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Monday,15-June-2026
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चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को ममता के लिए अहम उपचुनाव की घोषणा की

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भारत निर्वाचन आयोग ने काफी अटकलों के बाद शनिवार को भवानीपुर में उपचुनाव और मुर्शिदाबाद जिले के दो अन्य विधानसभा क्षेत्रों- समसेरगंज और जंगीपुर में चुनाव की तारीख की घोषणा की। इन तीनों सीटों पर 30 सितंबर को मतदान होगा और 3 अक्टूबर को मतगणना होगी। पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव से पहले उम्मीदवारों की मौत के कारण समसेरगंज और जंगीपुर में चुनाव रोक दिए गए थे। दूसरी ओर, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना है, क्योंकि मौजूदा विधायक सोवोंदेब चट्टोपाध्याय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए जगह बनाने के लिए इस्तीफा दे दिया था।

बनर्जी हाल ही में संपन्न चुनावों में नंदीग्राम में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी से हार गईं थीं और वह अभी भी विधायी निकाय की निर्वाचित सदस्य नहीं हैं।

निर्वाचन आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने सूचित किया है कि प्रशासनिक जरूरतों और जनहित को देखते हुए और राज्य में एक शून्यता से बचने के लिए भवानीपुर में उपचुनाव कराया जाएगा।

मुख्य सचिव एच. के. द्विवेदी के माध्यम से आयोग ने अपनी अधिसूचना में कहा है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, एक मंत्री जो लगातार छह महीने की अवधि के लिए राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा और वहां जब तक चुनाव तुरंत नहीं कराए जाते, तब तक सरकार में शीर्ष कार्यकारी पदों पर एक संवैधानिक संकट और शून्य होगा।

अधिसूचना में कहा गया है, प्रशासनिक जरूरतों और जनहित को देखते हुए और राज्य में शून्यता से बचने के लिए, भवानीपुर, कोलकाता के लिए उप-चुनाव कराए जा सकते हैं, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ने का इरादा रखती हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार, हालांकि, निर्वाचन आयोग ने अन्य 31 विधानसभा क्षेत्रों और तीन संसदीय क्षेत्रों (देश भर में) में उपचुनाव नहीं कराने का फैसला किया है, लेकिन संवैधानिक आवश्यकता और पश्चिम बंगाल राज्य से विशेष अनुरोध पर विचार करते हुए उसने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराने का फैसला किया है।

अधिसूचना में कहा गया है, आयोग ने 3 विधानसभा क्षेत्रों, जिनमें पश्चिम बंगाल के 56-समसेरगंज, 58-जंगीपुर और ओडिशा का 1 विधानसभा क्षेत्र 110-पिपली में भी चुनाव कराने का फैसला किया है, जहां मतदान स्थगित कर दिया गया था।

पश्चिम बंगाल के इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव से पहले उम्मीदवारों की मौत के कारण चुनाव टाल दिया गया था। आयोग ने 20 सितंबर से अभियान के लिए सात दिन का समय दिया है।

हालाकि, चार और विधानसभा क्षेत्र हैं – उत्तर 24 परगना में खरदा, कूच बिहार में दक्षिण दिनहाटा, नादिया में शांतिपुर और दक्षिण 24 परगना में गोसाबा, जहां उप-चुनाव निर्धारित हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने कोविड महामारी को देखते हुए चुनावों को रोक दिया है।

बता दें कि संविधान के आर्टिकल 164(4) के अनुसार, चुनाव नहीं जीतने पर भी कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन फिर अगले 6 महीने के अंदर उसे राज्य की विधान सभा का या विधान परिषद का सदस्य बनना होता है। चूंकि पश्चिम बंगाल में विधान परिषद नहीं है, इसीलिए ममता बनर्जी को विधान सभा का सदस्य बनने के लिए चुनाव जीतना होगा।

तृणमूल कांग्रेस काफी लंबे समय से चुनाव के लिए दबाव बना रही है और हाल ही में सौगत रॉय, जवाहर सीरकर, सुखेंदु शेखर रॉय, सजदा अहमद और मोहुआ मोइत्रा सहित तृणमूल सांसदों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयुक्त से मुलाकात की थी और चुनाव कराए जाने की मांग की थी। यह घोषणा पार्टी के लिए एक बड़ी राहत है।

राष्ट्रीय समाचार

विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार उठाएगी और कदम: वित्त मंत्री सीतारमण

