अंतरराष्ट्रीय
बीएलएम मूवमेंट को सपोर्ट करेंगी इंग्लैंड, विंडीज महिला टीमें
इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की महिला क्रिकेट टीमें 21 से 30 सितम्बर तक डर्बीई के इनकोरा काउंटी मैदान पर होने वाली पांच मैचों की टी-20 सीरीज के दौरान ब्लैक लाइव्ल मैटर मूवमेंट को सपोर्ट करेंगी। इंग्लैंड की कप्तान हीदर नाइट ने विंडीज की कप्तान स्टेफाने टेलर के साथ विचार-विमर्श के बाद यह तय किया कि इस सीरीज के दौरान कैसे इस मूवमेंट को अधिक से अधिक समर्थन और सहयोग प्रदान किया जा सकता है।
नाइट ने कहा, “हमने एक खिलाड़ी के तौर पर एक दूसरे से बात की और हम निश्चित तौर पर इस मूवमेंट का सम्मान करने के लिए कुछ करेंगी। हमारा सहयोग इस मूवमेंट के साथ होगा।”
दोनों टीमें सीरीज के दौरान अपनी जर्सी पर ब्लैक लाइव्स मैटर का लोगो भी लगाएंगी। इससे पहले जुलाई में आयोजित टेस्ट सीरीज के दौरान इंग्लैंड एवं वेस्टइंडीज की पुरुष टीमों ने भी जर्सी पर इस मूवमेंट के लोगो का उपयोग किया था।
इसके बाद हालांकि इंग्लैंड, पाकिस्तान और आस्ट्रेलियाई टीमों ने इस मूवमेंट को समर्थन नहीं दिया था, इस कारण वेस्टइंडीज के महान गेंदबाज माइकल होल्डिंग ने इनकी आलोचना भी की थी।
अंतरराष्ट्रीय
श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के 7 मछुआरों को किया गिरफ्तार, केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील

रामेश्वरम, 26 मार्च : तमिलनाडु और श्रीलंका के जाफना जिले के बीच स्थित पाल्क खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच श्रीलंकाई नौसेना ने गुरुवार तड़के रामेश्वरम के सात मछुआरों को अवैध शिकार (पोचिंग) के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऑपरेशन के दौरान दो मैकेनाइज्ड फिशिंग ट्रॉलर भी जब्त किए गए।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार को रामेश्वरम फिश लैंडिंग सेंटर से कुल 365 फिशिंग टोकन जारी किए गए थे। गिरफ्तार किए गए मछुआरे दो नावों पर सवार थे, जो नेदुंथीवू द्वीप के पास मछली पकड़ रहे थे, तभी श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें रोक लिया।
बताया जा रहा है कि जब्त किए गए ट्रॉलर सिमसन और ससिकुमार के हैं। समुद्र में शुरुआती पूछताछ के बाद मछुआरों को हिरासत में लेकर श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना की खबर के बाद रामनाथपुरम जिले के थंगाचीमदम इलाके में मछुआरों के बीच आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में मछुआरे कार्ल मार्क्स की प्रतिमा के पास एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंकाई सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मछुआरों और उनकी नावों की तुरंत रिहाई की मांग की।
मछुआरा संगठनों ने भी केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली गिरफ्तारियों से क्षेत्र के लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।
इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए मछुआरा प्रतिनिधियों की एक आपात बैठक गुरुवार शाम 4 बजे बुलाई गई है। मछुआरा नेता जेसु राजा ने कहा कि यह समस्या पिछले 40 साल से चली आ रही है और मछली पकड़ना ही यहां के लोगों की मुख्य आजीविका है। उन्होंने बताया कि करीब 90 प्रतिशत परिवार इसी पर निर्भर हैं और अगर स्थायी समाधान नहीं निकला तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
उन्होंने ‘पाक बे’ में पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग की, यह कहते हुए कि इस क्षेत्र में मछुआरे लंबे समय से काम करते आ रहे हैं।
एक अन्य मछुआरे एंटनी ने सवाल उठाया कि जब भारत श्रीलंका को मित्र देश बताता है, तो फिर ऐसी गिरफ्तारियां क्यों जारी हैं। उन्होंने कहा कि नावों की जब्ती और भारी जुर्माने के कारण कई परिवार कर्ज में डूब गए हैं और कई मछुआरे बेरोजगार हो गए हैं।
