अंतरराष्ट्रीय
वैश्विक स्मार्टफोन बाजार तीसरी तिमाही में 6 फीसदी गिरा, सैमसंग शीर्ष पर
वैश्विक स्मार्टफोन बाजार तिमाही-दर-तिमाही में 6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तीसरी तिमाही में 342 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जबकि बाजार में साल-दर-साल 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई। हालांकि, सैमसंग ने 69 मिलियन यूनिट के स्मार्टफोन शिपमेंट के साथ तीसरी तिमाही में नंबर एक स्थान बरकरार रखा।
मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, वैश्विक घटकों की कमी और चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे प्रमुख बाजारों की धीमी रिकवरी के कारण बाजार में गिरावट आई है।
काउंटरप्वाइंट रिसर्च के निदेशक तरुण पाठक ने एक बयान में कहा, “सितंबर तिमाही के दौरान, हमने आपूर्ति की कमी देखी जो जून तिमाही के दौरान अनुभव की तुलना में और भी अधिक गंभीर थी।”
उन्होंने कहा, “इससे शिपमेंट वॉल्यूम में गिरावट आई, विशेष रूप से एंट्री टियर सेगमेंट में, जिसने विकास क्षमता को सीमित कर दिया है। परिणामस्वरूप, बाजार की मांग को मध्य-से-उच्च-स्तरीयस्मार्टफोन द्वारा पूरा किया गया, जिसने तिमाही को रिकॉर्ड राजस्व तक पहुंचाने में मदद की।”
एप्पल ने तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 15 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 48 मिलियन यूनिट्स की शिपिग की। यह वृद्धि नवीनतम आईफोन 13 श्रृंखला के लॉन्च और आईफोन एसई 2020 के अपेक्षित प्रदर्शन से अधिक मजबूत होने से प्रेरित थी।
एप्पल ने चीन के प्रीमियम सेगमेंट में अपना जोर जारी रखा, जहां ओप्पो, वीवो और शाओमी जैसे चीनी ब्रांड हुआवेई की घटती स्थिति द्वारा छोड़े गए अंतर को प्रभावी ढंग से भरने में सक्षम नहीं हैं।
शाओमी ने 44.4 मिलियन यूनिट्स शिप किए, जो कि साल-दर-साल 5 प्रतिशत और 15 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही नीचे है, क्योंकि यह चल रहे कंपोनेंट की कमी से गंभीर रूप से प्रभावित था।
नतीजतन, इसकी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी दूसरी तिमाही में 16.25 फीसदी से घटकर 12.9 फीसदी रह गई। चीन में, शाओमी के शिपमेंट में तिमाही-दर-तिमाही में 15 प्रतिशत की गिरावट आई और ब्रांड ने ऑनर का तीसरा स्थान खो दिया।
ओप्पो, जिसमें वनप्लस भी शामिल है, उसने साल-दर-साल 23 फीसदी की बढ़ोतरी की और 38.1 मिलियन यूनिट्स के साथ 11.1 फीसदी मार्केट शेयर हासिल किया।
ब्रांड ने 400-599 डॉलर और 600-799 डॉलर मूल्य बैंड में वृद्धि देखी, मुख्य रूप से रेनो 6 सीरीज, फाइंड एक्स3 और वनप्लस 9 श्रृंखला के मजबूत शिपमेंट के कारण हुई।
तिमाही के दौरान, वनप्लस ने भारत में अपनी अब तक की सबसे अधिक शिपमेंट दर्ज की।
तिमाही के लिए 9.8 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के लिए वीवो ने 9 प्रतिशत साल-दर-साल और 4 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही की वृद्धि की। वीवो ने तीसरी तिमाही में 17 मिलियन से अधिक यूनिट के साथ चीन के बाजार में बढ़त जारी रखी।
कोर घटकों की कमी के कारण हुआवेई के शिपमेंट में सालाना 84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5.8 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई।
ऑनर्स के शिपमेंट में 73 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही की वृद्धि हुई, जो चीन में बाजार में वापसी से प्रेरित था, इससे यह तीसरी तिमाही में चौथा सबसे बड़ा ब्रांड बन गया।
रियलमी ने 16 मिलियन यूनिट्स के साथ अब तक का सर्वोच्च शिपमेंट प्रदर्शन हासिल किया है। यह इसकी 8 सीरीज और हाल ही में लॉन्च की गई नारजो सीरीज के मजबूत और लगातार प्रदर्शन से प्रेरित था।
व्यापार
बजट वाले दिन भी खुला रहेगा शेयर बाजार, बीएसई और एनएसई में होगी सामान्य ट्रेडिंग

मुंबई, 31 जनवरी : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी यानी रविवार को यूनियन बजट 2026 पेश करने वाली हैं। आम तौर पर शनिवार और रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है, लेकिन बजट के चलते इस बार रविवार को घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई और एनएसई खुले रहेंगे। इसके साथ ही कमोडिटी मार्केट यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) भी स्पेशल ट्रेडिंग सेशन के तौर पर खुला रहेगा।
