राजनीति
किसान विरोध: सरकार ने गलत सूचना फैलाने पर अंकुश लगाने के लिए हरियाणा के 7 जिलों में 23 फरवरी तक इंटरनेट निलंबित कर दिया
किसानों के साथ गतिरोध के बीच, हरियाणा सरकार ने बुधवार को सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस सेवाओं पर प्रतिबंध 23 फरवरी तक बढ़ा दिया।
इससे पहले सरकार ने निलंबन को 19 फरवरी तक बढ़ा दिया था.
हरियाणा प्रशासन द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, वॉयस कॉल को छोड़कर, बल्क एसएमएस और मोबाइल नेटवर्क पर प्रदान की जाने वाली सभी डोंगल सेवाएं, अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जिलों के अधिकार क्षेत्र में निलंबित रहेंगी।
गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार से निपटने के लिए सरकार के उपाय
“मोबाइल फोन और एसएमएस पर व्हाट्सएप, फेसबुक ट्विटर आदि जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए, आंदोलनकारियों और प्रदर्शनकारियों की भीड़ को बढ़ावा देने और संगठित करने के लिए, जो जीवन की गंभीर हानि का कारण बन सकते हैं और आगजनी या बर्बरता और अन्य प्रकार की हिंसक गतिविधियों में शामिल होकर सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना, “आदेश में कहा गया है।राज्य प्रशासन ने यह भी उल्लेख किया कि यह आदेश सात जिलों में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए बढ़ाया गया है और 23 फरवरी तक लागू रहेगा।
इसमें कहा गया है, “जैसा कि पहले पैराग्राफ में बताया गया है, यह आदेश उभरती स्थिति को देखते हुए एकतरफा पारित किया जा रहा है। उपरोक्त आदेश के उल्लंघन का दोषी पाया गया कोई भी व्यक्ति प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा।”
झड़प में 12 पुलिसकर्मी घायल
इस बीच, दाता सिंह-खनौरी सीमा पर “दिल्ली चलो” मार्च के बीच प्रदर्शनकारी किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच झड़प के बाद कम से कम 12 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, एक अधिकारी ने बुधवार को कहा।हरियाणा पुलिस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो संदेश में एक्स पर कहा, “प्रदर्शनकारियों ने दाता सिंह-खनौरी सीमा पर पुलिस कर्मियों को चारों ओर से घेर लिया और उसमें मिर्च पाउडर के साथ पराली जला दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया।” लाठी-डंडे चले और पथराव हुआ। करीब 12 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।””हम प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे ऐसी गतिविधियों का सहारा न लें क्योंकि जहरीला धुआं न केवल क्षेत्र में दृश्यता को कम करता है बल्कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों के प्रयासों में भी बाधा डालता है। इससे दोनों पक्षों के लिए खतरा पैदा होता है और संभावना भी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटनाएँ, ”अधिकारी ने कहा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ओम बिड़ला और थाईलैंड सीनेट अध्यक्ष की मुलाकात, व्यापार, पर्यटन और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा

नई दिल्ली । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मंगलवार को नई दिल्ली में थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा, आयुर्वेद और योग समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में दोनों पक्षों ने संसदीय सहयोग को और मजबूत बनाने, एक-दूसरे के अनुभवों और अच्छी कार्यप्रणालियों को साझा करने तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया।
ओम बिड़ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित गहरी मित्रता की हमने फिर से पुष्टि की। हमने व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा, आयुर्वेद और योग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ हमारी साझेदारी को नई गति दे रही है।”
बिड़ला ने कहा, “हमने संसदीय सहयोग को और गहरा करने, अच्छी संसदीय प्रक्रियाओं को साझा करने तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मामलों में मिलकर काम करने के अवसरों पर भी चर्चा की। इसमें ब्रिक्स के तहत सहयोग को बढ़ाने पर भी विचार हुआ, ताकि दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं और लोगों के कल्याण को आगे बढ़ाया जा सके।”
यह मुलाकात नई दिल्ली में संसद भवन स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के दौरान हुई। सोमवार से शुरू हुए इस फोरम में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय नेता शामिल हुए हैं। फोरम का उद्देश्य संसदीय सहयोग को मजबूत करना और जन-केंद्रित विकास को आगे बढ़ाना है।
मोंगकोल सुरासज्जा 25 अक्टूबर को 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे। उनके स्वागत में लोकसभा ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरसज्जा का हार्दिक स्वागत है। 25 अक्टूबर को आईजीआई हवाई अड्डे पर सांसद संध्या राय और दिलीप सैकिया ने उनका स्वागत किया।”
राजनीति
भाजपा 28 अक्टूबर को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत देशभर में पदयात्रा निकालेगी

नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बुधवार को अपने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत देशभर में पदयात्रा आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अपने-अपने क्षेत्रों में शामिल होने की उम्मीद है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दिल्ली में होने वाली पदयात्रा में हिस्सा लेंगे, जो चांदनी चौक इलाके में आयोजित की जाएगी।
राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली इस पदयात्रा में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है।
यह राष्ट्रव्यापी पहल भाजपा के उस अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद विपक्ष के आरोपों का जवाब देना और लोकतंत्र तथा चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना है।
दिल्ली में, यह पदयात्रा दोपहर 2 बजे लाल किले से शुरू होकर चांदनी चौक स्थित टाउन हॉल की ओर जाएगी। इस पदयात्रा में 15,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
भाजपा का लक्ष्य इन कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करना है। वरिष्ठ नेताओं के इन पदयात्राओं में शामिल होने से पार्टी के अभियान को मजबूती मिलेगी और वे जनता तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे।
इस यात्रा को लेकर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के माध्यम से भाजपा प्रदेशभर में जनता के बीच जाकर कांग्रेस के झूठ और फेक नैरेटिव को तथ्यों के साथ उजागर करेगी। पदयात्राओं एवं जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को जागरूक करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और प्रदेश में सुशासन के प्रति जनविश्वास को और मजबूत किया जाएगा।
यहां बताते चलें कि भाजपा का यह अभियान उस वक्त शुरू होने जा रहा है, जब इंडिया ब्लॉक की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रैली प्रस्तावित है। यहां पर 1 नवंबर को मेगा रैली होने की उम्मीद जताई गई है।
राजनीति
बिना ठोस वजह इस्तीफा देने वाले विधायकों से उपचुनाव का खर्च वसूलने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें बिना किसी ठोस वजह के अपनी सीट से स्वेच्छा से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों से उपचुनाव पर हुए सरकारी खर्च की वसूली के लिए व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग (ईसीआई), तमिलनाडु के मुख्य चुनाव अधिकारी और राज्य में अपनी सीटों से इस्तीफा देने वाले छह पूर्व विधायकों समेत अन्य से जवाब मांगा है।
यह याचिका वकील के. सुथन ने दायर की है। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें विधायकों के स्वेच्छा से इस्तीफा देने के कारण सरकारी खर्च पर उपचुनाव कराने के मामले में वित्तीय जवाबदेही की मांग करने वाली उनकी जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने ‘चुनाव व्यय सुरक्षा’ प्रणाली शुरू करने के लिए निर्देश देने की मांग की है। इसके तहत बिना कानूनी रूप से मान्य ठोस कारण के इस्तीफा देने वाले विधायक को दोबारा चुनाव लड़ने से पहले होने वाले उपचुनाव की लागत के बराबर राशि जमा करनी होगी।
उन्होंने ऐसे विधायकों के लिए चुनाव लड़ने पर पांच साल की अयोग्यता की भी मांग की है। याचिका में कहा गया है कि 4 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के कुछ हफ्तों के भीतर ही एआईएडीएमके के छह विधायकों ने अपनी सीटों से इस्तीफा दे दिया और बाद में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए।
उनका इस्तीफा तब आया, जब उनमें से कुछ के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करने के आरोप में अयोग्यता की कार्यवाही शुरू की गई थी।
याचिका के अनुसार, इस्तीफों ने विधायकों को लंबित कार्यवाही से बचने और एक अलग राजनीतिक बैनर के तहत फिर से चुनाव लड़ने में मदद की, जबकि इनके परिणामस्वरूप हुए उपचुनावों ने सरकारी खजाने पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डाला।
इसमें आगे तर्क दिया गया है कि चुनाव आयोग ने 2004 में चुनाव सुधारों के लिए अपने प्रस्तावों में सिफारिश की थी कि अपनी सीटें छोड़कर उपचुनाव कराने वाले उम्मीदवारों को संबंधित खर्च वहन करना चाहिए, लेकिन यह सिफारिश अब तक लागू नहीं हुई है।
याचिकाकर्ता मद्रास हाईकोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रस्तावित वित्तीय सुरक्षा और पांच साल की अयोग्यता चुनावी कानून में नए प्रावधान जोड़ देगी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि मांगी गई राहत में एक नया वित्तीय और दंडात्मक ढांचा बनाना शामिल है, जो न्यायिक निर्देशों के बजाय विधायी नीति के दायरे में आता है।
हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को कहा था, “किसी विधायी सीट से इस्तीफा देने का अधिकार स्वयं सदन की सदस्यता को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक योजना का एक पहलू है और न्यायिक आदेश द्वारा इस पर अतिरिक्त-वैधानिक शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं।”
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