Connect with us
Monday,12-October-2026
ताज़ा खबर

राजनीति

एडिटर्स गिल्ड ने की बीबीसी कार्यालयों में IT खोजों की निंदा, कहा ‘मीडिया को परेशान करने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल’

Published

on

Modi BBC Documentry

आयकर विभाग द्वारा मुंबई और दिल्ली में बीबीसी के कार्यालयों पर छापेमारी के बाद एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने मंगलवार को एक बयान जारी किया। बयान में, गिल्ड ने कहा कि वह बीबीसी इंडिया के कार्यालयों में किए जा रहे आईटी “सर्वेक्षण” के बारे में गहराई से चिंतित है और समाचार संगठनों को डराने और परेशान करने के लिए सरकारी एजेंसियों के निरंतर चलन से व्यथित है जो कि आलोचनात्मक हैं। सत्ता प्रतिष्ठान। “यह गुजरात में 2002 की हिंसा और भारत में अल्पसंख्यकों की वर्तमान स्थिति पर बीबीसी द्वारा दो वृत्तचित्रों की रिहाई के तुरंत बाद आता है। वृत्तचित्रों ने राजनीतिक जल को उकसाया, सरकार ने गुजरात पर गलत और पूर्वाग्रहपूर्ण रिपोर्टिंग के लिए बीबीसी की आलोचना की। हिंसा, और भारत में ऑनलाइन पहुंच और फिल्मों को देखने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास,” बयान पढ़ा।

गिल्ड ने कहा कि I-T विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण सरकारी एजेंसियों का उपयोग करके उन प्रेस संगठनों को डराने और परेशान करने की प्रवृत्ति को जारी रखते हैं जो सरकारी नीतियों या सत्ता प्रतिष्ठान की आलोचना करते हैं। “सितंबर 2021 में, न्यूज़क्लिक और न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यालयों का इसी तरह से आयकर विभाग द्वारा” सर्वेक्षण “किया गया था। जून 2021 में, दैनिक भास्कर और भारत समाचार के खिलाफ सर्वेक्षण किए गए थे। फरवरी 2021 में, ईडी ने न्यूज़क्लिक के कार्यालयों पर छापे मारे थे। प्रत्येक मामले में, समाचार संगठनों द्वारा सरकारी प्रतिष्ठान के महत्वपूर्ण कवरेज की पृष्ठभूमि के खिलाफ छापे और सर्वेक्षण किए गए थे।” इसमें कहा गया है कि यह एक ऐसी प्रवृत्ति है जो संवैधानिक लोकतंत्र को कमजोर करती है।

गिल्ड ने मांग की कि ऐसी सभी जांचों में बहुत सावधानी और संवेदनशीलता दिखाई जाए ताकि पत्रकारों और मीडिया संगठनों के अधिकारों को कमजोर न किया जाए। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा, “इसके अलावा, गिल्ड अपनी पहले की मांग को दोहराता है कि सरकारें यह सुनिश्चित करें कि इस तरह की जांच निर्धारित नियमों के तहत की जाए और वे स्वतंत्र मीडिया को डराने के लिए उत्पीड़न के साधनों में न बदल जाएं।”

आईटी की तलाशी के बाद बीबीसी ने बयान जारी किया
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर ने ट्विटर पर कहा, “आयकर अधिकारी इस समय नई दिल्ली और मुंबई में बीबीसी कार्यालयों में हैं और हम पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं।” बीबीसी ने ट्वीट किया, “हमें उम्मीद है कि यह स्थिति जल्द से जल्द सुलझ जाएगी।”

इससे पहले भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए हिंदू सेना द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था
हिंदू सेना अध्यक्ष की रिट याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि बीबीसी भारत और केंद्र सरकार के खिलाफ पक्षपाती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री देश और मोदी के वैश्विक उत्थान के खिलाफ एक गहरी साजिश का परिणाम है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

खेतों से स्कूलों तक फ्रांस में बेचैनी, महंगाई से लेकर एआई तक ने बढ़ाई चिंता

Published

on

भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार को दुनिया का ध्यान उन प्रदर्शनों और घटनाक्रमों की ओर दिलाया जिसका जिक्र संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने अपने उस बयान में नहीं किया था जो नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन के खिलाफ दिया गया था। एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था से कहा कि उन्हें अपने पास के क्षेत्रों पर भी नजर दौड़ानी चाहिए। उन्होंने नाम नहीं लिया लेकिन इन पास के क्षेत्रों में से एक फ्रांस भी है, जहां पिछले कुछ दिनों से बवाल मचा हुआ है।

