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‘लोकतंत्र का गला घोंटा गया’, सांसदों के निलंबन पर बोली सोनिया; मोदी-शाह पर साधा निशाना

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कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुधवार को संसद से 141 सांसदों के निलंबन को लेकर केंद्र की भाजपा नीत सरकार की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया है। साथ ही उन्होंने ‘इतिहास को विकृत करने’ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना भी की।

गाँधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे महान देशभक्तों को बदनाम करने के लिए इतिहास को विकृत करने और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और सरकार की आलोचना की।

कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की आम सभा की बैठक में पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ”इस सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंट दिया है।”

उन्होंने कहा कि इससे पहले कभी भी संसद के इतने सारे विपक्षी सदस्यों को निलंबित नहीं किया गया था और वह भी सिर्फ एक उचित और वैध मांग उठाने के लिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, “संसद के विपक्षी सदस्यों ने 13 दिसंबर की असाधारण घटनाओं के बारे में लोकसभा में गृह मंत्री के बयान देने की मांग की थी। इस अनुरोध को जिस अहंकार के साथ लिया गया उसका वर्णन करने के लिए कोई शब्द नहीं हैं।”

लोकसभा में 13 दिसंबर के सुरक्षा उल्लंघन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “13 दिसंबर को जो हुआ वह अक्षम्य है और इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है। प्रधानमंत्री को राष्ट्र को संबोधित करने और घटना पर अपने विचार व्यक्त करने में चार दिन लग गए, और उन्होंने ऐसा संसद के बाहर किया।

उन्होंने कहा, “ऐसा करके, उन्होंने सदन की गरिमा के प्रति अपने अनादर और हमारे देश के लोगों के प्रति अपनी उपेक्षा को स्पष्ट रूप से दर्शाया है। मैं यह कल्पना आप पर छोड़ती हूं कि अगर भाजपा आज विपक्ष में होती तो क्या प्रतिक्रिया देती।”

सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि इस सत्र में जम्मू-कश्मीर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए हैं।

उन्होंने कहा, “जो लोग (पंडित) जवाहरलाल नेहरू जैसे महान देशभक्तों को बदनाम करने के लिए इतिहास को विकृत करते हैं और ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ते हैं, वे लगातार अभियान चला रहे हैं। इन प्रयासों का प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्वयं नेतृत्व किया है, लेकिन हम डरेंगे नहीं। हम सच बोलने पर कायम रहेंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने और जल्द से जल्द चुनाव कराने की माँग की। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों की आकांक्षाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, उन्हें संबोधित किया जाना चाहिए और वह सम्मान दिया जाना चाहिए जिसके वे हकदार हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि हमारा मानना है कि महिला आरक्षण विधेयक को इस शर्त के साथ पारित किया जाना कि इसे केवल परिसीमन या जनगणना के बाद ही लागू किया जाएगा, एक दिखावा है जिसका उद्देश्य महिलाओं को गुमराह करना और उनके वोट हासिल करना है, जो कि उचित है।

सोनिया गाँधी ने कहा, “संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लंबे समय से लंबित है। बर्बाद करने के लिए समय नहीं है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि महिलाओं के लिए आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसमें ओबीसी समुदाय सहित सभी समुदायों की महिलाओं को शामिल किया जाना चाहिए।”

उन्होंने तेलंगाना में पार्टी सहयोगियों को विधानसभा चुनाव के लिए समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ काम करने के लिए बधाई दी।

सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि शीतकालीन सत्र में तेलंगाना में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का विधेयक पारित हो गया। उन्होंने केंद्र में भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “यह आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में निहित एक प्रतिबद्धता थी। अपनी कार्यकुशलता पर गर्व करने वाली सरकार को इसे पूरा करने में नौ साल लग गए।”

उन्होंने कहा कि यह कहना कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव परिणाम हमारी पार्टी के लिए बहुत निराशाजनक रहे हैं, एक अतिशयोक्ति होगी। कांग्रेस अध्यक्ष हमारे खराब प्रदर्शन के कारणों को समझने के लिए पहले दौर की समीक्षा कर चुके हैं और हमारे संगठन के लिए आवश्यक सबक सीखें।

