राष्ट्रीय
देशभर के छात्रों के लिए शुरू की जाएगी डिजिटल यूनिवर्सिटी: वित्त मंत्री
भारत सरकार ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिए विश्व स्तरीय डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित करेगी। दरअसल बीते 2 वर्षों के दौरान कोरोना महामारी के कारण छात्रों एवं शैक्षणिक जगत को सबसे अधिक नुकसान झेलना पड़ा है। जहां एक और स्कूल कॉलेज बंद रहे वहीं ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं थे। अब केंद्र सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा को सु²ढ़ता प्रदान करने के लिए बाकायदा एक डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित करने का बजट प्रावधान किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित करने की बात कही। उन्होंने बताया यह डिजिटल विश्वविद्यालय देशभर के सभी छात्रों के लिए उपलब्ध होगा। यह एक बहुभाषी विश्वविद्यालय होगा जिसका लाभ भारत के सभी क्षेत्रों में रहने वाले छात्र ले सकेंगे।
वित्त मंत्री के मुताबिक भारत का यह डिजिटल विश्वविद्यालय उच्चतम एवं बेहतरीन टेक्नोलॉजी से युक्त होगा। वित्त मंत्री ने बताया कि डिजिटल विश्वविद्यालय से देश के कई विख्यात विश्वविद्यालयों को जोड़ा जाएगा।
अपने अपने क्षेत्र में महारत हासिल कर चुके देश के नामी विश्वविद्यालय इस डिजिटल विश्वविद्यालय की मदद करेंगे। देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों की सहायता से यहां पाठ्यक्रमों को बनाया और लागू किया जाएगा। साथ ही फेकल्टी और छात्रों को भी इस अनुभव का लाभ प्राप्त होगा।
गौरतलब है कि स्वयं शिक्षा मंत्रालय बीते 2 वर्ष के दौरान शिक्षा के डिजिटल माध्यमों को सशक्त बनाने का प्रयास करता रहा है। छात्रों के लिए ऑनलाइन पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने वाले शिक्षा मंत्रालय के पोर्टल ‘दीक्षा’ को प्रतिदिन 5 करोड़ से अधिक हिट मिल रहे हैं। यही कारण है कि शिक्षा मंत्रालय सभी राज्यों में स्कूली शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए ‘नेशनल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्च र’ को मजबूत कर रहा। इसके साथ ही सभी ग्रेड के लिए विशेष क्यूआर कोडेड एनर्जाइज्ड टेक्स्टबुक, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार की गई हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार की गई यह डिजिटल पाठ्य सामग्री दीक्षा पोर्टल पर उपलब्ध है।
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक अब तक दीक्षा में 402 करोड़ से अधिक शिक्षण सत्र, 4,844 करोड़ से अधिक सीखने के मिनट और 5 करोड़ से अधिक औसत दैनिक पृष्ठ हिट के साथ 2,730 करोड़ से अधिक पृष्ठ हिट हैं।
मंत्रालय का कहना है कि आज की तारीख में दीक्षा पर कुल 2,27,704 ई-कंटेंट लाइव हैं। वहीं वर्ष 2022 -23 के बजट में ऑनलाइन शिक्षा को और अधिक मजबूती देने के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत जहां डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है वहीं स्कूली छात्रों के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं जिनमें डीटीएच आधारित टीवी चैनल्स की संख्या बढ़ाना शामिल है।
राष्ट्रीय
पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

oil
नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।
एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।
डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।
वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।
राष्ट्रीय
राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

law
नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।
यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।
न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।
साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राजनीति
बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।
आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”
आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”
अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”
कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र10 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
न्याय2 years agoमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
अपराध4 years agoबिल्डर पे लापरवाही का आरोप, सात दिनों के अंदर बिल्डिंग खाली करने का आदेश, दारुल फैज बिल्डिंग के टेंट आ सकते हैं सड़कों पे
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