फ्रांस को अक्सर बेहतर जीवन स्तर, मजबूत सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा वाले देश के रूप में देखा जाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से तस्वीर वैसी नहीं रही है। बच्चे अपनी शिक्षण व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं, किसान सूखे की मार से परेशान हैं, अस्पतालों में संसाधनों का दबाव है, परिवार महंगाई से जूझ रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

फ्रांसीसी अखबार ‘ले मोंद’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक दबाव, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक सेवाओं की कमजोर स्थिति और राजनीतिक अनिश्चितता एक-दूसरे से जुड़कर लोगों की बेचैनी बढ़ा रहे हैं। यह असंतोष किसी एक वर्ग या समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है।

फ्रांस में हाल के दिनों में हाईस्कूल के विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शनों ने विशेष ध्यान खींचा है। विद्यार्थियों की शिकायत है कि कई स्कूलों में इमारतों की हालत खराब है, कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्र हैं और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाती।

रिपोर्ट बताती है कि, फ्रांस में माध्यमिक स्तर पर फ्रेंच भाषा की एक कक्षा में औसतन 29 विद्यार्थी होते हैं, जबकि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के देशों का औसत 26 है। कुछ शहरी स्कूलों में एक कक्षा में 36 या उससे अधिक विद्यार्थी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

समस्या केवल कक्षा के आकार की नहीं है। कुछ स्कूलों में छत से पानी टपकने, शौचालयों की खराब स्थिति, बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं होने और गर्मियों में कक्षाओं का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाने की शिकायतें हैं। कई विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।

दिलचस्प बात यह है कि फ्रांस हाईस्कूल शिक्षा पर ओईसीडी के औसत से अधिक खर्च करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा पर उसका खर्च ओईसीडी के औसत से 28 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद संसाधनों के वितरण, शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे यह बहस तेज हुई है कि अधिक खर्च करने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था सभी विद्यार्थियों को समान अवसर क्यों नहीं दे पा रही है।

फ्रांस की अर्थव्यवस्था और उसकी सामाजिक पहचान में कृषि की अहम भूमिका है। लेकिन किसानों के सामने भी चुनौतियां बढ़ रही हैं। सूखा, भीषण गर्मी, जलवायु परिवर्तन और खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की बढ़ती कीमतें उनकी आय पर दबाव डाल रही हैं।

खेती के लिए जरूरी ऊर्जा, खाद और अन्य सामान महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ती है। दूसरी ओर, मौसम की अनिश्चितता फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि अगली फसल से उन्हें पर्याप्त कमाई होगी या नहीं।

जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। फ्रांस में गर्मी की लहरों और जंगलों में आग की घटनाओं ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। बढ़ते तापमान से खेती, पानी की उपलब्धता और लोगों के स्वास्थ्य पर एक साथ दबाव पड़ सकता है।

इस तरह किसानों की परेशानी केवल कृषि नीति का विषय नहीं रह जाती। इसका संबंध खाद्य पदार्थों की कीमतों, ग्रामीण रोजगार और आम परिवारों के घरेलू बजट से भी है।

फ्रांस में परिवारों के सामने जीवनयापन की लागत एक बड़ी चिंता बन रही है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें, महंगे आवास और रोजमर्रा के खर्च लोगों की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

जब आय की तुलना में जरूरी खर्च तेजी से बढ़ते हैं, तो परिवारों के पास बचत, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के लिए कम पैसा बचता है। जिन लोगों की आय पहले से सीमित है, उनके लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।

आर्थिक दबाव का असर केवल व्यक्तिगत जीवन पर नहीं पड़ता। जब बड़ी संख्या में परिवार भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं, तो सरकारी नीतियों, सार्वजनिक सेवाओं और राजनीतिक नेतृत्व के प्रति असंतोष भी बढ़ सकता है।

तकनीकी विकास ने फ्रांस सहित दुनिया के कई देशों में उत्पादकता बढ़ाने और नए काम पैदा करने की संभावनाएं खोली हैं। लेकिन एआई के तेजी से विस्तार ने रोजगार की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी पैदा की हैं।