यह कोई पहली बार नहीं है जब छुट्टी वाले दिन शेयर बाजार खुला रहेगा, पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि जब 1 फरवरी को बजट पेश हुआ है और उस दिन छुट्टी रहा है, तब भी शेयर बाजार में ट्रेडिंग कराई गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को सुबह 11 बजे लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अपने सर्कुलर में कहा है कि “केंद्रीय बजट पेश होने के चलते, सदस्यों से अनुरोध है कि वे ध्यान दें कि एक्सचेंज 1 फरवरी 2026 को मानक बाजार समय (सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक) के अनुसार लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित करेगा।
चूंकि यह सेटलमेंट हॉलिडे है, इसलिए 30 जनवरी को खरीदे गए शेयर 1 फरवरी को बेचे नहीं जा सकेंगे। इसी तरह, बजट वाले दिन खरीदे गए शेयर अगले दिन बेचना संभव नहीं होगा।
निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह किसी भी वित्त मंत्री के लिए सबसे लंबे लगातार कार्यकालों में से एक है। यह 2024 में एनडीए सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट भी होगा।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों का ध्यान सरकार के कर्ज, राजकोषीय घाटे और अगले साल की उधारी योजना पर रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि उधारी में साल-दर-साल करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 4.1 से 4.2 प्रतिशत के आसपास रह सकता है।
बजट से जुड़े सभी दस्तावेज आर्थिक मामलों का विभाग तैयार करता है। इनमें सरकार के खर्च, आमदनी और आने वाले वित्त वर्ष के लिए नई योजनाओं का पूरा ब्योरा होता है।
इससे पहले 29 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 संसद में पेश किया गया था। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस को इसकी जानकारी दी थी।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ईरान की ओर पहले से बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है, सभी विकल्प खुले : ट्रंप

वाशिंगटन, 31 जनवरी : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की ओर पहले से ज्यादा बड़ा नौसैनिक बेड़ा भेज रहा है। उनका कहना है कि वॉशिंगटन बातचीत के जरिए समझौता चाहता है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो दूसरे रास्तों के लिए भी तैयार है।
ट्रंप ने बताया कि यह तैनाती अमेरिका की उस नौसैनिक मौजूदगी से भी बड़ी होगी, जो पहले वेनेजुएला के पास थी। उन्होंने इसे एक बड़ा जहाज़ी बेड़ा बताया। उनका कहना था कि इस कदम का मकसद दबाव बढ़ाना है, जबकि बातचीत की कोशिशें जारी रहेंगी।
ट्रंप ने कहा, “हम अब ईरान की ओर ज्यादा संख्या में जहाज भेज रहे हैं। उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को कोई समय-सीमा दी गई है, तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बात केवल ईरान ही ठीक से जानता है।
ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उनका ईरान से सीधे संपर्क हुआ है। जब उनसे पूछा गया कि क्या संदेश ईरान के नेताओं तक पहुंचा है, तो उन्होंने कहा, “हां, पहुंचा है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत से हल निकालना चाहता है, लेकिन हालात बिगड़ने की संभावना को भी नकारा नहीं। ट्रंप बोले, “अगर समझौता हो गया तो अच्छा है। अगर नहीं हुआ, तो आगे देखा जाएगा।”
सवालों के जवाब में ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य ताकत पर जोर दिया, लेकिन किसी खास कार्रवाई का विवरण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास “दुनिया के सबसे शक्तिशाली जहाज” हैं और इस तैनाती को रोकथाम की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया।
उन्होंने सैन्य योजनाओं के समय और नियमों पर बात करने से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य मामलों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताना चाहते।
