अंतरराष्ट्रीय
फ्रेंच ओपन : मीडिया से बात न करने पर ओसाका पर लगा जुर्माना
विश्व की नंबर-2 महिला टेनिस खिलाड़ी जापान की नाओमी ओसाका पर फ्रेंच ओपन के पहले राउंड में जीत दर्ज करने के बाद मीडिया से बात न करने पर 15,000 डालर का जुर्माना लगाया गया है और आगे से ऐसा करने पर कठोर सजा की चेतावनी भी दी गई है। ओसाका ने शानदार शुरूआत करते हुए रोमानिया की पैट्रिसिया मारिया टिग को हराकर फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट के दूसरे दौर में जगह बना ली। चार बार की ग्रैंड स्लैम विजेता ओसाका ने एक घंटे 47 मिनट तक चले मुकाबले में 63वें रैंकिंग की पैट्रिसिया को 6-4, 7-6(4) से हराया।
यूएस ओपन और ऑस्ट्रेलियन ओपन की गत विजेता ओसाका 2019 के बाद इस टूर्नामेंट में खेल रही हैं। पिछले साल चोट के कारण वह फ्रेंच ओपन में हिस्सा नहीं ले सकीं थी।
ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के नियमों के मुताबिक, मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में अगर कोई खिलाड़ी मीडिया से बात करने से मना करता है तो उन पर 20000 अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
चार ग्रैंड स्लैम आयोजनकर्ताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा, ” 23 वर्षीय ओसाका को काफी जुर्माना और भविष्य के ग्रैंड स्लैम में निलंबन का सामना करना पड़ता है। ग्रैंड स्लैम नियमों का एक मुख्य तत्व मीडिया के साथ जुड़ने की खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है, चाहे उनके मैच का परिणाम कुछ भी हो। यह एक जिम्मेदारी है, जो खिलाड़ी, खेल और प्रशंसकों के लिए लेते हैं।”
ओसाका ने इसका जवाब देते हुए टिवटर पर लिखा, ” गुस्सा आने की वजह समझ की कमी है। जब कोई परिवर्तन हो तो वह लोगों को असहज करता है।”
ओसाका ने बुधवार को एक बयान जारी कहा था कि फ्रेंच ओपन के दौरान वह मीडिया से बात नहीं करेंगी।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-इजरायल और ईरान के हमलों में हूती की ‘एंट्री’, ईरानी मीडिया ने किया बड़ा दावा

तेहरान, 26 मार्च : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हमलों का दौर अब भी जारी है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस हमले को लगभग एक महीना होने वाला है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब तक कोई बात नहीं बनी है। इस बीच अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के खिलाफ हूती विद्रोहियों की एंट्री हो सकती है।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही इजरायल के खिलाफ जंग में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट में बिना नाम बताए सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि हूती, जिन्हें यमनी अंसारुल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, बाब अल-मंदाब स्ट्रेट पर कब्जा करने के लिए तैयार हैं।
अक्टूबर 2023 से विद्रोही समूह ने लाल सागर में पहले ही तनाव की स्थिति बना रखी है और गाजा पर इजरायल के हमलों का बदला लेने के लिए सैकड़ों इजरायली ठिकानों पर गोलाबारी की है।
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, हूती ने अमेरिका और ब्रिटेन से जुड़े जहाजों को भी निशाना बनाया है, जिससे दुनिया भर में व्यापार में रुकावट आई है। अमेरिका और दूसरी पश्चिमी नौसेनाएं समुद्र के रास्ते जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही हैं, लेकिन अगर हूती बाब अल-मंदाब स्ट्रेट पर कब्जा करने का फैसला करते हैं, तो इससे उनके विकल्प और कम हो सकते हैं।
बाब अल-मंदाब स्ट्रेट भूमध्य सागर और अरब सागर के बीच एक जरूरी रास्ता है, जो यूरोप को अफ्रीका और उससे आगे के महासागरों में एशिया से जोड़ता है। इन सबके बीच अमेरिका और ईरान के बातचीत को लेकर चर्चाएं हो रही हैं।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, ईरान ने इन दावों खारिज करते हुए यह कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे पार्टी के जरिए हल्का-फुल्का संदेशों का आदान-प्रदान हुआ।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मध्यस्थों के माध्यम से ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच विभिन्न संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है, जबकि पिछले महीने के अंत में देश पर अमेरिकी और इजरायली हमलों की शुरुआत के बाद से तेहरान ने वाशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की।
अराघची ने कहा, “कुछ दिनों पहले से अमेरिकी पक्ष विभिन्न मध्यस्थों के माध्यम से अलग-अलग संदेश भेज रहा है। जब मित्र देशों के माध्यम से हमें संदेश भेजे जाते हैं और हम जवाब में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं या आवश्यक चेतावनी जारी करते हैं तो इसे न तो बातचीत कहा जाता है और न ही संवाद। यह केवल हमारे मित्रों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान है, और हमने अपने सैद्धांतिक रुख को दोहराया है।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप की ईरान को चेतावनी, ‘बेहतर होगा बातचीत को लेकर हों गंभीर, कहीं देर न हो जाए’