एआई आधारित उपकरण कई ऐसे काम कर सकते हैं, जिनके लिए पहले इंसानी श्रम की जरूरत होती थी। इससे कुछ क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदल सकते हैं और कर्मचारियों को नए कौशल सीखने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, कुछ नौकरियों की मांग घटने या रोजगार के स्वरूप में बदलाव आने की आशंका भी है।

वहीं, फ्रांस की सामाजिक व्यवस्था में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन अस्पतालों के कर्मचारियों पर काम का बढ़ता बोझ, संसाधनों की कमी और कामकाज की परिस्थितियों को लेकर असंतोष भी सामने आ रहा है।

जब शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं में समस्याएं एक साथ दिखाई देती हैं, तो नागरिकों के मन में यह सवाल उठता है कि सरकार उनकी बुनियादी जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पा रही है।

यह चुनौती ऐसे समय में और जटिल हो जाती है, जब सरकार के सामने बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज और सीमित बजट के बीच खर्च की प्राथमिकताएं तय करने का दबाव हो। एक ओर नागरिक बेहतर सेवाओं की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को उपलब्ध संसाधनों के भीतर कई प्रतिस्पर्धी जरूरतों का समाधान खोजना पड़ता है।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य 2026 की तीसरी तिमाही में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.3 अरब डॉलर रहा

Published

on

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.3 अरब डॉलर के 67 सौदे दर्ज किए गए। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सौदों का कुल मूल्य तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सौदों की संख्या मामूली रूप से 65 से बढ़कर 67 हो गई।

सौदों के मूल्य में इस तेज वृद्धि के पीछे बड़े मूल्य वाले विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) सौदे और सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की गतिविधियों की अहम भूमिका रही। इनमें दो बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी शामिल थे।

आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) को छोड़कर विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (पीई/वीसी) गतिविधियों के तहत 3 अरब डॉलर के 58 सौदे हुए।

2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ा। साथ ही, सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियों में मजबूती आई, वहीं पीई/वीसी निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट दर्ज की गई।

फिनटेक, बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का संयुक्त रूप से कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत योगदान रहा। यह प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के लगातार बने हुए विश्वास को दर्शाता है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी के पार्टनर और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “जैसे-जैसे पूंजी निवेश के मामले में चयनात्मक रुख बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रोथ को टिकाऊ रिटर्न में बदलने की क्षमता यह तय करेगी कि किन वित्तीय कंपनियों को निवेश मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि अधिक लागत वाले माहौल में मजबूत फंडिंग मॉडल, बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और नियामकीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितना कि कारोबार का विस्तार करने का अवसर।

उन्होंने आगे कहा, “भारत के वित्तीय इकोसिस्टम में विकास की अभी भी काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अगले चरण में उन कारोबारों को फायदा होगा जो केवल तेजी से नहीं, बल्कि टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।”

2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए गतिविधियों के तहत 2.3 अरब डॉलर के 23 सौदे दर्ज किए गए। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन एक बड़े सौदे के कारण कुल मूल्य में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

घरेलू सौदों की कुल संख्या में 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, लेकिन सौदों के कुल मूल्य में उनका योगदान केवल 9 प्रतिशत था। वहीं, विदेश से भारत में किए गए तीन सौदों का एमएंडए के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत योगदान रहा।

विदेशों में भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए सौदों की गतिविधियां भी धीमी रहीं। दूसरी तिमाही में ऐसे सात सौदे हुए थे, जबकि तीसरी तिमाही में इनकी संख्या घटकर दो रह गई।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग सड़क हादसों में दो लोगों की मौत, दो घायल

Published

on

जम्मू-कश्मीर में सड़क हादसों की दो अलग-अलग घटनाओं में एक युवक और एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हो गए। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी।

बारामूला जिले के पट्टन इलाके में हैदरबेग के पास 10 सेक्टर के नजदीक एक डंपर की टक्कर लोड कैरियर गाड़ी से हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और उसके पिता घायल हो गए। डंपर ट्रक ने लोड कैरियर को टक्कर मारी, जिसे अनंतनाग जिले के बिजबेहरा के रहने वाले मुर्तजा शब्बीर भट चला रहे थे।

