महाराष्ट्र
गौतम अडानी ने पालघर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र की संभावना तलाशी, निजी क्षेत्र में उद्यम की अटकलें तेज
पालघर, महाराष्ट्र: अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी और इसके परिचालन पहलुओं के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए तारापुर महाराष्ट्र साइट (टीएमएस) का दौरा किया। रविवार को हुई इस यात्रा में गोपनीयता का उच्च स्तर रखा गया, क्योंकि अदानी ब्रीफिंग के लिए हेलीकॉप्टर से पहुंचे। समूह के प्रतिनिधिमंडल में अदानी एनर्जी और अदानी ग्रीन एनर्जी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
महाराष्ट्र के पालघर में स्थित टीएमएस में दो परमाणु ऊर्जा स्टेशन हैं और यह भारत के परमाणु ऊर्जा बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी यात्रा के दौरान, अदानी और अदानी एनर्जी, अदानी ग्रीन और समूह के ऊर्जा रणनीति प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। ब्रीफिंग में परमाणु ऊर्जा के भविष्य के दृष्टिकोण का एक व्यापक अवलोकन भी प्रदान किया गया, जिसमें भारत के ऊर्जा संक्रमण में इसके रणनीतिक महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया।
दौरे पर आए प्रतिनिधिमंडल को TAPS 3 और 4 संयंत्र क्षेत्रों का दौरा कराया गया, जहाँ उन्हें संयंत्र के संचालन का विस्तृत विवरण दिया गया। साइट पर मौजूद विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषताओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल और भारत के चल रहे ऊर्जा परिवर्तन में परमाणु ऊर्जा की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब परमाणु ऊर्जा क्षेत्र विस्तार के लिए तैयार है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में 2025-26 के बजट में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी खिलाड़ियों के लिए खोलने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 20,000 करोड़ रुपये के परमाणु ऊर्जा मिशन की भी घोषणा की, जिसमें 2033 तक पांच छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर स्थापित करने की योजना है।
अडानी की यात्रा को इस क्षेत्र में समूह की संभावित भागीदारी की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर पालघर जिले में हाल ही में हुए घटनाक्रमों के मद्देनजर। हाल के महीनों में, इस क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक और बुनियादी ढाँचे के विकास के कारण परमाणु ऊर्जा में रुचि बढ़ी है, जिसमें कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वधावन बंदरगाह परियोजना का शुभारंभ भी शामिल है। क्षेत्र की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के प्रयासों के तहत, पालघर में निजी क्षेत्र से एक नई परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के बारे में चर्चा चल रही है।
जिले की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, दहानू तालुका में चिंचनी, वरोर, गुंगावड़ा, धाक्ति दहानू, नरपद और चिखला जैसे तटीय क्षेत्रों के साथ, परियोजना के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करने के लिए अन्वेषण कार्य चल रहा है। ये क्षेत्र वधावन बंदरगाह के करीब हैं, जिससे इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की मांग बढ़ेगी।
पालघर में परमाणु ऊर्जा में बढ़ती रुचि जिले के भविष्य के विकास के लिए स्थायी ऊर्जा समाधानों के महत्व को उजागर करती है। निजी क्षेत्र की परमाणु ऊर्जा परियोजना की संभावना के साथ, पालघर जल्द ही भारत के ऊर्जा परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है, जो क्षेत्र के औद्योगिक विस्तार और देश के स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में बदलाव दोनों का समर्थन करता है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियों की समय सीमा बढ़ी, अब 26 अक्टूबर तक कर सकते हैं आवेदन : सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग ने यह समय सीमा 26 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत मसौदा मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां दर्ज करने की अवधि बढ़ाई गई है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को सटीक और अपडेट रखने के लिए की जा रही है।
सीएम फडणवीस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार नए शेड्यूल में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 31 अगस्त से 26 अक्टूबर तक है। दावे और आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया 31 अगस्त से 10 नवंबर तक है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 16 नवंबर को किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच लें। अगर किसी का नाम छूट गया है तो उसे जोड़ने के लिए आवेदन करें, अगर जानकारी में कोई गलती है तो सुधार के लिए आवेदन करें और जरूरत होने पर 26 अक्टूबर से पहले आपत्ति दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया हर पात्र नागरिक के वोट देने के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही है, इसलिए पात्र नागरिकों को इस बढ़ाई गई समय सीमा का लाभ उठाना चाहिए। बता दें कि इसी बीच दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन जारी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन को ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ बताया है और चुनाव आयोग पर सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में जुटा है।