कांग्रेस नेता ने कहा, “हम भारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, फिर भी मुझे विश्वास है कि हमारी दृढ़ता और लचीलापन हमें जीत दिलाएगा। इस कठिन समय में हमारी विचारधारा और हमारे मूल्य हमारे मार्गदर्शक हैं।”

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष ने पहले ही हमारी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हमारे स्थापना दिवस पर नागपुर में आयोजित होने वाली रैली इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सरकार ने संसद सहित लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभों और संस्थाओं पर व्यवस्थित हमला किया है।“

उन्होंने कहा कि संविधान पर हमला हो रहा है, आर्थिक असमानताएं बढ़ रही हैं, आर्थिक विकास के बारे में प्रधानमंत्री के दावों और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर है।

उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जरूरी है कि हम इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाएं।

उन्होंने कहा, “यह हमारा भी कर्तव्य है कि हम उन ताकतों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ें जो उस सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही हैं जिसने हमारे देश को कायम रखा है।”

उन्होंने पिछले एक साल में प्रदर्शित नेतृत्व के लिए कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं हाल के विधानसभा चुनावों के लिए अथक प्रचार करने के लिए अपने सभी सहयोगियों और कार्यकर्ताओं की भी आभारी हूं। हमें अपनी निराशा को आगामी आम चुनावों के लिए सकारात्मक अभियान में बदलना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए ‘देश के लिए दान’ का जो अभिनव अभियान शुरू किया गया है, उसके महत्व को कम नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि आप में से हर कोई यह सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देगा कि यह एक निरंतर और सफल प्रयास बना रहे।”

राष्ट्रीय समाचार

‘ये नया भारत है घर में घुसकर मारता है’, सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर नेताओं ने वीर सपूतों को किया नमन

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उरी आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने 10 वर्ष पहले 2016 में 28 और 29 सितंबर की रात नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक के माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर सटीक और लक्षित कार्रवाई की थी। सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर नेताओं ने मां भारती के वीर सपूतों के शौर्य, पराक्रम एवं अदम्य साहस को सलाम किया है।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने लिखा, “भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम के प्रतीक ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ पर मां भारती की रक्षा के लिए सदैव समर्पित हमारे वीर सैनिकों को कोटि-कोटि नमन। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनका अद्वितीय साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत है। वीर जवानों का यह पराक्रम देशवासियों में राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत करता है।”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर हमारी भारतीय सेना का सम्मान करते हुए, हमारे राष्ट्र के लिए खतरों के खिलाफ उनकी निर्णायक कार्रवाई भारत के सुरक्षा इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में खड़ी है। ‘सर्जिकल स्ट्राइक डे’ पर देश की रक्षा में समर्पित भारतीय सेना की वीरता को नमन!”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय देने वाले भारतीय वीर जवानों को कोटि-कोटि नमन। देश की रक्षा के लिए आपका समर्पण और बलिदान सदैव राष्ट्रवासियों के लिए प्रेरणा रहेगा।”

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारतीय सेना के अदम्य शौर्य और अटूट पराक्रम के प्रतीक सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर मां भारती के वीर सपूतों को सादर नमन! देश की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए भारतीय सेना के जवानों ने साहस, शौर्य और अदम्य संकल्प का परिचय दिया। राष्ट्र की रक्षा के लिए उनका समर्पण प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है।”

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने लिखा, “सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर राष्ट्र-रक्षा में समर्पित मां भारती के वीर सपूतों के शौर्य, पराक्रम एवं अदम्य साहस को सलाम!”

छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने लिखा, “ये नया भारत है घर में घुसकर मारता है..!! देश के स्वाभिमान, साहस और पराक्रम के प्रतीक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की गौरवमयी 10वीं वर्षगांठ एवं शौर्य दिवस पर भारतीय सेना के वीर सपूतों के पराक्रम को सादर नमन।”

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “सर्जिकल स्ट्राइक की गौरवमयी वर्षगांठ ‘शौर्य दिवस’ पर भारतीय सेना के वीर सपूतों को सादर नमन। 29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने आतंक के खिलाफ अपने अदम्य साहस, शौर्य और अडिग संकल्प का परिचय देते हुए पूरी दुनिया को भारत की निर्णायक शक्ति का संदेश दिया। आतंक के खिलाफ भारत के इस बड़े कदम ने नए भारत के उस संकल्प को मजबूती दी, जो शांति में विश्वास रखता है, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करता।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार: वित्त मंत्री सीतारमण

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सऊदी अरब भारत का भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी पर जोर दिया।

निर्मला सीतारण ने दोहा में ‘एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) 2026 सालाना बैठक’ के दौरान सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान से मुलाकात की। अल-जदान ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और बेहतर होते निवेश माहौल के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को बधाई दी और सऊदी अर्थव्यवस्था के बारे में अपनी राय रखी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने भारत-सऊदी अरब द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत के सफल समापन का स्वागत किया। इससे द्विपक्षीय निवेश के लिए एक मजबूत और अधिक भरोसेमंद ढांचा मिलेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। अल-जदान ने कहा कि सऊदी अरब इसके जल्द लागू होने का इंतजार कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की राजकीय यात्रा के दौरान बताई गई सोच को याद करते हुए दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।

अलजदान ने भारत से निवेश का स्वागत करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। स्विट्जरलैंड से एआईआईबी गवर्नर और राजदूत पिएत्रो लाजेरी के साथ अपनी बैठक में उन्होंने भारत में मौके तलाश रहे विदेशी निवेशकों के लिए ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (एनआईआईएफ) को एक भरोसेमंद पार्टनर बताया, जो गवर्नेंस और पारदर्शिता के ऊंचे स्टैंडर्ड्स का पालन करता है। साथ ही, स्विस निवेशक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के लिए एनआईआईएफ इंफ्रास्ट्रक्चर फंड पर विचार कर सकते हैं।

राजदूत लाजेरी ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत में पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और निवेश के लिए बड़े मौके देखता है। उन्होंने भारत की आगामी राजकीय यात्रा और नई दिल्ली में होने वाले दूसरे यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन (ईएफटीए) प्रॉस्पेरिटी समिट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में स्विस फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) की ग्रोथ ग्लोबल एफडीआई से ज्यादा तेजी से हो रही है और ‘बायलैटरल इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट’ को अंतिम रूप देने के लिए सहयोग मांगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, लाजेरी ने फाइनेंशियल सेक्टर और सस्टेनेबल फाइनेंस में सहयोग करने में भी दिलचस्पी दिखाई।

वित्त मंत्री सीतारमण ने स्विस निवेशकों और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों को जीआईएफटी आईएफएससी में भारत के अपने फाइनेंशियल सर्विस सेंटर में निवेश के मौके तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया, जो वित्तीय सेवा और उत्पाद, टैक्स लाभ और बिजनेस के अनुकूल माहौल देता है।

सीतारमण ने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले से भी मुलाकात की। दोनों मंत्री दोबारा मिलकर खुश थे और उन्होंने नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान बातचीत को आगे बढ़ाने के मौके पर चर्चा की।

बातचीत में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और रिकवरी के लिए नेपाल के आकलन और प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। साथ ही, इस मुश्किल समय में भारत जो भी मदद दे सकता है, उसकी बारीकियों पर काम करने के लिए दोनों देशों की टीमों के बीच लगातार बातचीत जारी रखने पर जअर दिया गया।

मंत्रियों ने नई दिल्ली बैठक में शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर भी चर्चा की और लगातार बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया। बयान में कहा गया है कि यूपीआई-एनपीआई लिंकेज को जल्द शुरू करने और इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई, क्योंकि यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद पहल है।

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महाराष्ट्र

सूखे से निपटने के लिए मदद का खर्च आम नागरिकों से नहीं बल्कि बिचौलियों से वसूला जाए: शिवसेना (यूबीटी)

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नागरिकों से निजी जश्न कम करने और अपनी बचत को सूखा राहत कार्यों में दान करने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आग्रह पर शिवसेना (यूबीटी) की ओर से मंगलवार को प्रशासन की मंशा और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया गया है।