एंटनी ने बताया कि एक मशीनीकृत ट्रॉलर की कीमत करीब 40 लाख रुपए होती है और 2018 से अब तक 180 से ज्यादा नावें जब्त की जा चुकी हैं, जिससे यह संकट और गहरा गया है।
अंतरराष्ट्रीय
इजरायल का दावा ‘एयर स्ट्राइक में ईरानी नेवी कमांडर तंगसीरी की मौत’

तेल अवीव, 26 मार्च : इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नेवी कमांडर अलीरेजा तंगसीरी को मार गिराया है। इजरायली मीडिया ने इसकी जानकारी दी है।
‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ ने इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया कि बंदर अब्बास शहर पर किए गए हमलों में नेवी कमांडर मारे गए, हालांकि ईरान की तरफ से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पिछले कुछ दिनों में अलीरेजा तंगसीरी का नाम सुर्खियों में रहा है। वो आईआरजीसी नेवी के प्रमुख थे और उन्हें ईरान की समुद्री सैन्य रणनीति का अहम चेहरा माना जाता था। खास तौर पर होर्मुज में जहाजों की निगरानी और सैन्य कार्रवाई में उनकी बड़ी भूमिका रही है।
दक्षिणी ईरान के बुशहर प्रांत में जन्मे तांगसीरी, ईरान-इराक युद्ध और तथाकथित टैंकर युद्ध (यह 1980 के दशक में ईरान के साथ अमेरिका का पहला संघर्ष था) में अहम भूमिका निभाने के बाद आईआरजीसी नेवी का हिस्सा बने।
तांगसीरी ने बंदर अब्बास में आईआरजीसी नेवी के पहले नेवल डिस्ट्रिक्ट की कमान संभाली और 2010 से 2018 तक डिप्टी कमांडर के तौर पर काम किया, जिसके बाद उन्होंने फोर्स के चीफ का पद संभाला।
अगर तंगसीरी की मौत की पुष्टि हो जाती है तो उनका नाम उन वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की बढ़ती लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनकी 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से हत्या कर दी गई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी।
पहले और सबसे बड़े नुकसानों में ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई शामिल थे। इसके बाद इस्लामिक रिपब्लिक के सियासी और सैन्य कुनबे के शीर्ष अधिकारी और नेता मारे गए। इस तरह इन हमलों में ईरान की टॉप लेयर लगभग खत्म कर दी गई। खामेनेई के प्रमुख सलाहकार और सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ऐसे ही एक हमले का शिकार हुए थे। उनकी मौत से भी ईरान को काफी झटका लगा क्योंकि वो एक अच्छे नेगोशिएटर भी माने जाते थे।
अंतरराष्ट्रीय
इमरान खान के बेटे कासिम पिता से मिलने की गुहार लेकर पहुंचे यूएनएचआरसी, पाकिस्तान सरकार को घेरा

imran khan
नई दिल्ली, 26 मार्च : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान दो साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। इस दौरान उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में पीटीआई प्रमुख खान के बेटे कासिम खान ने बुधवार को यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (यूएनएचआरसी) में अपने पिता का मामला उठाया। कासिम ने कहा कि अधिकारियों का पूर्व प्रधानमंत्री के साथ बर्ताव अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कन्वेंशन का उल्लंघन है।
बता दें, इमरान खान को तोशखाना और भ्रष्टाचार मामले में 14 और 17 साल की सजा सुनाई गई है और 2023 से वह जेल में हैं। खान के कैद में जाने के बाद से उनकी पार्टी के लोग लगातार ये आरोप लगा रहे हैं कि पीटीआई चीफ को गलत इरादे से अकेले रखा जा रहा है; उन्हें किसी से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है। जनवरी में यह बात सामने आने के बाद कि उन्हें आंख की बीमारी है, उनके मेडिकल ट्रीटमेंट पर बार-बार चिंता जताई गई है।
