राष्ट्रीय
वोटर लिस्ट मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ रिवीजन पिटीशन की सुनवाई टली
नई दिल्ली, 13 मार्च : नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई टल गई। यह मामला कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़ा है, जिन पर बिना नागरिकता हासिल किए वोटर सूची में नाम शामिल कराने का आरोप है। अब अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।
इस मामले में अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से सुनवाई टालने की मांग के कारण फिलहाल आगे बढ़ाया नहीं गया। अगली सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।
पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की तरफ से जवाब दाखिल किया गया था। इसमें याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया। बताया गया कि यह मामला केवल राजनीतिक उद्देश्यों के तहत हवा में उड़ा दिया गया है और किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित नहीं है।
वहीं, याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी जबकि उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में शामिल था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल किया गया और क्या इसके लिए किसी फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया गया। इसके अलावा, यह भी पूछा गया कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से क्यों हटाया गया और जब 1983 में नागरिकता हासिल की गई, तब किस दस्तावेज के आधार पर उनका नाम सूची में शामिल किया गया।
सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका में आरोप लगाए गए थे कि इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की जांच कर सही तथ्य सामने लाए जाएं। हालांकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर में सोनिया गांधी की खिलाफ दर्ज याचिका को खारिज कर दिया था लेकिन याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ रिवीजन पिटीशन दाखिल की।
कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद अब 30 मार्च को अगली सुनवाई होगी। इस दौरान सभी पक्षों को अपने तर्क रखने का मौका मिलेगा।
राष्ट्रीय
एलपीजी को लेकर विपक्ष के रवैये पर भड़के भाजपा नेता, ‘विपक्ष जनता को गुमराह कर कहा’

नई दिल्ली, 13 मार्च : पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 12 मार्च गुरुवार को कहा था कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और भारत के पास इस समय पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहें न फैलाएं और फर्जी जानकारी से बचें। केंद्रीय मंत्री के बयान पर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना सांसद मिलिंद देवरा ने कहा कि भारत सरकार ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति अपनी मंशा पहले ही व्यक्त कर दी है। यह बात भारत के विदेश मंत्री और तेल मंत्री द्वारा भी कही जा चुकी है।
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि विपक्ष को काम करना नहीं है। वे सिर्फ इसी तरह की हरकतें करते हैं। जो मुद्दा ही नहीं है उसके बारे में कांग्रेस का आंदोलन करने की नीति ही रही है। कांग्रेस को सदन में काम करने की कोई इंटरेस्ट नहीं है। सदन के बाहर प्रोटेस्ट करना और सुर्खियों में रहना यही इनका काम है।
भाजपा सांसद मयंक नायक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित है। देशवासियों से मैं कहना चाहता हूं कि कोई पैनिक न लें। विपक्ष जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। देश की जनता पीएम मोदी के नेतृत्व में सलामत है। देश की जनता को टेंशन लेने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जनता के सामने जाने के लिए कोई मौका ही नहीं है। जनता के सामने विपक्ष किस मुद्दे को लेकर जाए।
भाजपा सांसद ममन मिश्रा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का काम आधारहीन होता है। उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री बोल रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्री कह रह हैं, सबकुछ जनता के सामने है। कहीं कोई संकट नहीं है। एलपीजी का प्रोडक्शन हमने बढ़ा दिया है। कई जगह विपक्ष के रवैये की वजह से पैनिक हो गया है।”
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क गड्ढों-करंट से होने वाली मौत रोकने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली, 13 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर गड्ढों, खुले बिजली के तारों से करंट लगने और खराब बुनियादी ढांचे की वजह से होने वाली मौतों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पूरे देश के लिए एकसमान आदेश जारी करना संभव नहीं है। इस तरह की समस्याएं स्थानीय स्तर पर अलग-अलग होती हैं, इसलिए याचिकाकर्ता चाहें तो संबंधित हाई कोर्ट में जाकर याचिका दायर कर सकते हैं।
यह याचिका ‘जनश्रुति पीपुल्स वॉयस’ नाम की संस्था ने दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि सड़क हादसों, खुले तारों से होने वाले करंट लगने के मामलों और खराब सड़कों व अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से होने वाली मौतों को रोकने के लिए देशव्यापी मानक प्रक्रिया और दिशा-निर्देश बनाए जाएं। याचिकाकर्ता ने इन मौतों को रोकने के लिए सख्त नीतियां और जिम्मेदारी तय करने की अपील की थी, क्योंकि ऐसी घटनाएं रोजाना हो रही हैं और इनमें निर्दोष लोगों की जान जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला हाई कोर्ट के दायरे में आता है, जहां स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बेहतर फैसला लिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी इशारा किया कि बुनियादी ढांचे की देखभाल और सुरक्षा के मुद्दे मुख्य रूप से राज्य सरकारों, नगर निकायों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी हैं।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर में सड़कों पर गड्ढों, खुले मैनहोल और बिजली के लटकते तारों से होने वाले हादसे आम बात हो गई है। कई हाई कोर्ट्स पहले ही ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना चुके हैं, जैसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में गड्ढों से मौत होने पर मुआवजा देने के आदेश दिए थे।
राजनीति
एलजीपी संकट और 8 सांसदों के निलंबन पर लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली, 13 मार्च : लोकसभा में शुक्रवार को एलपीजी और 8 सांसदों के निलंबन को लेकर हंगामा हुआ। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
शुक्रवार सुबर 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस के सांसद वेल के नजदीक पहुंच गए। उन्होंने एलपीजी संकट को लेकर चर्चा की मांग उठाई। इसके साथ ही, 8 सांसदों के निलंबन को वापस लेने के लिए हंगामा किया।
स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने की कोशिश करते हुए कहा, “मैंने पहले भी आग्रह किया था और फिर से आग्रह कर रहा हूं कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। आज भी प्रतिपक्ष के 8 सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हुए हैं। प्रश्नकाल के अंदर देश के मुद्दे और क्षेत्र की समस्याएं उठती हैं, तो वहीं सरकार की जवाबदेही तय होती है। इसीलिए आग्रह है कि प्रश्नकाल के अंदर सभी को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने विपक्षी सदस्यों को लेकर कहा, “वे बोलते हैं कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए, उन्हें सदन में बोलने दिया जाए, लेकिन जब बोलने का अवसर दिया जाता है तो उस समय आप बोलते नहीं हैं और सदन में गतिरोध करना चाहते हैं। यह संसदीय मर्यादा नहीं है।” स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को प्रश्नकाल के बाद अपना विषय उठाने के लिए कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा।
8 सदस्यों के निलंबन पर सख्त टिप्पणी करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “सदन के अंदर अगर मेजों पर चढ़ेंगे तो इसी तरह (निलंबन) की कार्रवाई होगी। मेरा एक और आग्रह है कि सदन की पवित्रता, चाहे वह संसद परिसर के अंदर हो या संसद के बाहर हो, उसकी पवित्रता, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाने की सबकी जिम्मेदारी है। जिस तरह का आचरण और व्यवहार विपक्ष के सदस्यों का रहा है, वे सदन की पवित्रता को समाप्त कर रहे हैं।”
लोकसभा स्पीकर ने दोहराया कि विपक्ष के सदस्य प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते हैं और लगातार गतिरोध पैदा करते हैं। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
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