ये बयान व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान आए, जहां घरेलू आयोजनों के बीच ट्रंप ने विदेश नीति, रक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
अमेरिका और ईरान के रिश्ते कई सालों से तनाव में हैं। इसकी वजह प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे रहे हैं। पहले भी बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन सीमित सफलता मिली और टकराव की स्थिति बार-बार बनी।
अमेरिका ने इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के समय नौसैनिक तैनाती का इस्तेमाल अक्सर रोकथाम और संकेत दोनों के रूप में किया है, जबकि यह भी कहा है कि वह कूटनीतिक समाधानों के लिए खुला है।
अंतरराष्ट्रीय
भारत भरोसे पर आधारित एआई गवर्नेंस विजन पर काम कर रहा है: मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार

वाशिंगटन, 31 जनवरी : भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संचालन के लिए भरोसे पर आधारित नीति अपना रहा है। इस नीति में सख्त नियमों के बजाय समावेश, नवाचार और सुरक्षा पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। यह बात देश के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने थिंक-टैंक समुदाय से बातचीत में कही।
नई दिल्ली से वर्चुअली बोलते हुए, मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने सीएसआईएस के सम्मेलन में कहा कि एआई का संचालन अब देश की आर्थिक और रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा बन गया है।
उन्होंने कहा कि एआई अब केवल कुछ कंपनियों या सीमित प्रयोगों तक नहीं रह गया है, बल्कि यह हर क्षेत्र में शामिल हो चुका है और अर्थव्यवस्था की डिजिटल रीढ़ बन गया है।
अजय कुमार सूद ने बताया कि दुनिया भर में एआई के इस्तेमाल में तेजी आई है, जेनरेटिव एआई में निवेश बढ़ रहा है और डाटा केंद्रों की ऊर्जा जरूरतें भी लगातार बढ़ रही हैं। इन बदलावों से यह साफ हो गया है कि एआई का संचालन अब कोई सीमित नीति विषय नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति, जनविश्वास और सतत विकास से सीधे जुड़ा मामला है।
उन्होंने कहा कि भारत की एआई नीति में सुरक्षा, जवाबदेही, पारदर्शिता और सभी को साथ लेने पर ध्यान दिया गया है, साथ ही नवाचार को बढ़ावा देने के लिए जरूरी लचीलापन भी रखा गया है।
भारत में एआई नीति को वर्ष 2024 में शुरू की गई इंडियाएआई मिशन के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इस मिशन के तहत साझा कंप्यूटिंग सुविधा, एकीकृत डाटा मंच, स्वदेशी एआई मॉडल का विकास और लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों को रियायती दरों पर उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधा दी जा रही है, जिससे उनकी लागत काफी कम हुई है। राष्ट्रीय एआई डाटा मंच पर कई क्षेत्रों से जुड़े हजारों डाटा सेट और मॉडल उपलब्ध हैं, जो देश में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
भारत एआई शिक्षा और वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में भी निवेश कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय एआई संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हाल ही में भारत ने राष्ट्रीय एआई संचालन रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कानूनी निगरानी और तकनीकी उपायों को साथ जोड़ने वाला तरीका बताया गया है। इससे जोखिम कम करते हुए बड़े स्तर पर नवाचार संभव हो सकेगा।
एआई इम्पैक्ट समिट को देखते हुए, सूद ने कहा कि भारत एक साझा ग्लोबल विजन को बढ़ावा देना चाहता है जिसमें एआई डेवलपमेंट के लिए एक यूनिवर्सल इनेबलर के रूप में काम करे। सूद ने कहा, “फोकस कंप्यूट, डेटा और फाउंडेशनल मॉडल जैसे मुख्य एआई संसाधनों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर होगा, ताकि ये संसाधन कुछ ही जगहों या कंपनियों तक सीमित न रहें, और देश अपने समाज, भाषाओं और सार्वजनिक प्रणालियों के लिए संदर्भ-विशिष्ट समाधान बना सकें।”
अजय कुमार सूद के अनुसार, सफलता का पैमाना केवल एआई की क्षमता नहीं होगा, बल्कि यह देखा जाएगा कि वह क्षमता कितनी व्यापक जनहित और सामाजिक लाभ में बदलती है।
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