ऐसे में यूएनएचआरसी में उनके बेटे कासिम खान ने यूएनएचआरसी में इस मुद्दे को उठाया और कहा कि इमरान का मामला कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। असल में, यह 2022 के बाद से पाकिस्तान में दमन के एक बहुत बड़े पैटर्न का सबसे साफ उदाहरण था। इस सिलसिले में उन्होंने राजनीतिक कैदियों की हिरासत, मिलिट्री कोर्ट द्वारा आम लोगों पर मुकदमा चलाने और उन्हें सजा देने और पत्रकारों को चुप कराने, किडनैप करने या देश निकाला देने का जिक्र किया।
इस दौरान कासिम ने फरवरी 2024 के आम चुनावों का भी थोड़ा जिक्र किया और पीटीआई के इन आरोपों को दोहराया कि चुनाव में धांधली हुई थी। कासिम ने कहा कि पाकिस्तान ने जीएसपी प्लस फ्रेमवर्क के तहत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कन्वेंशन को बनाए रखने के लिए जरूरी कमिटमेंट किए हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कवनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स और यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि इमरान को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया था और उन्हें अकेले कैद में रखा जा रहा है। कासिम ने आगे बताया कि उनके परिवार को उनसे मिलने पर रोक है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान खान को मेडिकल केयर देने से मना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसने, मिलिट्री कोर्ट में आम लोगों के ट्रायल के साथ उन ट्रीटी की शर्तों का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा, “मैं और मेरा भाई राजनीतिक लोग नहीं हैं। हम कभी भी इस तरह के संगठनों के सामने नहीं आना चाहते थे लेकिन मेरे पिता की जिंदगी की मांग है कि हम एक्शन लें। हम चुपचाप खड़े नहीं रह सकते क्योंकि उसकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें हमसे दूर रखा जा रहा है। अगर हालात उल्टे होते, तो हम जानते हैं कि वह तब तक लड़ना बंद नहीं करेंगे जब तक हम आजाद नहीं हो जाते। हम उनके लिए कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं।”
कासिम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इमरान का एक मैसेज भी साझा किया। यह मैसेज तब आया जब सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि इमरान को ईद-उल-फितर पर अपने बच्चों से बात करने की इजाजत दी जाएगी।
कासिम ने कहा कि उन्होंने शनिवार को इमरान से बात की थी। कासिम द्वारा शेयर किए गए मैसेज में इमरान ने न्यायपालिका पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने “अपनी ईमानदारी बेच दी है”।
कासिम और उनके बड़े भाई सुलेमान अपनी मां के साथ लंदन में रहते हैं और उन्हें इमरान से मिलने के लिए पाकिस्तान जाना होगा। दोनों ने दिसंबर 2025 में कहा था कि उन्होंने अपने वीजा के लिए अप्लाई कर दिया है और जनवरी में पाकिस्तान जाने का प्लान बना रहे हैं। हालांकि, इससे पहले भी इमरान खान की पूर्व पत्नी ने बताया था कि पाकिस्तानी सरकार उनके बेटों के वीजा एप्लिकेशन को रिजेक्ट कर रही है।
इस सिलसिले में कासिम ने यूएनएचआरसी में अपना आरोप दोहराया कि पाकिस्तानी सरकार ने “जानबूझकर” उनके और उनके भाई के वीजा को अप्रूव करने से मना कर दिया था। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “किसी कैदी के बच्चों को उससे मिलने का हक न देना, पूरे परिवार के लिए सजा की तरह है। हमारे बीच जो कम बातचीत हुई, उससे मुझे पता है कि मेरे पिता परेशान थे लेकिन वह अपनी हालत के बारे में बात करने से मना कर रहे हैं। इसलिए वह जो कुछ भी झेल रहे हैं, उसकी डिटेल उनसे नहीं बल्कि इंडिपेंडेंट सोर्स और खुद संयुक्त राष्ट्र से मिली है।”
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