TRUMP
वाशिंगटन, 26 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान उनके सामने गिड़गिड़ा रहा है और वो डील की भीख मांग रहा है। ट्रंप का यह भी कहना है कि ईरानी वार्ताकार बहुत अजीब हैं। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि तेहरान को “जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”
अपने ट्रुथ सोशल ऐप पर ट्रंप ने कहा: ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और “अजीब” हैं। वे हमसे डील करने के लिए “गुजारिश” कर रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं, और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ “हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं।” गलत!!! उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा!
ईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह “न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।”
धमकी, चेतावनी और विरोध के बीच पश्चिम एशिया ही नहीं पूरी दुनिया के लिए 27 मार्च का दिन काफी अहम है। 23 मार्च को ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता का दावा करते हुए कहा था कि बातचीत “सकारात्मक और रचनात्मक” है, इसलिए वो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के फैसले को “5 दिन के लिए टाल रहे हैं।” इसकी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय
नाटो पर बिफरे ट्रंप, बोले- ‘मदद नहीं की, ये समय कभी भूलना मत’

TRUMP
वाशिंगटन, 26 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) देशों पर बिफरे हैं। उन्होंने सीधे-सीधे धमकी देते हुए कहा कि इस समय को कभी ‘भूलिएगा मत।’
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में ईरान के लिए विवादित शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा, “नाटो देशों ने ईरान जैसे पागल देश के खिलाफ कोई मदद नहीं की। अमेरिका को नाटो से किसी चीज की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ये समय कभी भूलिएगा मत!”
बीते शुक्रवार (20 मार्च) को भी ट्रंप ने ईरान-इजरायल तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद न करने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने नाटो को “कागजी शेर” और सदस्य देशों को “कायर” बताते हुए कहा था कि बिना अमेरिका के यह गठबंधन कुछ नहीं है। ट्रंप ने कहा कि नाटो देश केवल तेल की कीमतों पर शिकायत करते हैं, लेकिन मदद के लिए आगे नहीं आते।
उन्होंने ट्रुथ सोशल पर आरोप लगाया कि नाटो सदस्य देश परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि वे केवल तेल की बढ़ती कीमतों की शिकायत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्य देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद करने को तैयार नहीं हैं, जो कि एक सामान्य सैन्य अभ्यास है और उनकी माने तो तेल की ऊंची कीमतों का मुख्य कारण है।
ट्रंप का आरोप रहा है कि नाटो सहयोगी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं कर रहे हैं, जो तेल की ऊंची कीमतों का कारण है, जबकि यह एक आसान सैन्य कार्य है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ जंग सैन्य रूप से जीती जा चुकी है और अमेरिका को अब किसी देश की जरूरत नहीं है। तब भी उन्होंने कहा था कि नाटो के इन सहयोगियों को हम याद रखेंगे, जो इस मुश्किल समय में साथ नहीं खड़े हुए।
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