को पुष्टि की कि कल्याण-डोम्बिवली में दो महिलाएं ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं। जब कथित तौर पर धोखेबाजों ने महानगर गैस लिमिटेड के प्रतिनिधियों के रूप में खुद को पेश किया और उन्हें अपने फोन पर एक दुर्भावनापूर्ण एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए धोखा दिया।
सहायक पुलिस आयुक्त सुहास हेमदे के अनुसार, पीड़ितों को एक अज्ञात व्यक्ति के फोन आए, जिसने खुद को गैस वितरण कंपनी का कर्मचारी बताया। फोन करने वाले ने गैस संबंधी जानकारी अपडेट करने के बहाने उनसे एक APK फाइल डाउनलोड करके खोलने और अपने मोबाइल फोन पर एक फॉर्म भरने को कहा।
महिलाओं द्वारा प्रक्रिया पूरी करने के बाद, कथित तौर पर उनके बैंक खातों से लगभग 4 लाख रुपये निकाल लिए गए। पुलिस ने डोंबिवली पुलिस स्टेशन में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज कर घटना की जांच शुरू कर दी है।
यह घोटाला ऐसे समय में सामने आया है जब नवी मुंबई और ठाणे सहित मुंबई महानगर क्षेत्र के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी देखी जा रही है।
आज सुबह-सुबह, घटती आपूर्ति के बीच सानपाड़ा के निवासी सुबह 3 बजे से ही एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए कतारों में लगे हुए देखे गए। इंटरनेट पर वायरल हुए वीडियो में एक गैस एजेंसी के बाहर भारी भीड़ जमा दिखाई दे रही थी, जिसमें लोग खाली सिलेंडर लिए लंबी कतारों में इंतजार कर रहे थे।
इस कमी ने पूरे क्षेत्र के आतिथ्य सत्कार क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन (एएचएआर) के अध्यक्ष विजय शेट्टी के अनुसार, शहर के 16,000 रेस्टोरेंटों में से लगभग 20 प्रतिशत मंगलवार तक कमी के कारण बंद हो गए थे, और बुधवार को यह संख्या बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई।
इसके अलावा, एलपीजी की आपूर्ति ठप होने के कारण रायगढ़ जिले और नवी मुंबई के 20 प्रतिशत से अधिक होटल 11 मार्च तक बंद हो गए थे। होटल मालिकों का आरोप है कि सिलेंडर कालाबाजारी में 3,000 रुपये से शुरू होने वाली कीमतों पर बेचे जा रहे हैं, जो सामान्य दरों से अधिक है।
होटल संघों ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे तत्काल पर्याप्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करें ताकि आगे और बंद होने से बचा जा सके और आतिथ्य क्षेत्र पर निर्भर हजारों श्रमिकों की आजीविका की रक्षा की जा सके।
राजनीति
एलजीपी संकट और 8 सांसदों के निलंबन पर लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली, 13 मार्च : लोकसभा में शुक्रवार को एलपीजी और 8 सांसदों के निलंबन को लेकर हंगामा हुआ। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
शुक्रवार सुबर 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस के सांसद वेल के नजदीक पहुंच गए। उन्होंने एलपीजी संकट को लेकर चर्चा की मांग उठाई। इसके साथ ही, 8 सांसदों के निलंबन को वापस लेने के लिए हंगामा किया।
स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने की कोशिश करते हुए कहा, “मैंने पहले भी आग्रह किया था और फिर से आग्रह कर रहा हूं कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। आज भी प्रतिपक्ष के 8 सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हुए हैं। प्रश्नकाल के अंदर देश के मुद्दे और क्षेत्र की समस्याएं उठती हैं, तो वहीं सरकार की जवाबदेही तय होती है। इसीलिए आग्रह है कि प्रश्नकाल के अंदर सभी को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने विपक्षी सदस्यों को लेकर कहा, “वे बोलते हैं कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए, उन्हें सदन में बोलने दिया जाए, लेकिन जब बोलने का अवसर दिया जाता है तो उस समय आप बोलते नहीं हैं और सदन में गतिरोध करना चाहते हैं। यह संसदीय मर्यादा नहीं है।” स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को प्रश्नकाल के बाद अपना विषय उठाने के लिए कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा।
8 सदस्यों के निलंबन पर सख्त टिप्पणी करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “सदन के अंदर अगर मेजों पर चढ़ेंगे तो इसी तरह (निलंबन) की कार्रवाई होगी। मेरा एक और आग्रह है कि सदन की पवित्रता, चाहे वह संसद परिसर के अंदर हो या संसद के बाहर हो, उसकी पवित्रता, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाने की सबकी जिम्मेदारी है। जिस तरह का आचरण और व्यवहार विपक्ष के सदस्यों का रहा है, वे सदन की पवित्रता को समाप्त कर रहे हैं।”
लोकसभा स्पीकर ने दोहराया कि विपक्ष के सदस्य प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते हैं और लगातार गतिरोध पैदा करते हैं। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र सरकार पेश करेगी विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’

मुंबई, 13 मार्च : महाराष्ट्र सरकार शुक्रवार को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश करने जा रही है। इसके साथ ही, ‘जबरन’ धर्मांतरण के पीछे शामिल व्यक्तियों और संगठित संस्थाओं की पहचान करने और उन्हें दंडित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी या लालच देकर कराए जाने वाले धार्मिक धर्मांतरणों पर रोक लगाना है। 5 मार्च को हुई बैठक में राज्य कैबिनेट ने एक उच्च-स्तरीय विशेष समिति की सिफारिशों के बाद इसे मंजूरी दे दी थी।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता वाली इस समिति का गठन 14 फरवरी, 2025 को किया गया था। इसका उद्देश्य कानूनी ढांचों का अध्ययन करना और अवैध धर्मांतरण से जुड़ी शिकायतों से निपटने के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार करना था।
एक बार जब बिल को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों से मंजूरी मिल जाएगी, तो इसे राज्यपाल की सहमति के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।
महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय की ओर से जारी एजेंडा में प्रश्नकाल के बाद राज्य विधानसभा में इस बिल को पेश करने की बात कही गई है।
इस बिल में सख्त प्रशासनिक शर्तें और आपराधिक दंड का प्रस्ताव रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धर्म परिवर्तन जबरदस्ती नहीं, बल्कि पूरी तरह से व्यक्तिगत पसंद का मामला हो।
इस बिल के अनुसार, जो लोग धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें जिला अधिकारियों को 60 दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद, इसे कानूनी रूप से वैध माने जाने के लिए 25 दिनों के भीतर आधिकारिक तौर पर पंजीकृत करवाना जरूरी होगा।
इसके अलावा, बिल में यह प्रस्ताव किया गया है कि जिस व्यक्ति का धर्म परिवर्तन हो रहा है, उसके खून के रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अगर उन्हें शक हो कि इस प्रक्रिया में जबरदस्ती या कोई लालच शामिल है।
सरकार का कहना है कि यह कानून कमजोर लोगों को धर्म परिवर्तन की गलत चालों से बचाने के लिए जरूरी है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे सहित अन्य मंत्रियों ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून के प्रबल समर्थक रहे हैं। यह कानून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में देखे गए एक चलन का ही अनुसरण करता है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के “धर्म की स्वतंत्रता” संबंधी कानून बनाए हैं।
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