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार देश में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आगे भी कई कदम उठाएगी और बॉन्ड मार्केट के लिए हाल में घोषित उपाय इस दिशा में सिर्फ शुरुआत हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित हीरो माइंडमाइन समिट 2026 को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, “हम मानते हैं कि देश में और अधिक विदेशी पूंजी आने की जरूरत है। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों को विदेश से धन जुटाने की अनुमति देना इस कहानी का अंत नहीं है। हम आगे भी और कदम उठाएंगे।”

उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता को समझती है और आरबीआई के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने पर काम कर रही है कि बाजारों को आवश्यक निवेश मिलता रहे।

वित्त मंत्री ने कहा, “हम मानते हैं कि बॉन्ड मार्केट आने वाली विदेशी पूंजी को समाहित करने का एक अच्छा माध्यम बन सकता है। फिलहाल यह सुविधा केवल सरकारी प्रतिभूतियों के लिए दी गई है, लेकिन यह अंतिम कदम नहीं है। हमें एहसास है कि देश में और अधिक विदेशी पूंजी आनी चाहिए।”

सीतारमण ने कहा कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार है और खपत लगातार बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया भर के अन्य देशों और कारोबारों की तरह भारत भी कई ऐसी अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है जो उसके नियंत्रण से बाहर हैं। इनमें टैरिफ, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं शामिल हैं। हालांकि भारत का बड़ा घरेलू बाजार इन चुनौतियों से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन देश अब भी कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों के आयात पर निर्भर है, जिससे बाहरी झटकों का असर पड़ सकता है।

उनके अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बीमा लागत में वृद्धि और समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिम भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा की जरूरतों को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही चुनौती नहीं है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल जहाजों के लिए बीमा और जोखिम की लागत भी बढ़ गई है। ऐसे में भारत को बढ़ती बाहरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना होगा।”

उर्वरक बाजार की अस्थिरता का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट पेश किए जाने के बाद से वैश्विक आपूर्ति की स्थिति कई बार बदली है। कुछ पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देशों द्वारा घरेलू भंडार बढ़ाने के लिए निर्यात कम करने से कमी की आशंका पैदा हुई थी, लेकिन लगभग एक वर्ष बाद चीन के दोबारा निर्यात बाजार में लौटने से कुछ राहत मिली है।

सीतारमण ने आगे कहा कि भारत का डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है, जो सरकार की सक्रिय नीतियों और राज्यों की मजबूत भागीदारी के कारण संभव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जो गतिविधियां पहले केवल बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों तक सीमित थीं, वे अब तुमकुरु और मंगलुरु जैसे टियर-2 शहरों तक भी पहुंच रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, डेटा सुरक्षा मजबूत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि डेटा सेंटर और जीसीसी से जुड़ी नीतियों को बेहतर तरीके से समझा और लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से संवाद भी कर रही हैं।

सीतारमण ने कहा, “लोगों ने इसे यह सोचकर नहीं देखा कि डेटा सेंटर क्या होता है। भारत के तकनीकी विशेषज्ञ और युवा इस क्षेत्र को तेजी से समझ रहे हैं और इसमें अपनी भूमिका निभा रहे हैं।”

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राष्ट्रीय समाचार

भारत में यात्री वाहनों की बिक्री मई में 27 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया की सेल्स 19 लाख यूनिट्स के पार

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भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने बीते महीने मजबूत प्रदर्शन किया और बिक्री किसी भी वर्ष के मई में महीने में अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर रही है। इसकी वजह यात्री वाहनों, दोपहिया वाहनों और तिपहिया वाहनों की मजबूत मांग है। यह जानकारी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से सोमवार को दी गई।

मई 2026 में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 27.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 4,38,854 यूनिट हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 3,44,656 यूनिट था।

दोपहिया सेगमेंट में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जहां बिक्री 14.8 प्रतिशत बढ़कर 19,02,209 यूनिट हो गई, वहीं तिपहिया वाहनों की बिक्री 31.1 प्रतिशत बढ़कर 70,720 यूनिट तक पहुंच गई।

सियाम के डायरेक्टर जनरल राजेश मेनन ने कहा कि मई के महीने में तीनों मुख्य वाहन कैटेगरी में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की गई।

उन्होंने इस बढ़ोतरी का श्रेय आंशिक रूप से मई 2025 के कम बेस और जीएसटी दरों में कमी व आसान फाइनेंसिंग विकल्पों से बढ़ी मांग को दिया।

उन्होंने बताया, “ये कारक सभी कैटेगरी में वाहनों की ज्यादा बिक्री को बढ़ावा दे रहे हैं।”