सरकार के इस रवैये को ‘खाली जेबों से पैसे निकालने’ जैसा बताते हुए, उद्धव ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रही जनता से आपदा प्रबंधन के लिए फंड जुटाने को कहना असंवेदनशील और नाकाफी है।

संपादकीय में पूरे महाराष्ट्र में बढ़ते कृषि संकट की ओर ध्यान दिलाया गया। इसमें बताया गया कि गंभीर सूखे के कारण कर्ज और मुश्किलों से जूझ रहे परभणी, यवतमाल, सोलापुर और हिंगोली जिलों में सिर्फ दो दिनों के भीतर चार किसानों ने आत्महत्या कर ली। इसमें चेतावनी दी गई कि अगर राज्य सरकार से तुरंत और सीधी मदद नहीं मिली, तो सूखा प्रभावित इलाके ‘कब्रिस्तान’ में बदल सकते हैं। इन समुदायों को बचाए रखने की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनके प्रशासन पर होगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस को सीधे चुनौती देते हुए ठाकरे गुट ने कहा कि जो आम नागरिक पहले से ही महंगाई और आर्थिक तनाव से जूझ रहे हैं, उनसे शादी और नामकरण जैसे छोटे पारिवारिक समारोहों में कटौती करने के बजाय, सरकार को आंतरिक भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और ठेकेदारों के कमीशन पर सख्ती करनी चाहिए।

संपादकीय में राज्य की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया। इसमें कोंकण क्षेत्र में तटीय जमीन की विवादास्पद बिक्री और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे से जुड़े भारी फंड के लेन-देन का जिक्र किया गया।

इसमें यह भी दावा किया गया कि जनता का पैसा अक्सर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरी जगहों पर लगाया जाता है। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि वे जनता से कंजूसी करने को कहने के बजाय, इस तरह की पैसे की बर्बादी को रोकें ताकि सूखा राहत के लिए फंड जुटाया जा सके।

ठाकरे गुट ने कहा, “राज्य सरकार कमीशन-एजेंटों और ठेकेदारों की सरकार बन गई है। हर तरफ लूट मची है। ठेकेदारों को सरकारी खजाने का पैसा देने और अपनी जेबें भरने के लिए गैर-जरूरी परियोजनाएं बनाई जा रही हैं। अगर मुख्यमंत्री इस लूट को भी रोक दें, तो इससे सूखा प्रभावित लोगों को फायदा होगा।”

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और नेताओं की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) के आरोपों पर निशाना साधते हुए, संपादकीय में सत्ताधारी गठबंधन से कहा गया है कि वे राजनीतिक खर्चों को ग्रामीण इलाकों की मुश्किलों को दूर करने में लगाएं। इसमें सुझाव दिया गया है कि राजनीतिक दल-बदल और चुनाव प्रचार के लिए रखे गए फंड को तुरंत प्रभावित किसानों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए।

इसके अलावा, संपादकीय में सरकार के लिए सूखे से निपटने के लिए बड़ा फंड जुटाने के कई अहम उपाय सुझाए गए हैं। इसमें सरकार से कहा गया है कि वह राजनीतिक सहयोगियों के लिए तय बकाया रकम को सीधे सूखा राहत कोष में ट्रांसफर करे और मुंबई के बड़े बिल्डरों, स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) के डेवलपर्स और मोटी कमाई करने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों से बड़ा योगदान अनिवार्य करे।

संपादकीय में राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि वह महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र की मदद के लिए पीएम केयर फंड में बची हुई रकम में से 2,000 करोड़ रुपये से 4,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग करे।

आखिर में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रियों द्वारा सांकेतिक दान (जैसे एक महीने की सरकारी सैलरी छोड़ना) सत्ताधारी नेताओं के पास मौजूद भारी संसाधनों को देखते हुए महज दिखावा है। पार्टी ने नेतृत्व से आग्रह किया कि वे भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक बिचौलियों की फल-फूल रही मिलीभगत को तोड़कर असली हिम्मत दिखाएं, ताकि राज्य के 11 करोड़ नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।

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