महाराष्ट्र
एमपीएससी में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति, तुकाराम मुंडे को मिली सचिव की जिम्मेदारी

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर जारी उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग से जुड़े मामलों की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार का यह फैसला रविवार को सामने आया। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में एसएम जोशी पुल पर आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान समिति के गठन की जानकारी दी। यहां उम्मीदवार पिछले 10 दिनों से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। तुकाराम मुंडे के अलावा इसमें लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर विचार करने की अपेक्षा है।
सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।
आंदोलनकारी उम्मीदवारों की मांगों में केवल महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार ही शामिल नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा, उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की भी खबर है।
महाराष्ट्र
मुंबई में अवैध मलबा निस्तारण पर बीएमसी सख्त, ट्रैकिंग नियमों के उल्लंघन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना

मानसून की वापसी के बाद मुंबई में वायु गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इस बीच, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने जा रही है। सोमवार से बिना अधिकृत और सक्रिय व्हीकल ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (वीटीएमएस) के निर्माण मलबा या खुदाई से निकली सामग्री ले जाने वाले प्रत्येक वाहन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
बीएमसी के मुंबई डेब्रिस कंट्रोल एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एमडीसीटीएस) पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने वाली निर्माण परियोजनाओं पर भी प्रत्येक उल्लंघन के लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह कदम निर्माण मलबे के अवैध निस्तारण और मुंबई के पर्यावरण एवं वायु गुणवत्ता पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। बीएमसी ने सभी 26 नगर निगम वार्डों को जारी एक सर्कुलर में अधिकारियों को तत्काल निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
मुंबई में प्रतिदिन 8,000 टन से अधिक निर्माण एवं तोड़फोड़ का मलबा निकलता है, जो शहर की प्रसंस्करण क्षमता से काफी ज्यादा है। दहिसर और शिलफाटा स्थित दो प्रसंस्करण केंद्रों की संयुक्त क्षमता प्रतिदिन लगभग 1,200 टन मलबे के निस्तारण की है। मलबे की मात्रा और प्रसंस्करण क्षमता के बीच बड़े अंतर के कारण अवैध तरीके से मलबा फेंकने की समस्या बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि निर्माण मलबे को अक्सर सड़कों के किनारे, खाली भूखंडों, नालों, खाड़ियों, जलाशयों और मैंग्रोव क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है।
मलबे के परिवहन और निस्तारण की निगरानी बेहतर बनाने के लिए बीएमसी ने 24 अगस्त को एमडीसीटीएस पोर्टल शुरू किया था। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे की उसके उत्पादन स्थल से लेकर अधिकृत निस्तारण या प्रसंस्करण केंद्र तक निगरानी करना है।
इस पोर्टल के जरिए नगर निगम अधिकारी मलबा ले जाने वाले वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी कर सकते हैं। साथ ही, निर्धारित मार्ग से हटने वाले वाहनों का पता लगाने और मलबे के अवैध निस्तारण के संदिग्ध मामलों की पहचान करने में भी मदद मिलती है।
बीएमसी ने निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों, सरकारी एजेंसियों और निजी डेवलपरों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकृत संस्थाओं को मलबा प्रबंधन की विस्तृत योजना प्रस्तुत करनी होगी। वहीं, मलबा ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस-सक्षम वीटीएमएस उपकरण लगाना और निर्धारित परिवहन मार्गों का पालन करना जरूरी होगा।
बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त से 9 अक्टूबर के बीच एमडीसीटीएस पोर्टल पर कुल 220 पंजीकरण हुए। इनमें 109 बिल्डर और डेवलपर, 44 परिवहनकर्ता, बीएमसी के 19 ठेकेदार, मलबा और मिट्टी के 17 बाहरी खरीदार, 15 कॉरपोरेट संस्थाएं और चार सरकारी एजेंसियां शामिल हैं। इस अवधि में किसी भी व्यक्तिगत नागरिक ने पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया।
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