हादसे में मुर्तजा और उनके पिता शब्बीर अहमद भट घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए ट्रॉमा हॉस्पिटल पट्टन ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मुर्तजा को मृत घोषित कर दिया, जबकि उनके पिता को बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर के झेलम वैली कॉलेज हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। पुलिस पोस्ट पलहलन ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सोमवार को हुई एक और सड़क दुर्घटना में अनंतनाग जिले के फुर्राह मीर बाजार इलाके में एक कार की टक्कर से मोटरसाइकिल सवार एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका पति गंभीर रूप से घायल हो गया।

इस टक्कर से बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक महिला की पहचान फरीदा अख्तर के तौर पर हुई है, वहीं उसका पति मोहम्मद अल्ताफ भट घायल हो गया। घायल को अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है।

जम्मू-कश्मीर में सड़क दुर्घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी समस्या हैं; इस केंद्र शासित प्रदेश में आबादी के अनुपात में मौत की दर राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में कुल दुर्घटनाओं में थोड़ी कमी आई और ये 5,318 हो गईं, लेकिन सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 984 हो गई।

Continue Reading
Advertisement
अंतरराष्ट्रीय समाचार8 minutes ago

खेतों से स्कूलों तक फ्रांस में बेचैनी, महंगाई से लेकर एआई तक ने बढ़ाई चिंता

व्यापार20 minutes ago

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में हुई 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड 1.47 लाख करोड़ रुपए का कारोबार

खेल45 minutes ago

शंघाई मास्टर्स: जीत के बाद कैस्पर रूड और ऑगर-एलियासिम के बीच ‘राउंड ऑफ 16’ का मुकाबला तय

मनोरंजन1 hour ago

कैसे अलका याग्निक बनीं 90 के दशक की बड़ी गायिका, रमेश तौरानी ने बताया अनुराधा पौडवाल का कनेक्शन

राष्ट्रीय समाचार1 hour ago

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य 2026 की तीसरी तिमाही में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.3 अरब डॉलर रहा

राष्ट्रीय समाचार2 hours ago

जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग सड़क हादसों में दो लोगों की मौत, दो घायल

व्यापार2 hours ago

खुशखबरी: एक्जिम बैंक ने मैनेजर सहित 8 पदों के लिए आवेदन की तारीख बढ़ाई, अब 21 अक्टूबर तक मौका

मनोरंजन3 hours ago

सोनाली बेंद्रे ने बताया कैंसर से लड़ने का अलग नजरिया, बोलीं-मैंने इसे जंग की तरह नहीं देखा

मनोरंजन4 hours ago

सोशल मीडिया ट्रोलिंग को ऐसे हैंडल करते हैं अमिताभ बच्चन, बताया क्यों लिखना कर दिया कम

व्यापार4 hours ago

हफ्ते के पहले दिन सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, बाजार खुलते ही 1,400 रुपए टूटा सोना; चांदी 1,500 रुपए से ज्यादा फिसली

बॉलीवुड2 weeks ago

टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में 10 साल बाद कोर्ट ने बॉयफ्रेंड पर सुनाया फैसला

अपराध3 days ago

दिल्ली पुलिस ने मकोका के दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपए बरामद

राजनीति4 weeks ago

राष्ट्रपति मुर्मु ने ईरानी समकक्ष पेजेश्कियन से की मुलाकात, स्थायी शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

खेल4 weeks ago

14 जनवरी से होगा डब्ल्यूपीएल 2027 का आगाज, 28 अक्टूबर को कोच्चि में होगी खिलाड़ियों की नीलामी

मनोरंजन4 weeks ago

‘बिग बॉस 20’ में एक तरफ अरिश्फा का गुस्सा, दूसरी तरफ रीति तिवारी के आंसू, बोलीं- ‘मेरे खिलाफ गए तो लड़ूंगी’

राजनीति2 days ago

“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

राष्ट्रीय समाचार3 weeks ago

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार को मिला सपोर्ट, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा; फार्मा, एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में तेजी

राजनीति2 weeks ago

अखिलेश यादव का चुनावी ऐलान : सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन बहाल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने का वादा

व्यापार1 week ago

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

अपराध3 weeks ago

पंजाब में 47 किलो हेरोइन और अवैध हथियारों के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार, सीमा पार से जुड़े तार

रुझान