थोक बिक्री के ये मजबूत आंकड़े रिटेल बिक्री के शानदार प्रदर्शन के कारण आए हैं।

इससे पहले, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने बताया था कि मई में पैसेंजर वाहनों की रिटेल बिक्री पहली बार 4 लाख के आंकड़े को पार कर गई, जो सालाना आधार पर 23.25 प्रतिशत बढ़कर 4,02,591 यूनिट हो गई।

फाडा ने इस ग्रोथ की वजह ग्रामीण इलाकों में मजबूत मांग, एंट्री-लेवल कार सेगमेंट में सुधार और स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल्स (एसयूवी) की लगातार मांग को बताया।

दोपहिया सेगमेंट ने मई में अब तक की सबसे अच्छी बिक्री दर्ज की, जिसमें स्कूटर की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। स्कूटर की बिक्री सालाना आधार पर 27.4 प्रतिशत बढ़कर 7,39,667 यूनिट हो गई।

इस महीने मोटरसाइकिल की बिक्री 7.2 प्रतिशत बढ़कर 11,13,973 यूनिट हो गई, जबकि मोपेड की बिक्री 30.3 प्रतिशत बढ़कर 48,569 यूनिट हो गई।

तिपहिया सेगमेंट ने भी अपनी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखी। बिक्री एक साल पहले के 53,942 यूनिट से बढ़कर 70,720 यूनिट हो गई।

पैसेंजर कैरियर सबसे बड़ी कैटेगरी बनी रही, जिसकी बिक्री 30 प्रतिशत बढ़कर 57,649 यूनिट हो गई, जबकि गुड्स कैरियर ने 35.3 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दर्ज की और बिक्री 11,802 यूनिट तक पहुंच गई।

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राजनीति

विपक्ष को तय करना होगा पीएम का चेहरा, जनता पूछेगी तो बताना पड़ेगा: संजय राउत

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शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत तृणमूल में हुए बिखराव पर साफगोई से अपनी बात रखी। उन्होंने एक तरफ जहां ममता बनर्जी धड़े वाले गुट को असली टीएमसी बताया, तो वहीं दूसरी तरफ से बगावत का बिगूल फूंकने वाले नेताओं को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब इन लोगों को भाजपा की असली हकीकत के बारे में पता चलेगा, जब इन्हें किनारे कर दिया जाएगा।

उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अब आप ममता बनर्जी की पार्टी में फूट का मुद्दा भूल जाइए। इस प्रकरण को एक महीने से ज्यादा हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में अब इस मुद्दे पर चर्चा करना किसी भी सूरत में प्रासंगिक नहीं है। अब आप जरा टीएमसी के उन नेताओं की बात करिए, जिन्होंने अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलने की जुर्रत की थी।

संजय राउत के मुताबिक, टीएमसी ने त्रिपुरा की ऐसी पार्टी का दामन थामने की हिमाकत की है, जिसका अपना कोई अस्तित्व ही नहीं है। इस पार्टी की स्थिति ऐसी बन चुकी है कि ये राजनीतिक मैदान में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में इन लोगों ने ऐसे पार्टी का दामन थामकर किस तरह के बुद्धिमत्ता का परिचय दिया है, ये तो फिलहाल यही बता सकते हैं। हाल ही में चुनाव में इस पार्टी को महज 800 वोट मिले हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि इन लोगों को अमित शाह ने साजिशन एक ऐसी पार्टी में धकेल दिया, जो अपने वजूद को बचाने से जूझ रही है। अब यह सिलसिला कब तक जारी रहेगा, ये तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।

उन्होंने आगे कहा कि अब इन सब स्थितियों के बीच ममता बनर्जी की बात करें, तो मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि ममता बनर्जी की टीएमसी ही असली टीएमसी है। इसमें किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए और यही स्थिति आगामी दिनों में महाराष्ट्र में भी लागू होती है। इसके इतर, जो भी लोग टीएमसी को छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हुए हैं, उन्हें यह बात पता चल जाएगी कि बीजेपी की असली सच्चाई क्या है?

संजय राउत ने इस बात की पैरोकारी की कि इंडिया गठबंधन में प्रधानमंत्री के पद के लिए एक चेहरे का चयन करना होगा अन्यथा अगर हम लोगों के बीच में जाएंगे, तो हमसे सवाल किया जाएगा कि तुम्हारे पीएम का चेहरा कौन है? ऐसी स्थिति में हम फिर क्या जवाब देंगे। ऐसी स्थिति में हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि पीएम फेस को लेकर किसी एक चेहरे का चयन करें। इसके बाद अपने कदम आगे बढ़ाएं।

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